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डॉ. भवानी सिंह राजावत मामले की जांच ठंडे बस्ते में, CMHO से दस्तावेज मांगने तक सीमित रही कार्रवाई

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ग्वालियर
भ्रष्टाचार में आंकठ तक डूबा रहे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के कुछ बाबुओं का हाल इतना जबरदस्त है कि जिला प्रशासन के आदेशों और निर्देशों की अवहेलना करने की स्थिति तो नजर आती रहती है, मगर अब तो कलेक्टर कार्यालय से जारी होने वाले आरोप पत्रों आदि को जमींदोज करने की माहरत भी उनके द्वारा हासिल कर ली गई है। कुछ ऐसा ही मामला डॉ. भवानी सिंह राजावत को लेकर है, जिसमें
कलेक्टर कार्यालय दस्तावेजों की मांग को लेकर लिखे गए पत्र अब फाइलों में दबकर रह गए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार  जिले में डॉ. भवानी सिंह राजावत की तैनाती दिनांक 11 अक्टूबर 2023 को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आंतरी बिलौआ पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से हुई थी और इसका विवरण सेवा पुस्तिका आईएफएमआईएस में दर्ज किया गया था। लेकिन उनका वेतन 6 अक्टूबर 2023 से दिया गया था और इस बात की शिकायत जब कलेक्टर कार्यालय में हुई तो वहां से एक निरीक्षण दल का गठन कर शिकायत की जांच की गई। जिसमें निरीक्षण दल द्वारा इस संबंध में संबंधित स्थापना लिपिक दीपेन्द्र सिंह तोमर से जानकारी चाही गई थी।

विभागीय जांच संस्थित करने के  लिए मांगे थे दस्तावेज
इस मामले में कार्यालय कलेक्टर की स्थापना शाखा से वर्ष 2025 में ही दो बिंदुओं का पत्र जारी कर डॉ. भवानी सिंह राजावत की पदस्थापना तिथि संशोधित कर उसकी छायाप्रति मांगी थी। वहीं दूसरे बिंदू में संबंधित लिपिक दीपेन्द्र सिंह तोमर का जबाब संतोषजनक न पाए जाने की स्थिति में उसके खिलाफ विभागीय जांच संस्थित करने के लिए तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से आरोप पत्र, आधार पत्र, अभिलेेख एवं साक्ष्य सूची मय सह दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति के साथ मांगे गए थे।

सब कुछ हुआ बंद
इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार अब इस जांच का अता-पता नहीं है और कलेक्टर कार्यालय से आने वाले पत्र पूरी तरह बंद हो गए है। जिसके चलते यह जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

कई मामले हैं ऐसे
कलेक्टर कार्यालय में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में हुई अनियमितताओं के कई मामले  आज भी लंबित है। जिसमें वर्ष 2019 में तत्कालीन कलेक्टर अनुराग चौधरी ने कड़ी कार्रवाई की थी और कई दस्तावेज जप्त किए थे। लेकिन उनके जाने के बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। वहीं दोषी कर्मचारी एक बार फिर बच निकले थे।

कलेक्टर कार्यालय में ही जमीं जड़
विभागीय सूत्रों की मानें तो मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के रसूखदार बाबुओं की जड़े कलेक्टर कार्यालय में जमीं हुई है। जिसका कारण वहां के कई कर्मचारियों का सीधे कलेक्टर कार्यालय में हस्तक्षेत्र होकर राजस्व अधिकारियों से सीधी पहुंच होना है।

डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने की जिला प्रशासन की अवहेलना
वर्ष 2025 में कलेक्टर कार्यालय से भेजे गए पत्रों का मामला तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सचिन श्रीवास्तव से जुड़ा हुआ है। क्योंकि उस समय यही विभाग प्रमुख की स्थिति में थे और उनके द्वारा जिला प्रशासन की अवहेलना करने का काम किया गया था। जिसका कारण विभागीय भ्रष्टाचार था।

नियम से काम तो लग रहा झटका
मिली जानकारी के अनुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में दशकों से जमे हुए कई बाबुओं द्वारा नियम विरुद्ध कार्य करने की व्यवस्था को अंजाम दिया जा रहा था। लेकिन वर्तमान में शासन के नियमों को सख्ती से अमल में लाने की व्यवस्था को अंजाम दिए जाने की वजह से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एमएस सगर निशाने पर बने हुए हैं।


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