mysterious Navratnagarh – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Sat, 03 Oct 2026 16:10:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg mysterious Navratnagarh – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 झारखंड का रहस्यमयी नवरत्नगढ़ किला, 33 इंच मोटी दीवारों से लेकर रानी लुकई की भुलभुलैया तक है खास https://eveningtimescg.com/jharkhands-mysterious-navratnagarh-fort-is-unique-from-its-33-inch-thick-walls-to-queen-lukais-maze/ Sat, 03 Oct 2026 16:10:00 +0000 https://eveningtimescg.com/jharkhands-mysterious-navratnagarh-fort-is-unique-from-its-33-inch-thick-walls-to-queen-lukais-maze/ रांची
अगर आप झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता का लुत्फ उठाने के अलावा यहां के कुछ ऐतिहासिक किले के इतिहास को करीब से जानना चाहते हैं, तो गुमला जिले के सिसई में स्थित 'नवरत्नगढ़' (डोइसागढ़) का किला सबसे बेस्ट है. रांची से गुमला जाने वाले मुख्य मार्ग पर सिसई प्रखंड है. सिसई के मुख्य रास्ते से मात्र 5 किलोमीटर दूर नगर गांव में स्थित यह ऐतिहासिक स्थल विश्व धरोहर (World Heritage) में शामिल है. सन्नाटे और वीरानी के बीच खड़े इसके ऐतिहासिक अवशेष आज भी छोटानागपुर के नागवंशी राजाओं की कहानी को बयां करता है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) विभाग अब इस प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखने के लिए इसका समय समय पर जीर्णोद्धार करता रहता है.

सुरक्षा के लिए राजा दुर्जनशाल ने बनाया था अभेद्य किला
ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, मुगल साम्राज्य के लगातार होते हमलों से सुरक्षा और रणनीतिक बचाव के उद्देश्य से नागवंशी राजा दुर्जनशाल ने नवरत्नगढ़ को अपनी राजधानी बनाया था. सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह किला पूरी तरह अभेद्य था, जिसके चारों तरफ गहरी खाइयां बनाई गई थीं और किले के भीतर जाने का केवल एक ही पहाड़ी मार्ग उपलब्ध था. हालांकि समय के चक्र के साथ खाइयां समतल जमीन में तब्दील हो गईं और कई इमारतें जमींदोज हो गईं, लेकिन इसकी 33 इंच मोटी सुदृढ़ दीवारें और पांच मंजिला पंचमहला महल आज भी पूरी भव्यता के साथ सीना ताने खड़े हैं.

रानी लुकई की रहस्यमयी गुंबद आकर्षण का केंद्र
नवरत्नगढ़ की वास्तुकला और स्थापत्य कला पर्यटकों को हैरान कर देती है. यहां की पांच मंजिला वर्गाकार इमारत (पंचमहला), रानियों के निवास हेतु बना रानी वासा, कचहरी घर, गुप्त कमरे और रानियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई प्रसिद्ध 'रानी लुकई' की भुलभुलैया आज भी कौतूहल का विषय हैं. इसके अलावा, इमारतों के शीर्ष गुंबदों पर उकेरी गई सिंह, घोड़े और कई पशुओं की नक्काशीदार आकृतियां तथा स्तंभों पर लिपटे विशाल नागों के शिल्प नागवंशी राजाओं की उत्कृष्ट कला समझ को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं.

परिसर में कमल सरोवर का प्राकृतिक सौंदर्य सबको भाता
इतिहास के पन्नों में समेटे इस परिसर का प्राकृतिक और आध्यात्मिक वातावरण पर्यटकों को शांति का अद्भुत अहसास कराता है. परिसर में स्थित कमल सरोवर, ऐतिहासिक धोबी मठ, जगन्नाथ मंदिर, भैरव मंदिर और कपिलनाथ मंदिर यहां के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं. कपिलनाथ मंदिर के गर्भगृह में स्थापित विशाल आकृतियां और दीवारों पर की गई मनोहारी चित्रकारी प्राचीन कारीगरी की श्रेष्ठता को उजागर करती हैं. नए साल के मौके पर यहां आसपास के इलाकों से हजारों की संख्या में लोग पिकनिक मनाने और इतिहास को समझने के लिए जुटते हैं.

पुरातत्व विभाग सहेज रहा धरोहर
हाईटेक दौर में हजारों वर्ष पुरानी यह ऐतिहासिक धरोहर लंबे समय तक उपेक्षा का शिकार रही, जिससे नागवंशी कालीन अमूल्य भवन खंडहरों में तब्दील हो गए. हालांकि, अब पुरातत्व विभाग (ASI) द्वारा इस स्थल के बचे हुए अवशेषों और भवनों की वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत कराई जा रही है, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल की रंगत लौटने लगी है. यदि आप झारखंड में भीड़भाड़ से दूर अपने परिवार के साथ प्रकृति और इतिहास के बीच समय बिताना चाहते हैं, तो नवरत्नगढ़ की यात्रा आपके लिए यादगार साबित हो सकती है.

 

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