hydrogen train – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Tue, 28 Jul 2026 03:50:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg hydrogen train – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 1200KM दौड़ी हाइड्रोजन ट्रेन! 3200 लीटर डीजल की बचत, अब दिल्ली तक दौड़ाने की तैयारी https://eveningtimescg.com/hydrogen-train-covers-1200-km-saves-3200-liters-of-diesel-plans-underway-to-run-it-to-delhi/ Tue, 28 Jul 2026 03:50:00 +0000 https://eveningtimescg.com/hydrogen-train-covers-1200-km-saves-3200-liters-of-diesel-plans-underway-to-run-it-to-delhi/ नई दिल्ली

देश में हाइड्रोजन ट्रेन की खूब चर्चा हो रही है. 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. तब से ट्रेन लगातार पटरी पर बिना किसी दिक्कत की दौड़ रही है। 

दरअसल, भारतीय रेलवे ने पर्यावरण को बचाने के लिए एक नई और अनोखी 'हाइड्रोजन ट्रेन' चलाई है. यह ट्रेन धुएं की जगह सिर्फ पानी की भांप छोड़ती है. रेलवे के मुताबिक भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन ने अपनी शुरुआती यात्रा में ही पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश की है। 

17 जुलाई 2026 को दिल्ली के निकट जींद और सोनीपत के बीच शुरू हुई इस ट्रेन ने 25 जुलाई तक 1200 किलोमीटर से अधिक का सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. इस दौरान ट्रेन ने 3,200 लीटर से अधिक डीजल की खपत को बचाकर रेलवे के ईंधन खर्च और प्रदूषण दोनों में भारी कमी लाई है।

कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
यह हाइड्रोजन ट्रेन डीजल इंजन या बाहरी बिजली (OHE लाइन) से चलने की बजाय अपने अंदर ही बिजली पैदा करती है. ट्रेन में लगे फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जिससे बिजली बनती है और ट्रेन का इंजन चलता है। 

इस पूरी प्रक्रिया में कोई धुआं या प्रदूषित गैस नहीं निकलती है. बाय-प्रोडक्ट के रूप में साइलेंसर से सिर्फ जलवाष्प निकलता है, चंद दिनों में ही इस ट्रेन ने केवल 1,200 किलोमीटर का सफर तय करके 3,200 लीटर से ज्यादा डीजल बचा लिया है. अब कल्पना कीजिए कि जब पूरे देश में हाइड्रोजन ट्रेनें चलने लगेंगी तो फिर कितना डीजल बचेगा। 

दिल्ली से हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की तैयारी
जींद से सोनीपत के बीच चलने वाली इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं. जो कि बेहद हाईटेक हैं. दिखने में बिल्कुल मेट्रो कोच की तरह नजर आती हैं। 

पॉवर और बैटरी क्षमता 
इस देश में दो 'हाइड्रोजन ड्राइविंग पॉवर कार' लगाई गई हैं, जो कुल 2,400 किलोवाट की पावर जेनरेट करती हैं. इसे सपोर्ट देने के लिए लिथियम आयरन फास्फेट बैटरी और हाइड्रोजन सिलेंडरों का उपयोग किया गया है। 

सुरक्षा का पूरा ध्यान
ट्रेन में आग या गैस लीक का पता लगाने के लिए ऑटोमैटिक सेंसर और सेफ्टी सिस्टम लगे हैं. अगर कोई दिक्कत होती है, तो गैस की सप्लाई अपने आप बंद हो जाती है. जींद-सोनीपत रूट पर मिली सफलता के बाद, अब बहुत जल्द इस हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल दिल्ली वाले रूट पर शुरू होने जा रहा है। 

 

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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन अब दिल्ली में करेगी ट्रायल https://eveningtimescg.com/indias-first-hydrogen-train-to-undergo-trials-in-delhi/ Mon, 27 Jul 2026 10:20:00 +0000 https://eveningtimescg.com/indias-first-hydrogen-train-to-undergo-trials-in-delhi/ नई दिल्ली
 जींद-सोनीपत के बीच सफलतापूर्वक दौड़ रही भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का अगला डेस्टिनेशन अब दिल्ली होगा। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इसका ट्रायल सोनीपत से दिल्ली में सब्जी मंडी रेलवे स्टेशन के बीच शुरू किया जाएगा। यहां ट्रायल सफल होने के बाद फिर इसका दायरा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन तक बढ़ाए जाने की योजना है। हालांकि, सोनीपत से सब्जी मंडी के बीच ट्रायल शुरू करने में संचालन संबंधित एक दिक्कत आ रही है। जिसमें अगर इसका ट्रायल दिल्ली तक शुरू किया जाता है तो फिर चार-पांच दिनों के लिए हरियाणा में इसकी सर्विस बंद करनी पड़ेगी। इसी वजह से दिल्ली में इसका ट्रायल शुरू नहीं हो पा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि असल में सोनीपत से दिल्ली के बीच जब भी इस हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल शुरू किया जाएगा। तब ट्रेन और ट्रैक की क्षमता समेत अन्य तकनीकी मसलों को देखने के लिए ट्रेन में 2600 यात्रियों के वजन जितनी रेत की बोरी भरी जाएंगी। 10 डिब्बों वाली इस ट्रेन में 8 यात्री कोच हैं। हर कोच में यात्रियों के बैठने और खड़े होने की क्षमता के हिसाब से उतने ही वजन की रेत की बोरियां भी इसमें रखकर ट्रायल किया जाएगा।

