Bypass – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Sun, 13 Sep 2026 10:30:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Bypass – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 ग्वालियर-झांसी बायपास पर 109 करोड़ होंगे खर्च, ब्लैक स्पॉट खत्म करने बनेंगे 3 अंडरपास-फ्लाईओवर https://eveningtimescg.com/%e2%82%b9109-crore-to-be-spent-on-gwalior-jhansi-bypass-3-underpasses-and-flyovers-to-be-built-to-eliminate-black-spots/ Sun, 13 Sep 2026 10:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/%e2%82%b9109-crore-to-be-spent-on-gwalior-jhansi-bypass-3-underpasses-and-flyovers-to-be-built-to-eliminate-black-spots/ ग्वालियर.

एनएच-44 के ग्वालियर-झांसी बायपास रूट पर सिकरौदा के बाद अब तीन पॉइंट पर और फ्लाई ओवर एवं अंडरपास बनेंगे। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के इस प्लान को स्वीकृति मिल गई है और अब कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ फाइनल एग्रीमेंट हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि बारिश के बाद बिलौआ, कल्याणी और अर्रू तिराहे पर फ्लाई ओवर व अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इन तीनों स्थानों पर होने वाले कामों पर करीब 109 करोड़ 43 लाख रुपये खर्च होंगे। सिकरौदा, बिलौआ, कल्याणी व अर्रू तिराहे पर लगातार होने वाले एक्सीडेंट को देखते हुए यह निर्णय जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया था। जिसमें समिति अध्यक्ष व सांसद भारत सिंह कुशवाह ने एनएचएआई से डीपीआर तैयार कराई थी और फिर केंद्र सरकार से राशि स्वीकृत कराई। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तिराहे पर होने वाले हादसों में कमी आएगी। यह निर्माण कार्य अगले महीने अक्तूबर में शुरू हो जाएगा। इसके तहत अलग-अलग पॉइंट्स की समस्या का समाधान हो सकेगा।

हादसे के बड़े कारण…
सिकरौदा और अर्रू तिराहा
ग्रामीणों और स्थानीय वाहनों के आवागमन के लिए अवैध कट बने हुए हैं, जहां से अचानक वाहन मुख्य हाइवे पर आ जाते हैं।
क्रेशर व हैवी माइनिंग ट्रैफिक
बिलौआ क्रेशर मंडी क्षेत्र से यहां मिट्टी व पत्थरों से लदे डंपर, ट्रक व ओवरलोडेड वाहन अनियंत्रित गति में हाइवे पर आते हैं।
ओवरटेकिंग
एनएच-44 पर वाहन 100-120 किमी घंटा से अधिक की रफ्तार में चलते हैं। तिराहे या मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने का समय नहीं मिलता।
स्ट्रीट लाइट और संकेतक
कल्याणी व अर्रू तिराहे के पास रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था और सर्विस रोड/साइन बोर्ड न होने से दूर से आ रहे वाहनों को मोड़ का अंदाजा नहीं लगता।
रॉन्ग-साइड ड्राइविंग
स्थानीय ग्रामीण और क्रेशर क्षेत्र के वाहन चालक समय और दूरी बचाने के चक्कर में हाइवे की गलत दिशा में वाहन चलाते हैं, जो कई बार आमने-सामने की भिड़ंत का कारण बनता है।

लोगों को मिलेगी राहत
इस बायपास पर सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट सिकरौदा तिराहे पर है। जहां आए दिन बड़े हादसे होते हैं और अब तक सैकड़ों लोगों की मौत इन हादसों में हो चुकी है। अब यहां एक फ्लाई ओवर बनने से सड़क हादसों में कमी आएगी।

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ग्वालियर-झांसी बायपास पर 109 करोड़ होंगे खर्च, ब्लैक स्पॉट खत्म करने बनेंगे 3 अंडरपास-फ्लाईओवर https://eveningtimescg.com/%e2%82%b9109-crore-to-be-spent-on-gwalior-jhansi-bypass-3-underpasses-and-flyovers-to-be-built-to-eliminate-black-spots-2/ Sun, 13 Sep 2026 10:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/%e2%82%b9109-crore-to-be-spent-on-gwalior-jhansi-bypass-3-underpasses-and-flyovers-to-be-built-to-eliminate-black-spots-2/ ग्वालियर.

