Netanyahu – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Tue, 29 Sep 2026 16:30:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Netanyahu – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 अबू धाबी में नेतन्याहू की अरब नेताओं से बैठक, ईरान-हूती पर हुई चर्चा https://eveningtimescg.com/netanyahu-meets-arab-leaders-in-abu-dhabi-discusses-iran-and-the-houthis/ Tue, 29 Sep 2026 16:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/netanyahu-meets-arab-leaders-in-abu-dhabi-discusses-iran-and-the-houthis/ अबू धाबी
 संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के अबू धाबी यात्रा की पुष्टि की है। उसने बताया है कि इस दौरान नेतन्याहू ने राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक की भी की थी। बैठक में सऊदी अरब, जॉर्डन, मोरक्को और लीबिया सहित क्षेत्र के कई अरब देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस बैठक को इजरायल के साथ सामान्य रिश्तों की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान को इस बैठक से दूर रखा गया, जो खुद को इस्लामी दुनिया का रहनुमा होने का दिखावा करता है।

नेतन्याहू ने अरब देशों को बड़ा ऑफर दिया
रिपोर्ट के अनुसार, बेंजामिन नेतन्याहू की अरब देशों के नेताओं के साथ हुई बैठक ईरान और मध्य पूर्व में उसके समर्थकों के प्रभाव को सीमित करने के तरीकों पर केंद्रित थी। इस बैठक में यमन के हूती विद्रोहियों पर खास चर्चा की गई, जिनके हमलों के कारण सऊदी अरब को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बैठक के दौरान अरब देशों के प्रतिनिधियों ने हवाई हमलों से रक्षा के लिए एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती के इजरायल के प्रस्ताव को ध्यान से सुना। ऐसी रिपोर्ट हैं कि इजरायल ने पहले ही संयुक्त अरब अमीरात की रक्षा के लिए अपने एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हुए हैं।

नेतन्याहू के यूएई दौरे की पुष्टि
एक आधिकारिक बयान में, इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय ने पुष्टि की कि नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने कल संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के निमंत्रण पर संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया। कार्यालय ने कहा कि इस यात्रा में "दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय चुनौतियों" पर चर्चा हुई। यूएई के दौरे पर गए इजरायली प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख, मोसाद के प्रमुख, प्रधानमंत्री के सैन्य सचिव और राजनीतिक सलाहकार भी शामिल थे।

लीबिया के सद्दाम हफ्तार से मिले नेतन्याहू
इटली के अखबार 'इल फोग्लियो' की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अबू धाबी में पूर्वी लीबिया के डिप्टी कमांडर और खलीफा हफ्तार के बेटे सद्दाम हफ्तार के साथ एक गुप्त बैठक की। रिपोर्ट में हफ्तार के पूर्व सलाहकार मोहम्मद बुइसिर का हवाला दिया गया है, जिन्होंने दावा किया कि सद्दाम ने लीबिया का राष्ट्रपति बनने की अपनी कोशिश के लिए इजरायल का राजनीतिक समर्थन हासिल करने के लिए नेतन्याहू से मुलाकात की थी। खबरों के मुताबिक, नेतन्याहू के विमान के उतरने के ठीक 20 मिनट बाद सद्दाम का विमान अबू धाबी में उतरा।

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नेतन्याहू पर गंभीर सवाल, रिपोर्ट में दावा- हमास को कतर की फंडिंग की खुफिया चेतावनी मिली थी https://eveningtimescg.com/serious-questions-raised-about-netanyahu-as-a-report-claims-hamas-received-intelligence-warnings-about-qatari-funding/ Sun, 20 Sep 2026 06:41:00 +0000 https://eveningtimescg.com/serious-questions-raised-about-netanyahu-as-a-report-claims-hamas-received-intelligence-warnings-about-qatari-funding/ यरूशलेम
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर कतर और हमास से जुड़े फंडिंग के एक मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल, एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले इजरायली खुफिया एजेंसियों ने नेतन्याहू को कतर से हमास के सैन्य संगठन तक पहुंच रहे पैसों को लेकर कई बार चेतावनी दी थी.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया आकलन में यह रकम हमास के सैन्य संगठन के कुल बजट की करीब आधी तक बताई गई थी. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने नेतन्याहू पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि अगर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से ऐसी जानकारी दी गई थी, तो इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए.

