Tejas – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Sat, 19 Sep 2026 06:41:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Tejas – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 वायुसेना की ताकत बढ़ी, तेजस विमानों का बेड़ा पूरा; स्वदेशी जेट से बढ़ेगी क्षमता https://eveningtimescg.com/air-force-strength-boosted-as-tejas-fleet-is-completed-indigenous-jet-to-enhance-capabilities/ Sat, 19 Sep 2026 06:41:00 +0000 https://eveningtimescg.com/air-force-strength-boosted-as-tejas-fleet-is-completed-indigenous-jet-to-enhance-capabilities/ नई दिल्ली

हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना को पूरी तरह स्वदेशी 20 तेजस विमानों की डिलीवरी का अनुबंध पूरा कर लिया। अंतिम खेप में दो सीट वाले दो तेजस प्रशिक्षण विमान वायुसेना को सौंपे गए। इसके साथ ही एचएएल ने वायुसेना के लिए 70 एचटीटी-40 बेसिक प्रशिक्षण विमानों की डिलीवरी के अनुबंध की भी शुरुआत की। निजी विमानन कंपनी पवनहंस को चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर भी सौंपे गए।

बेंगलुरु में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू की मौजूदगी में विमानों और हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी की गई। अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर 2010 में रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच हुए एफओसी अनुबंध के तहत 20 तेजस विमानों की आपूर्ति होनी थी। इनमें 16 एक सीट वाले लड़ाकू विमान और चार दो सीट वाले प्रशिक्षण विमान शामिल थे।

पहले ही दिए जा चुके हैं 16 लड़ाकू विमान
सभी 16 लड़ाकू विमानों और दो प्रशिक्षण विमानों की आपूर्ति पहले ही की जा चुकी थी। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए स्वदेश में विकसित प्रौद्योगिकियां समय की मांग हैं। अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए रक्षा मंत्री ने वैज्ञानिकों और इंजीनियरों से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

क्या है इन विमानों की खासियत
एचटीटी-40 (हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40) स्वदेश में डिजाइन और विकसित किया गया प्रशिक्षक विमान है, जिसे भारतीय रक्षा सेवाओं की शुरुआती प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। एचएएल के एक बयान के अनुसार, एलसीए एफओसी प्रिशक्षु विमान एक हल्का, हर मौसम में काम करने वाला और कई तरह की भूमिकाएं निभाने वाला 4.5-जेनरेशन का विमान है, जिसे मुख्य रूप से वायुसेना की प्रशिक्षण ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

बयान के अनुसार, '' इन तकनीकों ने भारत को एक उन्नत दो-सीट वाला लड़ाकू विमान क्षमता विकसित करने और उसे संचालित करने में सक्षम बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में ऐसा तंत्र विकसित किया जाना चाहिए, जो असैन्य और सैन्य विमानन दोनों क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा कर सके। सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक संगठनों के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखना चाहिए।' अत्याधुनिक नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए सिंह ने वैज्ञानिकों और अभियंताओं से भविष्य की रक्षा जरूरतों को पूरा करने वाली प्रौद्योगिकियां विकसित करने का आग्रह किया।

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तेजस को मिला ‘बाहुबली’ इंजन, GE Aerospace ने HAL को सौंपे 3 F404-IN20 इंजन; बढ़ेगी लड़ाकू ताकत https://eveningtimescg.com/tejas-gets-a-baahubali-engine-ge-aerospace-hands-over-3-f404-in20-engines-to-hal-boosting-combat-prowess/ Sun, 06 Sep 2026 03:33:00 +0000 https://eveningtimescg.com/tejas-gets-a-baahubali-engine-ge-aerospace-hands-over-3-f404-in20-engines-to-hal-boosting-combat-prowess/ बेंगलुरु 

