मध्यप्रदेश – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Thu, 01 Oct 2026 17:40:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg मध्यप्रदेश – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 भोपाल दुग्ध संघ की 44वीं वार्षिक साधारण सभा संपन्न https://eveningtimescg.com/bhopal-milk-unions-44th-annual-general-meeting-concludes/ Thu, 01 Oct 2026 17:40:00 +0000 https://eveningtimescg.com/bhopal-milk-unions-44th-annual-general-meeting-concludes/ भोपाल 

भोपाल सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित, भोपाल की वर्ष 2025-26 की 44वीं वार्षिक साधारण सभा की बैठक पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय एवं संस्थान, साइंस हिल्स, भोपाल के ऑडिटोरियम में 30 सितंबर को हुई। वार्षिक साधारण सभा की अध्यक्षता संभागायुक्त भोपाल संभाग, भोपाल एवं प्रशासक, भोपाल सहकारी दुग्ध संघ मर्यादित, भोपाल के प्रतिनिधि श्री पी.सी. शाक्य, अपर कलेक्टर द्वारा की गई। संघ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, श्री प्रीतेश जोशी द्वारा वार्षिक साधारण सभा में रखे गए प्रस्तावों का अनुमोदन प्राप्त किया गया।

दुग्ध संकलन और दूध उत्पादकों को रिकॉर्ड भुगतान

वर्ष 2025-26 के दौरान भोपाल दुग्ध संघ से जुड़ी 2,646 सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से औसतन 3.77 लाख किलोग्राम प्रतिदिन दूध का संकलन किया गया, जो विगत वर्ष (2024-25) की 2,110 समितियों से प्राप्त 3.15 लाख किलोग्राम प्रतिदिन की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। दुग्ध संघ ने वर्ष 2025-26 में दुग्ध उत्पादकों को समितियों के माध्यम से ₹674.44 करोड़ का भुगतान किया, जो पिछले वर्ष के ₹485.39 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है। इसके साथ ही दुग्ध संघ ने पशुपालकों के हित में बड़ा निर्णय लेते हुए 1 अक्टूबर 2026 से अब तक की सर्वोच्च क्रय दर ₹890/- प्रति किलोग्राम फैट लागू कर दी है।

दुग्ध समितियों के लाभ और पशुपालन सेवाओं में बढ़ोतरी

वर्ष 2025-26 में दुग्ध समितियों ने ₹1,100.49 लाख का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो विगत वर्ष के ₹864.15 लाख से अधिक है। पशुपालकों के लिए संघ द्वारा 29,052 मीट्रिक टन पशु आहार ‘सुदाना' और 64 मीट्रिक टन मिनरल मिक्चर ‘सुदाना' का विक्रय किया गया। इसके अलावा, 324 कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों के माध्यम से 1.21 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए। संघ के प्रशिक्षण केंद्र में पशुपालन, डेयरी संचालन और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित प्रशिक्षण व अभिप्रेरण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

सांची उत्पादों की बिक्री में उछाल और खाद्य सुरक्षा में A+ ग्रेड

उपभोक्ता सेवाओं के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में औसतन 3.05 लाख लीटर पैकेट दूध प्रतिदिन बेचा गया (जो पिछले वर्ष 3.02 लाख लीटर था)। सांची घी की बिक्री में जबरदस्त उछाल देखा गया और यह पिछले वर्ष के 860 मीट्रिक टन से बढ़कर 1,362 मीट्रिक टन पर पहुंच गई।

गुणवत्ता के मामले में भोपाल दुग्ध संघ ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) से 'A+' श्रेणी हासिल की। संघ ने निर्धारित 108 अंकों में से 106 अंक प्राप्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन निधि सिंह द्वारा किया गया। संघ के प्रभारी क्षेत्र संचालन श्री राजेश विजयवर्गीय ने सभी अतिथियों और सदस्यों का आभार व्यक्त किया।

 

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वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में राज्य स्तरीय वन्य-जीव सप्ताह-2026 का आयोजन https://eveningtimescg.com/state-level-wildlife-week-2026-organized-at-van-vihar-national-park/ Thu, 01 Oct 2026 17:20:00 +0000 https://eveningtimescg.com/state-level-wildlife-week-2026-organized-at-van-vihar-national-park/ भोपाल 

वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल में 'जुड़े आवास, वन्य-जीवन का विकास' थीम पर राज्य स्तरीय वन्य-जीव सप्ताह 2026 के प्रथम दिन का आयोजन उत्साह एवं उल्लास के साथ उपस्थित अधिकारियों द्वारा चित्रकारी कर सांकेतिक रूप से किया गया। वन्य-जीव सप्ताह के अवसर पर प्रथम दिन आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में लगभग 1200 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके साथ ही 'एक फोटो, एक कहानी" प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों से वन्य-जीव एवं प्रकृति से संबंधित अपने 52 फोटो एवं उनसे सम्बंधित कहानियों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई। आगंतुकों द्वारा संकल्प लेने के लिये वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में पांच स्थलों पर संरक्षण दीवार (Conservation Wall) लगाई गई है। उक्त संरक्षण दीवार (Conservation Wall) पर बच्चों एवं समस्त आयु वर्ग के आगंतुकों तथा अधिकारियों द्वारा संकल्प लिया जाकर हस्ताक्षर किये गये।