इजरायली खुफिया एजेंसियों ने दी थी वार्निंग
इजरायली न्यूजपेपर येदिओथ अहरोनोथ (Yedioth Ahronoth) की एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेतन्याहू को कतर से हमास के सैन्य संगठन तक पहुंच रहे पैसों की जानकारी कई बार दी गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने आकलन किया था कि यह पैसा हमास के सैन्य संगठन के बजट का बड़ा हिस्सा था.

रिपोर्ट में मिस्र की ओर से दी गई चेतावनी का भी जिक्र है. दावा किया गया है कि मिस्र ने भी नेतन्याहू को बताया था कि कतर से आने वाली रकम हमास के सैन्य संगठन तक पहुंच रही है. इसके अलावा इजरायली खुफिया एजेंसियों को एक अलग और गुप्त रास्ते की जानकारी मिली थी. इसके जरिए कतर से जुड़ी रकम सीधे हमास की सशस्त्र इकाइयों तक पहुंचाई जा रही थी.

इस बीच नेतन्याहू के कार्यालय ने इन दावों को खारिज किया है. कार्यालय ने जांच रिपोर्ट को पुराने झूठ का संग्रह बताया है. उसका कहना है कि इन दावों को पहले भी गलत साबित किया जा चुका है. नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा है कि इजरायल के सुरक्षा प्रमुखों ने कतर की आर्थिक मदद का समर्थन किया था. यह मदद मानवीय जरूरतों के लिए थी. इसका उद्देश्य गाजा में शांति और स्थिरता बनाए रखने में मदद करना था.

कतर ने भी आरोपों को बताया गलत
कतर ने भी रिपोर्ट में किए गए दावों को पूरी तरह खारिज किया है. कतर के अंतरराष्ट्रीय मीडिया कार्यालय ने कहा कि उसने कभी हमास को पैसा नहीं दिया. उसके मुताबिक, कतर की मदद इजरायल और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ तय व्यवस्था के तहत फिलिस्तीनी नागरिकों तक पहुंचाई गई.

कतर ने कहा कि अगर किसी दूसरे तरीके से कोई पैसा हमास तक पहुंचा भी है, तो उसका कतर से कोई संबंध नहीं है. कतर ने इजरायल के राजनीतिक नेताओं पर भी निशाना साधा. उसने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले गल्फ देश को बलि का बकरा बनाने की कोशिश की जा रही है.

रिपोर्ट के सामने आने के बाद नेतन्याहू की सरकार पर विपक्ष का दबाव बढ़ा है. याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट ने कहा कि इन खुलासों से 7 अक्टूबर के हमले से जुड़ी घटनाओं की जांच की जरूरत और बढ़ गई है. उन्होंने 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलताओं की जांच के लिए एक राज्य जांच आयोग बनाने की मांग की. इस हमले से पहले इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया सूचनाओं को लेकर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं.

नई रिपोर्ट ने अब कतर से आने वाली रकम और उसके हमास तक पहुंचने के दावों को लेकर एक और बहस छेड़ दी है. हालांकि, नेतन्याहू का कार्यालय और कतर दोनों इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं.
 

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नेतन्याहू पर मंडरा रहा हार का खतरा? सर्वे में आइजनकोट की पार्टी सबसे आगे, 25 सीटों का अनुमान https://eveningtimescg.com/is-netanyahu-facing-the-threat-of-defeat-gadi-eisenkots-party-leads-in-the-survey-projected-to-win-25-seats/ Wed, 09 Sep 2026 03:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/is-netanyahu-facing-the-threat-of-defeat-gadi-eisenkots-party-leads-in-the-survey-projected-to-win-25-seats/ तेल अवीव
इजरायल में आम चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए सर्वे के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं. सोमवार को जारी एक ओपिनियन पोल के मुताबिक, अगर आज चुनाव होते हैं तो पूर्व इजरायली सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की याशार पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है. सर्वे में नेतन्याहू की जीत-हार को लेकर भी बड़े दावे सामने आ रहे हैं। 

सर्वे में याशार को 25 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, जबकि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 21 सीटों पर सिमटती दिख रही है. यह सर्वे इजरायल के मार्केट रिसर्च और पब्लिक ओपिनियन पोलिंग संस्थान मिडगैम ने चैनल 12 के लिए किया है. पिछले सर्वे के मुकाबले याशार को एक सीट का फायदा हुआ है, जबकि लिकुड की दो सीटें कम हुई हैं. इजरायल की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। 