एनएच-44 के ग्वालियर-झांसी बायपास रूट पर सिकरौदा के बाद अब तीन पॉइंट पर और फ्लाई ओवर एवं अंडरपास बनेंगे। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के इस प्लान को स्वीकृति मिल गई है और अब कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ फाइनल एग्रीमेंट हो गए हैं।

बताया जा रहा है कि बारिश के बाद बिलौआ, कल्याणी और अर्रू तिराहे पर फ्लाई ओवर व अंडरपास का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इन तीनों स्थानों पर होने वाले कामों पर करीब 109 करोड़ 43 लाख रुपये खर्च होंगे। सिकरौदा, बिलौआ, कल्याणी व अर्रू तिराहे पर लगातार होने वाले एक्सीडेंट को देखते हुए यह निर्णय जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया था। जिसमें समिति अध्यक्ष व सांसद भारत सिंह कुशवाह ने एनएचएआई से डीपीआर तैयार कराई थी और फिर केंद्र सरकार से राशि स्वीकृत कराई। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तिराहे पर होने वाले हादसों में कमी आएगी। यह निर्माण कार्य अगले महीने अक्तूबर में शुरू हो जाएगा। इसके तहत अलग-अलग पॉइंट्स की समस्या का समाधान हो सकेगा।

हादसे के बड़े कारण…
सिकरौदा और अर्रू तिराहा
ग्रामीणों और स्थानीय वाहनों के आवागमन के लिए अवैध कट बने हुए हैं, जहां से अचानक वाहन मुख्य हाइवे पर आ जाते हैं।
क्रेशर व हैवी माइनिंग ट्रैफिक
बिलौआ क्रेशर मंडी क्षेत्र से यहां मिट्टी व पत्थरों से लदे डंपर, ट्रक व ओवरलोडेड वाहन अनियंत्रित गति में हाइवे पर आते हैं।
ओवरटेकिंग
एनएच-44 पर वाहन 100-120 किमी घंटा से अधिक की रफ्तार में चलते हैं। तिराहे या मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने का समय नहीं मिलता।
स्ट्रीट लाइट और संकेतक
कल्याणी व अर्रू तिराहे के पास रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था और सर्विस रोड/साइन बोर्ड न होने से दूर से आ रहे वाहनों को मोड़ का अंदाजा नहीं लगता।
रॉन्ग-साइड ड्राइविंग
स्थानीय ग्रामीण और क्रेशर क्षेत्र के वाहन चालक समय और दूरी बचाने के चक्कर में हाइवे की गलत दिशा में वाहन चलाते हैं, जो कई बार आमने-सामने की भिड़ंत का कारण बनता है।

लोगों को मिलेगी राहत
इस बायपास पर सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट सिकरौदा तिराहे पर है। जहां आए दिन बड़े हादसे होते हैं और अब तक सैकड़ों लोगों की मौत इन हादसों में हो चुकी है। अब यहां एक फ्लाई ओवर बनने से सड़क हादसों में कमी आएगी।

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भोपाल बायपास होगा 6-लेन, ₹1757 करोड़ से भोपाल-विदिशा रोड भी बनेगी फोरलेन https://eveningtimescg.com/bhopal-bypass-to-be-expanded-to-6-lanes-bhopal-vidisha-road-to-be-upgraded-to-4-lanes-at-a-cost-of-%e2%82%b91757-crore/ Sun, 16 Aug 2026 03:32:00 +0000 https://eveningtimescg.com/bhopal-bypass-to-be-expanded-to-6-lanes-bhopal-vidisha-road-to-be-upgraded-to-4-lanes-at-a-cost-of-%e2%82%b91757-crore/ भोपाल 