वन्य-जीव सप्ताह 2026 के दौरान वन विहार ने शुरू की वन्य-जीव पासपोर्ट-मेरा 1% वन्यजीवों के लिए अभिनव पहल

इस वर्ष वन्य-जीव सप्ताह 2026 के दौरान वन विहार राष्ट्रीय उद्यान एवं प्राणी उद्यान, भोपाल द्वारा एक नई एवं अभिनव गतिविधि 'वन्य-जीव पासपोर्ट मेरा 1% वन्यजीवों के लिए प्रारंभ की गई है। इस पहल का उद्देश्य वन्य-जीव सप्ताह के आयोजनों को केवल पारंपरिक प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए लोगों और वन्य-जीव संरक्षण के बीच एक अधिक गहरा, सार्थक एवं दीर्घकालिक जुड़ाव स्थापित करना है। इस पहल का व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग केवल वन्य-जीव सप्ताह के दौरान किसी गतिविधि में भाग लेकर ही न रुकें, बल्कि 'वन्य-जीव संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत प्रतिबद्धता लें और पूरे वर्ष तथा संभव हो तो जीवनभर इसके लिए योगदान करते रहें। इस पहल की मूल अवधारणा यह है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने समय, प्रयास अथवा दैनिक कार्यों का कम से कम 1 प्रतिशत वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण के लिए समर्पित कर सकता है। इस प्रकार संरक्षण को वर्ष में केवल एक सप्ताह तक सीमित गतिविधि न बनाकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनावा जा सके।

"वन्य-जीव पासपोर्ट" पहल के अंतर्गत वन विहार के दोनों प्रवेश द्वारों पर पंजीकरण कराने वाले आगंतुकों को 'डिजिटल वन्य-जीव पासपोर्ट प्रदान किया जा रहा है। इसके माध्यम से वे वन विहार के विभिन्न महत्वपूर्ण बाड़ों एवं स्थलों पर स्थापित 10 रोचक वन्य-जीव एवं संरक्षण आधारित चैलेंज स्टेशनों में भाग ले सकते हैं। प्रत्येक स्टेशन पर प्रतिभागियों को वन्य-जीवों से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देना होता है। प्रत्येक चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने पर उन्हें वन विहार के स्वयंसेवकों द्वारा एक 'स्टाम्प' प्रदान किया जाता है। इस गतिविधि को इस प्रकार तैयार किया गया है कि प्रतिभागी वन विहार के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने के साथ-साथ वन्य-जीवों, उनके आवास, जैव विविधता तथा संरक्षण के महत्व के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकें।

इस पहल में 'मध्यप्रदेश के विभिन्न हिस्सों तथा राज्य के बाहर से आए 100 से अधिक उत्साही स्वयंसेवक भी वन विहार के साथ जुड़कर वन्य-जीव सप्ताह की गतिविधियों के आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। ये स्वयंसेवक विभिन्न चैलेंज स्टेशनों पर प्रतिभागियों की सहायता करने, उनका मार्गदर्शन करने, वन्य-जीव पासपोर्ट गतिविधि के संचालन तथा विभिन्न गतिविधियों से जुड़े संरक्षण संदेशों को समझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन स्वयंसेवकों की स्वैच्छिक भागीदारी वन्य-जीव संरक्षण के प्रति नागरिकों में बढ़ती रुचि एवं सहभागिता को दर्शाती है और वन्य-जीव सप्ताह के आयोजनों को एक मजबूत 'सामुदायिक आयाम प्रदान करती है।

10 चैलेंज पूरे करने के बाद प्रतिभागियों को "मेरा 1% वन्य-जीवों के लिए संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस संकल्प के अंतर्गत वे वन्य-जीव एवं प्रकृति संरक्षण के लिए अपने स्तर पर कुछ सार्थक कार्य करने की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता लेते हैं। इस पहल के माध्यम से वन विहार का उद्देश्य संरक्षण को केवल एक सप्ताह के आयोजन के रूप में न रखते हुए इसे 'पूरे वर्ष की आदत और जीवनभर की जिम्मेदारी में परिवर्तित करना है। प्रतिभागियों को अपने संरक्षण संबंधी कार्यों को सोशल मीडिया पर साझा करने तथा वन विहार के सोशल मीडिया हँडल@वनविहारऑफिशल के साथ सहयोग एवं टैग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे वन्य-जीव संरक्षण के लिए निरंतर सक्रिय रहने वाले लोगों का एक व्यापक समुदाय तैयार करने में सहायता मिलेगी।

