shoury – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 02 Jul 2026 06:40:15 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg shoury – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 शौर्या दल 22 लाख महिलाओं की देश की सबसे बड़ी साइलेंट आर्मी https://eveningtimescg.com/shaurya-dal-the-countrys-largest-silent-army-of-2-2-million-women/ Tue, 09 Jun 2026 15:41:00 +0000 https://eveningtimescg.com/shaurya-dal-the-countrys-largest-silent-army-of-2-2-million-women/ शौर्या दल 22 लाख महिलाओं की देश की सबसे बड़ी साइलेंट आर्मी

एमपी कैबिनेट ने दी वर्ष 2030-31 तक निरंतरता को मंजूरी

भोपाल 

मध्यप्रदेश के गांवों और शहरों की गलियों से गुज़रते हुए अगर आपको साड़ी का पल्लू संभाले या कॉलेज का बैग टांगे महिलाओं की कोई टोली दिखाई दे, तो उन्हें सिर्फ राहगीर समझने की भूल मत कीजिएगा। यह मध्यप्रदेश की 'शौर्या दल' सेना है—बिना वर्दी के समाज की वो 'गार्डियन' जो आज देश में महिला सशक्तिकरण की सबसे बुलंद हुंकार बन चुकी है ,जिसने महिला सशक्तिकरण की परिभाषा को कागजों से निकालकर धरातल पर साकार कर दिखाया है। वर्ष 2013  में महज़ 6 जिलों से शुरू हुआ यह कारवां आज प्रदेश के कोने-कोने में फैल चुका है, जिसे देखते हुए सरकार ने इसे अगले 5 साल (2026-27 से 2030-31) तक लगातार जारी रखने का महत्वपूर्ण फैसला किया है।

अपराध पर 'प्री-एंट्री बैन': पुलिस से पहले पहुंचती है यह 'जाबांज टोली'

शौर्या दल की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि ये अपराध होने के बाद मोमबत्तियां नहीं जलातीं, बल्कि अपराध होने से पहले ही उसकी कमर तोड़ देती हैं। किसी घर में घरेलू हिंसा की सुगबुगाहट हो, किसी गांव में गुपचुप बाल विवाह मंडप सज रहा हो, या कोई संदिग्ध मानव तस्करी (ट्रैफिकिंग) का जाल बुन रहा हो—शौर्या दल का खुफिया नेटवर्क तुरंत एक्टिव हो जाता है। 15 से 45 वर्ष की ये जांबाज महिलाएं पुलिस और कानून के हस्तक्षेप से पहले अपनी 'सामुदायिक समझाइश' के ब्रह्मास्त्र से बड़े-बड़े मामलों को शांति से सुलझा देती हैं।

22 लाख से अधिक की 'साइलेंट आर्मी', जहां किशोरी और गृहणी हैं एक साथ

यह देश का शायद सबसे अनोखा और विशाल सामाजिक नेटवर्क है, जिसमें वर्तमान में 22.52 लाख से अधिक महिलाएं और बेटियाँ सीधे तौर पर जुड़ी हैं। इस दल की खूबसूरती देखिए—एक तरफ जहां 7.64 लाख कॉलेज और स्कूल जाने वाली नई पीढ़ी की लड़कियां अपने तकनीकी और आधुनिक विचारों के साथ इसमें शामिल हैं, वहीं दूसरी तरफ 14.88 लाख अनुभवी गृहणियां और बुजुर्ग महिलाएं हैं, जो समाज की विविधताओं से भलीभाँति परिचित हैं। युवा जोश और अनुभव जब एक मंच पर आता है, तो दकियानूसी सोच और नकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण को घुटने टेकने ही पड़ते हैं।

आदिवासी अंचलों से शहरों तक हक की हुंकार

महिला एवं बाल विकास विभाग की इस पहल ने सुदूर आदिवासी क्षेत्रों से लेकर शहरी वार्डों तक की महिलाओं को अपनी बंदिशें तोड़कर खुलकर सांस लेने का मौका दिया है। आज ये शौर्या दल सिर्फ सुरक्षा कवच नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर महिलाओं की समान पहुंच सुनिश्चित करने का जरिया बन चुके हैं। महिलाएं अब सिर्फ सरकारी योजनाओं की कतारों में खड़ी नहीं होतीं, बल्कि अपने मौलिक अधिकारों के लिये लड़ना सीख चुकी हैं।

देश के लिए नया रोल मॉडल बना 'मध्यप्रदेश'

शौर्या दल ने यह साबित कर दिया है कि असली महिला सशक्तिकरण तब आता है जब चाबी खुद महिलाओं के हाथ में सौंप दी जाए। समाज की नकारात्मक सोच और रूढ़ियों पर प्रहार करता मध्यप्रदेश का यह 'शौर्या मॉडल' आज पूरे देश के सामने एक मिसाल है, जो यह संदेश देता है कि जब महिलाएं खुद अपनी और समाज की रक्षक बन जाएं, तो बदलाव को आने से कोई नहीं रोक सकता।। 

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