Home छत्तीसगढ़ 436 रुपए के सुरक्षा कवच से मिला 2 लाख रूपए का सहारा

436 रुपए के सुरक्षा कवच से मिला 2 लाख रूपए का सहारा

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​रायपुर

 ​विपरीत परिस्थितियों में एक छोटी-सी बचत किस तरह किसी परिवार के लिए बड़ा संबल बन सकती है, इसकी बानगी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में देखने को मिली है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ('बिहान') से जुड़कर महिलाओं में आई वित्तीय साक्षरता का ही सुखद परिणाम है कि आज ग्रामीण परिवार आकस्मिक संकट के समय आर्थिक रूप से खुद को सुरक्षित पा रहे हैं।
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धमतरी जिले के ग्राम अर्जुनी की रहने वाली स्वर्गीय सगनी बाई ध्रुव 'ठाकुर देव स्व-सहायता समूह' की एक सक्रिय सदस्य थीं। बिहान के माध्यम से चलाए जा रहे सामाजिक सुरक्षा अभियानों से प्रेरित होकर उन्होंने मात्र 436 रुपए के वार्षिक प्रीमियम पर प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत अपना बीमा कराया था।दुर्भाग्यवश, उनके असमय निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन ऐसे कठिन समय में बिहान कैडर की मुस्तैदी और योजना की दूरदर्शिता परिवार के लिए एक आर्थिक ढाल बनकर सामने आई।
       
​इस पूरे प्रकरण में जमीनी स्तर पर काम कर रहीं बैंक सखी कामिनी विश्वकर्मा और बीमा सखी प्रतिमा साहू ने आगे बढ़कर परिजनों को ढांढस बंधाया और क्लेम से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए। इसके बाद आश्रय महिला क्लस्टर संगठन (देमार) के जरिए बैंक के साथ त्वरित समन्वय स्थापित किया गया, जिससे बीमा दावा प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हो सकी।
​परिणामस्वरूप, सगनी बाई के पति श्री कानतु राम ध्रुव के बैंक खाते में 2 लाख रुपए की बीमा दावा राशि हस्तांतरित कर दी गई। कानतु राम के लिए यह राशि केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि कठिन घड़ी में मिला एक मजबूत सामाजिक सहारा है, जिससे वे अपने परिवार की दैनिक प्राथमिकताओं और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो सके हैं।
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सगनी बाई ध्रुव का यह उदाहरण यह सिद्ध करता है कि समय रहते सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ना कितना आवश्यक है। मात्र 436 रुपए का यह छोटा-सा वार्षिक निवेश संकट की घड़ी में किसी भी परिवार को 2 लाख रूपए की आर्थिक सुरक्षा दे सकता है। आज बिहान के स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को केवल आजीविका गतिविधियों तक सीमित न रखकर बैंकिंग, बचत, पेंशन और बीमा जैसी दूरगामी योजनाओं से जोड़ रहे हैं। प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही ये सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अनिश्चितताओं के दौर में ग्रामीण परिवारों के लिए आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की एक मजबूत गारंटी बनकर उभर रही हैं।


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