Major move – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Mon, 07 Sep 2026 16:10:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Major move – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 योगी सरकार का बड़ा कदम, हर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष https://eveningtimescg.com/major-move-by-the-yogi-government-mental-health-support-cells-to-be-set-up-in-every-university-and-college/ Mon, 07 Sep 2026 16:10:00 +0000 https://eveningtimescg.com/major-move-by-the-yogi-government-mental-health-support-cells-to-be-set-up-in-every-university-and-college/ लखनऊ

योगी सरकार ने प्रदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर महत्वपूर्ण पहल की है। विद्यार्थियों को स्वस्थ, सुरक्षित और तनावमुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति तैयार की जाएगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर उच्च स्तरीय बैठक की।

बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न पहलुओं, संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों को समय पर परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा एम.पी. अग्रवाल, विशेष सचिव निधि वास्तव समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

तनाव और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने पर फोकस

योगी सरकार उच्च शिक्षा को केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास पर जोर दे रही है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करना है, जहां पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर को लेकर तनाव अथवा भावनात्मक परेशानियों से जूझ रहे विद्यार्थियों को समय रहते उचित सहायता मिल सके। नीति के तहत राज्य से लेकर जिला और संस्थान स्तर तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता की समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार काउंसलिंग और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

राज्य स्तर पर नोडल व्यवस्था, जिलों में होगी निगरानी

प्रस्तावित व्यवस्था में निदेशक, उच्च शिक्षा को राज्य स्तर पर नोडल एवं कार्यान्वयन प्राधिकारी बनाया जाएगा। वहीं प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में संचालन समिति नीति के क्रियान्वयन, बजट और नियमित समीक्षा की निगरानी करेगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। यह समिति जिले के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ समन्वय करते हुए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करेगी।

हर संस्थान में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष

योगी सरकार की प्रस्तावित नीति का सबसे अहम पहलू प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष की स्थापना है। यहां विद्यार्थियों को सुरक्षित और गोपनीय वातावरण में काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा अन्य विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य पोर्टल विकसित कर विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है।

शिक्षकों और कर्मचारियों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण

विद्यार्थियों की मानसिक परेशानियों को शुरुआती स्तर पर पहचानने के लिए शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्र प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में तनाव, भावनात्मक परेशानी और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संकेतों को समझने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षित शिक्षक छोटे समूहों में विद्यार्थियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और जीवन कौशल से जुड़े संवाद कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे। गंभीर तनाव या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए हेल्पलाइन और रेफरल व्यवस्था विकसित की जाएगी। पूरी प्रक्रिया में विद्यार्थी की गोपनीयता और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नीति से जोड़ा जाएगा

प्रस्तावित नीति में मानसिक स्वास्थ्य को केवल काउंसलिंग तक सीमित न रखते हुए इसे विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ने की योजना है। इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां और करियर काउंसलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। सोशल मीडिया के माध्यम से भी सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संदेश और जागरूकता सामग्री विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।

पोर्टल और डैशबोर्ड से होगी निगरानी

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के लिए उच्च शिक्षा विभाग में समेकित पोर्टल एवं डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से संस्थानों में संचालित मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों, सहायता व्यवस्था और प्रगति की निगरानी की जा सकेगी। योगी सरकार की इस पहल से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा संस्थागत तंत्र विकसित होने की उम्मीद है, जहां पढ़ाई के साथ उनकी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को भी प्राथमिकता मिले। सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा को अधिक विद्यार्थी केंद्रित, संवेदनशील, सुरक्षित और समावेशी बनाना है।

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योगी सरकार का बड़ा कदम: 3 से 10 अगस्त तक चलेगा ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 3.0’ https://eveningtimescg.com/major-move-by-the-yogi-government-divyangjan-employment-campaign-3-0-to-run-from-august-3-to-10/ Thu, 30 Jul 2026 16:40:00 +0000 https://eveningtimescg.com/major-move-by-the-yogi-government-divyangjan-employment-campaign-3-0-to-run-from-august-3-to-10/ लखनऊ

दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार द्वारा प्रदेश भर में 'दिव्यांगजन रोजगार अभियान 3.0' का आयोजन 3 से 10 अगस्त 2026 तक किया जा रहा है।

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दिव्यांगजनों को सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की इस विशेष पहल का उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण प्राप्त दिव्यांगजनों सहित अन्य योग्य इच्छुक दिव्यांग युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

अभियान के दौरान प्रदेश के सभी राजकीय आईटीआई में विशेष रोजगार गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। दिव्यांग अभ्यर्थियों को रोजगार के साथ-साथ विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी। जिला उद्योग एवं निर्यात प्रोत्साहन केंद्र औद्योगिक इकाइयों और व्यावसायिक संस्थानों से समन्वय कर रिक्तियों की जानकारी जुटाएगा, वहीं एमएसएमई विभाग स्वरोजगार योजनाओं और लीड बैंक के माध्यम से ऋण व वित्तीय सहायता में सहयोग करेगा।

जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी और जिला रोजगार सहायता अधिकारी रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकृत अभ्यर्थियों को रिक्तियों से जोड़ेंगे। अभियान की खास बात यह है कि पिछले दो चरणों में लाभान्वित दिव्यांगजनों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा, ताकि उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन हो सके।

योगी सरकार की मंशा है कि कोई भी दिव्यांगजन रोजगार से वंचित न रहे। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। प्रत्येक जनपद में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति बनाई गई है, जो अभियान की निगरानी और समन्वय करेगी। 10 अगस्त तक सभी जनपदों से लाभान्वितों का विवरण शासन को भेजा जाएगा और सर्वाधिक रोजगार-स्वरोजगार उपलब्ध कराने वाले शीर्ष पांच जनपदों के जिलाधिकारियों और उनकी टीम को शासन स्तर पर प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। इसकी तैयारियों को लेकर 30 जुलाई को मिशन निदेशक पुलकित खरे ने सभी सीडीओ और संबंधित अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

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योगी सरकार का बड़ा कदम, यूपी में लगेंगी एआई सक्षम पोर्टेबल एक्स-रे, एमआरआई और डिजिटल मैमोग्राफी मशीनें https://eveningtimescg.com/major-move-by-the-yogi-government-ai-enabled-portable-x-ray-mri-and-digital-mammography-machines-to-be-deployed-in-up/ Wed, 01 Jul 2026 16:45:00 +0000 https://eveningtimescg.com/major-move-by-the-yogi-government-ai-enabled-portable-x-ray-mri-and-digital-mammography-machines-to-be-deployed-in-up/ लखनऊ

 योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।

एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान 

अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी। एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल 

एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी। उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

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