वन्य-जीव पासपोर्ट के माध्यम से प्रतिभागियों को उनके प्रदर्शन एवं सहभागिता के आधार पर विभिन्न स्तरों पर पहचान भी प्रदान की जा रही है। जो प्रतिभागी सभी 10 चैलेंज के सही उत्तर देकर '10 स्टाम्प' प्राप्त करते हैं, उन्हें "वन्य-जीव संरक्षण राजदूत' का प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। 8-9 स्टाम्प प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को "वन्य-जीव चैंपियन, जबकि 5-7 स्टाम्प प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को "वन्य-जीव एक्सप्लोरर" के रूप में मान्यता दी जाएगी। इस प्रकार इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों को वन्य-जीव सप्ताह समाप्त होने के बाद भी वन्य-जीव संरक्षण से जुड़े रहने के लिए प्रेरित करना है। वन्य-जीव सप्ताह-2026 के 'पहले ही दिन इस पहल को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली, जब कुल 118 आगंतुकों ने वन्य-जीव पासपोर्ट गतिविधि के लिए पंजीकरण कराया। इनमें से 'सु अनन्या बोरासी एवं  चिराग नागपाल प्रथम 'वन्य-जीव संरक्षण राजदूत' बने, जबकि ' हर्षित पटेल, सु खुशी अग्रवाल,  मोहित मेवाड़े एवं  हितेश प्रजापति' को 'वन्य-जीव चैंपियन के रूप में मान्यता दी गई।

वन्य-जीव संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के लिए 'वन्य-जीव संरक्षण राजदूतों को एक वर्ष में वन विहार में 12 निःशुल्क प्रवेश, जबकि "वन्य-जीव चैंपियनों को 6 निःशुल्क प्रवेश प्रदान किए जाएंगे। ये वन्य-जीव संरक्षण राजदूत एवं चैंपियन वन विहार और व्यापक समाज के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेंगे तथा अपने 'परिवार, मित्रों एवं समाज के बीच वन्य-जीव संरक्षण का संदेश पहुंचाने और दूसरों को भी छोटे-छोटे लेकिन सार्थक संरक्षण कार्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।

"वन्य-जीव पासपोर्ट मेरा 1% वन्यजीवों के लिए पहल वन विहार के उस प्रयास को दर्शाती है, जिसके माध्यम से वन्य-जीव सप्ताह को अधिक 'सहभागितापूर्ण, रोचक एवं क्रियाशील' बनाया जा रहा है। केवल व्याख्यानों, प्रतियोगिताओं अथवा समारोहों तक संरक्षण जागरूकता को सीमित रखने के बजाय इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक आगंतुक को एक प्रतिभागी, एक संकल्पकर्ता और अंततः संरक्षण के संदेशवाहक के रूप में विकसित करना है। राज्य के विभिन्न हिस्सों तथा राज्य के बाहर से स्वयंसेवकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस संदेश को और मजबूत करती है कि वन्य-जीव संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है और प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर इसमें योगदान दे सकता है।

इस पहल का मूल संदेश सरल है- 'वन्य-जीव संरक्षण केवल वन्य-जीव सप्ताह के दौरान की जाने वाली गतिविधि नहीं है, बल्कि यह हम सभी की ऐसी जिम्मेदारी है, जिसे हम अपने छोटे-छोटे लेकिन सार्थक प्रयासों के माध्यम से प्रत्येक दिन आगे बढ़ा सकते हैं।

"मेरा 1% वन्यजीवों के लिए मेरा संकल्प, मेरा प्रयास, मेरा योगदान।"

वन्य-जीव सप्ताह के दौरान वन विभाग की विभिन्न शाखाओं एवं सहयोगी संस्थाओं द्वारा भी प्रदर्शनी लगाई गई। इनमें ईको टूरिज्म बोर्ड सामाजिक वानिकी, बांस मिशन, क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, विंध्य हर्बल / एमएफपी पार्क, जैव विविधता बोर्ड एवं रीजनल साइंस सेंटर प्रमुख है।

वन्य-जीव सप्ताह का उद्देश्य आमजन, विद्यार्थियों एवं पर्यटकों में वन्य-जीवों, उनके प्राकृतिक आवास, जैव विविधता एवं वन्य-जीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा प्रकृति के साथ संवेदनशील एवं जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना है।

कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव) एवं मुख्य वन्य-जीव अभिरक्षक डॉ. समीता राजोरा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम  मनोज कुमार अग्रवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) मती बिंदु शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास)  बसवराव अन्निगिरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान एवं विस्तार) मती अर्चना शुक्ला एवं सेवानिवृत प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं सदस्य सचिव म.प्र. जैव विविधता बोर्ड  सुदीप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रोजेक्ट)  एम.एल. मीना, प्रबंध संचालक म.प्र. लघु वनोपज संघ मती कमलिका मोहंता, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य-जीव)  एल. कृष्णमूर्ति, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-2)  अजय कुमार यादव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंधन)  एच.एस. मोहंता, वन संरक्षक भोपाल वृत्त  क्षितिज कुमार सहित वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यालयों के शिक्षक, विद्यार्थी, अभिभावक एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।

02 अक्टूबर को होंगे विभिन्न कार्यक्रम

वन्य-जीव सप्ताह 2026 के अंतर्गत 02 अक्टूबर को वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रातः 7 से 9 बजे तक पक्षी अवलोकन। प्रातः 10 बजे से विद्यालयीन छात्र-छात्राओं के लिए जन-जागरूकता हेतु सृजनात्मक कार्यशाला, जिसमें क्ले मॉडलिंग, पेचर क्रॉफ्ट एवं स्टोन पेंटिंग शामिल हैं। प्रातः 10 से दोपहर एक बजे तक 'मध्यप्रदेश के वन्य-जीव' विषय पर स्टोन पेंटिंग (खुला वर्ग), वुडन टाइल पेंटिंग (खुला वर्ग), कहानी प्रतियोगिता (कक्षा 9 से 12) एवं खजाने की खोज (खुला वर्ग) प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।

