नई दिल्ली
WWE की रिंग दुनिया के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण मंचों में गिनी जाती है। जहां पहुंचने का सपना लाखों रेसलर्स देखते हैं। इस मंच पर भारत के कई पहलवानों ने भी अपनी ताकत, हुनर और दमदार प्रदर्शन से अलग पहचान बनाई है। द ग्रेट खली ने जहां वर्ल्ड चैंपियन बनकर इतिहास रचा, वहीं जिंदर महल, सौरव गुर्जर, सिंह ब्रदर्स और गामा सिंह ने भी भारतीय रेसलिंग का परचम दुनिया भर में लहराया। आइए जानते हैं WWE में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले इन पांच दिग्गज सुपरस्टार्स के बारे में।
द ग्रेट खली
द ग्रेट खली WWE में सबसे सफल भारतीय रेसलर माने जाते हैं। 7 फीट 1 इंच लंबे खली ने 2006 में WWE में डेब्यू किया और आते ही अंडरटेकर जैसे दिग्गजों को चुनौती दी। 2007 में उन्होंने बैटल रॉयल जीतकर वर्ल्ड हेवीवेट चैंपियनशिप अपने नाम की। खली की ताकत और विशाल कद ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई और वह भारतीय रेसलिंग के सबसे बड़े चेहरे बन गए।
जिंदर महल
पंजाबी मूल के जिंदर महल ने WWE में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन 2017 में उन्होंने इतिहास रच दिया। उन्होंने रैंडी ऑर्टन को हराकर WWE चैंपियनशिप जीती और यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय मूल के रेसलर बने। 'द मॉडर्न डे महाराजा' के नाम से मशहूर जिंदर ने लंबे समय तक WWE के टॉप स्टार्स के साथ मुकाबले किए।
सौरव गुर्जर
मध्य प्रदेश के सौरव गुर्जर ने WWE में 'सांगा' के नाम से पहचान बनाई। WWE में आने से पहले वह राष्ट्रीय स्तर के किकबॉक्सर और टीवी अभिनेता भी रह चुके हैं। अपने लंबे कद और दमदार फिजिक के दम पर उन्होंने NXT में कई प्रभावशाली मुकाबले लड़े। सौरव को भारत के उभरते हुए WWE सुपरस्टार्स में गिना जाता है।
सिंह ब्रदर्स
सुनील सिंह और समीर सिंह, जिन्हें WWE में सिंह ब्रदर्स के नाम से जाना जाता है। भारतीय मूल की सफल टैग टीम रही है। दोनों ने WWE में जिंदर महल के साथ मिलकर काम किया और कई बड़े मुकाबलों में हिस्सा लिया। अपनी शानदार टीमवर्क और मनोरंजक अंदाज के कारण उन्होंने WWE यूनिवर्स में अलग पहचान बनाई।
गामा सिंह
गामा सिंह भारतीय मूल के उन शुरुआती रेसलर्स में शामिल रहे जिन्होंने इंटरनेशनल प्रोफेशनल रेसलिंग में अपनी पहचान बनाई। साल 1981 में उन्होंने WWE (तत्कालीन WWF) में डेब्यू किया। इसके अलावा कई बड़े रेसलिंग प्रमोशन्स में हिस्सा लिया। गामा सिंह अपनी तकनीकी रेसलिंग और अनुभव के लिए जाने जाते थे। उन्होंने भारतीय मूल के कई युवा रेसलर्स को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और रेसलिंग में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।




