व्यापार – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Sun, 27 Sep 2026 12:10:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg व्यापार – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 8वें वेतन आयोग में ₹72 हजार तक बेसिक पे की मांग, फिटमेंट फैक्टर 4 करने का प्रस्ताव https://eveningtimescg.com/demand-for-a-basic-pay-of-up-to-%e2%82%b972000-in-the-8th-pay-commission-proposal-to-increase-the-fitment-factor-to-4/ Sun, 27 Sep 2026 12:10:00 +0000 https://eveningtimescg.com/demand-for-a-basic-pay-of-up-to-%e2%82%b972000-in-the-8th-pay-commission-proposal-to-increase-the-fitment-factor-to-4/ नई दिल्ली
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। इन बैठकों में न्यूनतम बेसिक सैलरी, फिटमेंट फैक्टर, सालाना इंक्रीमेंट, भत्तों और पेंशन में बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसी बीच दो प्रमुख कर्मचारी संगठनों, NC-JCM (National Council-Joint Consultative Machinery) और BPMS (Bharatiya Pratiraksha Mazdoor Sangh) ने अपनी मांगें रखी हैं। इनमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को ₹69,000 से ₹72,000 तक करने के प्रस्ताव शामिल हैं।

सैलरी ₹69,000 और फिटमेंट 3.833 की डिमांड
NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक पे ₹69,000 करने और फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 3.833 रखने की डिमांड की है। संगठन मौजूदा 3% सालाना इंक्रीमेंट को बढ़ाकर 6% करने का भी प्रस्ताव दे रहा है। इसके अलावा वेतन मैट्रिक्स में बदलाव और कुछ पे लेवल को आपस में मिलाने की डिमांड भी शामिल है। संगठन ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए पोषण संबंधी जरूरतों को आधार बनाने का सुझाव दिया है। इसमें भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) से जुड़ी 3,490 कैलोरी की जरूरत का उल्लेख किया गया है, खासकर शारीरिक मेहनत वाले कामों के लिए।

बेसिक सैलरी ₹72,000 और फिटमेंट 4 का प्रस्ताव
दूसरी ओर BPMS ने न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹72,000 और फिटमेंट फैक्टर 4 करने का प्रस्ताव रखा है। संगठन भी सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने के पक्ष में है। इसके साथ ही उसने न्यूनतम वेतन तय करने के तरीके में बदलाव की मांग की है। BPMS चाहता है कि वेतन निर्धारण में प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि को भी ध्यान में रखा जाए। संगठन के ज्ञापन के मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय 2016-17 में ₹1,03,219 से बढ़कर 2024-25 में ₹1,92,774 हो गई। संगठन ने इस वृद्धि को अपनी मांग के समर्थन में पेश किया है। उसने वेतन गणना में परिवार के सदस्यों की संख्या तीन से बढ़ाकर 5 मानने का भी सुझाव दिया है।

फिटमेंट फैक्टर क्यों है अहम?
यह वह मल्टीपायर है, जिसका इस्तेमाल मौजूदा बेसिक पे को संशोधित करके नई बेसिक सैलरी तय करने में किया जाता है। इसलिए कर्मचारी संगठनों की मांग है कि महंगाई और बढ़ते घरेलू खर्च को ध्यान में रखते हुए इसे तय किया जाए। हालांकि, फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारी की कुल सैलरी भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वास्तविक वेतन में बदलाव DA, HRA और अन्य भत्तों तथा अंतिम वेतन संरचना पर भी निर्भर करेगा।

आयोग की अपकमिंग बैठकों में भी इन मुद्दों पर कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, बेंगलुरु में 7 और 8 अक्टूबर 2026 तथा मुंबई में 22 और 23 अक्टूबर को बैठकें होनी हैं। इन परामर्श बैठकों का उद्देश्य अलग-अलग वर्गों की मांगों और सुझावों को समझना है। इसके बाद आयोग उपलब्ध आंकड़ों और प्रस्तावों का आकलन करेगा।

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि ₹69,000 या ₹72,000 की न्यूनतम बेसिक सैलरी और 3.833 या 4 के फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) की मांगें अभी कर्मचारी संगठनों के प्रस्ताव हैं, अंतिम फैसला नहीं। वास्तविक वेतन वृद्धि आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए, कर्मचारियों को इन प्रस्तावित आंकड़ों को संभावित मांग के रूप में देखना चाहिए, न कि तय होने वाली सैलरी के रूप में।

 

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दुनिया पर कर्ज का पहाड़! 365 ट्रिलियन डॉलर पहुंचा ग्लोबल डेट, 6 महीने में बढ़ा ₹10 ट्रिलियन https://eveningtimescg.com/the-world-is-facing-a-mountain-of-debt-global-debt-reaches-365-trillion-an-increase-of-%e2%82%b910-trillion-in-six-months/ Sun, 27 Sep 2026 07:35:00 +0000 https://eveningtimescg.com/the-world-is-facing-a-mountain-of-debt-global-debt-reaches-365-trillion-an-increase-of-%e2%82%b910-trillion-in-six-months/ नई दिल्ली
दुनिया कर्ज तले दबती जा रही है और ग्लोबल ऋण अब 365 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. फाइनेंशिय कमेंट्री पब्लिकेशन 'द कोबेसी लेटर' ने इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (IIF) के लेटेस्ट डेटा का हवाला देते हुए ग्लोबल कर्ज के बोझ को उजागर किया है. 2026 की पहली छमाही में इस रिकॉर्ड लेवल तक पहुंचे कर्ज में, सिर्फ छह महीनों में ही 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का उछाल आया है.

आठ साल में यहां पहुंचा दुनिया का कर्ज
वैश्विक ऋण (Global Debt) के आईआईएफ चार्ट को देखें, तो साफ पता चलता है कि बीते कई सालों में इसमें लगातार बढ़ोतरी होती गई है. वित्त वर्ष 2018 में लगभग 250 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर अब दुनिया का कर्ज 2026 की पहली छमाही तक ही लगभग 365 ट्रिलियन डॉलर का स्तर छू रहा है.

