food – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Tue, 08 Sep 2026 09:08:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg food – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 टिफिन में खाना घंटों रहेगा गर्म, अपनाएं ये 8 आसान घरेलू तरीके https://eveningtimescg.com/food-in-your-tiffin-will-stay-hot-for-hours-try-these-8-easy-home-remedies/ Tue, 08 Sep 2026 09:08:00 +0000 https://eveningtimescg.com/food-in-your-tiffin-will-stay-hot-for-hours-try-these-8-easy-home-remedies/ सुबह-सुबह हर घर में लंच बनाने की तैयारी होती है. बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर ऑफिस तक के लिए टिफिन में लंच पैक किया जाता है. ऑफिस के लिए तो लोग खाना गर्म रखने वाले टिफिन बॉक्स खरीद लेते हैं, लेकिन बच्चों के लिए ऐसा कर पाना मुश्किल होता है. साथ ही कितना भी गर्म रखने वाले टिफिन खरीद लें, लेकिन कुछ घंटों बाद खाना ठंडा हो ही जाता है. ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि सुबह-सुबह घर से निकलते समय खाना गर्म करके टिफिन में पैक किया जाता है, लेकिन ऑफिस या स्कूल पहुंचने के बाद जब टिफिन खुलता है तो खाना काफी ठंडा हो चुका होता है.

हर जगह खाना गर्म करने के लिए माइक्रोवेव मिले, ये भी जरूरी नहीं है. ऐसे में सवाल है कि आखिर टिफिन में खाना ज्यादा देर तक गर्म कैसे रखा जाए? इसके लिए आपको कोई महंगा इलेक्ट्रिक लंच बॉक्स खरीदने की जरूरत नहीं है. खाना पैक करने के तरीके में थोड़ा बदलाव करके भी आप काफी देर तक उसकी गर्माहट बनाए रख सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही आसान घरेलू तरीके.

टिफिन में खाना डालने से पहले करें ये छोटा सा काम
टिफिन में सीधे गर्म खाना डालने के बजाय पहले उसमें थोड़ा गर्म पानी भरकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद पानी निकालकर टिफिन को अच्छी तरह पोंछ लें और तुरंत गर्म खाना भर दें. इससे टिफिन पहले से ठंडा नहीं रहेगा और खाने की गर्माहट जल्दी कम नहीं होगी.

खाना अच्छी तरह गर्म करके ही पैक करें
अगर खाना टिफिन में डालने से पहले ही हल्का ठंडा हो गया है तो वो कुछ ही देर में और ठंडा हो जाएगा. इसलिए सब्जी, दाल, चावल या जो भी खाना पैक कर रहे हैं, उसे अच्छी तरह गर्म करें और उसके तुरंत बाद टिफिन बंद कर दें.

टिफिन के अंदर खाली जगह न छोड़ें
टिफिन के अंदर जितनी ज्यादा खाली जगह होगी, गर्मी उतनी जल्दी कम हो सकती है. इसलिए जरूरत के हिसाब से सही शेप का बॉक्स इस्तेमाल करें. बहुत बड़े टिफिन बॉक्स में थोड़ा सा खाना भरने से बचें.

गर्म रोटी को ऐसे रखें
रोटियां जल्दी ठंडी होती हैं. इन्हें सीधे स्टील के डिब्बे में रखने के बजाय साफ कॉटन के कपड़े या फॉइल में लपेटकर रखें. इसके बाद इन्हें अच्छी तरह बंद होने वाले टिफिन में रखें. इससे रोटियों की गर्माहट कुछ ज्यादा समय तक बनी रह सकती है.

टिफिन को तुरंत बैग में रखें
खाना पैक करने के बाद टिफिन को खुला या किचन की ठंडी जगह पर ज्यादा देर तक न रखें. ढक्कन बंद करके उसे तुरंत इंसुलेटेड लंच बैग में रख दें. ये तरीका स्कूल जाने वाले बच्चों और ऑफिस जाने वालों के लिए काफी काम का हो सकता है.

