F-35 fighter jet – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Mon, 21 Sep 2026 03:34:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg F-35 fighter jet – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 F-35 के संवेदनशील पुर्जों की खेप हांगकांग पहुंची, चीन के हाथ लगने की आशंका से अमेरिका में जांच https://eveningtimescg.com/a-shipment-of-sensitive-f-35-parts-arrived-in-hong-kong-sparking-an-investigation-in-the-us-over-the-possibility-of-them-falling-into-chinese-hands/ Mon, 21 Sep 2026 03:34:00 +0000 https://eveningtimescg.com/a-shipment-of-sensitive-f-35-parts-arrived-in-hong-kong-sparking-an-investigation-in-the-us-over-the-possibility-of-them-falling-into-chinese-hands/  वॉशिंगटन
ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका ले जाए जा रहे F-35 फाइटर जेट के बेहद संवेदनशील पुर्जों वाली एक खेप को हांगकांग भेज दिया गया। इस घटना के बाद अमेरिका ने जांच शुरू कर दी है, क्योंकि आशंका है कि ये पुर्जे चीनी अधिकारियों के हाथ लग सकते थे।

पोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शिपमेंट में F-35 का कैनोपी शामिल था और ये एयरक्राफ्ट के स्टील्थ सिस्टम का एक अहम हिस्सा है। यह सामान एक ब्रोकर के जरिए ले जाया जा रहा था लेकिन यह साफ नहीं है कि शिपमेंट को असल में कहां भेजा गया या ये पार्ट्स अभी किसके पास हैं।

मामले की जांच शुरू
इस घटना के बाद पेंटागन और कांग्रेस, दोनों ने ही जांच शुरू कर दी है। जून में अमेरिकी विदेश विभाग और पेंटागन के अधिकारियों ने कांग्रेस की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम कमेटियों के स्टाफ को जानकारी देना शुरू किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि ये ब्रीफिंग अभी भी जारी हैं और आगे भी और बैठकें होने की उम्मीद है।

F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने पुष्टि की कि उसे F-35 लाइटनिंग II के पार्ट्स से जुड़ी शिपमेंट की समस्या के बारे में जानकारी थी। अमेरिकी अधिकारी इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर इन पार्ट्स को वापस लाने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करने पर काम कर रहे हैं।

क्यों अहम हैं ये पुर्जे
यह गायब हिस्सा पायलट के कॉकपिट के लिए सिर्फ एक सुरक्षा कवच से कहीं ज्यादा है। F-35 का कैनोपी कॉकपिट के ऊपर लगा एक ऐक्रेलिक बबल है जिस पर पारदर्शी रडार-एब्जॉर्बिंग मटीरियल की एक पतली परत चढ़ी होती है और यह कोटिंग विमान के रडार सिग्नेचर को कम करके उसके स्टील्थ डिजाइन का एक हिस्सा बनती है।

समय के साथ कोटिंग खराब हो सकती है, जिसका मतलब है कि जैसे-जैसे F-35 फ्लीट बढ़ेगी, कैनोपी की मरम्मत या उन्हें बदलने की जरूरत होगी। अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए 1,300 से ज्यादा फाइटर जेट बनाए जा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में F-35 के लिए मेंटेनेंस की सुविधाएं तो हैं लेकिन अभी उनमें से किसी में भी इसकी कैनोपी की मरम्मत करने की क्षमता नहीं है।

F-35 प्रोग्राम पुर्जों को स्टोर करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और उनकी मरम्मत करने के लिए दुनिया भर में फैली सुविधाओं के नेटवर्क पर निर्भर करता है। इस विमान को बनाने वाली कंपनी, लॉकहीड मार्टिन, प्रोग्राम की पूरी सप्लाई चेन को मैनेज करती है और पुर्जों को लाने-ले जाने के लिए कमर्शियल शिपिंग कंपनियों की मदद लेती है।

कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी का कहना है कि सुरक्षा कारणों से वह अलग-अलग शिपमेंट के बारे में बात नहीं कर सकती लेकिन एयरक्राफ्ट के पार्ट्स की आवाजाही से जुड़े अमेरिकी नियमों का पालन करती है। कंपनी ने कहा, "हमारी टीमें F-35 प्रोग्राम की विश्वसनीयता और हमारे सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर शिपमेंट को पूरी सावधानी और सुरक्षा उपायों के साथ संभालती हैं।"