कर्ज के आंकड़े में हालिया वृद्धि खासतौर पर उभरते बाजारों में देखने को मिली है. कोबेसी लेटर के मुताबिक, उभरते बाजारों का कर्ज 2026 की पहली छमाही में 6.5 ट्रिलियन डॉलर बढ़कर रिकॉर्ड 110 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया. इस इजाफे में सरकारों और नॉन-फाइनेंशियल कंपनियों का योगदान सबसे ज्यादा रिकॉर्ड किया गया है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन को छोड़कर उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में कुल कर्ज लगभग 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जो दुनिया की सबसे बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बाहर बढ़ती वित्तपोषण की जरूरतों को उजागर करता है.

उभरते बाजार क्यों हैं केंद्र में?
365 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंचे दुनिया के कर्ज में उभरती अर्थव्यवस्थाएं केंद्र में हैं. दरअसल, सरकारों ने पब्लिक खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर और राजकोषीय घाटे के वित्तपोषण के लिए कर्ज लेना जारी रखा, जबकि कंपनियों ने भी निवेश और संचालन के वित्तपोषण के लिए कर्ज पर जोर दिया है. अब इसका असर ये हो रहा है कि सरकारों और कंपनियों को अपनी इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा दायित्वों को पूरा करने में लगाना पड़ सकता है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उभरते बाजारों के लिए कर्ज की यह समस्या तब और भी जटिल हो सकती है, जब कर्ज विदेशी मुद्राओं में लिया गया हो. घरेलू मुद्रा के कमजोर होने से डॉलर या यूरो में लिए गए कर्ज को चुकाने की स्थानीय मुद्रा लागत बढ़ सकती है.

सबसे बड़ी चिंता तो ये सता रही
ग्लोबल कर्ज बढ़ने के बीच सबसे बड़ी चिंताओं पर गौर करें, तो इनमें सिर्फ कर्ज का आंकड़ा नहीं, बल्कि उस कर्ज को चुकाने में कितना खर्च आता है, यह है. Kobeissi Letter में अनुमान जताया गया है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले वर्ष सरकारी ऋण पर 3.3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का ब्याज चुकाया और ब्याज का यह आंकड़ा वैश्विक खर्च के अनुमानों से कहीं अधिक रहा. इनमें एआई पर खर्च 2.6 ट्रिलियन डॉलर, डिफेंस पर 3.1 ट्रिलियन डॉलर, क्लीन एनर्जी पर 2.3 ट्रिलियन डॉलर शामिल हैं.

ये आंकड़े इस तस्वीर को साफ करने के लिए काफी हैं, कि कैसे कर्ज चुकाने की लागत तेजी से सरकारी वित्त पर एक बड़ा बोझ बन गई है. जी7 देशों में वार्षिक सरकारी ब्याज भुगतान में भी भारी वृद्धि हुई है, कोबेसी लेटर के अनुसार इसमें साल-दर-साल 85% का इजाफा हुआ है.

वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात घटा
Global Debt लगातार बढ़ रहा है, खास बात ये है कि वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात महामारी काल के उच्चतम स्तर से नीचे रहने के बावजूद यह ग्रोथ हुई है. हालांकि, अनुपात में दिखने वाला यह सुधार एक महत्वपूर्ण कारक को छिपाता है, महंगाई ने नॉमिनल जीडीपी को ऊपर उठाया है, न कि विश्व में ऋण में व्यापक कमी आई है. हालिया कर्ज के आंकड़े एक महत्वपूर्ण अंतर की ओर इशारा करते हैं. वो ये है कि वैश्विक ऋण-से-जीडीपी अनुपात में 2021 के अपने उच्चतम स्तर से गिरावट आने का मतलब यह नहीं है कि दुनिया ने ऋणमुक्ति हासिल कर ली है.

कोबेसी लेटर में कहा गया है कि वैश्विक जीडीपी के लगभग 310% के बराबर ऋण भार अभी भी बहुत अधिक है. हालांकि, यह अनुपात कोरोना काल में अपने हाई से करीब 25% नीचे है. लेकिन इस गिरावट का यह अर्थ कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि सरकारों, कंपनियों और परिवारों ने अपने ऋण का काफी हद तक भुगतान कर दिया है.

एक्सपर्ट ने समझाया पूरा माजरा
एक्सपर्ट ने इसमें बताया है कि ग्लोबल नॉमिनल जीडीपी में ग्रोथ आंशिक रूप से महंगाई के कारण हुई. इसका गणित समझें, तो जब कीमतें बढ़ती हैं, तो आर्थिक उत्पादन का नॉमिनल मूल्य बढ़ता है, भले ही वस्तुओं और सेवाओं की वास्तविक मात्रा उसी गति से न बढ़े. इससे ऋण-से-जीडीपी अनुपात अधिक प्रबंधनीय लग सकता है. साफ शब्दों में समझें, तो अगर नॉमिनल जीडीपी कर्ज की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती है, तो डॉलर के संदर्भ में विश्व पर अधिक ऋण हो सकता है, जबकि उसका ऋण अनुपात कम हो जाता है.

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भारत-US ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट, 90% काम पूरा; कुछ मुद्दे बाकी https://eveningtimescg.com/major-update-on-india-us-trade-deal-90-of-work-complete-a-few-issues-remain/ Sun, 27 Sep 2026 03:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/major-update-on-india-us-trade-deal-90-of-work-complete-a-few-issues-remain/  नई दिल्‍ली

भारत और अमेरिका के संबंधों में सालो से व्‍यापार सबसे बड़ा अड़चन बना हुआ था, लेकिन अब दोनों देश एक निर्णायक मोड़ क करीब दिख रहे हैं. अमेरिकी विदेश विभाग के सीनियर अधिकारी ने कहा है कि प्रस्‍ताव‍ित समझौता 90 फीसदी से ज्‍यादा पूरा हो चुका है, बस मसले बचे हुए हैं।  