विपक्षी गठबंधन को बहुमत से ज्यादा सीटों का अनुमान
सर्वे के मुताबिक, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट की टुगेदर पार्टी को 13 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि, यह उसके हालिया सर्वे में सबसे कम आंकड़ा है और पिछली बार के मुकाबले पार्टी को दो सीटों का नुकसान हुआ है। 

यायर गोलान की अगुवाई वाली डेमोक्रेट्स पार्टी 11 सीटों पर बनी हुई है. वहीं एविगडोर लिबरमैन की यिसराइल बेतेनु पार्टी को 8 सीटें मिलने का अनुमान है. यूनाइटेड टोरा यहूदी धर्म पार्टी को भी 8 और आर्येह डेरी की शास पार्टी को 7 सीटें मिल सकती हैं। 

बेजलेल स्मोट्रिच और मोशे फेइग्लिन की अगुवाई वाले राइट-विंग धार्मिक जियोनिज्म और जेहुत गठबंधन को 6 सीटें मिलने का अनुमान है. ओफर विंटर की अमचा यिसराइल को 4 सीटें मिल सकती हैं। 

इजरायल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अरब पार्टियों में जॉइंट लिस्ट को 7 और मंसूर अब्बास की यूनाइटेड अरब लिस्ट को 4 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट और अवी माओज की नोआम यिसराइल समेत कई पार्टियां 3.25 फीसदी के चुनावी थ्रेशोल्ड को पार करती नहीं दिख रही हैं। 

पीएम पद की पसंद में भी आइजनकोट आगे
राजनीतिक गुटों की बात करें तो विपक्षी खेमे को कुल 68 सीटें मिलने का अनुमान है. इनमें 57 सीटें यहूदी पार्टियों और 11 सीटें अरब पार्टियों की हैं. नेतन्याहू के खेमे को 52 सीटें मिलने का अनुमान है. स्मोट्रिच और विंटर की पार्टियों के चुनावी थ्रेशोल्ड पार करने से नेतन्याहू के खेमे को दो सीटों का फायदा हुआ है। 

इजरायल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय नेसेट में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है. ऐसे में मौजूदा सर्वे के आंकड़े विपक्ष को बढ़त देते हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए गठबंधन की तस्वीर अहम होगी

प्रधानमंत्री पद के लिए भी नेतन्याहू पिछड़ते दिख रहे हैं. सर्वे में 42 फीसदी लोगों ने गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री पद के लिए ज्यादा उपयुक्त बताया, जबकि नेतन्याहू के पक्ष में 35 फीसदी लोग रहे. यानी आइजनकोट को नेतन्याहू पर 7 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली। 

यह सर्वे ऐसे समय आया है जब 27 अक्टूबर के आम चुनाव के लिए पार्टियों ने अपनी उम्मीदवार सूची जमा कर दी है. आइजनकोट ने बेनेट की पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया है. वहीं ओफर विंटर ने भी स्मोट्रिच की पार्टी के साथ जाने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 

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वेस्ट बैंक में बड़े सैन्य अभियान की तैयारी, नेतन्याहू का बड़ा ऐलान https://eveningtimescg.com/preparations-for-a-major-military-operation-in-the-west-bank-netanyahu-makes-a-major-announcement/ Mon, 27 Jul 2026 04:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/preparations-for-a-major-military-operation-in-the-west-bank-netanyahu-makes-a-major-announcement/ नई दिल्ली
इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इजराइल कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बड़े स्तर पर कार्रवाई के लिए तैयार है. उनके इस बयान को इलाके में सैन्य अभियान तेज करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

अल जजीरा के मुताबिक, नेतन्याहू ने पत्रकारों से कहा कि सुरक्षा बलों को गांवों में जाने, तलाशी लेने, हथियार जब्त करने और लोगों को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए गए हैं. क्षेत्र में जारी छापों और हिंसक झड़पों के बीच यह रुख काफी सख्त माना जा रहा है. बातचीत के दौरान यह बात जोर देकर कही गई कि 'आतंकी ठिकानों' के खिलाफ इजरायल व्यापक कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है. सेना का ध्यान इस समय पूरे इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने और सुरक्षा अभियानों को कड़ा करने पर केंद्रित है.

