वुहान। चीन के जिस वुहान शहर से कोरोनावायरस दुनियाभर में फैलता चला गया, वहां मौत के नए आंकड़े जारी हुए हैं। पहले बताया गया था कि वुहान में कोरोना से 2579 लोगों की मौत हुई है। अब कहा गया है कि वहां 1290 मौतें और हुई थी। चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने शुक्रवार को ये जानकारी दी। इस रिपोर्ट के मुताबिक अकेले वुहान शहर में कुल 3869 लोगों ने जान गंवाई है। यानी पहले के दावे से करीब 50% अधिक। इस लिहाज से चीन में भी मौत का आंकड़ा बढ़ गया है। नई रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कुल 4632 लोगों की मौत हुई है। पहले 3,342 मौत बताई गई थी। चीन ने माना है कि कई मौतों की वजह जानने में गलती हुई है। नई रिपोर्ट में वुहान में संक्रमितों की तादाद भी 325 बढ़ा दी गई है। यह आंकड़ा अब 50 हजार 333 हो गया है। इसी के साथ अब चीन में कुल संक्रमितों की संख्या 82 हजार 692 हो गई है।
कोविड-19 प्रिवेंशन एंड कंट्रोल के वुहान मुख्यालय ने कहा है कि आंकड़ों में संशोधन संबंधित नियम और कानून के अनुसार किए गए हैं। अब कोरोना से जुड़ी जानकारी पारदर्शी एवं सार्वजनिक हैं और आंकड़े भी सही हैं।
आंकड़ों के गलत होने के बताए चार कारण
- कोरोना महामारी के शुरूआती दिनों में मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण बहुत से लोगों को अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पाया। इस कारण कई मरीजों ने घर पर ही दम तोड़ दिया।
- मरीजों के इलाज के दौरान अस्पताल अपनी क्षमताओं से ज्यादा काम कर रहे थे और रोगियों को बचाने और उपचार करने के लिए चिकित्सा कर्मचारियों को पहले से तैयार किया गया था, जिसके चलते गलत और भ्रामक रिपोर्टिंग हुईं।
- हुबेई प्रांत के वुहान शहर में अस्पतालों के तेजी से बढ़ने के कारण कुछ अस्पताल महामारी सूचना नेटवर्क से नहीं जुड़ सके और समय रहते डेटा की रिपोर्ट नहीं कर सके। इनमें प्राइवेट अस्पताल और कुछ अन्य चिकित्सा संस्थान भी शामिल हैं।
- मृतकों में से कुछ की पंजीकृत जानकारी अधूरी थी और रिपोर्टिंग में दोहराव और गलतियां थीं।
ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने उठाए सवाल
कोरोनावायरस को लेकर दुनिया को सटीक जानकारी न देने पर कई देश चीन की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने अब चीन से कड़े सवाल करने की जरूरत बताई है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमनिक राब ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि चीन को कड़े सवालों के जवाब देने चाहिए। चीन को बताना चाहिए यह महामारी कैसे पनपी और चीन में यह इतनी जल्दी खत्म कैसे हो गई।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा है कि चीन में कुछ ऐसी चीजें हुई हैं जिनके बारे में हमें पता नहीं है। अमेरिका में भी सेंट्रल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (सीआईए) ने व्हाइट हाउस में बताया है कि चीन के आधिकारिक आंकड़े बहुत कम दिखाए जा रहे हैं। वास्तविक आंकड़ों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है।
अमेरिका भी चीन के आंकड़ों पर संदेह जताता रहा
पूरी दुनिया चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन (एनएचसी) की ओर से जनवरी के अंत से रोजाना जारी किए जा रहे मृतकों की संख्या को लेकर संदेह जताया था। अमेरिका भी चीन के आंकड़ों पर संदेह जताता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार मौत के आंकड़ों को छुपाने को लेकर चीन पर निशाना साध चुके हैं। उन्होंने वर्ल्ड हेल्थ आॅर्गनाइजेशन पर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाया था और फंडिंग रोक दी है।