 

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3 माह के लंबे इंतजार के बाद खुला पर्यटकों के लिए बांधवगढ़ का द्वार https://eveningtimescg.com/bandhavgarhs-gates-open-to-tourists-after-a-long-three-month-wait/ Thu, 01 Oct 2026 17:20:00 +0000 https://eveningtimescg.com/bandhavgarhs-gates-open-to-tourists-after-a-long-three-month-wait/ भोपाल 

तीन माह के मानसून ब्रेक के बाद विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आज 1 अक्टूबर से नए पर्यटन सत्र की शुरुआत उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। इसके साथ ही टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में जंगल सफारी पुनः प्रारंभ हो गई। पर्यटन सत्र के पहले दिन ताला, मगधी और खितौली गेट को आकर्षक ढंग से सजाया गया। पार्क प्रबंधन एवं वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने पर्यटकों का पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया। गेट खोलने से पहले विधिवत पूजा-अर्चना कर वन्यजीवों की सुरक्षा एवं पर्यटन सत्र के सफल संचालन की कामना की गई। ताला गेट से पार्क में प्रवेश करने वाले पर्यटकों के लिए पहला दिन ही यादगार बन गया। सिद्ध बाबा क्षेत्र के पास पर्यटकों को एक बाघिन के दीदार हुए। बाघिन को अपने प्राकृतिक परिवेश में विचरण करते देख पर्यटक रोमांचित हो उठे। सफारी वाहनों में सवार पर्यटकों ने बाघिन की गतिविधियों को काफी देर तक देखा और इस खास पल को कैमरों में कैद किया। नए पर्यटन सत्र के पहले ही दिन बाघिन के दीदार से पर्यटकों का उत्साह और बढ़ गया।

कोर क्षेत्र में पर्यटन 1 अक्टूबर से 30 जून तक संचालित होगा, जबकि बफर क्षेत्र में पर्यटन वर्षभर जारी रहता है। पर्यटकों के स्वागत के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। निर्धारित समय पर तीनों प्रमुख गेटों से पर्यटकों के प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रवेश द्वारों को फूलों एवं अन्य सजावटी सामग्री से सजाया गया था। पर्यटकों को पार्क के नियमों का पालन करने तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की जानकारी भी दी गई।

पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय ने बताया कि नए पर्यटन सत्र से पहले सफारी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के साथ पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बार पर्यटकों को केवल बाघ दर्शन तक सीमित न रखते हुए जंगल, वन्यजीव, पक्षियों, वनस्पतियों, इतिहास, पर्यावरण एवं बांधवगढ़ के भौगोलिक महत्व की जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिए प्रसिद्ध होने के साथ अपनी प्राकृतिक विविधता, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय संस्कृति के लिए भी पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां प्राचीन गुफाएं, मंदिरों के अवशेष और शेषशय्या जैसे ऐतिहासिक स्थल पर्यटकों के अनुभव को और व्यापक बनाते हैं। जंगल सफारी के साथ बाघ, पक्षियों तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को देखने का अवसर बांधवगढ़ को विशिष्ट पर्यटन अनुभव प्रदान करता है।

देशी पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों में बांधवगढ़ आने वाले देशी पर्यटकों के साथ विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी वृद्धि देखने को मिली है। विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या से पर्यटन गतिविधियों के साथ क्षेत्र की आय में भी वृद्धि हो रही है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक पांच पर्यटन सत्रों में कुल 9 लाख 50 हजार 177 पर्यटक बांधवगढ़ पहुंचे। इनमें 8 लाख 34 हजार 693 देशी तथा 1 लाख 15 हजार 484 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। इस अवधि में पर्यटन से कुल 76 करोड़ 1 लाख 32 हजार 188 रुपये की आय प्राप्त हुई।

वर्ष 2021-22 में 1 लाख 76 हजार 51 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1 लाख 70 हजार 106 देशी और 5 हजार 945 विदेशी पर्यटक शामिल थे। इस वर्ष पर्यटन से 12 करोड़ 6 लाख 60 हजार 748 रुपये की आय हुई। वर्ष 2022-23 में कुल 1 लाख 85 हजार 825 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1 लाख 64 हजार 559 देशी और 21 हजार 266 विदेशी पर्यटक थे। इस वर्ष 13 करोड़ 89 लाख 74 हजार 913 रुपये की आय हुई। वर्ष 2023-24 में कुल 1 लाख 78 हजार 926 पर्यटक पहुंचे, जिनमें 1 लाख 53 हजार 32 देशी और 25 हजार 894 विदेशी पर्यटक शामिल रहे तथा 14 करोड़ 15 लाख 70 हजार 318 रुपये की आय हुई। वर्ष 2024-25 में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 1 लाख 96 हजार 889 हो गई, जिनमें 1 लाख 66 हजार 123 देशी और 30 हजार 766 विदेशी पर्यटक शामिल थे। इस वर्ष 16 करोड़ 38 लाख 78 हजार 420 रुपये की आय प्राप्त हुई। वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक 2 लाख 12 हजार 486 पर्यटक बांधवगढ़ पहुंचे, जिनमें 1 लाख 80 हजार 873 देशी और 31 हजार 613 विदेशी पर्यटक शामिल रहे। इस वर्ष पर्यटन से 19 करोड़ 50 लाख 47 हजार 789 रुपये की आय हुई।