अधिकारी ने कहा कि यह डील दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जा सकता है. PTI के इस सवाल- कब डील पर साइन हो सकता है, के जवाब में अधिकार ने कहा कि मैं यही कहूंगा कि देखते रहिए, जैसा कि हम बार-बार कहते हैं, 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है और बस कुछ आखिरी चीजें तय की जा रही हैं. इस कारण मुझे उम्‍मीद है कि आपको इस बारे में बहुत जल्‍द कुछ जानकारी मिलेगी। 

अधिकारी ने आगे कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा. अधिकारी ने यह भी कहा कि और इससे वास्तव में अमेरिका-भारत संबंधों में एक नया आयाम जुड़ेगा, जो व्यापार के मामले में दशकों से हमारे लिए संभव नहीं हो पाया है. यह हमेशा से ही संबंधों में सबसे बड़ी बाधा रही है। 

पीयूष गोयल ने कहा- बस ये काम बाकी
इससे पहले कमर्शियल और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी संकेत दिया था कि बातचीत लगभग पूरी होने वाली है. गुरुवार को नई दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे दिया है, जिनमें अमेरिका के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है. उन्होंने आगे कहा कि हमें बस अपने लिए सही लाभ खोजना है ताकि हम समझौते को जल्‍द से लागू कर सकें। 

भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के ढांचे का ऐलान किया था. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ में बदलाव के कारण आगे की बातचीत की आवश्यकता पड़ी. गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते वैश्विक जीडीपी के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से वाले बाजारों तक तरजीही पहुंच प्रदान करेंगे। 

पीएम मोदी दिसंबर में अमेरिकी यात्रा पर 
अमेरिकी अधिकरी ने संबंधों में चल रही व्‍यस्‍तता की ओर भी इशारा किया. विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्‍टूबर में भारी दौरे पर आने वाले हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में फ्लोरिडा में होने वाले G20 शिखर सम्‍मेलन के लिए अमेरिका की यात्रा करेंगे. अधिकारी ने कहा कि संबंधों में बहुत कुछ चल रहा है. अधिकारी ने कहा कि क्वाड देशों के विदेश मंत्री इस साल तीसरी बार मिलने वाले हैं।  

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सोना-चांदी 4 दिन में धड़ाम, ₹7,000 तक टूटी चांदी https://eveningtimescg.com/gold-and-silver-prices-crash-in-4-days-silver-drops-by-up-to-%e2%82%b97000/ Fri, 25 Sep 2026 07:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/gold-and-silver-prices-crash-in-4-days-silver-drops-by-up-to-%e2%82%b97000/ इंदौर 
सोमवार से गुरुवार तक सोने-चांदी के भाव लगातार 4 दिन तक गिरे। क्या गिरावट आगे भी जारी रहेगी या फिर से गोल्ड-सिल्वर के भाव चढ़ेंगे। क्योंकि, आगे करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं। इन त्योहारों में सोने-चांदी की डिमांड बढ़ जाती है। अगर पिछले चार दिनों की बात करें तो इस अवधि में चांदी करीब 7000 रुपये और सोना करीब 2,500 रुपये सस्ता हो चुका है।

इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक गुरुवार को भी 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,231 रुपये सस्ता होकर 1.51 लाख रुपये पर आ गया। वहीं, एक किलो चांदी 4,518 रुपये टूटकर 2.28 लाख रुपये पर पहुंच गई।

क्या सोने-चांदी में यह गिरावट आगे भी रहेगी जारी

ऑस्ट्रेलिया के हेज फंड मैनेजर राफेल लैम का मानना है कि सोने में हाल की गिरावट टेंपरेरी है। उनका लॉन्ग-शॉर्ट गोल्ड फंड पिछले साल लॉन्च होने के बाद से निवेशकों को 200% से ज्यादा नेट रिटर्न दे चुका है। लैम का तर्क है कि सोने की लॉन्ग-टर्म तेजी को सहारा देने वाली मुख्य ताकतें अभी भी बरकरार हैं।

क्यों बढ़ेंगे सोने के दाम

ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक लैम ने कहा कि “बड़े बाजारों की राजकोषीय हालत टिकाऊ नहीं है”, खासकर अमेरिकी सरकार का 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज और केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीदारी सोने को मीडियम से लॉन्ग टर्म में सपोर्ट देगी। उन्होंने कहा कि नजदीकी समय में कीमतें अमेरिका-ईरान युद्ध, रियल ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़ों से तय होंगी। लैम, मार्क लांडाऊ के साथ 1.5 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (1.1 अरब अमेरिकी डॉलर) के एल1 गोल्ड फंड को को-मैनेज करते हैं।

ईरान युद्ध और ब्याज दरों का दबाव

जनवरी में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद से सोने पर दबाव है। एनर्जी की कीमतें चढ़ने और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें बढ़ाने के दांवों से सोने जैसी ब्याज न देने वाली धातु पर असर पड़ा है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोना करीब 16% गिर चुका है।

लैम ने एक इंटरव्यू में कहा, “ईरान युद्ध के बाद से सोने के बाजार और कीमतों के लिए कुछ विपरीत हवाएं जरूर आई हैं, लेकिन हमारे हिसाब से ये बहुत टेंपरेरी हैं। सोने की मांग को चलाने वाले ज्यादातर मुख्य कारक मीडियम टर्म में बने रहेंगे, बल्कि और मजबूत होंगे।”

सोना 4,286 डॉलर प्रति औंस पर

सिडनी में गुरुवार शाम सोना 4,286.01 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था। लैम ने कहा, “जब सोने की कीमत 4,000 डॉलर के नीचे गई, तो हमने अपनी लॉन्ग पोजिशन काफी आक्रामक तरीके से बढ़ानी शुरू की। अब हम इसे वहीं रखे हुए हैं, यानी लो-टू-मिड 60% नेट लॉन्ग।” उन्होंने कहा कि अगर सोने की कीमत में और तेजी की उम्मीद सच होती है, तभी फंड लॉन्ग पोजिशन घटाने पर विचार करेगा।

