World Book – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 02 Jul 2026 06:31:41 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg World Book – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 3 साल की जुड़वां बहनों ने रचा इतिहास, बनीं दुनिया की सबसे कम उम्र की फीमेल ड्रमर, मिला वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स सम्मान https://eveningtimescg.com/3-year-old-twin-sisters-make-history-becoming-the-worlds-youngest-female-drummers-and-receiving-an-honor-from-the-world-book-of-records/ Mon, 29 Jun 2026 11:21:00 +0000 https://eveningtimescg.com/3-year-old-twin-sisters-make-history-becoming-the-worlds-youngest-female-drummers-and-receiving-an-honor-from-the-world-book-of-records/ भोपाल 

जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे खिलौनों और रंग-बिरंगी किताबों में व्यस्त रहते हैं, उसी उम्र में भोपाल की सान्वी नाहर और समन्वी नाहर ने अपनी ड्रमिंग से दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

महज 3 साल 9 महीने की उम्र में दोनों बहनों ने ‘यंगेस्ट फीमेल ड्रमर’ का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन में अपना नाम दर्ज कराया। उनकी इस उपलब्धि के बाद ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ कॉमंस में आयोजित समारोह में उन्हें सम्मानित भी किया गया।

21 मार्च 2026 को दोनों बच्चियों ने ड्रम सेट पर तय ट्रैक को लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक बिना रुके सफलतापूर्वक बजाया। रिकॉर्ड की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संस्था ने उनके प्रदर्शन की जांच की और फिर उन्हें आधिकारिक तौर पर प्रमाण-पत्र, मेडल और ट्रॉफी से सम्मानित किया।

उनकी उपलब्धि को संस्था के आधिकारिक रिकॉर्ड और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी शामिल किया गया है। इतनी कम उम्र में संगीत के कठिन वाद्य यंत्र पर ऐसा नियंत्रण हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

छोटी उम्र में कैसे रचा इतिहास?
ड्रमिंग को संगीत की सबसे चुनौतीपूर्ण विधाओं में गिना जाता है। इसमें दोनों हाथों और दोनों पैरों का एक साथ सही तालमेल होना जरूरी होता है। यही वजह है कि आमतौर पर बच्चों को पांच साल या उससे अधिक उम्र के बाद ही ड्रम सीखने की सलाह दी जाती है। लेकिन सान्वी और समन्वी ने इस सोच को बदल दिया।

उनकी मां डॉ. निकिता नाहर के मुताबिक, दोनों ने करीब सवा तीन साल की उम्र में ड्रम सीखना शुरू किया था। शुरुआत आसान नहीं थी। परिवार कई संगीत शिक्षकों के पास पहुंचा, लेकिन लगभग सभी ने इतनी छोटी उम्र का हवाला देकर सिखाने से इनकार कर दिया।

इसके बाद भोपाल की योगी म्यूजिक वैली एकेडमी के प्रशिक्षक युग नामदेव ‘योगी’ ने यह चुनौती स्वीकार की। उन्होंने बच्चियों को बिल्कुल शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण दिया। लगातार अभ्यास, सही तकनीक और परिवार के सहयोग की बदौलत दोनों ने कुछ ही महीनों में ऐसी पकड़ बना ली कि उनका प्रदर्शन वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुंच गया।

मेहनत, परिवार का साथ और सही मार्गदर्शन
रिकॉर्ड बनाने के लिए केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अनुशासन भी जरूरी था। प्रशिक्षक युग नामदेव के अनुसार, रिकॉर्ड की शर्त थी कि दोनों बच्चियों को लगातार 1 मिनट 20 सेकंड तक एक तय ट्रैक बिना किसी गलती के पूरा करना होगा।

इसके लिए उन्होंने लगभग एक महीने तक हर दिन उसी ट्रैक का नियमित अभ्यास किया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और रिकॉर्ड के लिए भेजा गया वीडियो और जरूरी दस्तावेज मंजूर कर लिए गए। सान्वी और समन्वी एक डॉक्टर परिवार से हैं।

उनके दादा डॉ. अक्षय नाहर, पिता डॉ. सक्षम नाहर और मां डॉ. निकिता नाहर सभी चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटियों की रुचि को कभी नजरअंदाज नहीं किया और उन्हें सीखने का पूरा मौका दिया।

 

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