AI technology – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Mon, 17 Aug 2026 12:20:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg AI technology – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 झारखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए AI तकनीक का सहारा, तीन क्षेत्रों में लगे सर्विलांस टावर https://eveningtimescg.com/ai-technology-deployed-to-curb-human-wildlife-conflict-in-jharkhand-surveillance-towers-installed-in-three-areas/ Mon, 17 Aug 2026 12:20:00 +0000 https://eveningtimescg.com/ai-technology-deployed-to-curb-human-wildlife-conflict-in-jharkhand-surveillance-towers-installed-in-three-areas/ रांची
 झारखंड में बारिश के मौसम के बाद मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं में बढ़ोतरी हो जाती है।

जंगलों में पानी भरने के कारण हाथी, तेंदुए और अन्य वन्यजीव भोजन व सुरक्षित ठिकाने की तलाश में आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करते हैं।

जिससे अक्सर जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का सहारा लिया है।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत तीन क्षेत्रों में लगे टावर
विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत रामगढ़, दलमा और पलामू क्षेत्र में तीन नए AI आधारित सर्विलांस टावर स्थापित किए हैं। इससे पहले थर्मल इमेजिंग तकनीक से केवल जीवों की एकसमान छवियां ही मिलती थीं।

लेकिन नई AI तकनीक जानवरों के आकार और बनावट के आधार पर उनका सटीक वर्गीकरण (हाथी, तेंदुआ, हिरण आदि) करने में सक्षम है।

इन टावरों में ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम लगा है जो वन्यजीवों की गतिविधि दर्ज होते ही सीधे कमांड सेंटर को रीयल-टाइम अलर्ट भेजेगा।

इससे वन विभाग की टीम त्वरित कार्रवाई कर सकेगी और स्थानीय ग्रामीणों को भी समय रहते सतर्क किया जा सकेगा।

पलामू जैसे क्षेत्रों में, जहाँ तेंदुए के हमले की घटनाएँ अक्सर सामने आती हैं, यह तकनीक बेहद कारगर साबित होगी।

सालाना 100 से अधिक लोग गंवाते हैं जान
झारखंड में वन्यजीवों के हमलों के कारण प्रतिवर्ष औसतन 100 लोगों की मौत हो जाती है; कुछ वर्षों में यह आंकड़ा 130 तक भी पहुेचा है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकथाम टास्क फोर्स से जुड़े शहजादा अनवर ने बताया कि हाथियों के मूवमेंट को ट्रैक करने में उत्तराखंड ने AI मॉडल अपनाकर मौतों के आंकड़ों में 40 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की है। झारखंड में भी इस तकनीक से सीमावर्ती ग्रामीणों को सुरक्षा मिलेगी।

आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पूरे राज्य में विस्तार
मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एसआर नटेश ने बताया कि मानसून के बाद इन तीनों टावरों से प्राप्त आंकड़ों और इनपुट्स का विश्लेषण अन्य स्रोतों से मिले डाटा के साथ किया जाएगा।

नतीजों की समीक्षा के बाद राज्य के अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में भी ऐसे AI सर्विलांस टावर लगाने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विभाग की प्राथमिकता ग्रामीण आबादी और वन्यजीवों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

]]>
अलीगंज अग्निकांड के बाद यूपी में सैटेलाइट और एआई से पकड़े जाएंगे अवैध निर्माण https://eveningtimescg.com/illegal-constructions-in-up-to-be-detected-via-satellite-and-ai-following-the-aliganj-fire-incident/ Mon, 10 Aug 2026 14:41:00 +0000 https://eveningtimescg.com/illegal-constructions-in-up-to-be-detected-via-satellite-and-ai-following-the-aliganj-fire-incident/ लखनऊ
 अलीगंज अग्निकांड के बाद अवैध निर्माणों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा। प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में होने वाले अवैध निर्माणों और मानचित्र से इतर किए जा रहे कार्यों की निगरानी अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए जियो पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जो सेटेलाइट इमेज और एआई आधारित प्रणाली के माध्यम से अवैध निर्माणों की पहचान करेगा।

उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के निर्देशन में इस योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। परिषद के अपर आवास आयुक्त व सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक होनी है। बैठक में पोर्टल विकसित करने वाली संस्था के चयन और तकनीकी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

समिति में विभिन्न विकास प्राधिकरणों, नगर व ग्राम नियोजन विभाग और राज्य सूचना विज्ञान केंद्र के अधिकारियों को शामिल किया गया है। बैठक में निविदा प्रक्रिया के दौरान प्राप्त तकनीकी आपत्तियों और सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत विभिन्न शहरों और विकास प्राधिकरण क्षेत्रों की नियमित सेटेलाइट तस्वीरें ली जाएंगी। इन तस्वीरों की पुराने रिकॉर्ड से तुलना कर यह पता लगाया जाएगा कि नई इमारत, अतिरिक्त मंजिल या किसी प्रकार का अवैध निर्माण तो नहीं किया गया।

शासन इसके लिए डिटेक्शन सिस्टम विकसित करा रहा है। यह प्रणाली समय-समय पर ली गई तस्वीरों का विश्लेषण कर निर्माण गतिविधियों में हुए बदलाव की पहचान करेगी। जैसे ही किसी क्षेत्र में संदिग्ध निर्माण गतिविधि सामने आएगी, संबंधित विकास प्राधिकरण को सूचना भेजी जाएगी।

असल में, अलीगंज अग्निकांड में अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रमुखता से सामने आई थी। इसके बाद शासन ने संकेत दिया था कि अवैध निर्माणों के खिलाफ केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उन्हें शुरुआती चरण में ही रोकने की प्रभावी व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।

नई प्रणाली लागू होने से विकास प्राधिकरणों की निगरानी क्षमता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी और अवैध निर्माणों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई हो सकेगी।

]]>
यूपी में एआई आधारित एक्स-रे, एमआरआई मशीनों से आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी जल्द। https://eveningtimescg.com/modern-healthcare-services-using-ai-based-x-ray-and-mri-machines-will-soon-be-available-in-up/ Wed, 01 Jul 2026 13:48:00 +0000 https://eveningtimescg.com/modern-healthcare-services-using-ai-based-x-ray-and-mri-machines-will-soon-be-available-in-up/ लखनऊ
 योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।

एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी।

एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी।

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल
एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी।

उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

]]>