टिफिन बैग का करें इस्तेमाल
अगर आपका खाना रोजाना कई घंटे बाद खाया जाता है तो एक अच्छी क्वालिटी का इंसुलेटेड लंच बैग काफी मदद कर सकता है. ये टिफिन को बाहर के टेंपरेचर से कुछ हद तक बचाता है और खाने की गर्माहट लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है.

बहुत ठंडे टिफिन में गर्म खाना न डालें
अगर टिफिन काफी देर से ठंडी जगह रखा हुआ है और उसमें तुरंत गर्म खाना डाल दिया जाए तो खाने की गर्मी का एक हिस्सा डिब्बे को गर्म करने में ही चला जाता है. इसलिए टिफिन को पैक करने से पहले हल्का गर्म कर लेना बेहतर तरीका है.

ढक्कन बार-बार खोलने से बचें
कई बार लोग खाना पैक करने के बाद बीच में टिफिन खोलकर देखते रहते हैं. ऐसा करने से अंदर की गर्म हवा बाहर निकल जाती है और खाना जल्दी ठंडा हो सकता है. इसलिए खाना खाने के समय ही टिफिन खोलें.

स्टील के टिफिन के साथ इंसुलेटेड कवर रखें
अगर आपके पास सामान्य स्टील का टिफिन है तो उसे अकेले बैग में रखने के बजाय इंसुलेटेड कवर में रखें. ये तरीका खासकर तब फायदेमंद है जब खाना पैक करने और खाने के बीच कई घंटे का गैप हो.

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Global Food Crisis Warning: 2027 में मंडरा रहा खाद्य संकट! JP Morgan ने बताया बड़ा खतरा, ये 5 कारण बनेंगे ‘विलेन’ https://eveningtimescg.com/global-food-crisis-warning-a-food-crisis-looms-for-2027-jp-morgan-highlights-a-major-threat-these-5-factors-will-play-the-villain/ Wed, 19 Aug 2026 04:32:00 +0000 https://eveningtimescg.com/global-food-crisis-warning-a-food-crisis-looms-for-2027-jp-morgan-highlights-a-major-threat-these-5-factors-will-play-the-villain/  नई दिल्ली

दुनिया के सामने बड़ा संकट खड़ा है. ये चेतावनी दी है जेपी मॉर्गन ने और कहा है कि अगले साल इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है. JP Morgan वैश्विक खाद्य संकट (Global Food Crisis) को लेकर अलर्ट किया है. सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया को शामिल किया गया है, जहां उर्वरक आपूर्ति में व्यवधान और अल नीनो का असर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। 

JP Morgan ने अपनी वॉर्निंग रिपोर्ट में कहा है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव, फर्टिलाइजर्स की कमी और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे के कारण 2027 में विश्व की खाद्य प्रणाली को एक नए आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है. इसमें चेतावनी दी गई है कि कृषि लागत में तेज बढ़ोतरी और संभावित रूप से कमजोर फसल पैदावार से ग्लोबल फूड क्राइसिस देखने को मिलेगा। 

दुनिया में मचेगा महंगाई का कोहराम
ग्लोबल फूड क्राइसिस का अलर्ट देते हुए जेपी मॉर्गन की ओर से एक और डराने वाली बात कही गई है. इसमें अनुमान लगाया गया कि 2027 की पहली छमाही में ग्लोबल महंगाई बढ़कर लगभग 5% तक पहुंच सकती है, जो 2026 की पहली छमाही में 2.8% थी। 

रिपोर्ट की मानें, तो यह चेतावनी दुनिया में अचानक भोजन की कमी होने के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक और बड़ी समस्या की ओर इशारा करती है. किसानों को बढ़ती लागत और प्रमुख खाद्य पदार्थों की कम आपूर्ति का सामना करना पड़ सकता है, ठीक उसी समय जब मौसम में बदलाव उत्पादन को खतरे में डाल रहा है। 

भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया को अलर्ट
जेपी मॉर्गन ने विशेष रूप से भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया को उन देशों में शामिल किया है, जहां उर्वरक आपूर्ति में व्यवधान और अल नीनो का संयोजन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है. भारत पहले ही उस स्ट्रेटिजिक चुनौती का सामना कर चुका है, जो वैश्विक फसल आपूर्ति में कमी आने पर उत्पन्न हो सकती है. अगर ये चेतावनी सच होती है, तो फिर भोजन महंगा हो सकता है, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जहां परिवार अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं। 

