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झारखंड JPSC परीक्षा में धांधली का शक, सोते रहे अभ्यर्थी और OMR में मिले 92 सही जवाब; CID जांच तेज

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रांची
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग को कई अहम साक्ष्य मिले हैं। परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट और कार्बन कॉपी के मिलान में ऐसे अंतर सामने आए हैं, जिनसे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच के अनुसार, कुछ सफल अभ्यर्थी परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए, जबकि उनकी ओएमआर शीट में बड़ी संख्या में उत्तर दर्ज मिले।
सोते रहे ओम प्रकाश, ओएमआर में मिले 91 और 92 सही जवाब

सीआईडी की जांच में ओम प्रकाश राणा का मामला सामने आया है। वह 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए थे। सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन में उनके परीक्षा के दौरान सोने और जम्हाई लेने की बात सामने आई।

वहीं, उनकी दोनों पेपर की ओएमआर शीट की जांच में क्रमशः 91 और 92 सही उत्तर मिलने का उल्लेख है। इससे परीक्षा के दौरान उनके प्रदर्शन और ओएमआर में दर्ज उत्तरों के बीच अंतर को लेकर सवाल उठे हैं।

वंदना ने हल किए कम प्रश्न, ओएमआर में मिले ज्यादा उत्तर
सफल अभ्यर्थी वंदना कुमारी के मामले में भी सीसीटीवी फुटेज और ओएमआर शीट के बीच कथित विसंगति मिली। जांच के मुताबिक, उन्होंने दोनों पेपर में लगभग 49 और 30 प्रश्न ही हल किए थे, जबकि ओएमआर शीट में क्रमशः 98 और 92 उत्तर दर्ज पाए गए। जांच एजेंसी इन तथ्यों को परीक्षा में संभावित गड़बड़ी के साक्ष्य के रूप में देख रही है।

खाली ओएमआर के बावजूद अरविंद को मिले 292 अंक
अरविंद कुमार का मामला भी जांच के दायरे में है। सीसीटीवी फुटेज में वह परीक्षा के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखे। जांच के अनुसार, उनकी ओएमआर शीट में कोई गोला भरा हुआ नहीं मिला, इसके बावजूद उन्हें 292 अंक मिले। आरोप है कि पूछताछ में अरविंद ने ओएमआर खाली छोड़ने और कार्बन कॉपी जलाने की बात स्वीकार की।

कार्बन कॉपी और मूल ओएमआर में भी अंतर
एफआरओ परीक्षा के सफल अभ्यर्थी रक्षक सिंह की कार्बन कॉपी में केवल 31 उत्तर दर्ज थे, जबकि मूल ओएमआर में 147 उत्तर मिलने की बात सामने आई है। उनके मोबाइल वीडियो में मूल प्रति स्ट्रांग रूम के बाहर टीडीपीएल कर्मियों के पास दिखाई देने का भी दावा किया गया है।

जांच में अभय तिवारी, उसके स्वजन और एजेंटों के माध्यम से अभ्यर्थियों की सफलता को लेकर भी आरोपों की पड़ताल की जा रही है। एक एजेंट के लैपटॉप में परिणाम घोषित होने से दो महीने पहले 24 अभ्यर्थियों की सूची मिलने की बात सामने आई है।

सीआईडी के अनुसार, ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे या निगरानी नहीं थी। इससे दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ की आशंका और गहरी हुई है। जांच एजेंसी इन सभी कड़ियों को जोड़कर परीक्षा में हुई संभावित अनियमितताओं और टीडीपीएल की भूमिका की पड़ताल कर रही है।


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