Vinod Tawde – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Sun, 06 Sep 2026 12:01:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Vinod Tawde – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 योगी से मिले BJP के नए यूपी प्रभारी विनोद तावड़े, 2027 चुनाव रणनीति पर मंथन https://eveningtimescg.com/new-bjp-up-in-charge-vinod-tawde-meets-yogi-strategy-for-2027-elections-deliberated/ Sun, 06 Sep 2026 12:01:00 +0000 https://eveningtimescg.com/new-bjp-up-in-charge-vinod-tawde-meets-yogi-strategy-for-2027-elections-deliberated/ लखनऊ
भाजपा का यूपी प्रभारी बनाए जाने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने रविवार को सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। रविवार को योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास 5- कालिदास मार्ग, लखनऊ पर भाजपा राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े एवं राष्ट्रीय मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के सह-प्रभारी जगदीश ईश्वरभाई पटेल ने शिष्टाचार भेंट की। विनोद तावड़े शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर राजधानी लखनऊ पहुंचे थे। आज लखनऊ में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक भी होनी है।

कोर कमेटी की बैठक
विनोद तावड़े के यूपी दौरे के दूसरे दिन भाजपा कोर कमेटी की बैठक होनी है। आज मुख्यमंत्री योगी के साथ विनोद तावड़े की मुलाकात हुई। इसमें बैठक में चुनाव की रणनीति और व्यापक बातचीत करके अहम फैसले लिए जाएंगे। इसके अलावा आज क्षेत्रीय प्रभारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और क्षेत्रीय महामंत्रियों के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में क्षेत्रवार राजनीतिक स्थितियों का जायजा लेकर उनके मुताबिक चुनावी रणनीति पर बातचीत होगी।
 

केशव और ब्रजेश पाठक से मिले तावड़े
यूपी भाजपा के नए प्रभारी विनोद तावड़े ने शनिवार देर शाम दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के सरकारी आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की।सूत्रों के मुताबिक दोनों उप मुख्यमंत्रियों से प्रदेश सरकार के कामकाज और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की पर चर्चा हुई। आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन की भावी रणनीति को लेकर भी बातचीत हुई है।विनोद तावड़े और सह प्रभारी जगदीप भाई पटेल का बेहद सादगी से उनका स्वागत हुआ।

योगी की कप्तानी में फिर जीतेंगे यूपी: तावड़े
भाजपा का यूपी प्रभारी बनाए जाने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने शनिवार को कहा कि योगी की अगुआई में भाजपा एक बार फिर 2027 में यूपी फतेह करेगी। दो दिवसीय दौरे पर आए तावड़े ने सपा के पीडीए पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि सपा के पीडीए का मतलब पराया धन अपना है। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी योगी के नेतृत्व में 2027 का विधानसभा चुनाव लड़े जाने की बात कह चुके हैं।

नारी सुरक्षा को मुद्दा बनाएगी भाजपा
तावड़े ने पीडीए पर तंज कसते हुए जिस तरह से पराया धन अपना कहा और उसकी व्याख्या करते हुए रुपया-पैसा और जमीन-जायदाद के साथ स्त्रीधन का जिक्र किया, उससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा सपा शासन काल में महिला सुरक्षा की स्थिति को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। तावड़े ने कहा कि सपा के पीडीए का मतलब पराया धन अपना है।

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बीजेपी की जीत के रणनीतिकार बने विनोद तावड़े, अब यूपी की कमान https://eveningtimescg.com/vinod-tawde-the-strategist-behind-the-bjps-victory-now-takes-charge-of-up/ Wed, 19 Aug 2026 03:35:00 +0000 https://eveningtimescg.com/vinod-tawde-the-strategist-behind-the-bjps-victory-now-takes-charge-of-up/ लखनऊ
भारतीय सियासत में धैर्य, निष्ठा और सांगठनिक क्षमता का कोई मुकाबला नहीं है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर इसका सबसे जीवंत उदाहरण है. महाराष्ट्र की राजनीति में तावड़े एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं. सूबे की फडणवीस सरकार में कद्दावर मंत्री रहे तावड़े का जब 2019 के विधानसभा चुनाव में अचानक टिकट काटा गया था, तब सियासी गलियारों में माना जाने लगा था कि उनका राजनीतिक अध्याय समाप्त हो गया. लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने के साथ ही उन्होंने जिस तरह से 'कमबैक' किया, वह उनकी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवाता है.