यह ताजा घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी सरकार की F-35 के स्पेयर पार्ट्स को ट्रैक करने की क्षमता को लेकर लंबे समय से चिंताएं बनी हुई हैं। सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) की 2023 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि मई 2018 से एक मुख्य ठेकेदार ने 85 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 1 मिलियन से ज्यादा F-35 स्पेयर पार्ट्स खो दिए थे।

निगरानी संस्था के अनुसार, F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने उन नुकसानों में से 2 प्रतिशत से भी कम की समीक्षा की थी। GAO ने यह भी पाया कि अक्टूबर 2022 तक 66 मिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत के 900,000 से ज्यादा अतिरिक्त पार्ट्स की जानकारी समीक्षा के लिए प्रोग्राम ऑफिस को नहीं दी गई थी।

यह समस्या कुछ हद तक F-35 के ग्लोबल स्पेयर-पार्ट्स पूल के मैनेजमेंट के तरीके से जुड़ी है। पार्ट्स पेंटागन के होते हैं, जबकि मुख्य कॉन्ट्रैक्टर ज्यादातर इन्वेंट्री को मैनेज करते हैं, जिससे सरकार के लिए उनकी लोकेशन और नुकसान का पता लगाने में कमियां रह जाती हैं। GAO ने कहा कि यह ग्लोबल पूल अमेरिका और विदेशों में 50 से ज्यादा जगहों पर फैला हुआ है।

जून 2026 की एक रिपोर्ट में GAO ने कहा कि पेंटागन को अभी भी स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और कॉन्ट्रैक्टर्स पर ज्यादा निर्भरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

]]>
अमेरिका ने बिना रडार वाले F-35 फाइटर जेट किए डिलीवर, भारत के लिए क्या हैं इसके मायने? https://eveningtimescg.com/us-delivers-f-35-fighter-jets-without-radar-what-does-this-mean-for-india/ Sat, 27 Jun 2026 16:33:00 +0000 https://eveningtimescg.com/us-delivers-f-35-fighter-jets-without-radar-what-does-this-mean-for-india/ वाशिंगटन
अमेरिका की सबसे एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट F35 की कहानी अब एक बड़े घोटाले और देरी की मिसाल बन गई है. पेंटागन ने हाल ही में मरीन कॉर्प्स को छह F35 फाइटर जेट बिना रडार के डिलीवर कर दिए हैं. नया एएन/एपीजी-85 रडार सिस्टम अप्रैल 2028 तक प्रोडक्शन शुरू नहीं होगा। 

F35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी मासिएलो ने सीनेट की सुनवाई में साफ कहा कि बिना रडार वाले ये जेट्स पूरी तरह मिशन कैपेबल नहीं माने जा सकते. यह बात इतनी सच्ची है कि इसे कोई छिपा नहीं सकता. दुनिया का सबसे महंगा फाइटर प्रोग्राम, जो अब तक 400 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च कर चुका है, अब बिना आंखों वाले विमानों को डिलीवर कर रहा है। 

ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स को बुलाकर मिसाइल स्टॉक की कमी पर सवाल किए. उसी समय पेंटागन F35 जैसे जेट्स बिना मुख्य हिस्से के दे रहा है. भारत के संदर्भ में यह खबर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ट्रंप ने भारत की यात्रा के दौरान और पहले कई बार भारतीय वायुसेना (IAF) को F35 ऑफर किया था। 

प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के समय ट्रंप ने कहा था कि वे भारत को F35 स्टेल्थ फाइटर उपलब्ध कराने का रास्ता तैयार कर रहे हैं. यह ऑफर भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को ऊंचाई देने वाला था लेकिन अब इस प्रोग्राम की समस्याएं भारत के लिए सोचने वाली बात हैं। 

F35 प्रोग्राम की महंगाई और समस्याएं 
F35 लाइटनिंग II को दुनिया का सबसे एडवांस्ड स्टेल्थ फाइटर माना जाता है. इसमें एक से ज्यादा रोल हैं – जमीन पर हमला, हवा में लड़ाई और टोही. लेकिन इसका कुल खर्च अब 2 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है, जो इसे इतिहास का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम बनाता है. एक जेट की कीमत 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा है, लेकिन रखरखाव, अपग्रेड और लाइफ साइकिल कॉस्ट इसे और महंगा बनाती है। 

