Pineapple – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 02 Jul 2026 06:30:23 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Pineapple – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 मेड़ पर लगाए कुछ अनानास के पौधे, आज हर साल ₹2.5 लाख कमा रहे रायगढ़ के किसान अरुण साहू https://eveningtimescg.com/arun-sahu-a-farmer-from-raigarh-now-earns-%e2%82%b92-5-lakh-annually-from-pineapple-plants-grown-on-his-field-bunds/ Sat, 27 Jun 2026 12:04:00 +0000 https://eveningtimescg.com/arun-sahu-a-farmer-from-raigarh-now-earns-%e2%82%b92-5-lakh-annually-from-pineapple-plants-grown-on-his-field-bunds/ मेड़ पर लगाए थे कुछ पौधे… आज हर साल 2.5 लाख की कमाई  

रायगढ़ के किसान अरुण सॉ ने अनानास की खेती से बदली तकदीर, बने प्रेरणा स्रोत

रायपुर
कभी खेत की मेड़ पर शौक से लगाए गए कुछ अनानास के पौधों ने रायगढ़ के एक किसान की जिंदगी बदल दी। सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ आज दो एकड़ में अनानास की खेती कर सालाना 2 से 2.5 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय कमा रहे हैं। उनकी सफलता अब क्षेत्र में कृषि नवाचार और विविधीकरण की मिसाल बन गई है।

शौक से शुरू हुआ, बना व्यावसायिक मॉडल  

        अरुण सॉ पहले धान समेत पारंपरिक फसलें उगाते थे। वर्षों पहले घरेलू उपयोग के लिए उन्होंने मेड़ पर कुछ अनानास के पौधे लगाए। पौधों की अच्छी बढ़वार और फलों की गुणवत्ता देखकर उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाया। पौधों से निकलने वाले प्ररोहों को अलग कर दोबारा रोपने का सिलसिला चलता रहा। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनका हौसला बढ़ाया। धीरे-धीरे यह प्रयोग दो एकड़ के बगीचे में बदल गया। आज उनके खेत में आम और अमरूद के बीच कतारबद्ध अनानास के पौधे बहुफसली खेती का सफल उदाहरण पेश करते हैं।

कम लागत, बेहतर मुनाफा 
 
          अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत कम लागत है। इसमें खाद, कीटनाशक और सिंचाई की जरूरत कम होती है, जिससे उत्पादन खर्च नियंत्रित रहता है। वहीं बाजार में मांग लगातार बनी रहती है। अरुण सॉ के खेत में तैयार हर फल गुणवत्ता के हिसाब से 40 से 80 रुपये तक बिकता है।

प्ररोहों की बिक्री से भी आय  

            फलों के साथ-साथ पौधों से निकलने वाले प्ररोहों की बिक्री भी उनकी आय का बड़ा जरिया बन गई है। बेहतर कमाई देख आसपास के किसान भी पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसलें अपनाने लगे हैं। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।

          अरुण सॉ कहते हैं कि खेती में सफलता सिर्फ मेहनत से नहीं, सही फसल चुनने, नई तकनीक अपनाने और विशेषज्ञों की सलाह मानने से मिलती है। स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग के अनुसार फसल चुनें तो कम जमीन-सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी संभव है।

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