हाशिए पर धकेले जाने के बावजूद विनोद तावड़े ने बीते कुछ सालों में अपनी कार्यकुशलता के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान बनाई. इसी का नतीजा है कि बिहार के बाद अब उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण सियासी राज्य उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है.

तावड़े के कंधों पर अब यूपी में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की कमान होगी. यूपी प्रभारी का पद पिछले दो सालों से खाली चल रहा था. इससे पहले तावड़े 2022 से बिहार का प्रभार संभाल रहे थे और उससे पहले हरियाणा की कमान उनके हाथों में थी। तावड़े का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. आइए जानते हैं कि साइडलाइन होने से लेकर राष्ट्रीय पटल पर लौटने तक तावड़े की पूरी कहानी…

महाराष्ट्र की सियासत का मजबूत चेहरा
महाराष्ट्र की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले विनोद तावड़े का जन्म 20 जुलाई 1963 को मुंबई के गिरगांव इलाके में एक मराठी परिवार में हुआ था. उन्होंने साठे कॉलेज (पूर्व में पार्ले कॉलेज) से अपनी पढ़ाई पूरी की. इसी दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की.

तावड़े राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से बचपन से ही जुड़े रहे. एबीवीपी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर युवाओं को जोड़ने की कला सीखी. भाजपा के प्रमोद महाजन और नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति के दांव-पेच सीखे और गोपीनाथ मुंडे के साथ मिलकर पार्टी के जनाधार को विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई.

एबीवीपी से शुरू हुई सियासी पारी
साल 1980 में तावड़े ने एबीवीपी के लिए सक्रिय काम शुरू किया और 1988 में इसके राष्ट्रीय महासचिव बने. इस दौरान उन्होंने कई छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया, जिससे उन्हें एक संघर्षशील युवा नेता के रूप में पहचान मिली. 1990 के दशक में उन्हें महाराष्ट्र भाजपा में सांगठनिक जिम्मेदारियां सौंपी गईं. 1995 में वे राज्य महासचिव नियुक्त किए गए.

इसके बाद 1999 में तावड़े को मुंबई भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया, जहां वे सबसे कम उम्र में इस पद पर आसीन होने वाले नेता बने. 2002 में पार्टी ने उन्हें महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) का सदस्य बनाया. 2011 में वे विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बने और विपक्ष की भूमिका को बड़ी प्रखरता से निभाया.

2014 में भाजपा ने उन्हें बोरीवली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा, जहां से जीतकर वे पहली बार विधानसभा पहुंचे. राज्य में सरकार बनने पर उन्हें स्कूली शिक्षा, उच्च व तकनीकी शिक्षा, और संस्कृति जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों का कैबिनेट मंत्री बनाया गया. हालांकि, 2019 के विधानसभा चुनाव में अचानक उनका टिकट काट दिया गया, जिससे उनका सियासी करियर दांव पर लग गया और वे पार्टी में साइडलाइन हो गए.

'वनवास' से कैसे किया सियासी कमबैक?
2014 से 2019 तक सत्ता के केंद्र में रहने वाले विनोद तावड़े के जीवन में बड़ा झटका 2019 में विधानसभा चुनाव न लड़ना.  राजनीति जानकारों ने इसे तावड़े का राजनीतिक अवसान माना. हालांकि, सार्वजनिक आलोचना या बयानबाजी करने के बजाय तावड़े ने खामोशी और संगठन के प्रति समर्पण का रास्ता चुना. इसी का नतीजा था कि अगले ही साल पार्टी ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी.

