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MP PWD में प्रमोशन फाइलों में हेराफेरी का आरोप, PS सुखवीर सिंह ने SO दयानंद उपाध्याय को हटाया

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भोपाल.

लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में इंजीनियरों की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठकों में दस्तावेजों के साथ की गई हेरफेर के मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने विभाग में पदस्थ अनुभाग अधिकारी (एसओ) दयानंद उपाध्याय को एकतरफा कार्यमुक्त करते हुए उनकी सेवाएं सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) को सौंप दी हैं।

यह पूरा मामला पदोन्नति के लिए तैयार किए गए फोल्डरों में विभागीय स्तर पर की गई गंभीर गड़बड़ियों से जुड़ा है। सबसे ज्यादा अनियमितताएं सहायक अभियंता (एई) से कार्यपालन अभियंता (ईई) तथा अधीक्षण अभियंता (एसई) से मुख्य अभियंता (सीई) के पदों पर पदोन्नति के लिए भेजी गई फाइलों में सामने आई हैं।

ऐसे सामने आया हेरफेर का खेल
1. विभागीय जांच छिपाने का प्रयास: एई से ईई पदोन्नति के लिए तैयार फोल्डरों में कई अधिकारियों के खिलाफ लंबित विभागीय जांच (डीआई) के मामलों को दबा दिया गया था, ताकि डीपीासी की बैठक के दौरान पदोन्नति में कोई कानूनी या प्रशासनिक अड़चन सामने न आए।
2. सीआर में की गई काट-छांट (क से 'क प्लस'): एसई से सीई की डीपीसी के दौरान मूल दस्तावेजों और तारीखों के मिलान में गंभीर जालसाजी पकड़ी गई। जिस अधिकारी की मूल सीआर (गोपनीय प्रतिवेदन) में श्रेणी 'क' दर्ज थी, डीपीसी में भिजवाए गए फोल्डर में उसे बढ़ाकर 'क प्लस' कर दिया था।

सीएस स्तर पर रुकी डीपीसी
डीपीसी बैठक के दौरान तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन के संज्ञान में जब यह गड़बड़ी आई, तो उन्होंने मौके पर ही फोल्डर वापस लौटाते हुए सभी दस्तावेजों के गहन परीक्षण के निर्देश दिए थे। नियम के मुताबिक डीपीसी में संबंधित अधिकारियों के पिछले 5 वर्षों के मूल सीआर फोल्डर की हर प्रविष्टि का मिलान किया जाता है और चल रही विभागीय जांच का ब्योरा रखा जाता है। गड़बड़ी उजागर होने के बाद डीपीसी रद्द कर दी गई थी। बताया जा रहा है कि एसई से सीई के 23 पदों के लिए डीपीसी का समय तय किया गया था, जिसमें मौजूदा 21 अधीक्षण अभियंताओं (एसई) के नाम शामिल थे। फिलहाल यह पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह अटकी हुई है।


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