10 डिब्बों वाली ट्रेन में 8 यात्री कोच
    ट्रायल सफल होने के बाद इसका दायरा नई दिल्ली स्टेशन तक बढ़ाए जाने की योजना है यात्रियों के बैठने और खड़े होने की क्षमता अनुसार उतने ही वजन की रेत की बोरियां रखी जाएंगी

ट्रायल में आ रही है थोड़ी दिक्कत
कम से कम चार-पांच दिनों तक सोनीपत से दिल्ली के बीच इसका ट्रायल किया जाएगा। इस दौरान यह अपनी सेवाएं जींद-सोनीपत रूट पर नहीं दे सकेगी। जबकि अब इस रूट पर ट्रेन चार्ट में यह जुड़ चुकी है। ऐसे में इसे इतने दिनों को हटाना और फिर दिल्ली के व्यस्त रूट पर इसका ट्रायल करने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। लेकिन जल्द ही इसका समाधान निकाल लिया जाएगा। जिसके बाद सोनीपत से दिल्ली के बीच इसका ट्रायल होगा।

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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू, बिना डीजल-बिजली तारों के भरेगी रफ्तार https://eveningtimescg.com/indias-first-hydrogen-train-launched-to-run-without-diesel-or-overhead-electric-wires/ Fri, 17 Jul 2026 07:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/indias-first-hydrogen-train-launched-to-run-without-diesel-or-overhead-electric-wires/ नई दिल्ली
रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया है। यह देश की पहले स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन है जो कि बिना डीजल और बिजली के तारों के चलेगी।जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली इस पैसेंजर ट्रेन में 2600 लोग सफ़र कर सकेंगे। फिलहाल यह ट्रेन 89 किलोमीटर के रूट पर चलेगी और दो घंटे में यह दूरी तय करेगी। बीच में 12 स्टेशनों पर ट्रेन रुकेगी। ट्रेन की अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी।

नहीं निकलता है धुआं
रेल मंत्रालय के अनुसार, 10 डिब्बों वाली यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा कर संचालित होती है तथा इससे केवल जलवाष्प का उत्सर्जन होता है। यह ट्रेन देश के नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को पाने और जीवाश्म ईंधन कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री करीब 26,800 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। कार्यक्रमों में रेलवे, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और हरित परिवहन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।

आज शाम को जालंधर पहुंचेंगे, जहां वह 5,470 करोड़ रुपये से अधिक की रेल और सड़क अवसंरचना परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे। राजनीतिक रूप से अहम दोआबा क्षेत्र में यह उनका पिछले साढ़े पांच महीनों में दूसरा दौरा होगा। इससे पहले वह एक फरवरी को भी जालंधर आए थे।

यह कमाल करने वाला छठा देश भारत
हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला भारत दुनिया का पांचवां देश है। इससे पहले यह तकनीक जर्मनी, चीन, जापान, फ्रांस और अमेरिका के पास है। रेलवे ने बताया है कि इस ट्रेन का इंजन पुराने इंजन जैसा ही है। बस इसमें डीजल या फिर बाहर से बिजली नहीं ली जाती है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से ट्रेन के अंदर ही बिजली बनती है। इस रासायनिक अभिक्रिया से केवल भाप निकलती है। इसके अलावा कोई भी प्रदूषक उत्सर्जित नहीं होता है।

इन स्टेशनों पर रुकेगी ट्रेन
यह ट्रेन जींद से सोनीपत तक 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी। एक दिन में दो राउंड ट्रिप मारेगी। इसका मतलब एक दिन में करीब 356 किलोमीटर चलेगी। जींद के बाद जींद सिटी, गोहाना, पांडु पिंडारा, लिलित खेड़ा, भांभेवा, इसापुर खेड़ी. बुटाना, खंडराई, राबरा, लाथ, मोहाना, सोनीपत में इसका स्टॉप होगा।