अब नया AN/APG-85 रडार पुराने APG-81 की जगह लेने वाला था. यह ज्यादा पावरफुल AESA रडार है, जो बेहतर टारगेट डिटेक्शन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता देता है. लेकिन नाक के अंदर माउंटिंग सिस्टम में बदलाव की वजह से पुराना रडार फिट नहीं हो पा रहा। 

इसलिए लॉकहीड मार्टिन ने कुछ जेट्स नाक में बैलास्ट लगाकर डिलीवर किए. मरीन कॉर्प्स ने इंतजार किया, लेकिन अब छह जेट्स बिना रडार के उनके पास हैं. जनरल मासिएलो ने माना कि ये जेट्स ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, लेकिन असली लड़ाई में पूरी क्षमता नहीं दिखा सकते। 

यह समस्या सिर्फ रडार तक सीमित नहीं. F35 प्रोग्राम लंबे समय से देरी, कॉस्ट ओवररन और कम तैयार दरों से जूझ रहा है. कई रिपोर्ट्स कहती हैं कि तैयार जेट्स का छोटा प्रतिशत ही पूरी तरह मिशन तैयार रहता है. ट्रंप ने कॉन्ट्रैक्टर्स से मिसाइल स्टॉक की कमी पर जवाब मांगा, जो दिखाता है कि अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री सप्लाई चेन की दिक्कतों से गुजर रही है। 

ट्रंप का भारत दौरा और F35 ऑफर 
ट्रंप ने भारत यात्रा के दौरान और इससे पहले मोदी के व्हाइट हाउस दौरे पर F35 का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को अरबों डॉलर के हथियार बेचेगा और F35 का रास्ता भी खोलेगा. यह ऑफर भारत को क्वाड और इंडो-पैसिफिक में चीन के खिलाफ मजबूत बनाने का संकेत था. भारत के पास अभी राफेल, Su-30MKI जैसे जेट्स हैं, लेकिन पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर IAF को नई ताकत दे सकता था। 

भारत ने हालांकि इस ऑफर को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रेड टेंशन और टैरिफ की वजह से भारत ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. भारत Make in India पर जोर देता है. रूस, फ्रांस के साथ लंबे संबंध रखता है. F35 खरीदने पर अमेरिकी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रखरखाव और इस्तेमाल पर सख्त शर्तें लगती हैं, जो भारत को पसंद नहीं आतीं. ट्रंप का ऑफर दिखाता है कि अमेरिका भारत को रणनीतिक पार्टनर मानता है। 

भारत अगर F35 खरीदता तो क्या होता? 
एक तरफ यह IAF को स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, बेहतर सेंसर और नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर देता. पाकिस्तान और चीन के एयर डिफेंस को चीरने में मदद करता. लेकिन दूसरी तरफ, बिना रडार वाले जेट्स की डिलीवरी, देरी और भारी खर्च भारत के बजट पर बोझ बन सकता था. भारत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA जैसे अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. F35 जैसी विदेशी टेक्नोलॉजी खरीदने से पहले इन समस्याओं को समझना जरूरी है। 

F35 प्रोग्राम की समस्याएं अमेरिकी डिफेंस इंडस्ट्री की कमजोरियों को उजागर करती हैं. सप्लाई चेन, प्रोडक्शन डिले और कॉस्ट कंट्रोल में दिक्कतें हैं. ट्रंप इन मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन समाधान आसान नहीं. भारत के लिए यह सबक है कि कोई भी हथियार परफेक्ट नहीं होता. रडार, सॉफ्टवेयर, इंजन और रखरखाव सब पर निर्भर रहना पड़ता है। 

F35 2028 तक नया रडार मिलने के बाद बेहतर हो सकता है, लेकिन फिलहाल यह प्रोग्राम चुनौतियों से भरा है. भारत को ट्रंप के ऑफर पर फिर से सोचना चाहिए, लेकिन अपनी शर्तों पर. संयुक्त उत्पादन, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और लागत प्रभावी डील जरूरी है। 

यह मामला सिर्फ एक जेट का नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध और रक्षा खरीद की जटिलताओं का है. भारत जैसे देश को मजबूत एयर फोर्स चाहिए, लेकिन बिना आंखों वाला विमान नहीं. ट्रंप की यात्रा और ऑफर ने नए द्वार खोले, लेकिन फैसला सावधानी से लेना होगा. F35 की कहानी जारी है – महंगा, शक्तिशाली लेकिन अभी सही नहीं। 

 

]]>