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IRDAI के प्रस्ताव से बीमा शेयरों में भूचाल, 36% तक टूटे स्टॉक्स https://eveningtimescg.com/irdai-proposal-sparks-turmoil-in-insurance-stocks-shares-plunge-up-to-36/ Fri, 25 Sep 2026 05:34:00 +0000 https://eveningtimescg.com/irdai-proposal-sparks-turmoil-in-insurance-stocks-shares-plunge-up-to-36/ मुंबई 
शेयर बाजार में गुरुवार को भारी तबाही देखने को मिली थी. खासकर बीमा कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्‍यादा तबाही दिखी, जहां PB Fintech के शेयरों में 36 फीसदी तक की गिरावट आई. इसके बाद Turtlemint के शेयर करीब 20 फीसदी तक गिर गए. साथ ही HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली. आज भी इन शेयरों में गिरावट देखी जा रही है। 

इन सभी शेयरों में गिरावट की एक खास वजह, IRDAI का एक प्रस्‍ताव था. इसमें कुछ ऐसी बातों का जिक्र किया गया है, जिससे इन कंपनियों का रेवेन्‍यू घट जाएगा. साथ ही प्रॉफिट और मार्जिन पर भी तगड़ा असर होने की उम्‍मीद जताई गई है. इसी कारण, इन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई, लेकिन अब सवाल ये है कि आखिर इस प्रस्‍ताव में ऐसा क्‍या है, जिस कारण किसी कंपनी का शेयर 36 फीसदी तक टूट सकता है? आइए जानते हैं पूरी डिटेल… 

पॉलिसी पेपर में ऐसा क्‍या है?  
1. कमीशन पर लिमिट लगाने की तैयारी 

IRDAI ने लाइफ, हेल्‍थ और मोटर बीमा में प्रोडक्‍ट्स और ड‍िस्‍ट्रीब्‍यूशन चैनल के हिसाब से कमीशन लिमिट दोबारा लागू करने का प्रस्ताव दिया है. साल 2023 में कमीशन पर मौजूद सेगमेंट वाली लिमिट हटाई गई थी।  

2. हेल्‍थ और टर्म इंश्‍योरेंस में कमीशन
एक्‍सपर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ढांचे में हेल्‍थ और टर्म इंश्‍योरेंस के नए बिजनेस पर कमीशन काफी कम हो सकता है. कुछ मामलों में अनुमानित कटौती करीब एक-तिहाई से दो-तिहाई तक की जा सकती है। 

3. लाइफ इंश्‍योरेंस में कमीशन 
अभी कमीशन का बड़ा हिस्‍सा पॉलिसी बेचने के समय या शुरुआती अवधि में मिल सकता है. प्रस्‍ताव में कहा गया है कि इस पॉलिसी टर्म के दौरान ज्‍यादा फैलाना चाहिए. इससे असर होगा कि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन की शुरुआती कमाई प्रभावित होगी और कंपनियों का रेवेन्‍यू घट सकता है। 

4. बीमा कंपनियों के खर्च की सीमा घटाने का प्रस्ताव
IRDAI ने एक्‍सपेंसेस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) को भी राश्‍नलाइज करने का प्रस्ताव रखा है. जनरल इंश्‍योरेंस के लिए EoM सीमा को पांच साल में GWP के 30% से डोमेस्टिक GDPI के 20% तक लाने का प्रस्ताव बताया गया है. इससे कंपनियों की कमाई पर तगड़ा असर हो सकता है। 

5. लोन के साथ जबरन बीमा बेचने पर रोक 
बैंकों और एनबीएफसी को लोन के साथ इंश्‍योरेंस को अनिवार्य करने से रोकने का प्रस्‍ताव दिया गया है. इससे उन बैंकों की इंश्‍योरेंस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन फीस इनकम पर भी असर पड़ने की आशंका बाजार में बनी है। 

6. डॉर्क पैटर्न पर रोक 
कंपनियों को ऐसी डिजान या प्रॉसेस से रोकना है, जिसमें कस्‍टमर्स को किसी खास विकल्प की ओर भ्रमित या मजबत किया जा रहा है. जैसे प्रोडक्‍ट की कीमत या बाकी फीचर्स की जानकारी से पहले ही कस्‍टमर्स से पूरी डिटेल मांगना है। 

सीधे शब्‍दों में कहें तो IRDAI का प्रस्ताव कहता है कि इंश्‍योरेंस बेचने पर कंपनियों या डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स कितना कमीशन ले सकेंगे, खर्च कितना कर सकेंगे और कस्‍टमर्स को पॉलिसी कैसे बेच सकेंगे, इन सभी पर ज्‍यादा कंट्रोल होगा. बाजार को डर है कि इन कमीशन बेस्‍ड कमाई से कंपनियों की अर्निग पर बड़ा झका लग सकता है। 

सरकार क्‍यों लेकर आई ये प्रस्‍ताव? 

    इंश्योरेंस की बिक्री में मिस-सेलिंग कम करना
    इंश्योरेंस की लागत कम करना
    ग्राहक को पता चले कि उसका पैसा किसे और क्यों जा रहा है
    बैंक से लोन लेते समय जबरन Insurance बेचने की शिकायतें रोकना

3 जुलाई को आई थी ये रिपोर्ट 
जुलाई में ही ये प्रस्‍ताव पब्लिक हो गया था. रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि IRDAI commission व्यवस्था में बड़ा बदलाव तैयार कर रहा है. खासकर बड़े अपफ्रंट में कमीशन को कम करके पॉलिसी की अवधि में भुगतान पर विचार कर रहा है. तब 4 से 5 सप्‍ताह में इसे लाने का प्रस्‍ताव था, लेकिन इसे 2 से 3 महीने के बाद पेश किया गया है। 