उर्वरक क्यों है इस क्राइसिस का केंद्र? 
जेपी मॉर्गन ने इस खाद्य संकट के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार अल नीनो और उर्वरक की कमी को बताया है. दरअसल, फर्टिलाइजर मार्केट और फूड मार्केट के बीच बड़ा कनेक्शन है. रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट वैश्विक यूरिया निर्यात का लगभग 42% और अमोनिया निर्यात का 27% हिस्सा है, जिससे यह क्षेत्र नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन जाता है। 

होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जारी रुकावटों ने इन सप्लाई चेन को खतरे में डाल दिया है, जबकि नेचुरल गैस की बढ़ती कीमतों ने आग में घी का काम किया है. यूरिया जैसे नाइट्रोजन उर्वरक को बुवाई के समय और फसल की प्रारंभिक ग्रोथ के समय डालना जरूरी है. इस समय का उपयोग न करने से प्रोडक्शन कम हो सकता है, भले ही बाद में आपूर्ति फिर से शुरू हो जाए। 

ऐसा अनुमान जाहिर किया गया है कि बीते कुछ समय में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त उर्वरक उत्पादन को पूरी क्षमता से बहाल करने में एक से चार साल लग सकते हैं, जबकि कुछ नेचुरल गैस सुविधाओं की मरम्मत में तीन से पांच साल का समय लग सकता है. एक्सपर्ट्स ने ग्लोबल फूड क्राइसिस के लिए एक चार्ट तैयार किया है, जिसे युद्ध → एनर्जी संकट → फर्टिलाइजर्स शॉर्टेज → एग्रीकल्चर कॉस्ट में इजाफा → उर्वरक का कम उपयोग → कम पैदावार → खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के जरिए दर्शाया गया है। 

अल नीनो से बिगड़ जाएगा खेल 
सिर्फ उर्वरक की कमी ही नहीं, बल्कि ग्लोबल फूड क्राइसिस के लिए दूसरा बड़ा विलेन जलवायु है. जेपी मॉर्गन का कहना है कि विकसित हो रहा अल नीनो प्रमुख कृषि क्षेत्रों में वर्षा और तापमान के पैटर्न को बदल सकता है, जिससे सूखे, बाढ़ और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. ऐतिहासिक रूप से, अल नीनो की घटनाओं को उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उत्पादन में औसतन 3.5% की गिरावट से जोड़ा गया है, जबकि समशीतोष्ण क्षेत्रों में 2.4% की वृद्धि देखी गई है। 
जेपी मॉर्गन के अनुसार, सुपर अल नीनो अपने चरम पर वैश्विक खाद्य मंहगाई को लगभग 0.7 फीसदी तक बढ़ा सकता है और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के साथ मिलकर इसका प्रभाव लगभग 1.3-1.5 फीसदी तक पहुंच सकता है। 

भारत में ये फसलें हो सकती हैं प्रभावित
कमजोर या अनियमित मानसून से धान, दालें, तिलहन, कपास, गन्ना और बारिश पर निर्भर अन्य फसलों पर असर पड़ सकता है. इसके परिणाम खेतों तक ही सीमित नहीं रहेंगे, क्योंकि कम उत्पादन से घरेलू आपूर्ति कम हो सकती है, थोक कीमतें बढ़ सकती हैं और लास्ट में रिटेल महंगाई में वृद्धि हो सकती है। 

JP Morgan ने कहा है कि भारत के लिए चिंता का विषय सिर्फ यह नहीं है कि देश में पर्याप्त भोजन होगा या नहीं, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि क्या किसान वैश्विक उर्वरक और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता के बावजूद किफायती लागत पर उत्पादन बनाए रख सकते हैं. कुछ संभावित कारकों की ओर भी इशारा किया गया है, जिनमें वैश्विक अनाज भंडार की पर्याप्त मात्रा और एशिया में चावल का अपेक्षाकृत अच्छा भंडार शामिल है। 