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वेस्ट बैंक में इजरायली सेना की छापेमारी जारी है. इसी दौरान कुछ इलाकों में इजरायली बस्तियों के लोगों की ओर से भी हमलों की खबरें सामने आई हैं. ऐसे में इस बयान को मौजूदा अभियान को और आगे बढ़ाने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

स्थानीय निवासियों का छलका दर्द
दूसरी तरफ, अल जजीरा से बात करते हुए 'यूथ अगेंस्ट सेटलमेंट्स' के संस्थापक ईसा अमरो ने जमीनी हकीकत बयां की. उनका कहना है कि कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिक हर दिन हिंसा का सामना करने को मजबूर हैं. हाल के महीनों में हमले काफी ज्यादा बढ़ गए हैं. जब भी कोई नागरिक अपने घर, परिवार या संपत्ति का बचाव करने की कोशिश करता है, उस पर हमला कर दिया जाता है या हिरासत में ले लिया जाता है.

ईसा अमरो ने दावा किया कि लगातार हमलों के डर से हाल के वर्षों में 20 से ज्यादा फिलिस्तीनी समुदाय अपने गांव छोड़ चुके हैं. उनके मुताबिक, सैकड़ों परिवार अपना घर, जमीन और बस्तियां छोड़ने को मजबूर हुए हैं. उन्होंने इसे 'जातीय सफाए' जैसा बताया.
 

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मिडिल ईस्ट में फिर जंग की आहट! नेतन्याहू के ऐलान पर ईरान की जंगी धमकी, लेबनान बॉर्डर पर बढ़ा तनाव https://eveningtimescg.com/rumblings-of-war-in-the-middle-east-again-iran-issues-a-war-threat-following-netanyahus-announcement-tensions-escalate-at-the-lebanon-border/ Fri, 26 Jun 2026 16:34:00 +0000 https://eveningtimescg.com/rumblings-of-war-in-the-middle-east-again-iran-issues-a-war-threat-following-netanyahus-announcement-tensions-escalate-at-the-lebanon-border/ बेरूत

लेबनान दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व का एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण देश है. यहां इजरायल की सीमा से लगा दक्षिणी इलाका लंबे समय से तनाव का केंद्र रहा है. हिज्बुल्लाह ईरान समर्थित एक मजबूत संगठन है, यहां सक्रिय है. हाल के वर्षों में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच कई बार झड़पें हुई हैं। 

2026  में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. इजरायल ने साफ कहा है कि जब तक हिज्बुल्लाह अपने हथियार नहीं छोड़ता, उसके सैनिक लेबनान के दक्षिणी हिस्से से नहीं हटेंगे. वहीं ईरान का रुख है कि इजरायल को पहले पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. यह जिद दोनों तरफ से नई जंग की स्क्रिप्ट लिख रही है। 

विश्लेषकों के अनुसार, यह सिर्फ सीमा विवाद नहीं है. यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन, हथियार नियंत्रण और बड़े देशों की रणनीति से जुड़ा मुद्दा है. लेबनान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है, लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और अगर नई जंग छिड़ी तो मानवीय संकट और बढ़ जाएगा। 

इजरायल का रुख: सुरक्षा पहले, हथियार छोड़ो
इजरायल बार-बार कह रहा है कि उसकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. हिज्बुल्लाह के पास हजारों रॉकेट और हथियार हैं जो इजरायल के शहरों को निशाना बना सकते हैं. इजरायली प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि दक्षिणी लेबनान में एक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखना जरूरी है. अगर हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ता तो इजरायली सेना वहां बनी रहेगी। 

इजरायल का तर्क है कि पिछले समझौतों में हिज्बुल्लाह ने हथियार छोड़ने का वादा किया लेकिन पूरा नहीं किया. इसलिए अब वे भरोसा नहीं कर रहे. इजरायल के अनुसार, हिज्बुल्लाह का हथियार रखना न सिर्फ इजरायल के लिए खतरा है बल्कि लेबनान की संप्रभुता को भी कमजोर करता है. इजरायल ने कई बार हवाई हमले किए हैं ताकि हिज्बुल्लाह की क्षमता कम हो. लेकिन इससे तनाव और बढ़ा है. अगर हिज्बुल्लाह फिर से हमला करता है तो इजरायल बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर सकता है। 