लगभग एक माह की ऑनलाइन बुकिंग

क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय ने बताया कि नए पर्यटन सत्र के प्रारंभ होने से पहले ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की लगभग एक माह की ऑनलाइन टिकट बुकिंग हो चुकी है। इससे पर्यटकों में बांधवगढ़ को लेकर उत्साह और रुचि का पता चलता है। सफारी वाहनों के निर्धारित मानकों के पालन पर विशेष सख्ती बरती जा रही है। सभी पर्यटक जिप्सियों की जांच एवं पंजीयन किया जा रहा है। वाहनों के दस्तावेज, तकनीकी स्थिति तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप पंजीयन सुनिश्चित किया जा रहा है।

195 गाइडों को प्रशिक्षण, 105 को अंग्रेजी एवं कम्युनिकेशन स्किल्स की ट्रेनिंग

पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए लगभग 195 गाइडों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ‘जंगल की पाठशाला’ के तहत गाइडों को वन्यजीवों के पदचिह्न, उनकी गतिविधियों, पक्षियों की पहचान, जंगल की वनस्पतियों तथा बांधवगढ़ के इतिहास से संबंधित जानकारी दी जा रही है।

इसके साथ ही 105 गाइडों को अंग्रेजी भाषा एवं बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी सरल, रोचक एवं प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जा सके।

हाथियों की मौजूदगी के बावजूद जारी रहेगी सफारी

क्षेत्र संचालक  अनुपम सहाय ने बताया कि सफारी के लिए सभी तैयारियां पूरी हैं। जंगली हाथियों की आवाजाही के बावजूद सफारी जारी रहेगी। पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गाइड एवं वाहन चालकों को प्रशिक्षण दिया गया है। नए पर्यटन सत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

 

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आधुनिक तकनीक, संवेदनशीलता और प्रो-एक्टिव पुलिसिंग: मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचार एवं कानून-व्यवस्था सुदृढ़ीकरण के प्रयास https://eveningtimescg.com/modern-technology-sensitivity-and-proactive-policing-madhya-pradesh-polices-innovations-and-efforts-to-strengthen-law-and-order/ Thu, 01 Oct 2026 17:10:00 +0000 https://eveningtimescg.com/modern-technology-sensitivity-and-proactive-policing-madhya-pradesh-polices-innovations-and-efforts-to-strengthen-law-and-order/ भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस राज्य में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए "देश भक्ति – जन सेवा" के मूलमंत्र के साथ कार्य कर रही है। विगत समय में प्रदेश के विभिन्न जिलों में उत्पन्न हुई अत्यधिक संवेदनशील और जटिल परिस्थितियों में मध्य प्रदेश पुलिस ने बिना किसी अनावश्यक बल प्रयोग या लाठीचार्ज के, केवल "पहले संवाद, फिर सुरक्षा" की सूझबूझ भरी रणनीति और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था के बल पर शांति स्थापित कर मिसाल कायम की है।

​जिलावार कानून-व्यवस्था के उत्कृष्ट उदाहरण

​1. धार: संवेदनशीलता, संवाद और त्रिस्तरीय सुरक्षा का प्रभावी मॉडल

​साम्प्रदायिक दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील धार जिले में पुलिस एवं प्रशासन ने कानूनी आदेशों के पालन और सौहार्द बनाए रखने में अभूतपूर्व तालमेल का प्रदर्शन किया। जिले मेंपूजन व नमाज शांतिपूर्वक संपन्न कराई गई। 23 जनवरी को  हजारों लोगों की वाग्देवी शोभायात्रा तथा दिनभर में श्रद्धालुओं द्वारा किए गए दर्शन-हवन के दौरान 6 सेक्टरों और 7 जोन में पुलिस बल तथा  आरएएफ (RAF) प्लाटून की तैनाती कर चाक-चौबंद सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

​प्रतिबंधात्मक आदेश, सतत शांति समिति बैठकें, ड्रोन व सीसीटीवी निगरानी और आरएएफ/एसटीएफ/क्यूआरएफ के फ्लैग मार्च से माहौल पूरी तरह नियंत्रित रहा।

​कानून-व्यवस्था के दृष्टिगत अनुमति निरस्त होने के बावजूद रैली निकालने की जिद पर अड़े असामाजिक तत्वों के विरुद्ध पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया। मजबूत बैरिकेडिंग और ड्रोन निगरानी के साथ उल्लंघन पर व्यक्तियों की वैधानिक गिरफ्तारी कर शहर में शांति बनाए रखी।

​​2. भोपाल पुलिस कमिश्नरेट: टकराव टालकर किसान आंदोलन में संवाद से समाधान

​मूंग खरीदी और खाद वितरण को लेकर नर्मदापुरम व आसपास के हजारों किसानों द्वारा बैरिकेड्स तोड़ने और राजमार्ग पर 6 घंटे तक चक्काजाम करने की गंभीर स्थिति में भोपाल पुलिस ने लाठीचार्ज या बल प्रयोग से परहेज किया। पुलिस कमिश्नर व प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को रोके रखा, जिससे आधी रात को मांगें पूरी होने के साथ चक्काजाम बिना किसी हिंसा के शांतिपूर्वक समाप्त हुआ।