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Stock Market Crash: खुलते ही शेयर बाजार में हाहाकार, Sensex 700 अंक से ज्यादा टूटा https://eveningtimescg.com/stock-market-crash-chaos-at-the-opening-bell-sensex-plunges-over-700-points/ Thu, 24 Sep 2026 05:32:00 +0000 https://eveningtimescg.com/stock-market-crash-chaos-at-the-opening-bell-sensex-plunges-over-700-points/ मुंबई 
 पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली समेत अन्य वजहों से आज घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दिखी है। इससे निवेशकों के बीच हाहाकार वाली स्थिति हो गई। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स700  अंकों की गिरावट के साथ लाल निशान में 74,272.40 पर अपने कारोबार की शुरुआत की है। 9 बजकर 20 मिनट में इसमें 643.55 अंकों की गिरावट दिखी। यह 0.86 फीसदी गिरकर 74,184.70 पर ट्रेड कर रहा था।

50 शेयरों वाला निफ्टी 9 बजकर 21 मिनट पर 0.92% गिरा दिखा। यह 215.30 अंक लुढ़ककर लाल निशान में 23,231.50 पर ट्रेड कर रहा था। इसकी आज की ओपनिंग 23,221.80 रही। आइए जानते हैं कि आज किन शेयरों में सबसे अधिक तेजी और किसमें सबसे अधिक गिरावट दिखी है। इसके साथ ही जानेंगे कि मार्केट में यह गिरावट आखिरकार क्यों आई है और एक्सपर्ट क्या कहते हैं।

सेंसेक्स-निफ्टी में खुलते ही भूचाल 
गुरुवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,828 की तुलना में गिरकर 74,272 पर ओपन हुआ और फिर कुछ ही मिनटों में ये तेजी से क्रैश होता चला गया. महज पांच मिनट के कारोबार के दौरान Sensex 700 अंकों से ज्यादा की गिरावट लेकर 74,120 के लेवल पर आ गया था। 

बात एनएसई निफ्टी की करें, तो ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलता हुआ नजर आया. Nifty अपने पिछले बंद 23,446 की तुलना में गिरावट लेकर 23,221 पर खुला और फिर 200 अंक से ज्यादा टूटकर 23,205 के लेवल पर कारोबार करता हुआ नजर आया।  

ताश के पत्तों की तरह बिखरे ये शेयर 
Share Market Crash के बीच रिलायंस से लेकर एचडीएफसी बैंक तक के शेयर गिरावट में ओपन हुए. अगर सबसे ज्यादा बिखरने वाले शेयरों की बात करें, तो इस लिस्ट में बीएसई लार्जकैप में शामिल Bajaj Finance Share (5%), Axis Bank Share (3.70%), Bajaj Finserve Share (3.50%), Kotak Bank Share (2%) की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। 

इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Policy Bazar Share (10%), MFSL Share (9.10%), AU Bank Share (5%), IDFC First Bank Share (3.30%), Yes Bank Share (2.60%) फिसल गए। 

NSE IPO की आज लिस्टिंग, क्या होगा? 
शेयर बाजार में तबाही मची है और ऐसे माहौल में एनएसई के शेयरों का स्टॉक मार्केट डेब्यू होने जा रहा है. ऐसे में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. यहां बता दें कि 22,561.57 करोड़ रुपये साइज का ये NSE IPO 17 से 21 सितंबर तक ओपन हुआ था और निवेशकों ने इसे अच्छा रिस्पांस दिया था. हालांकि, ग्रे मार्केट में ये आईपीओ सुस्त लिस्टिंग का संकेत देता आ रहा है. लिस्ट होने से ऐन पहले NSE IPO GMP महज 2 फीसदी के आसपास है।  

बाजार क्रैश के ये बड़े कारण 
शेयर बाजार में गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो अमेरिका से लेकर एशियाई बाजारों तक में गिरावट के शेयर मार्केट का सेंटीमेंट खराब हुआ है. डाउ जोंस बीते कारोबारी दिन 250 अंक फिसला था. इसके पीछे वजह ये थी कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के दो दशक के हाई पर पहुंच गई. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में उछाल जारी है और ये 100 डॉलर के पार कारोबार कर रहा है। 

सेंसेक्स के टॉप गेनर्स और लूजर्स कौन रहे?

9 बजकर 24 मिनट पर सेंसेक्स के 30 शेयरों में से टॉप गेनर्स और लूजर्स की लिस्ट

सेंसेक्स के टॉप गेनर्स सेंसेक्स के टॉप लूजर्स
टेक महिंद्रा (1.24%) बजाज फाइनेंस (4.52%)
सनफार्मा (0.45%) बजाज फिनसर्व (3.58%)
एचसीएल टेक (0.27%) एक्सिस बैंक (3.42%)
टीसीएस (0.12%) कोटक महिंद्रा बैंक (1.99%)
इन्फोसिस (0.00%) इंडिगो (1.56%)

निफ्टी के टॉप गेनर्स और लूजर्स कौन रहे? 

9 बजकर 44 मिनट पर निफ्टी के 50 शेयरों में से टॉप गेनर्स और लूजर्स की लिस्ट

निफ्टी के टॉप गेनर्स निफ्टी के टॉप लूजर्स
एसबीआई लाइफ (1.08%) एचडीएफसी लाइफ (7.61%)
टेक महिंद्रा (0.44%) बजाज फाइनेंस (4.30%)
आईसीआईसीआई बैंक (0.29%) एक्सिस बैंक (3.68%)
टाटा स्टील (0.13%) बजाज फिनसर्व (2.94%)
सनफार्मा (0.11%) कोटक महिंद्रा बैंक (1.95%)

आज शेयर बाजार क्यों गिरा है?