 मेट्रोपॉलिटन रीजन में शामिल मध्य प्रदेश के भोपाल में सड़कों का जाल बिछेगा। भोपाल बायपास 6-लेन में तब्दील होगा। 1757.55 करोड़ से भोपाल से विदिशा के बीच मौजूदा 2-लेन रोड भी फोरलेन में बदलेगा। सुबह से रात 11 बजे तक राजधानी को वाहनों के भारी दबाव से मुक्त रखने वाला भोपाल बायपास शहर के लिए बड़े सेतु की तरह है। ये इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम को जोड़ने वाला एकमात्र अहम बायपास है। इस पर टोल टैक्स की वसूली अगले 5 साल के लिए बढ़ा दी गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने इसकी मंजूरी दी। कैबिनेट ने सोयाबीन खेती को बढ़ावा देने सीहोर के इच्छावर में नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनएसआरआइ) खोलने को भी मंजूरी दी है। इसके लिए सरकार 20 हेक्टेयर जमीन नि:शुल्क देगी। ये संस्थान सोयाबीन की रोग मुक्त खेती को बढ़ावा देगा। अधिक पैदावार के लिए नई किस्में तैयार करने में मदद देगा। इससे प्रदेश में खाद्य तेलों की उपलब्धता आसान बनी रहेगी और उद्योगों को नई गति मिलेगी।

सिक्स लेन कब होगा पता नहीं, पर टोल वसूली 2031 तक
खास ये है कि, फोरलेन वाला भोपाल बायपास सिक्स लेन में कब तक बदला जाएगा, ये अभी साफ नहीं है। लेकिन, यहां टोल वसूली 2031 तक जारी रखी जाएगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है। यानी, सिक्स लेन में तब्दील होने से पहले ही इस पर टोल वसूली चलती रहेगी।

50 लाख किसानों को फायदा
इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च केंद्र का एक उपक्रम है। एनएसआरआइ इसी का केंद्र है। यह सीहोर की इचछावर तहसील के ग्राम भाऊखेड़ी में खुलेगा। यह संस्थान सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से मप्र समेत सभी राज्यों के करीब 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम कर रहा है।

इन प्रस्तावों का भी अनुमोदन व मंजूरी
-देवास की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट की जांच को बनी एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग के प्रस्ताव का अनुमोदन।

-मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन व जिन प्रकरणों में आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई, उनके संबंध में ज्ञापन के साथ विधान सभा के पटल पर रखे जाने को अनुमोदन दिया गया।

48 हजार करोड़ के ये काम भी मंजूर

-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में पहले से जारी काम चलते रहेंगे। इन पर 28,083.47 करोड़ खर्च होंगे।
-आयुष्मान भारत योजना के चल रहे काम पर 5 साल में 12,123.81 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
-जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में चल रहे कार्यों पर 5 साल में 795.59 करोड़ रुपए।
-1757.55 करोड़ से भोपालविदिशा मार्ग को 4-लेन में बदला जाएगा। इस पर 3 बायपास बनेंगे।
-वन क्षेत्रों से बांस काटने और डिपो में जमा करने वाली संयुक्त वन समितियों को लाभ के 918 करोड़ रुपए बांटेंगे।
-रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार के तहत 2 लाख रुपए और रानी अवंती बाई राज्यस्तरीय वीरता पुरस्कार में 1 लाख की जगह 2 लाख रुपए मिलेंगे।
-स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपए खर्च होंगे।
-जिला स्तरीय अमला योजना के लिए 6541 84 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
-खनिज साधन विभाग की परिसंपत्तियों का 2.५० करोड़ रुपए से संधारण होगा।

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भोपाल को 3900 करोड़ की बड़ी सौगात, बनेगा 10-लेन ईस्टर्न बायपास; ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत https://eveningtimescg.com/major-%e2%82%b93900-crore-gift-for-bhopal-10-lane-eastern-bypass-to-be-built-relief-from-traffic-jams-expected/ Sat, 27 Jun 2026 15:35:00 +0000 https://eveningtimescg.com/major-%e2%82%b93900-crore-gift-for-bhopal-10-lane-eastern-bypass-to-be-built-relief-from-traffic-jams-expected/ भोपाल 

 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को जल्द ही एक बड़ी आधारभूत सौगात मिलने जा रही है। शहर में प्रस्तावित 52 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास को अब 10-लेन के रूप में विकसित किया जाएगा। करीब 3,900 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट को भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए री-डिजाइन किया जा रहा है। नई डिजाइन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा।

हाल ही में हुई एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास परियोजना को दोबारा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने परियोजना की नई डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आने वाले वर्षों की ट्रैफिक मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