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UN Report: भारत में कुपोषण से ग्रस्त आबादी 42% घटी, लेकिन महंगा भोजन अब भी बड़ी चुनौती https://eveningtimescg.com/un-report-malnourished-population-in-india-drops-by-42-but-food-affordability-remains-a-major-challenge/ Sun, 26 Jul 2026 03:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/un-report-malnourished-population-in-india-drops-by-42-but-food-affordability-remains-a-major-challenge/ नई दिल्ली

भारत में भूख के खिलाफ चल रही लड़ाई में ठोस परिणाम दिख रहे हैं। लेकिन लाखों लोगों के लिए पौष्टिक भोजन अभी भी पहुंच से बाहर है।संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों द्वारा जारी नवीनतम स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन इन द वर्ल्ड (SOFI) 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पिछले दो दशकों में भूख को कम करने में सबसे बड़ी प्रगति की है। साथ ही, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ती खाद्य लागत के कारण आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए  पौष्टिक आहार वहन करना मुश्किल बना हुआ है।

आंकड़े दो बिल्कुल अलग-अलग कहानियां बयां करते हैं।
पिछले 20 वर्षों में भारत की कुपोषणग्रस्त आबादी में लगभग 42 प्रतिशत की कमी आई है, जो खाद्य सुरक्षा और कल्याणकारी कार्यक्रमों में सुधार को दर्शाती है। 2019 और 2025 के बीच, स्वस्थ आहार खरीदने में असमर्थ भारतीयों की संख्या में भी लगभग 29 प्रतिशत की गिरावट आई है, हालांकि लगभग 52 करोड़ लोग अभी भी नियमित रूप से  पौष्टिक भोजन नहीं खरीद सकते हैं।

'किफायती होना सबसे बड़ी बाधा है'
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्वस्थ आहार की लागत पिछले छह वर्षों में एक तिहाई से अधिक बढ़ गई है, क्रय शक्ति समता के हिसाब से यह लगभग 4.11 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति दिन तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि कई परिवारों के पास पेट भरने के लिए तो पर्याप्त भोजन होगा, लेकिन फलों, सब्जियों, दालों और प्रोटीन से भरपूर संतुलित और पौष्टिक भोजन करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए, मुद्दा अब केवल कैलोरी की उपलब्धता का नहीं है। यह तेजी से किफायती पोषण की उपलब्धता का मुद्दा बनता जा रहा है।

ये निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आए हैं जब खाद्य मुद्रास्फीति परिवारों के बजट पर लगातार दबाव डाल रही है, जिससे कई उपभोक्ता स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों के बजाय सस्ते खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत भूख को कम करने में हुई प्रगति को बेहतर पोषण परिणामों में बदलना चाहता है ,  तो कृषि में निरंतर निवेश, कुशल आपूर्ति श्रृंखला और खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करना आवश्यक होगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत कुपोषण और मोटापे दोनों से जूझ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में पांच वर्ष से कम आयु के लगभग एक तिहाई भारतीय बच्चे, यानी 32.9 प्रतिशत, बौनेपन के शिकार थे, जो दीर्घकालिक कुपोषण का एक संकेतक है। यह आंकड़ा 2012 में 41.7 प्रतिशत था। हालांकि, बच्चों में बौनेपन में कमी आने के बावजूद, इसी अवधि में बच्चों में मोटापे का प्रचलन 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गया है। वयस्क आबादी में मोटापा दोगुना हो गया है। 

वैश्विक भूख में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज की गई है।

भारत की प्रगति ने एक व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति में भी योगदान दिया है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक भूख में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज की गई। पिछले वर्ष लगभग 64.5 करोड़ लोग, यानी विश्व की 7.8 प्रतिशत आबादी, भूख से पीड़ित थी, जो 2024 में 8.1 प्रतिशत और 2022 में 8.6 प्रतिशत से कम है। भारत के नेतृत्व में एशिया ने इस सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जबकि लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भी सुधार देखा गया। 

फिर भी, दुनिया 2030 तक शून्य भूख के सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने से अभी भी बहुत दूर है।

रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर अभी भी 2.69 अरब लोग स्वस्थ आहार प्राप्त करने में असमर्थ हैं। अफ्रीका सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र बना हुआ है, जहां 309 करोड़ से अधिक लोग भूख का सामना कर रहे हैं और इसकी लगभग दो-तिहाई आबादी पौष्टिक भोजन खरीदने में असमर्थ है । 

जलवायु परिवर्तन से खाद्य आपूर्ति खतरे में है

संयुक्त राष्ट्र ने आत्मसंतुष्टि के प्रति भी आगाह किया है।
जलवायु परिवर्तन, चरम मौसम की घटनाएं, संघर्ष और वैश्विक व्यापार में व्यवधान खाद्य आपूर्ति को लगातार खतरे में डाल रहे हैं और कीमतों को बढ़ा रहे हैं। अल नीनो की संभावना से जुड़े मौसम संबंधी झटके और वैश्विक व्यापार मार्गों को प्रभावित करने वाले भू-राजनीतिक तनाव सहित नए जोखिम , अगर सरकारें खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने में विफल रहती हैं, तो हाल के लाभों को तेजी से उलट सकते हैं। 

भारत के लिए अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक परिवार को ऐसा भोजन मिल सके जो न केवल पर्याप्त हो, बल्कि पौष्टिक भी हो।

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों तक खाना किसने पहुंचाया? कूड़े से मिले रैपर ने खोला राज, पुलिस का बड़ा एक्शन https://eveningtimescg.com/who-delivered-food-to-the-protesters-at-jantar-mantar-wrapper-found-in-trash-reveals-the-secret-police-take-major-action/ Sat, 25 Jul 2026 06:21:00 +0000 https://eveningtimescg.com/who-delivered-food-to-the-protesters-at-jantar-mantar-wrapper-found-in-trash-reveals-the-secret-police-take-major-action/ नई दिल्ली

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली पुलिस अब उन कैफे और रेस्टोरेंट की तलाश कर रही है, जो प्रदर्शन स्थल पर मुफ्त खाना या थोक में फूड डिलीवरी कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि पुलिस इन फूड आउटलेट्स तक पहुंचने के लिए जंतर-मंतर पर फेंके गए खाली रैपर और फूड पैकेजिंग का सहारा ले रही है।

रैपर से सुराग, पुलिस कर रही पूछताछ
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अधिकारी कई रेस्टोरेंट और कैफे में जाकर पिछले कुछ दिनों के ऑर्डर और डिलीवरी का रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं। कुछ ढाबों और रेस्टोरेंट मालिकों से पेड और फ्री, दोनों तरह के ऑर्डर्स के सबूत मांगे गए हैं। कई मालिकों का दावा है कि उन्हें पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन भी बुलाया गया।

क्या है पूरा मामला?
दक्षिण दिल्ली के एक रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से औसतन 800 फूड पैकेट रोज जंतर-मंतर भेज रहे थे। गुरुवार को पुलिस उनके स्टोर पर पहुंची और पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि उन्हें इस स्टोर का पता जंतर-मंतर पर पड़े पैकेजिंग मटेरियल से चला।

रेस्टोरेंट मालिक के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें थाने बुलाकर कहा कि प्रदर्शन में मौजूद कई 'असामाजिक तत्व' उनके खाने का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए वे आगे से वहां खाना न भेजें।

कूड़े में मिले खाली रैपर से पुलिस आउटलेट्स को ट्रैक कर रही है

स्विगी-जोमैटो के बल्क ऑर्डर पर नजर

पुलिस ने जोमैटो और स्विगी जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से मिलने वाले बल्क ऑर्डर्स को लेकर भी हिदायत दी है। पुलिस का कहना है कि इस तरह के ऑर्डर्स को 'रेड फ्लैग' माना जाना चाहिए और इनकी डिलीवरी नहीं की जानी चाहिए।

जंतर-मंतर पर कई लोकल कैफे ने प्रदर्शनकारियों को मुफ्त रिफ्रेशमेंट और शरण देने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे। एक कैफे कर्मचारी ने बताया कि पुलिस की पूछताछ और दबाव के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर दिए हैं।

स्विगी-जोमैटो के बल्क ऑर्डर पर दिल्ली पुलिस की नजर
आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश?

