Home मध्यप्रदेश शिक्षा से होगी तरक्की की राह प्रशस्त, बच्चों को नियमित रूप से...

शिक्षा से होगी तरक्की की राह प्रशस्त, बच्चों को नियमित रूप से भेजें स्कूल: राज्यमंत्री गौर

2
0
Spread the love

शिक्षा से होगी तरक्की की राह प्रशस्त, बच्चों को नियमित रूप से भेजें स्कूल: राज्यमंत्री  गौर

शासकीय माध्यमिक शाला अमरावत खुर्द में कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों को वितरित किए स्कूली बैग

भोपाल

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने सोमवार को शासकीय माध्यमिक एकीकृत शाला, अमरावत खुर्द में आयोजित कार्यक्रम में कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों को स्कूली बैग वितरित करते हुए कहा कि शिक्षा ही जीवन में सर्वांगीण विकास और प्रगति का मूल आधार है। जो विद्यार्थी निष्ठा एवं लगन से विद्या अध्ययन करता है, वह तरक्की और सफलता के नए शिखरों को स्पर्श करता है। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें नियमित रूप से विद्यालय अवश्य भेजें, शिक्षित एवं गुणी बाल-पीढ़ी ही अपने परिवार के जीवन स्तर को उन्नत बनाने के साथ समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण में महती भूमिका निभाती है।

राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने उपस्थित विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद स्थापित कर उन्हें लगनपूर्वक अध्ययन करने तथा जीवन में उच्च लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गुरुजनों का सम्मान करने वाले तथा अनुशासित रहकर शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को जीवन में सफलता प्राप्त करने से कोई शक्ति नहीं रोक सकती। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने विद्यालय परिसर में मध्याह्न भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया तथा विद्यार्थियों से सीधे संवाद कर विद्यालय के संचालन की समयबद्धता, पठन-पाठन का स्तर और भोजन की गुणवत्ता एवं पर्याप्तता के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम में राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने शिक्षक वर्ग से संवाद करते हुए कहा कि शिक्षकों का पावन कर्तव्य विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण कर उनके जीवन को सही दिशा प्रदान करना है। यदि शिक्षक अपने शिष्यों को सुसंस्कृत और योग्य नागरिक बनाने में सफल होते हैं, तभी उनकी शिक्षण साधना वास्तविक अर्थों में सार्थक सिद्ध होती है। उन्होंने बल देकर कहा कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षित, संस्कारवान और उत्तरदायी नागरिक बनाने के लिए परिवार, शिक्षक और समाज को समन्वित प्रयास करने होंगे, जिससे सशक्त समाज और विकसित भारत की सुदृढ़ नींव बाल-मन में रोपे गए एवं सुसंस्कारों पर ही आधारित है।

 


Spread the love