भारत का स्वदेशी फाइटर जेट तेजस की ताकत बढ़ने वाली है. LCA तेजस Mk1A प्रोग्राम को बड़ा बढ़ावा मिला है. अमेरिकी कंपनी  GE Aerospace ने बताया कि उसने भारत को तीन पावरफुल फाइटर जेट इंजन सौंपे हैं. इन इंजन को तेजस में लगाया जाएगा. कंपनी ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को इसी साल अगस्त में ये इंजन दिए. यह डिलीवरी ऐसे समय में हुई है जब F404 इंजनों की सप्लाई में देरी के कारण तेजस Mk1A के उत्पादन और डिलीवरी कार्यक्रम पर असर पड़ा था. HAL पहले ही कह चुका है कि उसकी उत्पादन लाइन तैयार है, लेकिन विमानों की अंतिम डिलीवरी इंजन उपलब्धता पर निर्भर है। 

क्या है F404-IN20 इंजन?
F404-IN20, GE की F404 सीरीज का वह वैरिएंट है जिसे खास तौर पर भारतीय तेजस के लिए डेवलेप किया गया है. यह इंजन आफ्टरबर्नर के साथ करीब 84 kN (19,000 lbf) का मैक्सिमम थ्रस्ट पैदा करता है, जो तेजस को सुपरसोनिक गति और जबरदस्त मैन्युवरिंग क्षमता देता है. कहा जा सकता है कि यह इंजन केवल एक नॉर्मल अपग्रेड नहीं, बल्कि फाइटर जेट को हर मोर्चे पर घातक बनाने वाला पावरहाउस है। 

लद्दाख से लेकर रेगिस्तान तक अचूक प्रहार
इस इंजन की सबसे बड़ी खासियत इसका हर तरह के मौसम और इलाके में असरदार रहना है. यह इंजन लद्दाख के माइनस तापमान और लेह जैसे हाई-एल्टीट्यूड एयरबेसों से लेकर थार के 50 डिग्री तापमान वाले रेगिस्तान तक बिना पावर लॉस के काम करता है. इसके लिए इसमें खास सिंगल-क्रिस्टल टर्बाइन ब्लेड्स और एडवांस कूलिंग सिस्टम लगाए गए हैं। 

यह इंजन पूरी तरह फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) टेकनोलॉजी से लैस है. यह सिस्टम ईंधन की खपत को बेहतर बनाती है और डॉगफाइट के दौरान पायलट को तुरंत थ्रॉटल रिस्पॉन्स देती है। 

तेजस Mk1A के लिए क्यों अहम है यह डिलीवरी?
भारत का तेजस प्रोग्राम इंजन की कमी के चलते लगातार डिले हो रहा था.  अब तीन नए इंजन मिलने से HAL को तैयार एयरफ्रेम को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी. भारतीय वायुसेना ने फिलहाल 180 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है. ऐसे में अब इन इंजनों की जल्द डिलीवरी होने की संभावना बढ़ गई। 

MiG-21 की जगह लेगा तेजस
भारतीय वायुसेना पुराने MiG-21 बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटा रही है. ऐसे में तेजस Mk1A ही भविष्य के फ्रंटलाइन फाइटर स्क्वाड्रनों की रीढ़ बनने जा रहा है. F404-IN20 इंजन के साथ तेजस  लद्दाख जैसे हाई-एल्टीट्यूड बेस, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान और  पश्चिमी सीमा के फॉरवर्ड एयरबेस पर तैनात किए जा सकेंगे। 

क्या हैं तेजस Mk1A की खासियतें?
तेजस Mk1A, मौजूदा तेजस Mk1 का एडवांस वैरिएंट है. यह फाइटर जेट AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, BVR मिसाइल क्षमता, बेहतर मेंटेनेंस प्रोफाइल, कम ऑपरेटिंग लागत और आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता जैसी खासियतों के साथ भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा। 