गोविंदपुरा क्षेत्र में मारपीट की घटना के बाद शहर के कुछ संवेदनशील इलाकों में विरोध प्रदर्शन और तनाव फैल गया, जहां कुछ जगहों पर पथराव की घटनाएं भी हुईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस नेत्वरित कार्रवाई की, आरोपियों को गिरफ्तार कियाऔर संवेदनशील क्षेत्रों में भारी पुलिस सुरक्षा बल तैनात कर शांति व्यवस्था बहाल की।

3. खंडवा एवं खरगोन जिले: अग्रिम समन्वय से रूट विवादों का खात्मा

​त्योहारों के दौरान जुलूसों के मार्गों और समय को लेकर उत्पन्न होने वाले तनाव को पुलिस ने त्‍योहारों के पूर्व "शांति समिति की बैठकें" आयोजित कर हल किया। दोनों पक्षों के धर्मगुरुओं की आपसी सहमति से रूट व समय निर्धारण करवाकर संभावित झड़पों को शून्य किया गया।

​4. राजगढ़ जिला (ब्यावरा एवं बोड़ा): मध्यस्थता से लिखित समझौता

​ग्रामीण इलाकों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर और रात्रिकालीन आयोजनों को लेकर उभरे विवाद में पुलिस ने थाना परिसरों में आपातकालीन बैठकें आयोजित कीं। कानून और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए पुलिस की मध्यस्थता में दोनों पक्षों से समय-सीमा और ध्वनि नियंत्रण का लिखित समझौता कराया गया।

इसी प्रकार मध्यप्रदेश पुलिस ने "देशभक्ति-जनसेवा" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, अपराध नियंत्रण और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। पारंपरिक पुलिसिंग से आगे बढ़कर अब म.प्र. पुलिस स्मार्ट, तकनीकी रूप से सक्षम और जन-संवेदनशील पुलिसिंग को प्राथमिकता दे रही है।

  1. डिजिटल नवाचार एवं पारदर्शी नागरिक सेवाएं

नागरिकों को बिना किसी झंझट के पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल माध्यमों को सशक्त बनाया गया है:

ई-जीरो एफआईआर (E-Zero FIR) के दायरे का विस्तार: नागरिकों की सुविधा के लिए चोरी या संपत्ति संबंधी नुकसान की ऑनलाइन रिपोर्टिंग सीमा, जो पहले ₹1,00,000 थी, उसे घटाकर अब ₹25,000 कर दिया गया है। इससे छोटे अपराधों और संपत्ति चोरी की स्थिति में आम नागरिकों को त्वरित राहत और ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा मिल रही है।

ई-रक्षक ऐप (e-Rakshak Mobile App):राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB, भोपाल) द्वारा विकसित यह स्मार्ट-पुलिसिंग ऐप सुरक्षा व्यवस्था संभालने और नागरिकों तक आपातकालीन सेवाएं पहुँचाने में तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है।

सिटीजन पोर्टल (Citizen Portal):चरित्र सत्यापन (Character Verification), किरायेदार/कर्मचारी सत्यापन और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने जैसी बहुमूल्य सेवाएं घर बैठे उपलब्ध हो रही हैं।

क्यूआर कोड आधारित शिकायत व्यवस्था: भीड़भाड़ वाले बाजारों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर क्यूआर कोड स्थापित किए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर नागरिक बिना थाने जाए गोपनीय व सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डायल-112 व फर्स्ट रिस्पांस व्हीकल (FRV): किसी भी आपात स्थिति में सूचना मिलते ही न्यूनतम रिस्पांस टाइम में सहायता उपलब्ध कराने के लिए डायल-112 को आधुनिक जीपीएस व एफआरवी नेटवर्क से लैस किया गया है।

अपराधियों का डिजिटल रिकॉर्ड: एक क्लिक पर संदिग्धों का क्रिमिनल बैकग्राउंड, हिस्ट्री शीट और पूर्व रिकॉर्ड की जांच।

​फेशियल रिकग्निशन व वाहन ट्रैकिंग: चेहरे की पहचान कर संदिग्धों को चिह्नित करना तथा चोरी/लावारिस वाहनों और संपत्तियों को तुरंत ट्रैक करना।

​डिजिटल सम्मन/वारंट: समन व वारंट की तामीली को पारदर्शी और त्वरित बनाना।

2. महिला एवं बाल सुरक्षा: संवेदनशीलता और सख्त निगरानी

महिला, बालिकाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा मध्यप्रदेश पुलिस की सर्वोच्च ​“शी-शक्ति” (She-Shakti) अभियान: भोपाल पुलिस कमिश्नरेट द्वारा महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत महिला पुलिसकर्मियों द्वारा शहर भर में वाहन रैलियां निकालकर जागरूकता फैलाई जा रही है।

​हॉटस्पॉट व संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पेट्रोलिंग: प्रमुख बाजारों, पूजा स्थलों, मेलों, गरबा/डांडिया पंडालों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में प्रत्येक थाने से हॉटस्पॉट चिह्नित कर आरक्षक से निरीक्षक स्तर तक की महिला पुलिस पेट्रोलिंग पार्टियां तैनात की गई हैं।

