Rambaran – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Sat, 26 Sep 2026 10:22:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Rambaran – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 बैतूल के दिव्यांग तैराक रामबरन पाल ने पार किया इंग्लिश चैनल https://eveningtimescg.com/differently-abled-swimmer-rambaran-pal-from-betul-crosses-the-english-channel/ Sat, 26 Sep 2026 10:22:00 +0000 https://eveningtimescg.com/differently-abled-swimmer-rambaran-pal-from-betul-crosses-the-english-channel/ बैतूल

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के विक्रम अवॉर्डी दिव्यांग अंतरराष्ट्रीय तैराक रामबरन पाल ने इंग्लिश चैनल पार कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने इंग्लैंड के डोवर से फ्रांस तक 42 किलोमीटर से अधिक का समुद्री सफर तैरकर पूरा किया। रामबरन ने 21 घंटे 20 मिनट तक लगातार तैरते हुए यह चुनौती पूरी की।

रामबरन का यह अभियान 24 सितंबर को सुबह 8 बजकर 58 मिनट पर इंग्लैंड के डोवर तट से शुरू हुआ था। समुद्र के पानी का तापमान 15 डिग्री से कम था। कड़ाके की ठंड, तेज हवाओं और उफनती लहरों के बीच उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 21 घंटे 20 मिनट तक लगातार तैरने के बाद वे 25 सितंबर की सुबह 6 बजकर 18 मिनट पर फ्रांस के तट पर पहुंचे और तिरंगा लहराकर अपनी सफलता दर्ज की।

इस ऐतिहासिक अभियान में पद्मश्री और अंतरराष्ट्रीय पैरा तैराक डॉ. सतेन्द्र सिंह लोहिया भी शामिल रहे। उन्होंने अपनी तीसरी इंग्लिश चैनल क्रॉसिंग पूरी की। भिंड के तैराक गजेंद्र सिंह कुशवाह भी टीम का हिस्सा रहे। समुद्र में यह रिले तैराकी थी, जिसमें सभी तैराकों ने बारी-बारी से तैरकर अभियान पूरा किया।

पिछले साल खराब मौसम ने नहीं दिया था साथ
रामबरन पाल का इंग्लिश चैनल पार करने का सपना पिछले साल खराब मौसम के कारण अधूरा रह गया था। वे इंग्लैंड तक पहुंचे थे, लेकिन मौसम अनुकूल नहीं होने के कारण उन्हें बिना तैरे ही वापस लौटना पड़ा। इसके बाद बैतूल लौटकर उन्होंने एक साल तक कड़ी मेहनत की। उन्होंने ठंडे पानी में लगातार अभ्यास किया और इस बार पूरी तैयारी के साथ इंग्लिश चैनल पार करने में सफलता हासिल की।

रामबरन पाल अब तक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 22 पदक जीत चुके हैं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें वर्ष 2006 में प्रदेश के सर्वोच्च खेल सम्मान विक्रम अवॉर्ड से सम्मानित किया था। वर्तमान में वे बैतूल नगर पालिका के स्विमिंग पूल में कोच के तौर पर बच्चों को तैराकी सिखा रहे हैं। रामबरन की यह उपलब्धि दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने साबित किया है कि शारीरिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत इच्छाशक्ति और लगातार मेहनत से बड़ी से बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है।

 

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