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सैफई में महोत्सव और बर्मिंघम की बग्गी में उलझीं पिछली सरकारें, कारीगरों के बारे में सोचने की फुर्सत नहीं थी : योगी

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लखनऊ 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 के अवसर पर प्रदर्शनी एवं मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारों को सैफई में महोत्सव आयोजित कर मुंबई से डांस कराने और बर्मिंघम की बग्गी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत न हो, तब कारीगरों के बारे में सोचने का समय कहां से आता। उन्होंने कहा कि तब स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में सोचने की भी फुर्सत नहीं थी। हमारी सरकार ने परंपरागत कारीगरों के हुनर को सम्मान देने और उसे बाजार की आवश्यकता से जोड़ने का काम किया। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना लागू की गई और वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई।

छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को प्रदान की टूलकिट 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान का यह कार्यक्रम नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया। उत्तर प्रदेश में 2019 से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण, टूलकिट तथा स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। पिछले सात-आठ वर्षों में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया गया है।

भगवान विश्वकर्मा के मानस प्रतिनिधि हैं हमारे कारीगर

मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा के शिल्प और उनकी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी अद्भुत शिल्पकला से भगवान विश्वकर्मा ने समाज के कल्याण में योगदान दिया। भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र भी भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला से जुड़े उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई उद्योग या कारीगरी का क्षेत्र नहीं होगा, जहां विश्वकर्मा पूजन की परंपरा न रही हो। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान राम को लंका पर चढ़ाई करनी थी, तब समुद्र पर सेतु का निर्माण करने वाले नल और नील भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं। सौ योजन समुद्र में बिना पिलर के सेतु का निर्माण कुछ ही दिनों में पूरा होना उस समय की अद्भुत कारीगरी और शिल्पकला को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के उन्हीं मानस प्रतिनिधियों के रूप में आज हमारे कारीगर और हस्तशिल्पी समाज के सामने हैं।

पहले कारीगर उद्यमी था, फिर श्रमिक बनने को मजबूर हुआ

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत उस समय दुनिया में विकसित था, जब भारत का कारीगर उद्यमी था और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबी और पैसे का हवाला देकर कारीगरों को सुविधाओं से वंचित रखा। उनके पास हुनर और कारीगरी थी, लेकिन बाजार उनसे दूर कर दिया गया। बैंकिंग व्यवस्था से उन्हें दूर रखा गया और डिजाइन तथा तकनीक की बदलती मांग के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह हुआ कि जो कारीगर कभी उद्यमी हुआ करता था, वह श्रमिक बनने और बदहाली में जीवन जीने को मजबूर हो गया। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री का दायित्व मिलने पर उन्होंने प्रदेश के कारीगरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उस समय हस्तशिल्पी और कारीगर हताश और निराश थे तथा पलायन कर रहे थे। जिनके परिश्रम से प्रदेश में रौनक और रोजगार का सृजन होता था, वही कारीगर कथित बीमारी, भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति यह थी कि कारीगरों के हित में काम करने के बजाय लोग कारीगरों से वसूली और उनका शोषण करते थे।

प्रशिक्षण के साथ मानदेय और टूलकिट भी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह समझा कि बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे परंपरागत कार्य करने वाले लोग रोजाना मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा तो प्रशिक्षण अवधि में उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। इसलिए सरकार ने केवल प्रशिक्षण देने के बजाय प्रशिक्षण के साथ मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने पर टूलकिट और उसके बाद बैंक से जोड़ने की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण के दौरान ₹5,000 का मानदेय उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ₹15,000 तक की टूलकिट दी जाती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आज की बाजार और समाज की मांग के अनुरूप विकसित करना है।

16 से बढ़कर 25 ट्रेड, परंपरागत कारीगरों के साथ युवाओं को भी अवसर

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड शामिल किए गए थे। इनमें 11 पारंपरिक ट्रेड-बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी थे। अब सरकार ने पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा और मछुआरा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पारंपरिक कार्यों से समाज का पेट भरता रहा, उनके करने वालों को लंबे समय तक पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। सरकार ने अब ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा युवाओं की रुचि और आज की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की मरम्मत, विद्युत उपकरणों का रिपेयर, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड भी जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अपनी रुचि के अनुसार किसी भी ट्रेड में जा सकता है। इन 25 ट्रेड का मूल उद्देश्य एक ही है कि कारीगर और हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने।

₹10 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगर को उद्यमी बनाने की प्रक्रिया में प्रशिक्षण और टूलकिट के साथ बैंक से जोड़ना भी जरूरी है। सीएम युवा उद्यमी योजना में युवाओं को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण दिया जा रहा है, जबकि कारीगरों के लिए इसकी सीमा ₹10 लाख तक की गई है। इसमें ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण के साथ 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी की व्यवस्था भी है। उन्होंने कहा कि सरकार कारीगर के साथ मजबूती से खड़ी है। कारीगर को ऋण के लिए गारंटी देने की जरूरत नहीं है और ब्याज का भार भी सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि बैंक कारीगर को ऋण उपलब्ध कराएं, सरकार ब्याज की जिम्मेदारी उठाएगी।