हिज्बुल्लाह और लेबनान की स्थिति 
हिज्बुल्लाह खुद को लेबनान का रक्षक बताता है. उसके नेता कहते हैं कि इजरायल की मौजूदगी के खिलाफ वे हथियार नहीं छोड़ेंगे. हिज्बुल्लाह का मानना है कि इजरायल पहले लेबनान की जमीन छोड़े, तब बात हो सकती है. उन्होंने कुछ हथियार लेबनानी सेना को सौंपे लेकिन पूरी तरह से हथियार छोड़ने की बात नहीं मानी। 

लेबनान सरकार कमजोर है. देश में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और विभिन्न गुटों के बीच मतभेद हैं. हिज्बुल्लाह लेबनान की राजनीति में भी मजबूत है. अगर इजरायल नहीं हटता तो हिज्बुल्लाह समर्थकों में गुस्सा बढ़ेगा और नई लड़ाई शुरू हो सकती है. लेबनानी सेना दक्षिण में तैनात है लेकिन हिज्बुल्लाह की ताकत के आगे उसकी भूमिका सीमित लगती है। 

ईरान का रणनीतिक खेल: इजरायल पहले हटे
ईरान हिज्बुल्लाह का मुख्य समर्थक है. वह हथियार, पैसा और प्रशिक्षण देता है. ईरान का कहना है कि इजरायल को लेबनान से पूरी तरह हटना चाहिए और लड़ाई बंद करनी चाहिए. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर इजरायल हमले जारी रखता है तो वह जवाब देगा. ईरान-इजरायल के बीच अप्रत्यक्ष युद्ध लंबे समय से चल रहा है। 

ईरान के लिए लेबनान सिर्फ एक मोर्चा है. वह पूरे क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है. अगर इजरायल लेबनान में बना रहा तो ईरान दूसरे मोर्चों पर भी दबाव डाल सकता है. हाल के बयानों में ईरान ने कहा कि कोई भी समझौता लेबनान को कवर करे. इससे अमेरिका और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ा है। 

नई जंग की संभावित स्क्रिप्ट: क्या हो सकता है?
विश्लेषक मानते हैं कि अगर बात नहीं बनी तो नई जंग की स्क्रिप्ट इस तरह हो सकती है. पहले छोटी-छोटी झड़पें बढ़ेंगी. हिज्बुल्लाह रॉकेट दागेगा, इजरायल हवाई हमले करेगा. इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में और अंदर घुस सकती है. ईरान हिज्बुल्लाह को और मदद भेजेगा या दूसरे इलाकों से दबाव डालेगा। 

इससे लेबनान में बड़े पैमाने पर तबाही होगी। हजारों लोग मारे जा सकते हैं, लाखों विस्थापित होंगे. बुनियादी ढांचा बर्बाद होगा. इजरायल की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा क्योंकि सैनिकों की तैनाती महंगी है. अमेरिका, जो शांति चाहता है, बीच में फंस सकता है। 

संयुक्त राष्ट्र और अन्य देश सीजफायर की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दोनों पक्षों की जिद इसे मुश्किल बना रही है. अगर इजरायल हटने से इनकार करता रहा और हिज्बुल्लाह हथियार नहीं छोड़ा तो युद्ध टलना मुश्किल होगा। 

लेबनान की जंग सिर्फ दो देशों की नहीं है. यह पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित करेगी. सऊदी अरब, तुर्की जैसे देश प्रभावित होंगे. तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा. मानवीय संकट गहराएगा. लेबनान में पहले से लाखों शरणार्थी हैं. नई जंग से भूख, बीमारी और बेघर होने की समस्या बढ़ेगी. बच्चे स्कूल नहीं जा पाएंगे, अस्पताल नष्ट हो जाएंगे। 

क्या है समाधान?
समाधान मुश्किल लेकिन नामुमकिन नहीं. दोनों पक्षों को समझौता करना होगा. इजरायल को सुरक्षा गारंटी मिले और हिज्बुल्लाह हथियारों का कुछ हिस्सा लेबनानी सेना को सौंप दे. ईरान को भी आश्वासन चाहिए कि उसके हित सुरक्षित हैं. अमेरिका और अन्य शक्तियां मध्यस्थता कर सकती हैं. लेबनान की सरकार को मजबूत होना चाहिए ताकि वह अपने पूरे इलाके पर नियंत्रण रख सके. अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आर्थिक मदद देकर लेबनान को स्थिर करना चाहिए। 

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