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Tejas Fighter Jet: अमेरिकी इंजन में देरी के बीच DRDO का बड़ा दांव, आया नया Kaveri 2.0 इंजन https://eveningtimescg.com/tejas-fighter-jet-drdo-makes-a-bold-move-amidst-us-engine-delays-introduces-the-new-kaveri-2-0-engine/ Sun, 16 Aug 2026 03:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/tejas-fighter-jet-drdo-makes-a-bold-move-amidst-us-engine-delays-introduces-the-new-kaveri-2-0-engine/ बेंगलुरु 
भारत को अब अमेरिका GE F404 इंजन की जरूरत नहीं पड़ेगी. लंबे समय से चर्चा में रहे कावेरी जेट इंजन को अब पूरी तरह नया रूप देकर कावेरी 2.0 विकसित किया जा रहा है. डीआरडीओ की गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (जीटीआरई) इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा रहा है। 

इस मुख्य मकसद तेजस फाइटर जेट के लिए अमेरिकी जीई एफ404 इंजनों की जगह लेना है. सप्लाई चेन  में देरी की वजह से तेजस एमके1ए के उत्पादन में बाधा आ रही है, इसलिए यह स्वदेशी प्रयास और भी जरूरी हो गया है.  कावेरी इंजन की मूल परियोजना 1980 के दशक में शुरू हुई थी, लेकिन थ्रस्ट और वजन संबंधी समस्याओं के कारण इसे तेजस से अलग कर दिया गया था। 

अब जीटीआरई ने इसे पूरी तरह से नया कोर डिजाइन करके फिर से बनाया है. नया कावेरी 2.0 बिना आफ्टरबर्नर के 55 से 60 किलोन्यूटन ड्राई थ्रस्ट और आफ्टरबर्नर के साथ 90 से 100 किलोन्यूटन वेट थ्रस्ट देने का लक्ष्य रखता है. यानी इससे फाइटर जेट को तेज उड़ान की ताकत मिलेगी. यह क्षमता मौजूदा GE F404 इंजनों के बराबर या उससे बेहतर है, जो वर्तमान में तेजस एमके1ए को ताकत दे रहे हैं। 

पुराने कावेरी डेरिवेटिव इंजन (केडीई) में केवल 49 से 52 किलोन्यूटन थ्रस्ट मिलता था, जो आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरतों के लिए कम था. नया कोर हाई-प्रेशर कंप्रेसर पर जोर देता है ताकि दबाव अनुपात और ईंधन दक्षता बढ़ाई जा सके. इंजीनियर एडवांस्ड ब्लिस्क (ब्लेडेड डिस्क) का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो टाइटेनियम मिश्र धातु से बने हैं। 

ये सिंगल-पीस डिजाइन हवा के रिसाव को रोकते हैं, वजन कम करते हैं. थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात सुधारते हैं. सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड्स का उपयोग उच्च तापमान सहन करने के लिए किया जा रहा है, जिससे थर्मल दक्षता बढ़ेगी. वजन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा रही है। 

मूल कावेरी का वजन लगभग 1235 किलोग्राम था, जिसे अब 1100 किलोग्राम से कम करने का लक्ष्य है. भविष्य में इसे और घटाकर 1000 किलोग्राम के करीब लाने की योजना है. इसके लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और कंपोजिट सामग्रियों का सहारा लिया जा रहा है। 

इसके अलावा, फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (एफएडीईसी) सिस्टम लगाया जाएगा, जो इंजन को डिजिटल तरीके से नियंत्रित करेगा. विभिन्न उड़ान स्थितियों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करेगा। 

तेजस उत्पादन में देरी और स्वदेशी विकल्प की जरूरत
तेजस एमके1ए कार्यक्रम अमेरिकी GE F404 इंजनों की आपूर्ति में देरी से प्रभावित हो रहा है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड – HAL ने कई एयरफ्रेम तैयार कर लिए हैं, लेकिन इंजन न मिलने से डिलीवरी रुकी हुई है. वैश्विक सप्लाई चेन की समस्याएं और उत्पादन बाधाओं के कारण यह स्थिति बनी है। 

ऐसे में कावेरी 2.0 को मिड-लाइफ अपग्रेड के रूप में 2030 के दशक में तेजस बेड़े में फिट करने की योजना है. जब मौजूदा इंजन अपने ओवरहाल साइकिल में पहुंचेंगे, तब स्वदेशी इंजन लगाने से विदेशी निर्भरता कम होगी और आपूर्ति संबंधी जोखिम समाप्त होंगे। 