आज शेयर बाजार के गिरने के प्रमुख 5 कारण हैं। हमारे सहयोगी ईटी की एक रिपोर्ट में ये वजहें बताई गईं हैं-

  • बॉन्ड यील्ड 19 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची।
  • फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद।
  • तेल की कीमतों में उछाल।
  • कमजोर ग्लोबल संकेत।
  • रुपये में गिरावट।
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Xbox में फिर बड़ी छंटनी, सैकड़ों कर्मचारियों की गई नौकरी; COO का भावुक ई-मेल https://eveningtimescg.com/major-layoffs-at-xbox-again-hundreds-of-employees-lose-jobs-coo-sends-emotional-email/ Thu, 24 Sep 2026 05:10:00 +0000 https://eveningtimescg.com/major-layoffs-at-xbox-again-hundreds-of-employees-lose-jobs-coo-sends-emotional-email/  नई दिल्ली
माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग डिवीजन एक्सबॉक्स ने एक बार फिर छंटनी का बड़ा चाबुक चलाया है. महज कुछ ही महीनों के भीतर कंपनी में छंटनी का यह दूसरा बड़ा दौर है. एक्सबॉक्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आशा शर्मा की अगुवाई में चल रहे Xbox रीसेट के तहत सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरियां छीन ली गई हैं। 

एक्सबॉक्स की वेबसाइट पर शेयर किए गए एक आधिकारिक मेमो में कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) मैट बूटी ने पुष्टि की है कि इस बार 268 नौकरियों को खत्म किया जा रहा है। 

यह छंटनी एक्सबॉक्स के कई प्रमुख गेमिंग स्टूडियोज में काम कर रहे कर्मचारियों को प्रभावित करेगी. अपने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए मैट बूटी ने लिखा कि हमारे सहयोगियों ने अब तक जो कुछ भी बनाया है, उसके लिए मैं उनका बेहद आभारी हूं. मैं जानता हूं कि आज का दिन कंपनी छोड़कर जाने वाले साथियों और उनके आसपास की टीमों के लिए कितना कठिन और दर्दनाक होगा। 

दो महीनों में दूसरी बार गिरी गाज
यह नई छंटनी जुलाई में घोषित 1,600 कर्मचारियों की बड़ी छंटनी के ठीक बाद आई है. ये सभी कटौतियां माइक्रोसॉफ्ट की उस व्यापक योजना का हिस्सा हैं, जिसके तहत वित्त वर्ष 2027 (जो जून 2027 में समाप्त होगा) तक कुल 3,200 पदों को खत्म किया जाना है। 

कंपनी के इस भारी फेरबदल में सिर्फ छंटनी ही शामिल नहीं है, बल्कि कई मशहूर गेमिंग स्टूडियोज का मर्जर किया जा रहा है और एक्टिविजन, बैथेस्डा और किंग जैसे बड़े स्टूडियोज की जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ाया जा रहा है. जुलाई की छंटनी से पहले वैश्विक स्तर पर एक्सबॉक्स के पास लगभग 16,000 कर्मचारी काम कर रहे थे। 

कंपनी 6 अक्टूबर को एक 'टाउन हॉल' (कर्मचारियों के साथ मीटिंग) आयोजित करने जा रही है, जहां बीते महीनों में हुई उथल-पुथल और डिवीजन की प्रगति पर चर्चा की जाएगी। 

एक्सबॉक्स कर्मचारियों को भेजा गया मेमो  पढ़ें- 

टीम,

मैं आप सभी के साथ इस वर्ष की शुरुआत में तय किए गए 'XBOX रीसेट' के तहत कई महत्वपूर्ण अपडेट साझा करने के लिए यह पत्र लिख रहा हूं। 

पहला: हम हेलो स्टूडियोज, अन्य फर्स्ट-पार्टी स्टूडियोज, एक्सजीएस मैनेजमेंट और सेंट्रल फंक्शंस लेयर में कुल 268 पदों को खत्म कर रहे हैं. जुलाई के बाद से  स्टूडियोज का पुनर्गठन समेत उठाए गए कदमों ने हमें पहले से घोषित रीस्ट्रक्च‍रिंग  के लगभग तीन-चौथाई हिस्से तक पहुंचा दिया है. हमारे सहयोगियों ने जो कुछ भी बनाया है, उसके लिए मैं उनका दिल से आभारी हूं और मैं समझ सकता हूं कि जाने वाले कर्मचारियों और उनकी टीमों के लिए आज का दिन कितना कठिन होगा। 

दूसरा: हम अपने स्टूडियोज का पुनर्गठन कर रहे हैं. इसका मुख्य उद्देश्य कम बिजनेस यूनिट्स चलाकर अपनी फ्रेंचाइजी और गेम्स को मजबूत करना है. हम उन समूहों को एक साथ ला रहे हैं जो पहले से ही मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि पब्लिशिंग विशेषज्ञता को एक जगह केंद्रित किया जा सके। 

एक्टिविजन अब वर्ल्ड्स एज (World’s Edge) और रेयर (Rare) का काम भी संभालेगा. इसके अलावा, एक्टिविजन 'हेलो' (Halo) के अगले टाइटल को विकसित करेगा. इसके लिए एक नई और समर्पित टीम बनाई जा रही है, जो कॉल ऑफ ड्यूटी के चल रहे काम से बिल्कुल अलग होगी. हेलो स्टूडियोज में एक छोटी टीम हेलो कम्युनिटी और मौजूदा गेम्स को सपोर्ट करना जारी रखेगी। 

बैथेस्डा के दायरे में अब 'ऑब्सीडियन' को भी शामिल किया जाएगा. ऑब्सीडियन अपने मौजूदा प्रोजेक्ट्स ('ग्राउंडेड' समेत) और बैथेस्डा गेम स्टूडियोज के साथ मिलकर नए 'फॉलआउट' प्रोजेक्ट पर काम जारी रखेगा। 

किंग का दायरा बढ़ाकर इसमें 'माइक्रोसॉफ्ट कैजुअल गेम्स' को शामिल किया जाएगा, जिससे कैजुअल गेम डिजाइन के दो वैश्विक लीडर्स एक साथ आ जाएंगे। 

प्लेग्राउंड और टर्न दोनों स्टूडियोज मिलकर अब एक हो जाएंगे, जिनका पूरा फोकस 'फॉरजा' और 'फेबल' फ्रेंचाइजी पर रहेगा. ये दोनों स्टूडियो पिछले एक दशक से अधिक समय से क्रिएटिव पार्टनर्स रहे हैं और आज के बदलाव से उनका काम औपचारिक रूप से एक ही टीम के तहत आ जाएगा। 
मेमो में ल‍िखा कि आज हमारा पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की मदद करने और एक-दूसरे के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने पर होना चाहिए. मैं अगले सप्ताह अपने स्टूडियोज में समय बिताऊंगा। 

