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भोपाल में रिहायशी इलाकों में कारोबार पर हाईकोर्ट सख्त, 7 दिन में दिखाने होंगे अनुमति के दस्तावेज

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भोपाल 

भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं शहर में आवासीय और लो-डेंसिटी क्षेत्रों में अवैध निर्माण व गैर-कानूनी व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट गहरा गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मॉल, होटल व व्यावसायिक संचालकों को वैधानिक अनुमति पत्र नगरनिगम को दिखाने का निर्देश दिया है। जिस पर निगम विधि पूर्वक उनकी पड़ताल करेगा। दूसरी ओर, शहर के लो-डेंसिटी इलाकों में तय सीमा से 10 गुना तक ज्यादा अवैध निर्माण हो चुके हैं। नगर निगम की नोटिस व सीलिंग कार्रवाई के बीच अफसर अब मास्टर प्लान के जरिए इन्हें नियमित करने का रास्ता तलाश रहे हैं, जिससे मास्टर प्लान का ड्राफ्ट फिर अटक गया है।

मास्टरप्लान नियमित करने की प्लानिंग
शहर के जिन क्षेत्रों को 2005 के मास्टर प्लान में लो-डॅसिटी तय कर निर्माण की लिमिट तय कर रखी है, वहां बेशुमार व बड़े निर्माण हो गए है। अब इन निर्माणों को मास्टर प्लान के रास्ते नियमित कराने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आवासीय परिसरों से व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने नगर निगम नोटिस और सीलिंग कर रहा है। दोनों ही पक्ष इसके लिए मास्टर प्लान को लागू करने की मांग कर रहे है। प्लानिंग एरिया के लो-डेंसिटी क्षेत्रों को नियमित करने बीते पंद्रह दिन से टीएंडसीपी और नगरीय प्रशासन के अफसर बैठकें कर रहे हैं। गौरतलब है कि लो-डेंसिटी एरिया में 10 हजार वर्गफीट जमीन पर 0.06 एफएआर से महज 600 वर्गफीट तक के निर्माण की अनुमति है, जबकि यहां दस गुना ज्यादा 6000 से 8000 वर्गफीट तक निर्माण हो गए।

ये हैं लो-डेंसिटी के नियम
ग्राम बैरागढ़ चिचली, नीलबड़ व मिंडोरी में लो-डेंसिटी तय है। इनमें 48 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर डेंसिटी तय है। इनमें निर्माण के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर यानि 10 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल जरूरी है। यहां निर्माण की अनुमति पर 0.06 एफएआर तय है। यानि 10 हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 600 वर्गफीट निर्माण ही हो सकता है। इससे अधिक अवैध है। इसमें भी जमीन पर कुल अनुमति का छह फीसदी ही निर्मित किया जा सकता है।

कार्रवाई का रास्ता साफ
कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे।

याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं।

ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी
रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है।

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

ये हैं स्थिति

-कलियासोत कैचमेंट में साक्षी ढाबे के पास से अंदर के के क्षेत्र में निर्मित वीआइपी कॉलोनी में 600 वर्गफीट की जगह 6000 वर्गफीट के बंगले बना लिए। मामला कोर्ट में चला गया।

-चार इमली, श्यामला हिल्स पर अवैध तौर पर बंगले बन गए।
-नरसिंहगढ़ रोड पर लो-डेंसिटी में 12 बड़ी कॉलोनियां बन गईं।
-मिंडोरी और संबंधित क्षेत्र में बड़े मकान, रेस्टोरेंट विकसित हो गए।
-केरवा डेम से लगी जमीन लो-डेंसिटी है, लेकिन इसकी ओर जाने वाली रोड किनारे अवैध तौर पर कॉलोनियां विकसित हो गईं।

कोर्ट ने कहा-कागजात दिखाएं नगर निगम करेगा सभी के परीक्षण
आवासीय क्षेत्र के मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर अनुमति और वैधानिकता की जांच नगरनिगम भोपाल करेगा। हाईकोर्ट में सोमवार को 42 याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। वहीं, मंगलवार को दस नम्बर, कलियासोत और बड़ा तालाब के 50 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने सम्बंधी आदेश और शो-कॉज नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। शोकॉज नोटिस की याचिकाओं का निराकरण करते हुए कोर्ट ने नगर निगम को याचिकाकर्ताओं के जवाब का विधि के अनुसार परीक्षण कर कारण सहित आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। मकानों को तोड़ने के मामले में दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। एकलपीठ ने मकान तोड़ने पर लगी रोक बरकरार रखते हुए अगली सुनवाई 15 सितंबर निर्धारित की है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत
हाईकोर्ट के रुख का स्थानीय रहवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने इसे शहर के आवासीय इलाकों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि अब अनुमति के नाम पर टालमटोल या बहानेबाजी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि असली परीक्षा भोपाल नगर निगम की है, जिसे यह साबित करना होगा कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई प्रभावशाली व्यक्ति।

शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई
रहवासी लवनीश भाटी और संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पैदा हो रही ट्रैफिक, पार्किंग, अत्यधिक शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं पर चिंता जताई। रहवासियों का कहना हैं कि वे वर्षों से इन दिक्कतों को झेल रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी।


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