हर जिले में टूलकिट वितरण और ऋण की सुविधा

मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 सितंबर से 29 सितंबर तक हर जनपद में टूलकिट वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कारीगरों को टूलकिट के साथ ऋण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी कारीगर को ₹8 लाख, किसी को ₹2 लाख और किसी को ₹1 लाख का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकों के अधिकारी भी इन कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं और कारीगरों को मौके पर ही बैंक ऋण से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कारीगर को आत्मनिर्भर बनाना है।

96 लाख एमएसएमई यूनिट, 3.25 करोड़ लोगों को रोजगार

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों को आगे बढ़ाने की नीति का परिणाम प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में अब 96 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, जिनमें करीब 3 करोड़ 25 लाख लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य कहा जाता था, जबकि प्रदेश के पास सबसे बड़ी आबादी, सबसे उर्वरा भूमि, पर्याप्त जल संसाधन और सबसे युवा जनशक्ति थी। अब उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की चर्चा होती है तो उत्तर प्रदेश की भी गिनती होती है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू नहीं था, बल्कि इसे संचालित करने वाले राजनेताओं की मानसिकता बीमारू थी, जिन्होंने हस्तशिल्प और कारीगरों का सम्मान नहीं किया।

इंडिया एक्सपो सेंटर में लगेगा यूपी का ट्रेड शो

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का यह एक हिस्सा है। इसी क्रम में 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर में उत्तर प्रदेश ट्रेड शो आयोजित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के उद्यमियों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों द्वारा तैयार उत्पादों को शोकेस किया जाएगा। इसमें ढाई हजार से अधिक एग्जिबिटर्स भाग लेंगे और साढ़े छह सौ से अधिक फॉरेन बायर्स भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि ट्रेड शो में ₹12 हजार करोड़ से ₹15 हजार करोड़ तक का टर्नओवर हो सकता है। यहां होने वाले ऑर्डर और बिक्री से प्राप्त धन सीधे प्रदेश के कारीगरों, हस्तशिल्पियों और उद्यमियों तक पहुंचेगा। इससे कारीगरों की आय बढ़ेगी और प्रदेश के विकास को गति मिलेगी।

इस अवसर पर, उत्तर प्रदेश सरकार में सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव सूक्ष्म लघु मध्यम उद्यम विभाग शशि भूषण लाल सुशील, एसएलबीसी के कन्वीनर शैलेंद्र कुमार सिंह, आयुक्त एवं निदेशक उद्योग के विजेंद्र पांडियन समेत कारीगर और हस्तशिल्पी उपस्थित रहे। 

सीएम ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को वितरित की टूल किट

मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत विभिन्न जिलों के लाभार्थियों को टूल किट वितरित की। टूल किट पाने वालों में अयोध्या के श्रवण कुमार और राम तीरथ, बाराबंकी के राम जयसवाल और वंदना, उन्नाव के रंजीत, हरदोई के बाबूराम, कानपुर के शिवसेवक और अवधेश, रायबरेली के शाहिद खान, इटावा के विजयपाल तथा लखनऊ के मनीष शामिल रहे।

लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए वितरित किए चेक

मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए चेक भी वितरित किए। चेक पाने वालों में लखनऊ के प्रकाश दीन साहू को 8 लाख रुपये, राहुल कुमार को 1 लाख रुपये और मोहम्मद मुस्ताक को 2 लाख रुपये का चेक दिया गया। वहीं, उन्नाव के रामबाबू को 1.50 लाख रुपये और आनंद कुमार को 1 लाख रुपये का चेक वितरित किया गया। इसके साथ ही कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू तथा वीएसएसवाई 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया गया।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 से पारंपरिक कारीगरों को मिलेगा आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता का संबल : भूपेंद्र चौधरी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने कारीगरों और हस्तशिल्पियों के चौमुखी उत्थान के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने कहा कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और ओडीओपी जैसी कारीगरपरक योजनाओं की देशभर में चर्चा हो रही है। पिछले वर्षों में इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 6 लाख से अधिक हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को लाभान्वित किया गया है। इससे उनकी दक्षता और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उन्हें नए बाजार भी उपलब्ध हुए हैं। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत योजना का दायरा बढ़ाते हुए पारंपरिक एवं आधुनिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि योजना के माध्यम से कारीगरों को निःशुल्क प्रशिक्षण और टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ उनके उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई और वीएसएसवाई 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया गया। उन्होंने बताया कि प्लेज योजना के अंतर्गत 14 जनपदों में 205.8 एकड़ से अधिक भूमि स्वीकृत की जा चुकी है तथा इनमें 668 भूखंड उपलब्ध कराए गए हैं। 

प्रदर्शनी में लगाए गए हैं 125 स्टॉल
‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ पर आधारित प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर, 2026 तक आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी में ओडीओपी, ओडीओसी, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, एमएसएमई, सेक्टर स्किल काउंसिल, फ्रेंचाइजी ब्रांड एवं बैंक से संबंधित 125 स्टॉल लगाए गए हैं। प्रदर्शनी में 25 ट्रेड से जुड़े कारीगरों और उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार, तकनीकी उन्नयन, बाजार की मांग, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग एवं विपणन आदि के संबंध में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। साथ ही कॉरपोरेट प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू भी किए गए।


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