A sari draping – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Mon, 10 Aug 2026 16:12:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg A sari draping – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 मध्यप्रदेश भवन में साड़ी ड्रेपिंग एवं हैंडलूम प्रदर्शन प्रतियोगिता का हुआ आयोजन https://eveningtimescg.com/a-sari-draping-and-handloom-display-competition-was-held-at-madhya-pradesh-bhavan/ Mon, 10 Aug 2026 16:12:00 +0000 https://eveningtimescg.com/a-sari-draping-and-handloom-display-competition-was-held-at-madhya-pradesh-bhavan/ भोपाल

मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में भारतीय साड़ी, हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से साड़ी ड्रेपिंग एवं हैंडलूम डेमोंस्ट्रेशन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कुल 13 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। प्रतिभागियों ने साड़ी पहनने की विभिन्न पारंपरिक एवं रचनात्मक शैलियों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं क्षेत्रीय विविधता को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया।

प्रतियोगिता में महिलाओं ने बंगाली, महाराष्ट्रीयन सहित विभिन्न राज्यों की पारंपरिक साड़ी पहनने की शैलियों का प्रदर्शन किया। इस दौरान सिल्क, बनारसी सिल्क, बंगाली कॉटन, महाराष्ट्रियन नौवारी, बाघ प्रिंट सिल्क, पूना सिल्क तथा पटोला सिल्क सहित विभिन्न प्रकार की साड़ियां देखने को मिलीं। हस्तनिर्मित एवं हैंडलूम साड़ियों ने भी विशेष आकर्षण बटोरा। प्रतिभागियों ने साड़ियों को पारंपरिक तरीकों के साथ रचनात्मक अंदाज में धारण कर उनकी विशेषताओं और क्षेत्रीय पहचान को प्रदर्शित किया।

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को निर्धारित 20 मिनट में साड़ी ड्रेपिंग पूरी करनी थी। इसके बाद रैंप वॉक के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति दी तथा अपनाई गई साड़ी पहनने की शैली, उसकी विशेषताओं और उससे जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा के बारे में जानकारी साझा की। अलग-अलग साड़ी पहनने की शैलियों ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली की विविधता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रत्येक साड़ी को पहनने का तरीका अपने क्षेत्र की संस्कृति और परंपरा की एक अलग कहानी को दर्शाता नजर आया।

निर्णायकों ने परखी प्रतिभागियों की प्रस्तुति

कार्यक्रम में  महेश गुलाटी, सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक, हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट तथा वर्तमान में कंसल्टेंट, नेशनल काउंसिल फॉर हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट और डॉ. रुचिरा अग्रवाल, एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ फैब्रिक एंड अपैरल साइंस, लेडी इरविन कॉलेज, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, ने निर्णायक की भूमिका निभाई। निर्णायकों द्वारा प्रतिभागियों की साड़ी ड्रेपिंग की शैली, प्रस्तुति, साड़ी की विशेषता तथा उससे जुड़े सांस्कृतिक पक्षों का मूल्यांकन किया गया।

प्रतियोगिता के परिणामों में प्रथम स्थान गुनगुन, द्वितीय स्थान ममता कपसे, तृतीय स्थान नंदिनी त्रिपाठी, चतुर्थ स्थान रूपाल कपसे तथा पंचम स्थान डॉ. मेघा ने प्राप्त किया।

हैंडलूम दिवस के उपलक्ष्य में हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम में एआरसी  प्रकाश उन्हाले एवं प्रोटोकॉल ऑफिसर मती शिवाली सिंह भी उपस्थित रहीं। मती शिवाली सिंह ने बताया कि 7 अगस्त को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि साड़ी केवल पहनावा नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, क्षेत्रीय परंपराओं और हस्तकरघा कारीगरों के कौशल का परिचायक है। साड़ी पहनने की अलग-अलग शैलियां देश के विभिन्न क्षेत्रों की विशिष्ट संस्कृति और जीवनशैली को दर्शाती हैं।

मती सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश की साड़ियां और यहां की पारंपरिक वस्त्र कला भी अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं। चंदेरी और महेश्वरी जैसी मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध साड़ियां अपनी बुनाई, डिजाइन, हल्केपन और पारंपरिक शिल्प के लिए देश-विदेश में पहचान रखती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से न केवल भारतीय साड़ी की विविध शैलियों को सामने लाने का अवसर मिलता है, बल्कि हस्तकरघा से जुड़े बुनकरों और शिल्पकारों के कार्य को प्रोत्साहन देने तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध वस्त्र परंपरा से जोड़ने में भी मदद मिलती है।

कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय परिधान संस्कृति, साड़ी पहनने की पारंपरिक एवं विविध शैलियों तथा हस्तकरघा एवं हस्तशिल्प से जुड़े वस्त्रों के प्रति जागरूकता और आकर्षण बढ़ाना रहा। आयोजन के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध वस्त्र परंपरा को आधुनिक एवं रचनात्मक प्रस्तुति के साथ सामने लाने का प्रयास किया गया है।

 

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