jiutiya festival – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Wed, 30 Sep 2026 05:02:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg jiutiya festival – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 जिउतिया पर्व में आस्था के साथ सेहत का राज, मड़ुआ से नोनी साग तक खास थाली https://eveningtimescg.com/jiutiya-festival-holds-the-secret-of-faith-and-health-with-special-platters-ranging-from-mahua-to-noni-saag/ Wed, 30 Sep 2026 05:02:00 +0000 https://eveningtimescg.com/jiutiya-festival-holds-the-secret-of-faith-and-health-with-special-platters-ranging-from-mahua-to-noni-saag/  उदवंतनगर (भोजपुर)
संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना से रखा जाने वाला जिउतिया पर्व इसी सप्ताह शनिवार को है। यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण जीवन, कृषि और पारंपरिक पोषण ज्ञान से भी गहराई से जुड़ा है।

तीन दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय से लेकर निर्जला उपवास और फिर पारणा तक खान-पान की अपनी विशेष परंपरा है।

मड़ुआ से नोनी साग तक, थाली में देसी पोषण
शाहाबाद क्षेत्र में जिउतिया की थाली में ऐसे कई खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं, जो आज आधुनिक रसोई में कम दिखाई देते हैं।

मड़ुआ यानी रागी की घी लगी रोटी, नोनी का साग, सतपुतिया की सब्जी, पोई साग की पकौड़ी, कढ़ी, कंद या अरबी की सब्जी, नेनुआ-चना का तोड़ा, खीरे का रायता और कोहड़े की सब्जी जैसे व्यंजन पीढ़ियों से इस पर्व की खाद्य परंपरा का हिस्सा रहे हैं।

मोटे अनाज और स्थानीय सब्जियों में सेहत का राज
मड़ुआ फाइबर और कैल्शियम से भरपूर मोटा अनाज है, जो ग्लूटन मुक्त होता है। आयुष चिकित्सक डा. विभेष कुमार बताते हैं कि यह डायबिटीज को नियंत्रित रखने, वजन कम करने व हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक होता है।

अरबी पाचनतंत्र व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। नोनी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर है और हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी मानी जाती है

सतपुतिया में संतान वृद्धि की लोक आस्था
जिउतिया में सतपुतिया का विशेष महत्व है। लोकमान्यता के अनुसार एक बेल पर एक साथ कई फल लगने के कारण इसे संतान वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

उदवंतनगर के पंडित रामावतार ओझा कहते हैं कि पुराने समय में चेचक, हैजा और प्लेग जैसी महामारियों का व्यापक प्रभाव था। ऐसे दौर में बच्चों के सुरक्षित जीवन और दीर्घायु की कामना से जुड़ी लोक परंपराओं को विशेष महत्व मिला।

व्रत से आगे लोक ज्ञान को सहेजने का पर्व
जिउतिया पर्व के बहाने उन अनाजों, साग-सब्जियों और पारंपरिक व्यंजनों का इस्तेमाल होता है, जो कभी ग्रामीण रसोई की पहचान हुआ करते थे।

सनातन सेवा अभियान से जुड़े यशवंत सिंह कहते हैं कि आज जब मोटे अनाज और स्थानीय खाद्य पदार्थों को फिर से भोजन में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है, ऐसे में जिउतिया की परंपरा बताती है कि हमारी लोक संस्कृति में भोजन को मौसम, प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों से जोड़कर देखने की समझ पहले से मौजूद रही है।

आस्था के साथ विरासत भी आगे बढ़ाती है जिउतिया
यही कारण है कि जिउतिया मां की ममता और संतान की मंगलकामना के साथ लोक संस्कृति और पारंपरिक खान-पान की समृद्ध विरासत को भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने वाला पर्व माना जाता है।

 

]]>