 राजधानी को बड़ी सौगात मिली है। भोपाल में 52 किमी लंबा ईस्टर्न बायपास अब दस लेन होगा। इसे वेस्टर्न बायपास से 11 मील व भानपुर, भौंरी पर मिलना था, लेकिन अब इसमें समय लगेगा। पीडब्ल्यूडी MPPWD को इसे री-डिजाइन करने के लिए भेजा है। नई डिजाइन के साथ इसे कैबिनेट की मंजूरी मिलेगी, फिर काम शुरू होगा। ये 3900 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। गौरतलब है कि हाल में एम्पावर्ड कमेटी की बैठक में मल्टीलेन ईस्टर्न बायपास पर फिर से काम शुरू करना तय हुआ है। दरअसल भविष्य की अनुमानित मांग को देखते हुए मौजूदा सड़क कनेक्टविटी को मजबूत और बेहतर बनाने की आवश्यकता थी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार ईस्टर्न बायपास के लिए प्रक्रिया शुरु हो गई है।

शिक्षा-प्रशिक्षण प्रोजेक्ट होंगे किनारे पर
प्रस्तावित मार्ग पर कई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, विशेष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण क्षेत्रों में, विकसित की जा रही हैं। अफसरों के अनुसार, क्षेत्र में आगामी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए बेहतर कनेक्टविटी और जनता की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए इसके रूट और डिजाइन में संशोधन किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण ट्रेनिंग हब और एजूकेशन हब के तौर पर विकसित होगा।

वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली
वेस्टर्न बायपास को हाल में साधिकार समिति से मंजूरी मिली है। इसके अलाइनमेंट और लागत अनुमानों में बदलाव के बाद अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

एमपीआरडीसी अभी वेस्टर्न पर काम कर रहा, फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा
पीडब्ल्यूडी के जीएम कैपिटल, पीसी वर्मा बताते हैं कि अभी एमपीआरडीसी वेस्टर्न पर काम कर रहा है। फिर ईस्टर्न पर भी काम शुरू होगा। इसे री-डिजाइन किया जा रहा है। अभी के बायपास से यह बेहतर होगा।

एजुकेशन और ट्रेनिंग हब से जुड़ेगा बायपास
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित ईस्टर्न बायपास के आसपास कई बड़े शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान विकसित किए जा रहे हैं। इसी वजह से इसके रूट और डिजाइन में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम यातायात सुनिश्चित किया जा सके।

वेस्टर्न बायपास के बाद ईस्टर्न पर होगा काम
पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल एमपीआरडीसी वेस्टर्न बायपास परियोजना पर काम कर रहा है। इसके बाद ईस्टर्न बायपास के निर्माण को गति दी जाएगी। नई डिजाइन के साथ यह परियोजना पहले की तुलना में अधिक आधुनिक और उपयोगी होगी।

रिंग रोड नेटवर्क होगा पूरा
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास बनने के बाद भोपाल का लंबे समय से लंबित रिंग रोड नेटवर्क पूरा होने की उम्मीद है। इससे दूसरे शहरों की ओर जाने वाले वाहन बिना शहर के भीतर प्रवेश किए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे, जिससे राजधानी में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।

पर्यावरण मंजूरी भी होगी जरूरी
परियोजना को शुरू करने से पहले पर्यावरण विभाग और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से आवश्यक मंजूरी भी लेनी होगी। प्रस्तावित मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणीय अनुमति अहम मानी जा रही है।

रिंग रोड पूरा होने की उम्मीद
ईस्टर्न और वेस्टर्न बायपास से भोपाल के बहुप्रतीक्षित रिंग रोड नेटवर्क के पूरा होने की उम्मीद है। एक बार चालू होने के बाद, वाहन शहर में प्रवेश किए बिना सीधे अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे, जिससे शहर के भीतर यातायात का दबाव काफी कम हो जाएगा। देशभर में भोपाल ही एकमात्र ऐसी राजधानी है, जिसकी पूरी रिंग रोड नहीं है। ईस्टर्न कॉरिडोर के साथ पश्चिमी का काम पूरा होने पर ये रोड भी पूरी हो जाएगी।

प्रोजेक्ट के लिए पर्यावरण के साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एनजीटी की मंजूरी की भी दरकार हो सकती है। मार्ग में आने वाले पेड़ों की कटाई को लेकर NGT में मामला जा सकता है।

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