​त्वरित कार्रवाई व उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग: छेड़छाड़, फब्तियां कसने और पीछा करने जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिएअतिरिक्त/सहायक पुलिस आयुक्त (महिला सुरक्षा) स्तर के अधिकारी इसकी निगरानी कर रहे हैं।

​ऊर्जा डेस्क (Urja Desk):प्रदेश के सभी प्रमुख थानों में महिला केंद्रित शिकायतों की सुनवाई और त्वरित निस्तारण के लिए समर्पित महिला डेस्क सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

हेल्पलाइन नेटवर्क:

महिला हेल्पलाइन (1090 / 181): संकटग्रस्त महिलाओं को विधिक, चिकित्सीय एवं पुलिस सहायता।

चाईल्ड हेल्पलाइन (1098): बाल अपराधों की रोकथाम और गुमशुदा/मुसीबत में फंसे बच्चों के त्वरित रेस्क्यू के लिए 24×7 सक्रिय।

आपातकालीन सेवा: डायल 112 (एकीकृत आपातकालीन पुलिस सेवा)

​वित्तीय साइबर फ्रॉड: राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930

​मादक पदार्थ रोकथाम: नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 7049100785

​विशेष हेल्पलाइन्स: महिला हेल्पलाइन (1090) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098)

3. साइबर सुरक्षा एवं नशामुक्ति के विरुद्ध निर्णायक प्रहार

बदलते अपराध परिदृश्य में साइबर फ्रॉड और मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रहार करने के लिए दोहरे स्तर पर रणनीति लागू की गई है:

साइबर हेल्पलाइन 1930 एवं ‘सेफ क्लिक’ अभियान : ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में गोल्डन ऑवर (Golden Hour) के भीतर राशि ब्लॉक कराने के लिए हेल्पलाइन 1930 लगातार सक्रिय है।

नारकोटिक्स हेल्पलाइन (7049100785) एवं ‘ऑपरेशन प्रहार’: मादक पदार्थों के अवैध कारोबार की गुप्त सूचना देने हेतु नारकोटिक्स शाखा का मोबाइल नंबर 7049100785 सार्वजनिक किया गया है।

‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत दुर्गम एवं शैडो (नो-नेटवर्क) क्षेत्रों में ड्रोन सर्विलांस से अवैध फसलों और करोड़ों रुपये के ड्रग्स (स्मैक, गांजा, एमडी) पर बड़ी कानूनी कार्रवाइयां की जा रही हैं।

4. हवाई निगरानी, आधुनिक फॉरेंसिक व तकनीक

तकनीकी आधुनिकीकरण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश पुलिस देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हुई है।

PASTEC (पुलिस एरियल सिस्टम्स एण्ड टेक्नॉलाजी सेंटर), इंदौर:

पुलिस रेडियो ट्रेनिंग स्कूल (PRTS), इंदौर के परिसर में मध्यप्रदेश का प्रथम एवं देश का दूसरा ड्रोन ट्रेनिंग सेंटर 'PASTEC' प्रारंभ किया गया है। देशभर के संस्थानों का अध्ययन कर विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया। कर्नाटक पुलिस (बेंगलुरु) के बाद अपनी खुद की ड्रोन प्रशिक्षण संस्था स्थापित करने वाला मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बना है।

ऑपरेशन त्रिनेत्रम (CCTV सर्विलांस – देवास मॉडल): देवास पुलिस द्वारा जनसहभागिता और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सहयोग से शुरू किया गया 'ऑपरेशन त्रिनेत्रम' शहर के हर कोने को हाई-डेफिनिशन कैमरों से जोड़कर अपराध नियंत्रण और खुलासे का एक आदर्श मॉडल बन चुका है।

मोबाइल फॉरेंसिक वैन (57 MFVs) एवं ई-साक्ष्य: नए आपराधिक कानूनों के तहत घटनास्थल पर वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन के लिए आधुनिक फॉरेंसिक वैनों को तैनात किया गया है।

5. फील्ड पुलिसिंग, विधि-व्यवस्था एवं सामुदायिक सहभागिता

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जमीनी स्तर पर विजिबल और प्रिवेंटिव पुलिसिंग पर जोर दिया जा रहा है:

माइक्रो बीट व्यवस्था: शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को बीट एवं माइक्रो बीट में विभाजित कर आरक्षक/प्रधान आरक्षक स्तर पर जनता से सीधा संवाद और लोकल इंटेलिजेंस संकलन सुनिश्चित किया गया है।

कॉम्बिंग गश्त (Combing Patrol):रात के समय पूरे जिले में एक साथ वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में सघन कॉम्बिंग गश्त कर स्थायी वारंटियों, फरार आरोपियों, असामाजिक तत्वों और निगरानी बदमाशों की चेकिंग की जाती है।

समय-समय पर बलवा ड्रिल (Riot Drill) का अभ्यास: किसी भी अप्रत्याशित भीड़ या उपद्रव की स्थिति से निपटने के लिए थानों व पुलिस लाइनों में आधुनिक दंगारोधी उपकरणों, आंसू गैस, वाटर कैनन और बलवा ड्रिल का नियमित मॉक अभ्यास कराया जाता है।