हमारे 6 अक्टूबर के टाउन हॉल में, हम सभी 'ALL-XBOX' टीम के रूप में एक साथ आएंगे, अपनी प्रगति पर विचार करेंगे और अपने इतिहास के सबसे मजबूत गेम लाइनअप की ओर आगे देखेंगे। 

मैट
आईटी और गेमिंग इंडस्ट्री में जारी यह छंटनी का दौर एक बार फिर साबित कर रहा है कि वैश्विक मंदी और रीस्ट्रक्चरिंग की गाज सबसे पहले कर्मचारियों की नौकरियों पर ही गिरती है। 

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Hyundai Bayon की बुकिंग शुरू, सिर्फ ₹11 हजार में करें बुक; जल्द होगी लॉन्च https://eveningtimescg.com/hyundai-bayon-bookings-open-book-for-just-%e2%82%b911000-launch-coming-soon/ Thu, 24 Sep 2026 05:01:00 +0000 https://eveningtimescg.com/hyundai-bayon-bookings-open-book-for-just-%e2%82%b911000-launch-coming-soon/  नई दिल्ली

मिडसाइज एसयूवी सेगमेंट में हुंडई एक नई कार लेकर आ रही है. हम बात कर रहे हैं हुंडई बेयॉन (Hyundai Bayon) की. इस कार की बुकिंग शुरू हो चुकी है. 11 हजार रुपये खर्च करके आप इस एसयूवी (SUV) को बुक कर सकते हैं. एसयूवी को आप हुंडई की आधिकारिक वेबसाइट या फिर हुंडई डीलरशिप से बुक कर सकते हैं। 

ब्रांड ने लॉन्च से पहले इस कार के कई टीजर ड्रॉप किए हैं. बेयॉन को कंपनी वेन्यू और क्रेटा के बीच में कहीं लॉन्च कर सकती है. ये कार त्योहारी सीजन से पहले लॉन्च हो सकती है. वैसे कंपनी ने ग्लोबल मार्केट में इसके डेब्यू की तारीख तय कर दी है. आइए जानते हैं इस एसयूवी की खास बातें। 

कब लॉन्च होगी हुंडई बेयॉन? 
वैसे भारतीय बाजार में ये कार दिवाली से पहले लॉन्च होनी है, लेकिन कंपनी ने इसकी तारीखों का ऐलान नहीं किया है. ग्लोबल मार्केट को लेकर इसकी जानकारी सामने आ चुकी है. हुंडई इस एसयूवी को 12 अक्टूबर 2026 को पेरिस मोटर शो में अनवील करने वाली है. यूरोप में इसकी एंट्री की तारीखें तो कन्फर्म हो गई हैं. भारत में भी ये एसयूवी अक्टूबर में ही लॉन्च हो सकती है।  

क्या होगा हुंडई बेयॉन में खास? 
बेयॉन को कई मौकों पर टेस्टिंग के दौरान देखा गया है. हुंडई ने इसके कई टीजर भी जारी किए गए हैं, जिससे कार के डिजाइन का अंदाजा लगाया जा सकता है. बेयॉन का ओवरऑल लुक एक क्रॉसओवर जैसा होगा. यानी आप इसे कुछ-कुछ मारुति सुजुकी फ्रॉन्क्स जैसा समझ सकते हैं। 

एसयूवी में स्प्लिट हेडलैम्प्स का सेटअप मिलेगा, जो एच-शेप्ड एसईडी डीआरएल्स के साथ आएगी. मेन हेडलैम्प बंपर पर होंगे. इसमें रग्ड लुक वाला स्किड प्लेट मिलेगा. बेयॉन में रेगुलर पुल टाइप डोर हैंडल मिलेंगे. इसके अलावा फंक्शनल रूफ रेल्स और अच्छा खासा व्हील आर्च मिलेगा।  

रियर में स्लिम एलईडी लाइट बैंड मिलेगा. एसयूवी में पैनोरोमिनक सनरूफ दिया जा सकता है. ये कार 4 मीटर से बड़ी हो सकती है. इंटीरियर की बात करें, तो ये कार नई आई20 जैसे इंटीरियर के साथ आएगी. इसमें वर्टिकल एसी वेंट और फिजिकल कंट्रोल मिलेंगे। 

बेयॉन में 1.5 लीटर का फोर सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलेगा, जो सीवीटी गियरबॉक्स के साथ आ सकता है. इसके साथ ही कंपनी फैक्टरी फिटेड सीएनजी किट ऑफर कर सकती है. इसमें अंडर बॉडी टैंक देखने को मिल सकता है, जैसा मारुति सुजुकी विक्टोरिस में आता है. इसकी कीमत 9 लाख रुपये से 14 लाख रुपये एक्स शोरूम के बीच हो सकती है। 

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क्या लौटेगी Ambassador? हिंदुस्तान मोटर्स ने उत्तरपारा प्लांट को लेकर बढ़ाई हलचल https://eveningtimescg.com/will-the-ambassador-make-a-comeback-hindustan-motors-stirs-up-activity-regarding-the-uttarpara-plant/ Thu, 24 Sep 2026 04:22:00 +0000 https://eveningtimescg.com/will-the-ambassador-make-a-comeback-hindustan-motors-stirs-up-activity-regarding-the-uttarpara-plant/ कलकत्ता

हिंदुस्तान मोटर्स व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग में वापसी करने की तैयारी में है. एक वक्त था जब हिंदुस्तान मोटर्स की एंबेसडर का भारतीय बाजार में दबदबा था. ये कार 'पावर' की पहचान हुआ करती थी. कोई बड़ा नेता हो या फिर किसी महकमे का बड़ा अधिकारी एंबेसडर ही उनकी सवारी हुआ करती थी. लेकिन वक्त के साथ इस कार की रफ्तार थम गई।  

अब ऐसी चर्चाएं हैं कि कंपनी इस कार को वापस मार्केट में उतारने की तैयारी में जुटी हुई है. रिपोर्ट्स की मानें, तो कंपनी पश्चिम बंगाल के उत्तरपारा में व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत करना चाहती है. इस बार कंपनी का फोकस इलेक्ट्रिक व्हीकल पर होगा। 

