Pratima Bagri – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Fri, 10 Jul 2026 07:10:50 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Pratima Bagri – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 110 साल पुराने सबूत पेश किए’! मंत्री प्रतिमा बागरी बोलीं- मेरा जाति प्रमाण पत्र सही, अब जांच समिति के फैसले का इंतजार https://eveningtimescg.com/110-year-old-evidence-submitted-minister-pratima-bagri-states-her-caste-certificate-is-valid-now-awaiting-the-inquiry-committees-decision/ Wed, 08 Jul 2026 07:03:00 +0000 https://eveningtimescg.com/110-year-old-evidence-submitted-minister-pratima-bagri-states-her-caste-certificate-is-valid-now-awaiting-the-inquiry-committees-decision/ भोपाल
 मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मंगलवार को अपने अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को लेकर लगे आरोपों को खारिज किया। बागरी ने कहा कि उन्होंने राज्य की उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष सभी दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत कर दिए हैं और उनका जाति प्रमाण पत्र वैध है। विवाद तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि बागरी अनुसूचित जाति श्रेणी से नहीं आती हैं और उन्होंने गलत जानकारी के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था।

क्या लगा था आरोप
उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा बागरी राजपूत समुदाय से हैं और आरोप लगाया कि उन्होंने आरक्षित रैगांव निर्वाचन क्षेत्र से 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ा और बाद में एक अमान्य जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करके मंत्री बनीं। अहिरवार ने उनका जाति प्रमाण पत्र रद्द करने, विधानसभा से अयोग्य घोषित करने और राज्य मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की थी।

सोमवार को जांच समिति के सामने पेश हुईं
प्रतिमा बागरी ने बताया कि वह सोमवार को जाति जांच समिति के सामने पेश हुईं और अपने दावे के समर्थन में सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि समिति के साथ बैठक हुई थी और उन्होंने 110 साल से अधिक पुराने सबूतों सहित सभी दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। दस्तावेजों की जांच के बाद किसी को भी कोई अनियमितता नहीं मिली और उनका जाति प्रमाण पत्र असली है।

मंत्री ने दर्ज कराया था बयान
सोमवार को बागरी ने समिति के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया और ऐतिहासिक रिकॉर्ड और अनुसूचित जाति सूची में बागड़ी समुदाय के शामिल होने से संबंधित दस्तावेज सहित दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए। अहिरवार भी समिति के समक्ष पेश हुए और उनकी जातिगत स्थिति को चुनौती देने वाले दस्तावेज प्रस्तुत किए।

    प्रतिमा बागरी ने कहा- मेरा जाति प्रमाण पत्र सही
    जांज समिति को मेरे जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति नहीं
    मंत्री ने कहा- 110 साल पुराने दस्तावेज समिति को सौंपे
    जांच समिति का फैसला आना अभी बाकी है

जांज समिति का फैसला आना बाकी
कांग्रेस नेता के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री प्रतिमा बागरी ने उन पर राजनीतिक कारणों से झूठे दावे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी नहीं है और यह साबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि अहिरवार ने झूठे आरोप लगाए हैं और मीडिया के सामने गलत तथ्य पेश किए हैं, और अब सच्चाई सामने आ गई है। जांच समिति दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर रही है और अपनी जांच पूरी करने के बाद इस मामले पर फैसला सुनाएगी।

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MP की मंत्री प्रतिमा बागरी पर बढ़ा सियासी संकट, विधायकी और मंत्री पद पर लटकी तलवार https://eveningtimescg.com/political-crisis-deepens-for-mp-minister-pratima-bagri-her-legislative-seat-and-ministerial-post-hang-in-the-balance/ Wed, 01 Jul 2026 10:10:00 +0000 https://eveningtimescg.com/political-crisis-deepens-for-mp-minister-pratima-bagri-her-legislative-seat-and-ministerial-post-hang-in-the-balance/ भोपाल 

मध्यप्रदेश की एक महिला मंत्री की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हाईकोर्ट के एक आदेश के कारण वे बुरी तरह घिर गई हैं। यहां तक कि मंत्रिमंडल से बाहर होने का खतरा भी मंडराने लगा है। प्रदेश की नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी फर्जी जाति प्रमाण पत्र में घिरीं हैं। उन्हें राज्यस्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने तलब किया है। प्रतिमा बागरी को उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें उनकी अनुसूचित जाति प्रमाणित हो सके। ऐसा नहीं करने पर उनका मंत्रीपद भी जा सकता है। पद पर खतरा मंडराने के बीच मंत्री प्रतिमा बागरी भोपाल में एक कार्यक्रम में शामिल हुईं। उन्होंने नदी बचाने का संदेश दिया।

एससी कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार की हाईकोर्ट में दायर याचिका पर निर्देश के बाद यह आदेश जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने छानबीन समिति को संबंधित पक्षों को बुलाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच करने के आदेश दिए थे। समिति को यह तय करने को कहा गया है कि मंत्री प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाण-पत्र वैध है या नहीं।

हाईकोर्ट ने समिति द्वारा जांच पूरी करने और इसके बाद उचित आदेश पारित करने के लिए समय सीमा भी तय की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि 30 जून 2026 तक समिति द्वारा निर्णय नहीं लेने पर याचिका को पुनर्जीवित (रिवाइव) किया जा सकेगा।

गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र बनवाने का आरोप
कांग्रेस नेता प्रदीप अहिरवार ने याचिका में प्रतिमा बागरी पर गलत तरीके से अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण-पत्र बनवाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बागरी ने अनुचित तरीके से आरक्षण का लाभ लेकर रैगांव सीट से चुनाव लडा।

याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार का दावा है कि संबंधित इलाके में बागरी जाति, अनुसूचित जाति यानि एससी की सूची में शामिल नहीं है। उनका यह भी कहना है कि प्रतिमा बागरी राजपूत जाति से संबंधित हैं।

उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें अनुसूचित जाति प्रमाणित हो
अनूसचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र के आरोपों से घिरीं नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की मुश्किलें मंगलवार को उस समय बढ़ गई जब उन्हें राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति ने 6 जुलाई को तलब किया। उन्हें उन दस्तावेजों को लेकर आना होगा, जिसमें अनुसूचित जाति प्रमाणित हो। दस्तावेज न देने पर मंत्रीमंडल से उनकी छुट्टी हो सकती है। प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त कार्यालय ने इस संबंध में नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होते ही मंत्री प्रतिमा बागरी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।

जाति प्रमाणपत्र पर घिरीं मंत्री प्रतिमा बागरी ने नदी बचाने का संदेश दिया है। मंगलवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जल है तो कल है। मंत्री प्रतिमा बागरी ने एक्स हेंडल पर लिखा—

भोपाल स्थित होटल मैरियट में आयोजित नमामि गंगे मिशन अंतर्गत “डीपीआर तैयार करने एवं बेतवा नदी पुनर्जीवन विषयक क्षमता संवर्धन कार्यशाला” को संबोधित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

कार्यशाला में बेतवा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन, वैज्ञानिक प्रबंधन एवं दीर्घकालिक जल संवर्धन की दिशा में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। हमारी नदियाँ केवल जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला हैं।

सामूहिक प्रयास, जनभागीदारी एवं प्रभावी योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाने का हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

जल है तो कल है — नदी बचेगी, तभी प्रकृति और भविष्य सुरक्षित रहेगा।

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