Poisoning In Forest – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 02 Jul 2026 06:29:33 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Poisoning In Forest – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 कटनी के जंगल में तालाब में जहर घोलने से 14 चीतल-सांभरों की मौत, बाघों पर भी मंडराया खतरा https://eveningtimescg.com/14-chital-and-sambar-deer-die-after-poison-is-mixed-into-a-pond-in-the-katni-forest-threat-looms-over-tigers-too/ Sun, 28 Jun 2026 08:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/14-chital-and-sambar-deer-die-after-poison-is-mixed-into-a-pond-in-the-katni-forest-threat-looms-over-tigers-too/ कटनी.

जिले में वन्य प्राणियों की लगातार संख्या बढ़ रही है। वन्य प्राणियों से जहां आमजन को खतरा है तो वहीं वन्य प्राणी भी आमजन से सुरक्षित नहीं है। इसका एक उदाहरण सामने आया है कि विजयराघगढ़ क्षेत्र में करौंदी-घुघरी के पास तालाब में जहर मिलाकर 14 निर्दोष वन्य प्राणियों (चीतल व सांभर) का शिकार किया गया।

जिले के बरही क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव में बाघों का ठिकाना है, तो इसके साथ ही शाहडार के जंगल में बाघ और तेंदुए सहित वन्य प्राणियों की उपस्थिति लगातार बनी हुई है। घटना सामने आने के बाद अब बाघों और अन्य प्राणियों के जीवन को भी खतरा बना हुआ है।

जलस्त्रोतों की बढ़ा दी गई है सुरक्षा
जिले में सक्रिय शिकारी वन विभाग के जल स्रोतों के आसपास निगरानी न रखने का फायदा उठाकर इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना से पहले भी जिले में एक बार जलस्त्रोत में जहर मिलाने की घटना हो चुकी है। ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र में कुंड में जहर मिलाने से तेंदुए सहित अन्य वन्यप्राणियों की जान गई थी। घटना सामने आने के बाद अब वन विभाग अलर्ट हुआ है। जिले में जलस्त्रोतों के आसपास सुरक्षा व गश्त बढ़ाई गई है। दूसरी ओर शिकार करने वाले पकड़े गए तीनों आरोपियों को वन विभाग ने 14 दिन की रिमांड पर लिया है। उनसे पूछताछ की जा रही है कि घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह तो शामिल नहीं है।

बरही, शाहडार का जंगल स्थाई ठिकाना
जिले के जंगलों में भी बाघों की मौजूदगी है, जिसमें विशेष रूप से बड़वारा वन परिक्षेत्र के बरही के करौंदीकला, खितौली, झिरिया, सलैया, कुआं सहित अन्य कई गांवों हैं, जिनके जंगलों में वनराज का ठिकाना है। विशेष रूप से कुआं बीट में बाघों की स्थाई मौजूदगी है और लगभग आठ बाघों का मूवमेंट यहां रहता है। इसके साथ ही बगल से लगे बांधवगढ़ के जंगल से भी बाघों का आना-जाना रहता है। दूसरी ओर ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र का शाहडार का घना जंगल भी वन्य प्राणियों का पसंद का ठिकाना है। यहां पर भी बाघ का स्थाई ठिकाना है और उसके साथ तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणी बड़ी संख्या में हैं। गर्मी के दिनों में वन्य प्राणी रात को प्यास बुझाने के लिए जंगल के किनारे से लगे गांवों के जलस्त्रोतों तक पहुंचते रहे हैं। विजयराघवगढ़ की घटना सामने आने के बाद अब बड़े वन्य प्राणियों पर जान का खतरा मंडराने लगा है।

ढीमरखेड़ा में सामने आई थी घटना
विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में तालाब के पानी में जहर मिलाकर वन्य प्राणियों के शिकार की घटना जिले में पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी जिले में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2010-11 में भी जिले के ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के करौंदी बीट के पास ऐसी घटना सामने आई थी, जिसमें एक प्राकृतिक जलस्त्रोत में शिकारियों ने जहर मिलाया था। उसका पानी पीने से तेंदुए, चीतल, मोर सहित अन्य वन्य प्राणियों की मौत हुई थी। ढीमरखेड़ा क्षेत्र में ही इस साल अप्रैल माह में वन विभाग की टीम ने तीन शिकारियों को वन्य प्राणियों को मारने लगाए गए करंट के तार के साथ पकड़ा था तो उमरियापान, ढीमरखेड़ा, बड़वारा क्षेत्र में करंट लगाकर शिकार करने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

घटना के बाद जागा वन अमला
विजयराघवगढ़ के करौंदी-घुघरी में शुक्रवार की सुबह तालाब के किनारे 12 चीतल व दो सांभर मृत अवस्था में मिले थे। बड़ी संख्या में वन्य प्राणियों की मौत से वन विभाग सकते में आ गया था। आनन-फानन में डॉग स्क्वाड बुलाकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई, जिसमें वन विभाग ने शिकार करने वाले तीन शिकारियों को गिरफ्तार किया है। घटना के बाद सामने आया कि जंगल की सीमा से लगे जलस्त्रोतों के आसपास शिकारी सक्रिय न हों, इसको लेकर वन विभाग का फील्ड का अमला नजर नहीं रख रहा है और उसी का नतीजा था कि 14 निर्दोष वन्य प्राणियों की जान चली गई। घटना के बाद विभाग ने जहां तालाब का पानी खाली करा दिया है तो वहीं जलस्त्रोतों की सुरक्षा बढ़ाई गई है और अब नजर रखी जा रही है।

अमले को दिया प्रशिक्षण
वन्य प्राणियों की मौत के बाद अब वन विभाग के वनरक्षकों व अधिकारियों को जिले भर में ऐसे जलस्त्रोत जहां पर वन्य प्राणियों का आना-जाना रहता है, वहां पर तैनात करने के साथ गश्त करने और निगरानी रखने को लगाया गया है। शनिवार को डीएफओ सहित अन्य अधिकारियों ने फील्ड के अमले को पानी में जहर की जांच करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया, जिससे गश्त करते समय कर्मचारी पता लगा सकें कि पानी कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं घोला गया है। वन विभाग की टीम बड़वारा के बांधवगढ़ की सीमा से लगे गांवों, बाघ, तेंदुए सहित अन्य वन्य प्राणियों के ठिकानों के आसपास, ढीमरखेड़ा के शाहडार व अन्य वन क्षेत्रों में भी लगातार निगरानी कर रही है।

इनका कहना है
विजयराघवगढ़ की घटना के बाद आरोपितों को पकड़ा गया है और उनसे रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की जा रही है। जिले में बाघों का ठिकाना है और ऐसे क्षेत्रों में विशेष निगरानी कराई जा रही है। जंगलों से लगे जलस्त्रोतों के आसपास गश्त बढ़ाने के साथ ही अमले को पानी की जांच करने के लिए भी जानकारी दी गई है।
– गर्वित गंगवार, जिला वनमंडल अधिकारी

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