सीकेए बिरला ग्रुप ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार से संपर्क भी किया है. इस संबंध में राज्य सरकार ने फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है. हिंदुस्तान मोटर्स ने 2014 में अपने ऑपरेशन को बंद कर दिया था. वहीं पश्चिम बंगाल के पास लगभग दो दशक बाद ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम में वापसी करने का एक और मौका होगा। 

जॉइंट वेंचर में होगा प्लांट
2008 में टाटा नैनो प्रोजेक्ट के सिंगूर से बाहर होने के बाद राज्य को ऑटोमोबाइल सेक्टर से कोई बड़ा निवेश मिला नहीं है. वहीं सीकेए बिरला ग्रुप अभी भी ऑटोमोटिव कंपोनेंट इंडस्ट्री में बना हुआ है. रिपोर्ट्स की मानें तो हिंदुस्तान मोटर्स का ये ईवी प्लांट किसी अमेरिकी या यूरोपियन कंपनी के साथ जॉइंट वेंचर हो सकता है। 

इस खबर के आने के बाद एंबेसडर की वापसी की चर्चा होने लगी है. हालांकि, ये चर्चा ही है फिलहाल. इस संबंध में कोई भी ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. एंबेसडर की वापसी मुश्किल इसलिए भी है क्योंकि हिंदुस्तान मोटर्स के पास इस नाम को इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। 

क्यों मुश्किल है एंबेसडर की वापसीय़
2017 में हिंदुस्तान मोटर्स ने 80 करोड़ रुपये में इस नाम का ट्रेडमार्क प्यूजो (Peugeot SA) ग्रुप को बेच दिया था. इसका मतलब है कि हिंदुस्तान मोटर्स सीधे इस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. सोशल मीडिया पर आपको एंबेसडर ईवी के कई रेंडर दिख जाएंगे. लेकिन इनमें से कोई भी असली नहीं है. अगर हिंदुस्तान मोटर्स ऑटोमोबाइल सेक्टर में वापसी करता भी है, तो इसका नाम एंबेसडर नहीं होगा। 

वैसे ये पहला मौका नहीं है जब हिंदुस्तान मोटर्स ने इसकी शुरुआत की है. इससे पहले भी कंपनी ने एक यूरोपियन कंपनी के साथ एमओयू साइन किया था. लेकिन कंपनी को उत्तरपारा में प्रोडक्शन शुरू करने की मंजूरी नहीं मिलने के बाद वो मामला ठंडा पड़ गया था। 

 

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चीनी निवेश वाली ऑटो कंपनियों को PLI का लाभ दे सकती है सरकार, बड़ा अपडेट https://eveningtimescg.com/government-may-extend-pli-benefits-to-auto-companies-with-chinese-investment-major-update/ Thu, 24 Sep 2026 03:32:00 +0000 https://eveningtimescg.com/government-may-extend-pli-benefits-to-auto-companies-with-chinese-investment-major-update/  नई दिल्‍ली
सरकार चीन निवेश वाली कंपनियों को सपोर्ट दे सकती है. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार चीनी निवेश वाली ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट कंपनियों से प्रोडक्‍ट-लिंक इनसेंटिव (PLI) योजना के तहत आवेदन पर विचार कर सकती है. इससे JSW एमजी मोटर इंडिया और टाटा ऑटोकोम्प सिस्टम्स की दो साझेदारियों समेत कई कारोबारों को लाभ मिल सकता है। 

द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि डायरेक्‍ट विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी प्राप्त मौजूदा पीएलआई आवेदनों पर विचार किया जाएगा. हालांकि, PLI योजना के तहत नए आवेदनों के लिए कोई नई विंडो नहीं खोली जा रही है। 

भारत में MG ब्रांड के यात्री वाहन बेचने वाली JSW MG मोटर इंडिया, JSW ग्रुप और चीन की SAIC मोटर का संयुक्त कारोबार है. टाटा ऑटोकोम्प सिस्टम्स के चीनी कंपनियों के साथ दो कारोबार हैं. प्रेस्टोलाइट इलेक्ट्रिक बीजिंग के साथ साझेदारी में बनी टैको प्रेस्टोलाइट, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन और ट्रैक्शन मोटर्स का डिजाइन और निर्माण करती है. एयर इंटरनेशनल शंघाई कंपनी के साथ साझेदारी में बनी टैको एयर इंटरनेशनल, ऑटोमोटिव एयर कंडीशनिंग सिस्टम का निर्माण करती है। 

भारत-चीन संबंधों में सुधार
यह फैसला ऐसे समय आया है जब जून 2020 में गलवान घाटी की झड़पों के बाद सालों के तनाव के बाद भारत-चीन संबंधों में सुधार हुआ है. इस महीने की शुरुआत में, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी। 

दोनों देशों ने मंत्रिस्तरीय और आधिकारिक स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ाया है और सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है. भारत ने चीनी निवेश से जुड़े डायरेक्‍ट विदेशी निवेश प्रस्तावों की मंजूरी में तेजी लाने के लिए नए गाइडलाइन जारी किए हैं। 

इस चीनी निवेश पर मिली थी मंजूरी
चीनी डायरेक्‍ट निवेश प्रस्तावों की लंबित मंजूरी के कारण कुछ पीएलआई आवेदनों की प्रक्रिया में देरी हुई थी. अधिकारी ने बताया कि डिक्सन टेक्नोलॉजीज के एक चीनी साझेदार के साथ इलेक्ट्रॉनिक घटकों के लिए किए गए उद्यम सहित कुछ आवेदनों को पीएलआई लाभों के लिए पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. ऑटो पीएलआई योजना को सितंबर 2021 में ₹25,938 करोड़ के बजट आवंटन के साथ मंजूरी दी गई थी. प्रोत्साहन राशि अन्य मानदंडों के साथ-साथ उत्पादन में बढ़ोतरी, निवेश और घरेलू से जुड़ी हुई है। 

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