Kerala High Court – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 02 Jul 2026 06:34:23 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Kerala High Court – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 देवी-देवताओं या भारत माता के नाम पर शपथ नहीं, केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला https://eveningtimescg.com/kerala-high-courts-major-ruling-no-oaths-in-the-name-of-deities-or-bharat-mata/ Thu, 25 Jun 2026 08:41:00 +0000 https://eveningtimescg.com/kerala-high-courts-major-ruling-no-oaths-in-the-name-of-deities-or-bharat-mata/ तिरुवनंतपुरम
केरल हाई कोर्ट ने शपथ को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा कि स्थानीय निकायों के चुने हुए प्रतिनिधि शपथ लेते समय कानून में तय शब्दों से बाहर नहीं जा सकते. यानी शपथ  ईश्वर के नाम पर ली जा सकती है या फिर बिना ईश्वर का नाम लिए सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा की जा सकती है. उसमें देवी-देवताओं, भारत माता, किसी संगठन, राजनीतिक शहीद या किसी व्यक्ति का नाम जोड़ना मान्य नहीं है. इसी आधार पर अदालत ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के कुछ पार्षदों की शपथ को अवैध माना. कोर्ट ने कहा कि अपनी तरफ से कोई भी नया शब्द जोड़ना पूरी तरह गलत माना जाएगा। 

यह मामला तब अदालत पहुंचा जब तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों ने शपथ लेते समय अलग-अलग हिंदू देवी-देवताओं, 'भारतम्बा', 'भारत माता', गुरुदेव, अपने राजनीतिक आंदोलन के शहीदों के नाम लिए. इसी से जुड़ी एक दूसरी याचिका पलक्कड़ जिले के वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य की शपथ को लेकर भी थी. उस सदस्य ने 'ईश्वर की कृपा से उम्मन चांडी के नाम पर' शपथ ली थी. इन दोनों मामलों को देखते हुए हाई कोर्ट ने पूछा कि क्या कानून शपथ के तय प्रारूप से बाहर जाने की इजाजत देता है। 

कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने अपने फैसले में कहा कि केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट (नगरपालिका अधिनियम), केरल पंचायत राज एक्ट के तहत शपथ का सिर्फ दो ही तरीका है. पहला, ईश्वर के नाम पर शपथ लेना. दूसरा, ईश्वर का नाम लिए बिना सत्यनिष्ठा की प्रतिज्ञा करना. अदालत ने साफ कहा कि ईश्वर शब्द का दायरा बढ़ाकर किसी खास देवी-देवता, भारत माता, राजनीतिक शहीद, संगठन या व्यक्ति का नाम जोड़ना कानून के खिलाफ है। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि शपथ सिर्फ औपचारिकता नहीं है. यह जनता के प्रति एक गंभीर वादा है कि चुना हुआ प्रतिनिधि संविधान का पालन करेगा, कानून के मुताबिक काम करेगा, ईमानदारी से जनता की सेवा करेगा. इसलिए शपथ वही मानी जाएगी जो कानून में लिखे तरीके से ली गई हो। 

पार्षदों की सदस्यता पर क्या असर पड़ेगा?
हाई कोर्ट ने कहा कि शपथ गलत तरीके से ली गई थी, इसलिए वह वैध नहीं मानी जा सकती. लेकिन सिर्फ इस वजह से चुने हुए प्रतिनिधियों का जनादेश खत्म नहीं किया जाएगा. अदालत ने आदेश दिया है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षद, वडक्कनचेरी पंचायत सदस्य चार हफ्ते के भीतर दोबारा सही तरीके से शपथ लें. अदालत ने यह भी माना कि इन लोगों ने शायद यह सोचकर ऐसा किया कि उनका तरीका कानूनी रूप से सही है, इसलिए उन पर कोई सजा या जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। 

तिरुवनंतपुरम नगर निगम के पार्षदों के मामले में अदालत ने राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि अब तक उनके द्वारा किए गए काम केरल म्युनिसिपैलिटी एक्ट की धारा 531 के तहत सुरक्षित रहेंगे. यानी उनकी अब तक की कार्रवाई सिर्फ शपथ की गलती के आधार पर रद्द नहीं होगी. लेकिन वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत सदस्य के मामले में तस्वीर अलग है. कोर्ट ने कहा कि पंचायत राज एक्ट में ऐसी सुरक्षा का प्रावधान नहीं है, इसलिए उस सदस्य ने अब तक जो काम किए, वे अमान्य माने जाएंगे. हालांकि उसे भी दोबारा शपथ लेने का मौका दिया गया है। 

फैसले में नारायण गुरु की सीख और संविधान में दर्ज धर्मनिरपेक्षता का जिक्र करते हुए कहा गया कि लोग भगवान को भले ही अलग-अलग नामों से पुकारें, लेकिन कानूनन शपथ सिर्फ ईश्वर के नाम पर या सत्यनिष्ठा से ही ली जा सकती है. इसमें अपनी तरफ से कोई भी नाम जोड़ना ठीक नहीं है। 

 

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