Betul’s Kukru – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Fri, 03 Jul 2026 13:08:34 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg Betul’s Kukru – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों और जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान है बैतूल का कुकरू खामला https://eveningtimescg.com/betuls-kukru-khamla-is-a-unique-place-of-natural-beauty-coffee-plantations-and-tribal-culture/ Thu, 02 Jul 2026 16:40:00 +0000 https://eveningtimescg.com/betuls-kukru-khamla-is-a-unique-place-of-natural-beauty-coffee-plantations-and-tribal-culture/ भोपाल 

प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध, बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू एक अनछुआ रमणीय पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 3,668 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पर्वतीय क्षेत्र वर्षा ऋतु में बादलों, कोहरे, घने वनों और हरियाली से आच्छादित रहता है। अदना नदी का प्रवाह, मिश्रित वन और तेलिया सागौन के विशाल वृक्ष इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं में शामिल हैं। वर्षभर सुहावने मौसम वाला कुकरू प्रकृति प्रेमियों, ट्रैकिंग और बाइकिंग के शौकीनों के लिए उपयुक्त पर्यटन स्थल है। यहाँ स्थित सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट प्रमुख आकर्षण हैं। कुकरू अपनी कॉफी के साथ कोदो-कुटकी, आँवला, शहद, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली और भिलवा जैसे वन उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मोटे अनाज से बने पारंपरिक व्यंजन और वन उपज एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प यहाँ की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का हिस्सा हैं।

कॉफी बागानों से मिली विशिष्ट पहचान

कुकरू-खामला क्षेत्र ऐतिहासिक कॉफी बागानों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ वर्ष 1944 में कॉफी की खेती प्रारंभ हुई थी, जिसने इस क्षेत्र को विशेष पहचान दिलाई। देश में गिने चुने प्रांतों में ही उच्च किस्म की कॉफी की खेती होती है। कुकरू में लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में उच्चतम किस्म की अरेबिका कॉफी का उद्यान है, जिसमें से 10 एकड़ में कॉफी की खेती की जाती है। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड तथा वन विभाग द्वारा इन बागानों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।

ईको टूरिज्म और पर्यटन अधोसंरचना का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कुकरू के भ्रमण के दौरान इसे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म का विस्तार, सनराइज एवं सनसेट प्वाइंट का उन्नयन, आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईको रिसॉर्ट का विकास, पर्यटन अधोसंरचना का विस्तार तथा ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल्स और अन्य साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

जनजातीय समुदायों को मिलेगा रोजगार और स्वरोजगार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से होमस्टे योजना प्रारंभ करने की घोषणा की है। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया जाएगा तथा ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मध्यप्रदेश टूरिज्म द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही पर्यटकों को जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को निकट से जानने का अवसर मिलेगा।

कुकरू तक पहुँचना आसान

भोपाल से कुकरू की दूरी लगभग 270 किलोमीटर और बैतूल से लगभग 90 किलोमीटर है। रेल मार्ग से भोपाल और बैतूल के बीच नियमित ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें भोपाल–नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित अन्य प्रमुख ट्रेन शामिल हैं। बैतूल से कुकरू तक टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भोपाल से बैतूल और वहाँ से शाहपुर होते हुए कुकरू पहुँचा जा सकता है। अंतिम चरण का पर्वतीय मार्ग प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है।

प्रकृति, संस्कृति और ईको टूरिज्म का संगम

कुकरू प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों, जनजातीय संस्कृति और ईको टूरिज्म का समन्वित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ ईको टूरिज्म सेंटर के अंतर्गत पर्यटकों के लिए रेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है तथा मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (MPEDB) द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराता है। मानसून के दौरान कुकरू की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख प्रकृति पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान प्रदान करते हैं।

 

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