विनोद तावड़े और देवेंद्र फडणवीस की सियासी अदावत भी जगजाहिर है.  तावड़े मुंबई से हैं और फडणवीस नागपुर से, लेकिन उनके बीच सियासी रिश्ते अलग हैं. कहा जाता है कि तावड़े सीएम बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत फडणवीस के हाथ लही.  विनोद तावड़े की राजनीतिक छवि बीजेपी के मराठा और चालाक नेता की रही है, लेकिन वे बीजेपी के पुराने दौर के नेताओं की परंपरा से आए हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और पार्टी के भीतर लंबे समय तक संगठनात्मक कार्य के कारण, उन्हें पता था कि 2019 में विधानसभा टिकट से वंचित होने के बाद भी अवसर पाने का रास्ता क्या है.इसीलिए उन्होंने कभी भी मीडिया के सामने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की. वह धैर्यवान थे, लेकिन वह सिर्फ 'वेट एंड वॉच' की भूमिका में नहीं रहे.

बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव के रूप में नियुक्त किया और जेपी नड्डा की टीम में शामिल हो गए. महाराष्ट्र की राजनीति से दिल्ली की सियासत में आ गए. इसके बाद  तावड़े ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. एक साल के भीतर 2021 में उन्हें पार्टी के महासचिव के रूप में पदोन्नत किया गया. उन्हें हरियाणा के प्रभारी के तौर पर भी जिम्मेदारी दी गई. बीजेपी हाईकमान का भरोसा जीता और फिर सियासी बुलंदी पर चढ़ते चले गए.

बीजेपी के जीत की गारंटी बन गए तावड़े
2022 के राष्‍ट्रपति चुनाव में तावड़े ने एनडीए प्रत्‍याशी द्रौपदी मुर्मू के चुनाव प्रभारी रहे थे. इसी तरह उपराष्‍ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्‍णन के लिए भी जिम्मेदारी निभाने का काम किया.  2022 में विनोद तावड़े को बिहार का प्रभारी बनाया गया था. उनके नेतृत्‍व में बीजेपी को जबरदस्त कामयाबी बिहार में मिली और जेडीयू के साथ गठबंधन सरकार बनी. फिर 2024 लोकसभा चुनाव में भी एनडीए ने बिहार में अच्‍छा प्रदर्शन किया.

साल 2025 में एक बार फिर तावड़े के नेतृत्‍व में बिहार में बीजेपी और जदयू की सरकार बनी. बीजेपी की सीटों में इजाफा हुआ. बिहार में एनडीए के प्रभारी के रूप में उन्होंने सहयोगियों के बीच सीट शेयरिंग और अंदरूनी खींचतान को बेहद कुशलता से संभाला, जिसके शानदार परिणाम सामने आए. उनकी कार्यशैली से प्रभावित होकर जेपी नड्डा और अब नितिन नवीन के कार्यकाल में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाए रखा गया.  

उन्हें महाराष्ट्र से राज्यसभा भेजकर पार्टी ने उनके संसदीय करियर को भी नई दिशा दी और अब उन्हें यूपी की कमान सौंपी गई है. विनोद तावड़े को संगठन पर्व 2024 के तहत बीजेपी के राष्‍ट्रीय सदस्‍यता अभियान के प्रभारी बनाया गया था. इस दौरान उन्‍होंने देश भर में मात्र 15 दिन के भीतर 5 करोड़ नए सदस्‍य जोड़े थे, इसके अलावा यूपी में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चुनाव की कमान संभाली थी.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा घोषित सांगठनिक फेरबदल के तहत विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महासचिव बनाते हुए उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है. 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव और 2024 के झटकों के बाद पार्टी के कैडर में ऊर्जा फूंकना, योगी सरकार व संगठन के बीच समन्वय बिठाना और गैर-यादव ओबीसी व पारंपरिक वोट बैंक को साधना उनकी मुख्य जिम्मेदारी होगी.

 

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