यह प्रयास साफ्रान के साथ चल रहे संयुक्त कार्यक्रम से अलग है. साफ्रान के साथ 120 किलोन्यूटन या उससे अधिक थ्रस्ट वाला इंजन एएमसीए जैसे पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर के लिए विकसित किया जा रहा है. कावेरी 2.0 मध्यम थ्रस्ट वाला वर्कहॉर्स है, जो तेजस जैसे प्लेटफॉर्म के लिए उपयुक्त है। 

इससे भारत दोहरी रणनीति अपना रहा है- एक तरफ मौजूदा जरूरतों को पूरा करना और दूसरी तरफ भविष्य के एडवांस विमानों के लिए तकनीक विकसित करना। 

घातक यूसीएवी और अन्य चुनौतियां
कावेरी का ड्राई वर्जन यानी बिना आफ्टरबर्नर वाला संस्करण घातक (घातक) यूसीएवी के लिए भी उपयोगी है. यह मानवरहित लड़ाकू ड्रोन उच्च ऊंचाई और लंबे समय तक उड़ान भरने के लिए डिजाइन किया गया है. ड्राई इंजन ईंधन की बचत करता है. स्टेल्थ विशेषताओं को बनाए रखने में मदद करता है। 

इससे घातक कार्यक्रम को गति मिलेगी और भारत मानवरहित युद्धक क्षमताओं में आत्मनिर्भर बनेगा. भविष्य में कावेरी 2.0 को तेजस एमके2 या अन्य प्लेटफॉर्म में भी इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. चरणबद्ध परीक्षण की योजना है। 

इसमें ग्राउंड टेस्ट, हाई-अल्टीट्यूड ट्रायल्स और बाद में फ्लाइंग टेस्ट बेड पर उड़ान परीक्षण शामिल हैं. एक संशोधित तेजस विमान को टेस्ट बेड के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी चल रही है, क्योंकि मूल तेजस डिजाइन कावेरी के आयामों को ध्यान में रखकर बना था। 

प्रगति उत्साहजनक है. लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं. अतीत में देरी और तकनीकी बाधाओं के कारण आलोचना हुई थी. कई विशेषज्ञ और रक्षा विश्लेषक स्थिर और पर्याप्त फंडिंग की मांग कर रहे हैं ताकि परियोजना समय पर पूरी हो. जेट इंजन विकास जटिल प्रक्रिया है, जिसमें हॉट सेक्शन सामग्री, कंप्रेसर दक्षता और नियंत्रण प्रणालियों पर महारत हासिल करनी पड़ती है।   

सफलता मिलने पर यह न केवल तेजस बेड़े को मजबूत करेगा बल्कि रक्षा निर्यात क्षमता भी बढ़ाएगा. विदेशी इंजनों पर निर्भरता कम होने से रणनीतिक स्वायत्तता मिलेगी. जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल इंजन भारतीय वातावरण में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। 

व्यापक रणनीतिक महत्व
कावेरी 2.0 भारत की आत्मनिर्भर भार
त पहल का प्रतीक है. लड़ाकू विमानों का दिल इंजन होता है. इसे स्वदेशी बनाना तकनीकी संप्रभुता की दिशा में बड़ा कदम है. जीई इंजनों की देरी ने एक बार फिर याद दिलाया कि आपूर्ति श्रृंखला राजनीतिक या आर्थिक दबावों से प्रभावित हो सकती है. स्वदेशी विकल्प होने से ऐसी स्थितियों से बचा जा सकेगा। 

इंजीनियरिंग टीम उन्नत ब्लिस्क, टाइटेनियम एलॉय, सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड और वजन घटाने जैसी तकनीकों पर काम कर रही है. एफएडीईसी नियंत्रण और चरणबद्ध परीक्षण योजना से विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी. 2030 के दशक में तेजस एमके1ए अपग्रेड के लिए यह तैयार हो सकता है, जबकि घातक यूसीएवी को पहले ही समर्थन मिलेगा। 

 

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