कितना है किराया
इस ट्रेन में कुल 10 कोच हैं और 2600 यात्री सफर कर सकते हैं। इसकी कुल पावर 2400 किलोवाट है। एक बार हाइ्ड्रोजन भरने पर यह ट्रेन 250 किलोमीटर चलती है। वहीं ट्रेन का किराया 5 रुपये से अधिकतम 25 रुपये तक ही है। इस ट्रेन में सुरक्षा का खास धअयान रखा गाय है। इसमें मल्टी लेयर सेफ्टी सिस्मट लगे हैं। हाइड्रोजन लीक की स्थित में ट्रेन खुद ही रुक जाएगी। इसके अलावा फायर डिटेक्टर और मॉनिटरिंग सिस्टम में भी ट्रेन में लगाया गया है।

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भारत में हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल रन, जींद-सोनीपत रूट पर दिखी नई तकनीक की झलक https://eveningtimescg.com/hydrogen-train-trial-run-in-india-a-glimpse-of-the-new-technology-seen-on-the-jind-sonipat-route/ Sat, 27 Jun 2026 15:20:00 +0000 https://eveningtimescg.com/hydrogen-train-trial-run-in-india-a-glimpse-of-the-new-technology-seen-on-the-jind-sonipat-route/ नई दिल्ली
भारतीय रेलवे ने पिछले महीने 27 मई को नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन चलाने को मंजूरी दी थी। रेल मंत्रालय के मुताबिक यह ट्रेन जल्द ही शुरू होने के लिए तैयार है। यह 1200 KW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके 75 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलेगी। शुक्रवार को दिल्ली और जींद के बीच इसका ट्रायल रन किया गया। इस टेस्ट में इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस और ट्रेन के हिलने-डुलने जैसे अहम पहलुओं पर ध्यान दिया गया।

सिर्फ जल-वाष्प ही निकलता है
देश में हाइड्रोजन ट्रेन चलाने का मकसद साफ-सुथरे और ज्यादा एनर्जी-एफिशिएंट रेल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना है। रेलवे मंत्रालय ने कहा कि हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी हाइड्रोजन का इस्तेमाल करके केमिकल रिएक्शन के जरिए बिजली बनाती है, जिसमें सिर्फ जल-वाष्प ही निकलता है। इस वजह से यह पारंपरिक फॉसिल फ्यूल-बेस्ड ट्रैक्शन सिस्टम का एक साफ-सुथरा विकल्प बन जाती है। इस पहल के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन देशों में शामिल हो गया है जो हाइड्रोजन से चलने वाले रेल ट्रांसपोर्ट पर काम कर रहे हैं।

जींद-सोनीपत सेक्शन को पायलट रूट चुना गया
हरियाणा में जींद-सोनीपत सेक्शन को ऑपरेशन के लिए पायलट रूट के तौर पर चुना गया है। ट्रेनसेट के लिए जींद में ही हाइड्रोजन स्टोर करने और रिफ्यूलिंग की सुविधा भी बनाई गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन ने साइट पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस को स्टोर करने और भरने के लिए जरूरी लाइसेंस दे दिया है।
    
सभी तरह की व्यवस्था की गई है
रेलवे मंत्रालय के मुताबिक, भरोसेमंद और बिना किसी रुकावट के काम करने को पक्का करने के लिए रिफ्यूलिंग ऑपरेशन के लिए हाइड्रोजन कम्प्रेशन सिस्टम लगाया गया है। साथ ही टेक्निकल सपोर्ट और जरूरी स्पेयर पार्ट्स की भी व्यवस्था की गई है। एक स्टैंडबाय कम्प्रेशर यूनिट का इंतजाम भी किया जा रहा है। मंत्रालय ने आगे कहा कि हाइड्रोजन बनाने, स्टोर करने और सप्लाई करने वाली जगह पर लगे सेफ्टी सेंसर की नियमित रूप से जांच और सफाई की जाएगी ताकि सुरक्षित कामकाज सुनिश्चित हो सके।

ट्रेंड टेक्निकल स्टाफ ट्रेन के साथ रहेगा
इंडियन रेलवे ने हाइड्रोजन ट्रेनसेट और हाइड्रोजन प्लांट के लिए ऑपरेशन और मेंटेनेंस मैनुअल भी तैयार किए हैं, जिन्हें आरडीएसओ ने मंजूरी दी है। इसके साथ ही, शकूरबस्ती में मेंटेनेंस सुविधा के लिए सुरक्षा उपाय, ऑडिट और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी तय किए गए हैं। इस मंजूरी में हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग सिस्टम की 24 घंटे निगरानी, ​​जरूरी कामों के लिए ट्रेंड और सर्टिफाइड कर्मचारियों की तैनाती और नियमित जांच व मेंटेनेंस शेड्यूल शामिल हैं। शुरुआती दौर में ट्रेन के सुचारू रूप से चलने को सुनिश्चित करने के लिए ट्रेंड टेक्निकल स्टाफ ट्रेन के साथ रहेगा।

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