Garadu – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 02 Jul 2026 06:36:23 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Garadu – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 GI टैग से चमकी रतलाम की शान! बालम ककड़ी और गराडू को मिली नई पहचान, दुबई तक बढ़ी मांग https://eveningtimescg.com/gi-tag-boosts-ratlams-prestige-balam-kakdi-and-garadu-gain-new-recognition-demand-soars-up-to-dubai/ Tue, 23 Jun 2026 03:52:00 +0000 https://eveningtimescg.com/gi-tag-boosts-ratlams-prestige-balam-kakdi-and-garadu-gain-new-recognition-demand-soars-up-to-dubai/ रतलाम 
 मध्य प्रदेश को देश विदेश में पहचान दिलाने वाली रतलाम की बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को जीआई टैग मिल गया है. इससे पहले रतलाम की सेव और रियावन सिल्वर लहसुन को भी जीआई टैग मिला था. रतलाम मध्य प्रदेश का ऐसा पहला जिला है जहां की चार-चार यूनिक प्रोडक्ट को जीआई टैग मिला है. GI टैग मिलने से रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी के उत्पादक किसानों को फायदा मिलेगा और मांग बढ़ने से इनके बेहतर दाम भी किसानों को मिल सकेंगे। 

भारत सरकार से मिला GI टैग, किसानों को फायदा
उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक मंगल सिंह डुडवे ने इसकी जानकारी देते हुए बताया, '' सैलाना क्षेत्र में उगाई जाने वाली बालम ककड़ी और रतलाम जिले के बांगरोद के गराडू को भारत सरकार से जीआई टैग मिल गया है. वर्तमान में रतलाम जिले में बालम ककड़ी लगभग 100 हेक्टेयर और गराडू लगभग 120 हेक्टेयर में बोए जा रहे हैं. इन फसलों के उत्पादन से जिले के बड़ी संख्या में किसान जुड़े हुए हैं. अब इन्हें रतलाम के नाम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल सकेगी. दोनों फसलों की मांग बढ़ने से किसानों को फायदा मिलेगा और जिले के अन्य किसान भी इसकी खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। 

क्यों खास है रतलाम की बालम ककड़ी?
सैलाना क्षेत्र के आदिवासी अंचल में उगाई जाने वाली एक खास किस्म की ककड़ी जिसे बालम ककड़ी के नाम से जाना जाता है. अपने खास स्वाद और भीतर से निकलने वाले केसरिया और हरे रंग के लिए प्रसिद्ध है. वैसे तो ककड़ी को सलाद के रूप में उपयोग किया जाता है लेकिन इस बालम ककड़ी को लोग नाश्ते के तौर पर खाने में उपयोग करते हैं. बालम ककड़ी के खास स्वाद का आनंद बारिश के मौसम में केवल एक महीने के लिए ही लेने को मिलता है. अगस्त से सितंबर महीने के बीच बालम ककड़ी की बहार आती है। 

रतलाम के नाम से जाना जाएगा मालवी गराडू
रतलाम के बांदगरोद, खेतलपुर, सेजावता और धमोतर क्षेत्र में उगाया जाने वाला यह खास किस्म का कंदमूल फ्राई करके स्नैक्स के रूप में उपयोग किया जाता है. गराडू अपने बेहतरीन स्वाद, अंदर से मुलायम व बाहर से कुरकुरा होने की वजह से लोगों को खूब पसंद आता है. ठंड के मौसम में आने वाले इस फल के स्वाद का आनंद लेने के लिए देश के बड़े शहरों सहित दुबई तक से आर्डर आते हैं. गराडू विटामिन मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. वैसे तो मालवा के अन्य जिलों में भी गराडू की खेती की जाती है लेकिन रतलाम के आसपास के गांव में उत्पादित किए जाने वाले गराडू की साइज और क्वालिटी अच्छी होती है इसलिए रतलाम के गराडू की मांग अधिक बनी रहती है। 

क्या होता है जीआई टैग?
जीआई टैग (GI Tag) यानी जियोग्राफिकल इंडिकेशन टैग. जैसा की नाम से समझ आता है यहा किसी उत्पाद का 'भौगोलिक संकेतक' होता है. यह टैग प्रमाणित करता है कि वह उत्पाद उसी स्थान से आया है, जिसका दावा किया जा रह है.जीआई टैग आमतौर पर उत्पादके विशिष्ट भौगोलिक मूल स्थान, पारंपरिक गुणवत्ता और ख्याति के आधार पर दिया जाता है। 

रतलाम के गराडू और सैलाना की बालम ककड़ी को जीआई टैग दिलवाने के प्रयास मध्य प्रदेश शासन के एमएसएमई मंत्री चेतन्य काश्यप ने शुरू किए थे. इसके बाद अब रतलाम जिले के पास चार-चार यूनिक प्रोडक्ट के जीआई टैग मौजूद है। 

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