20 जून से शुरू हुए इस प्रदर्शन में देशभर के अलावा विदेशों से भी लोग डिलीवरी ऐप्स के जरिए खाना, स्नैक्स और पानी भेज रहे हैं। रेस्टोरेंट इंडस्ट्री से जुड़े एक सीनियर एग्जीक्यूटिव का मानना है कि यह सब आंदोलन की रफ्तार को कम करने की एक कोशिश है। इंटरनेट शटडाउन और मेट्रो सेवाएं प्रभावित होने के बाद, अब पुलिस की तरफ से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि प्रदर्शन स्थल पर खाने-पीने की सप्लाई आसानी से न पहुंच सके।

दिल्ली पुलिस ने अफवाहों को किया खारिज

इस बीच, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 'X' पर एक एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने से बचने की अपील की है। साथ ही फूड डिलीवरी, कैब और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से भी प्रतिबंधित क्षेत्र में अपनी सेवाओं को रेगुलेट करने को कहा गया है। हालांकि, नई दिल्ली इलाके में फूड डिलीवरी ऐप सर्विस पर बैन लगाने की अफवाहों का दिल्ली पुलिस ने सख्ती से खंडन किया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फूड डिलीवरी पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और इस तरह के दावे पूरी तरह से भ्रामक हैं।

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भोपाल में खाने को लेकर बवाल! IPL क्रिकेटर और IPS पिता पर कुक से मारपीट का आरोप, FIR दर्ज https://eveningtimescg.com/uproar-over-food-in-bhopal-ipl-cricketer-and-ips-father-accused-of-assaulting-cook-fir-registered/ Tue, 30 Jun 2026 07:11:00 +0000 https://eveningtimescg.com/uproar-over-food-in-bhopal-ipl-cricketer-and-ips-father-accused-of-assaulting-cook-fir-registered/  भोपाल

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड आईपीएस पिता शैलेश सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं. भोपाल पुलिस ने अपने घर के रसोइए के साथ मारपीट करने, गाली-गलौज करने और उसे अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने के आरोप में दोनों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। 

इस मामले में परिवार के ड्राइवर को भी सह-आरोपी बनाया गया है. यह पूरी घटना भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के मेंदोरी गांव स्थित उनके आवास की है. मूल रूप से रीवा जिले के रहने वाले 31 वर्षीय पीड़ित रसोइए विपेंद्र सिंह तोमर ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। 

विपेंद्र के मुताबिक, उन्हें हाल ही में एक परिचित के जरिए ₹15000 प्रति माह वेतन, रहने-खाने की सुविधा और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने के आश्वासन पर पूर्व पुलिस अधिकारी के नील बड़ बंगले पर काम के लिए लाया गया था. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि काम शुरू करने के कुछ ही घंटों के भीतर खाने की क्वालिटी को लेकर उन पर भारी मानसिक दबाव बनाया गया और गाली-गलौज की गई। 

कमरे में बंद होकर बचाई जान
पीड़ित कुक के अनुसार, जब उसने घर के खराब माहौल को देखकर नौकरी छोड़ने और वापस रीवा लौटने की इच्छा जताई, तो आरोपी भड़क गए. उसका मोबाइल फोन जबरन छीन लिया गया ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके और उस पर जबरन काम करने का दबाव बनाया गया। 

खुद को बचाने के लिए कुक ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया, लेकिन आरोप है कि पिता-पुत्र की जोड़ी और उनके ड्राइवर ने दरवाजा खोलकर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की. पुलिस द्वारा कराए गए मेडिकल परीक्षण में पीड़ित के चेहरे और शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे मारपीट की पुष्टि हुई है। 

भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज
रातीबड़ पुलिस ने औपचारिक शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कर
ली है. यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें धारा 296(B) (अश्लील कृत्य और सार्वजनिक रूप से गाली-गलौज), धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना/मारपीट) और धारा 3(5) (साझा आपराधिक दायित्व/समान इरादे से कई लोगों द्वारा किया गया कृत्य) शामिल हैं। 

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