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बिहार का बाल बजट 13 साल में सात गुना बढ़ा, शिक्षा को प्राथमिकता

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पटना
बिहार में बाल बजट की शुरुआत 2013-14 से हुई। इन 13 वर्षाें मेंं राज्य के कुल बजट में बाल-केंद्रित व्यय की हिस्सेदारी में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

प्रति बच्चा व्यय 2013-14 की तुलना में 2024-25 में सात गुना से भी अधिक बढ़ा है। शुक्रवार को यह जानकारी वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल ने दी।

वे यूनिसेफ और चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (सीएनएलयू) के बाल अधिकार केंद्र के सहयोग से आयोजित तकनीकी परामर्श कार्यशाला को संबोधित कर रही थी।

13 साल में बाल बजट सात गुना बढ़ा
उल्लेखनीय है कि 2013-14 में बिहार के बाल बजट का आकार 7825 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 54878.21 करोड़ रुपये हो गया था।

कार्यशाला में बिहार बाल कल्याण बजट 2026-27 की संरचना, वर्गीकरण, आवंटन और व्यय प्रणाली को और बेहतर करने के लिए विचार-विमर्श हुआ।

यूनिसेफ बिहार की फील्ड कार्यालय प्रमुख डाॅ. मोनिका ओ. निल्सन ने कहा कि बिहार की कुल जनसंख्या में लगभग 48 प्रतिशत (लगभग 4.98 करोड़) बच्चे हैं।

बाल बजट 2026-27 में शिक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता
ऐसे में राज्य का सतत विकास बच्चों पर होने वाले प्रभावी निवेश पर निर्भर करता है। पाटिल ने बताया कि बाल कल्याण बजट 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली है, जिसकी कुल बाल बजट में हिस्सेदारी 81.56 प्रतिशत है।

बाल बजटिंग की तीनों प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण जैसे विभागों को मिलकर काम करना है। कार्यशाला में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वित्त विशेषज्ञ, नीति निर्माता आदि ने भाग लिया।


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