plastic ban – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 10 Sep 2026 07:40:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg plastic ban – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 CG के जंगलों में प्लास्टिक फेंकना पड़ेगा भारी, पकड़े गए तो लगेगा जुर्माना https://eveningtimescg.com/littering-with-plastic-in-chhattisgarhs-forests-will-prove-costly-offenders-will-face-fines/ Thu, 10 Sep 2026 07:40:00 +0000 https://eveningtimescg.com/littering-with-plastic-in-chhattisgarhs-forests-will-prove-costly-offenders-will-face-fines/ बिलासपुर.

वन्यप्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण को देखते हुए वन मुख्यालय ने बड़ा निर्णय लिया है। एटीआर सहित प्रदेश के सभी वन मंडलों और संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के इस्तेमाल और कचरे पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

अब यदि किसी सैलानी के पास प्रतिबंधित प्लास्टिक पाया जाता है या उसे जंगल में फेंकते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 500 रुपए या उससे अधिक की प्रशमन राशि वसूल की जाएगी।

वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए सख्त होगी कार्रवाई
वन्यप्राणियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश के सभी वन मंडलों, रेंज, डिवीजन, अचानकमार टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के लिए कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा रहा है। संरक्षित क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर केवल समझाइश देने के बजाय तलाशी, जब्ती, प्लास्टिक हटाने और नियमों के तहत प्रशमन राशि वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सर्किल फॉरेस्ट ऑफिसर और बीट फॉरेस्ट ऑफिसर स्तर तक के अधिकारियों को अधिकार देने के निर्देश जारी किए गए हैं। वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग पर पहले से रोक के निर्देश हैं। इसके बावजूद प्लास्टिक के उपयोग और कचरे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए अब छत्तीसगढ़ प्लास्टिक एवं अन्य जैव अनाशित सामग्री नियम, 2023 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के नियमों के तहत प्लास्टिक कैरी बैग, नॉन-वूवन पॉलीप्रोपलीन बैग, प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, कटोरे, चम्मच और स्ट्रॉ समेत कई वस्तुएं प्रतिबंधित हैं।

टाइगर रिजर्व में भी सख्त प्रावधान लागू
अचानकमार टाइगर रिजर्व के अलावा प्रदेश के उदंती-सीतानदी, इंद्रावती और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित क्षेत्रों के सर्किल और बीट फॉरेस्ट अधिकारियों को नियमों के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत एवं सशक्त किया जा सकता है।

500 से 1 लाख रुपए तक प्रशमन राशि
नियमों में अपराध की प्रकृति और संबंधित व्यक्ति के आधार पर प्रशमन राशि निर्धारित की गई है। पहली बार उल्लंघन करने पर व्यक्ति या स्ट्रीट वेंडर से 500 रुपए, दुकान या प्रतिष्ठान से 5 हजार रुपए और निर्माता से 1 लाख रुपए तक की राशि ली जा सकती है। दूसरी बार अपराध करने पर यह राशि क्रमशः 5 हजार, 50 हजार और 2 लाख रुपए होगी। इसके बाद के अपराधों को अशमनीय रखा गया है।
जुर्माने की राशि और अपराध के प्रशमन के रूप में प्राप्त राशि राज्य सरकार के संबंधित खाते में जमा की जाएगी। इस राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न कार्ययोजनाओं में किया जाएगा।

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यूपी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध https://eveningtimescg.com/complete-ban-on-single-use-plastic-in-up-universities-and-colleges/ Tue, 23 Jun 2026 09:10:00 +0000 https://eveningtimescg.com/complete-ban-on-single-use-plastic-in-up-universities-and-colleges/  लखनऊ
यूपी के स्टेट यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया गया है। इसके अलावा पॉलीथीन बैग, प्लास्टिक की बोतलें, चम्मच और प्लास्टिक के कप-प्लेट पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा है। अब इनकी जगह पर कुल्हड़, कागज के बर्तन, जूट के थैले समेत अन्य का प्रयोग किया जाएगा। वहीं, जनभवन की ओर से इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

राज्यपाल व कुलाधिपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जॉनी की ओर से जारी किए गए आदेश के अनुसार विश्वविद्यालय व कॉलेज परिस की कैंटीन, हॉस्टल व कार्यक्रमों में प्लास्टिक की जगह पर कुल्हड़, जूट के थैले व कागज के बर्तन का प्रयोग किया जाए। वहीं, नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत में छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों को प्लास्टिक मुक्त परिसर की शपथ दिलाई जाएगी। गीले व सूखे कचरे के लिए अलग-अलग कूड़ेदान की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग की उचित व्यवस्था की जाए। हर उच्च शिक्षण संस्थान में प्लास्टिक मुक्त परिसर बनाने के लिए समिति का गठन के साथ हर शुक्रवार व शनिवार को विशेष सफाई अभियान चलाया जाएगा।

प्लास्टिक की बोतल में रखी कोल्ड ड्रिंक-जूस हो, फिर टिफिन में रखा लंच या प्लास्टिक के बर्तन में रखकर माइक्रोवेब में खाना गरमा रहे हैं तो यह दिमाग के संतुलन को बिगाड़ सकता है। दिमाग में ऐसा केमिकल लोचा पैदा हो सकता है जिससे भूलमने की क्षमता पर कुठाराघात हो सकता है। प्लास्टिक के बर्तन, बोतल बनने में बड़ी मात्रा में बिस्फेनॉल ए यानी बीपीए का इस्तेमाल होता है। यह निष्कर्ष भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन में आए हैं। यह अध्ययन जर्नल ऑफ बॉयोलॉजिकल केमिस्ट में प्रकाशित हो चुका है।

इन बीमारियों के होने का है खतरा
याददाश्त कमजोर होना, सीखने की क्षमता में कमी, चिंता, अवसाद, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, महिला व पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर, हार्मोनल असंतुलन, मोटापा और डायबिटीज, दिल की बीमारियां होने का खतरा है।

25 किलो से अधिक प्रतिबंधित सामग्री जब्त
उधर, हरदोई में यूपी शासन के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन अनुभाग-6, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में चलाए जा रहे सिंगल यूज प्लास्टिक जब्तीकरण अभियान के तहत नगर पालिका परिषद संडीला ने कार्रवाई की। बीते शनिवार को अभियान के दौरान 25 किलो से अधिक प्रतिबंधित पॉलीथिन एवं सिंगल यूज प्लास्टिक सामग्री जब्त की गई। साथ ही 82 हजार का जुर्माना भी वसूला गया।

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