Sugar mills – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Sun, 26 Jul 2026 07:00:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Sugar mills – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 बिहार की बंद नौ चीनी मिलों की जमीन निवेशकों को सौंपने का रास्ता साफ https://eveningtimescg.com/path-cleared-to-hand-over-land-of-nine-closed-sugar-mills-in-bihar-to-investors/ Sun, 26 Jul 2026 07:00:00 +0000 https://eveningtimescg.com/path-cleared-to-hand-over-land-of-nine-closed-sugar-mills-in-bihar-to-investors/ पटना  
बिहार की बंद नौ चीनी मिलों की जमीन निवेशकों को सौंपने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए सरकार ने चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) अधिनियम में संशोधन किया है। इसके बाद बंद चीनी मिलों की जमीन का स्वामित्व निजी कंपनियां या सहकारी समितियों को सौंपी जा सकेगी। सरकार ने राज्य की बंद नौ चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। सकरी और रैयाम दो मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के जरिए होना है। अन्य मिलों के संचालन के लिए निवेशकों को आमंत्रित किया गया है। इसके लिए बंद मिलों की जमीन सहकारी समितियों या निवेशकों को सौंपा जाना जरूरी है। बंद चीनी मिलों का अधिग्रहण चीनी विकास निगम ने किया था। इसका स्वामित्व अभी भी निगम के पास है।

इस कारण 1985 में बने अधिनियमि के अनुसार मिल का संचालन सिर्फ राज्य सरकार ही कर सकती थी। इसलिए बिना स्वामित्व बदले जमीन सौंपने की प्रक्रिया पर विधि विभाग को आपत्ति थी। अब गन्ना उद्योग विभाग ने जमीन हस्तांतरण के लिए अधिनियम में संशोधन कर लिया है।

नवंबर 2026 से तीन मिलें शुरू होंगी
पहले चरण में तीन बंद चीनी मिलें शुरू होंगी। इसमें मधुबनी जिले की सकरी, दरभंगा जिले की रैयाम और गोपालगंज जिले की सासामूसा चीनी मिल है। राज्य सरकार ने नवंबर 2026 से यहां पेराई शुरू करने का निर्णय लिया है। सकरी और रैयाम चीनी मिल का संचालन सहकारिता विभाग के जरिए होगा। सासामूसा के लिए निवेशक का चयन किया जा रहा है।

बता दें कि बिहार सरकार की सात निश्चय-3 के अंतर्गत "समृद्ध उद्योग – सशक्त बिहार" के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य में चीनी उद्योग एवं गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को नई गति देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। गन्ना उद्योग विभाग इसके लिए व्यापक एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

गन्ना उद्योग विभाग द्वारा नई चीनी मिलों की स्थापना, निवेश प्रोत्साहन, तकनीकी सहयोग, गन्ना क्षेत्र विस्तार तथा किसानों की आय वृद्धि को केंद्र में रखकर कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी पहल की निगरानी एवं क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो विभिन्न परियोजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों की नियमित समीक्षा कर रही है।

राज्य सरकार एवं सहकारिता विभाग द्वारा राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ (एनएफसीएसएफ), नई दिल्ली के साथ महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) किया गया है। इस समझौते के अंतर्गत बंद पड़ी सकरी एवं रैयाम चीनी मिलों की तकनीकी एवं आर्थिक संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन कराया गया है। एनएफसीएसएफ द्वारा दोनों चीनी मिलों की संभाव्यता फिजिब्लिटी रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। गत दिनों मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सकरी एवं रैयाम चीनी मिलों के पुनः संचालन हेतु इंडियन पोटाश लिमिटेड से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं।

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बिहार में चीनी मिल पर संकट गहराया, स्क्रैप कटाई शुरू होते ही आंदोलन के मूड में किसान https://eveningtimescg.com/crisis-deepens-at-bihar-sugar-mill-farmers-ready-to-protest-as-scrapping-begins/ Tue, 30 Jun 2026 16:00:00 +0000 https://eveningtimescg.com/crisis-deepens-at-bihar-sugar-mill-farmers-ready-to-protest-as-scrapping-begins/ गोपालगंज.

छह वर्षों से बंद पड़ी सासामुसा चीनी मिल के पुनः संचालन की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) की प्रक्रिया के तहत खरीदे गए स्क्रैप की कटाई की तैयारी मिल परिसर में शुरू हो गई है।

एक ओर बिहार सरकार गन्ना उद्योग विभाग के माध्यम से मिल चालू कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्क्रैप हटाने और परिसंपत्तियों की नीलामी तेज होने से किसानों और पूर्व मिलकर्मियों की चिंता बढ़ गई है।

मंत्री से मिलेंगे किसान, कार्रवाई नहीं रुकी तो आंदोलन
स्क्रैप कटाई की सूचना मिलते ही किसान संघर्ष समिति सक्रिय हो गई है। समिति के अध्यक्ष मोहम्मद तौहीद के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल पटना रवाना हुआ है। किसान गन्ना उद्योग मंत्री और विभागीय अधिकारियों से मिलकर स्क्रैप कटाई रोकने तथा मिल के पुनः संचालन पर ठोस निर्णय लेने की मांग करेंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।

2020 से बंद है मिल, लगातार उठ रही संचालन की मांग
सासामुसा चीनी मिल वर्ष 2020 से बंद पड़ी है। तब से हजारों गन्ना उत्पादक किसान और पूर्व मिलकर्मी इसके पुनः संचालन की मांग कर रहे हैं। कई बार जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार को ज्ञापन देने के साथ मिल गेट पर धरना-प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

40 करोड़ के बैंक बकाया से शुरू हुआ पूरा विवाद
विवाद की शुरुआत मिल पर सेंट्रल बैंक के करीब 40 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान से हुई। बैंक ने वसूली के लिए एनसीएलटी का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने पिछले वर्ष नवंबर में मिल का स्क्रैप करीब 18.50 करोड़ रुपये में बेचकर बैंक का बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके विरोध में किसानों ने 14 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जिसे मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था।

चार निवेशकों ने दिखाई रुचि, लेकिन नहीं बन सकी बात
गन्ना उद्योग विभाग की पहल पर मार्च और अप्रैल में चार निवेशक कंपनियों ने मिल परिसर का निरीक्षण किया और संचालन में रुचि दिखाई।

हालांकि भूमि की सीमित उपलब्धता तथा तकनीकी और वित्तीय कारणों से कोई भी निवेशक अंतिम निर्णय तक नहीं पहुंच सका। इस बीच राज्य सरकार ने किसानों के लगभग 43 करोड़ रुपये बकाया भुगतान की स्वीकृति भी दी है।

स्क्रैप हटाने का विरोध जारी, पुनर्जीवन की उम्मीद पर संकट
स्क्रैप की नीलामी लेने वाली कंपनी के कर्मी मिल परिसर में पहुंचकर साफ-सफाई शुरू कर चुके हैं और जल्द मशीनों की कटाई शुरू होने की संभावना है। किसान संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि किसानों और मिलकर्मियों का बकाया भुगतान तथा मिल के भविष्य पर स्पष्ट निर्णय होने तक स्क्रैप बाहर ले जाने का विरोध जारी रहेगा। किसानों का कहना है कि सरकार ने अब भी हस्तक्षेप नहीं किया तो सासामुसा चीनी मिल के पुनर्जीवन की उम्मीद हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

 

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