शांति समिति की बैठकें: संवेदनशील त्योहारों, जुलूसों व राष्ट्रीय पर्वों से पूर्व सभी समुदायों, धर्मगुरुओं, आयोजकों और गणमान्य नागरिकों के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण हेतु शांति समिति की बैठकों का अनिवार्य आयोजन।

जनसंवाद एवं जनसुनवाई: प्रत्येक मंगलवार को जिला स्तर से लेकर थाना स्तर तक जनसुनवाई आयोजित कर पीड़ितों की समस्याओं का समयबद्ध व पारदर्शी निराकरण किया जाता है।

6. विशेष सामाजिक अभियान (Community Policing)

​ऑपरेशन मुस्कान (Operation Muskaan):गुमशुदा और अपहृत बालक-बालिकाओं को खोजकर उन्हें सुरक्षित परिजनों से मिलाने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाया जाता है।

​नशा मुक्ति एवं 'ड्रग-फ्री' अभियान: शिक्षण संस्थानों और युवाओं के बीच मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए नारकोटिक्स शाखा और स्थानीय पुलिस की संयुक्त सख्त कार्रवाई जारी है।

​साइबर जागरूकता (Cyber Awareness):डिजिटल अरेस्ट, पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड और यूपीआई घोटालों से जनता को सतर्क करने के लिए जन-जागरूकता सत्र संचालित किए जा रहे हैं।

7. जीवन रक्षा (CPR), दक्षता संवर्धन एवं नवीन भर्तियां

पुलिस बल को संवेदनशील बनाने के साथ-साथ संसाधनों और जनबल को भी सुदृढ़ किया जा रहा है:

सीपीआर (CPR) जीवन रक्षक प्रशिक्षण: आपातकालीन परिस्थितियों, सड़क दुर्घटनाओं या हृदय गति रुकने (Cardiac Arrest) के समय नागरिकों की जान बचाने के लिए पुलिसकर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा एवं कार्डियोपल्मरी रिससिटेशन (CPR) का विधिवत प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मानसिक तनाव प्रबंधन: पुलिसकर्मियों के वेलफेयर के लिए 'हार्टफुलनेस' संस्था के साथ एमओयू कर तनाव प्रबंधन और ध्यान कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

नवीन पुलिस भर्तियां: पुलिस बल की कार्यक्षमता और ऊर्जा को बढ़ाने के लिए निरंतर नई भर्तियां की जा रही हैं।  वर्ष 2025 में लगभग 8,500 पदों पर भर्ती की अनुमति प्राप्त हुई, जिसमें लगभग 7,500 कांस्टेबल सहित सब-इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो आदि पद शामिल हैं। कांस्टेबलों का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है तथा सब-इंस्पेक्टर एवं सूबेदार भर्ती प्रक्रिया भी पूर्ण हो चुकी है।

वर्ष 2026 में 9662 विभिन्न पदों पर भर्ती की अनुमति प्राप्त हुई है। इस प्रकार दो वर्षों में 18 हजार से अधिक नवीन पदों पर भर्ती का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

8. कर्तव्यनिष्ठा का सम्मान — DGCR एवं के. एफ. रुस्तमजी अवॉर्ड

संवेदनशील कानून-व्यवस्था, असाधारण सूझबूझ और जनसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के मनोबल को बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा उन्हें निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

ग्राउंड पुलिसिंग में अद्वितीय योगदान, साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने, शांतिपूर्ण समाधान निकालने और जोखिम भरे अभियानों में साहसिक कर्तव्यनिष्ठा प्रदर्शित करने वाले चयनित पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को पुलिस महानिदेशक प्रशंसा डिस्क/रोल (DGCR – Director General's Commendation Roll) तथा मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिरीक्षक व पद्म विभूषण स्वर्गीय के. एफ. रुस्तमजी की स्मृति में स्थापित प्रतिष्ठित 'के. एफ. रुस्तमजी अवॉर्ड' से सम्मानित किया जा रहा है। यह सम्मान पुलिस बल में उत्कृष्ट कार्य, संवेदनशीलता और व्यावसायिक दक्षता को प्रोत्साहित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

मध्यप्रदेश पुलिस का यह बहुआयामी दृष्टिकोण यह सिद्ध करता है कि संवाद, सतर्कता, तकनीकी नवाचार और कर्तव्यनिष्ठा के सम्मान के समन्वय से बड़ी से बड़ी चुनौती का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। 

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सड़क दुर्घटनाओं में कमी और वाहन दुर्घटनाओं में मृत्युदर को कम करने कार्यशाला https://eveningtimescg.com/workshop-on-reducing-road-accidents-and-the-fatality-rate-in-vehicle-accidents/ Thu, 01 Oct 2026 17:00:00 +0000 https://eveningtimescg.com/workshop-on-reducing-road-accidents-and-the-fatality-rate-in-vehicle-accidents/ भोपाल 

विगत वर्ष प्रदेश में हुई सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को कम करने एवं सड़क दुर्घटनाओं में पीडितों को शासन द्वारा लागू की गई विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, केशलेस उपचार सहायता उपलब्ध कराने के उ‌द्देश्य से मध्यप्रदेश की विभिन्न जिला इकाईयों के पुलिस अधिकारियों/ कर्मचारियों को प्रशिक्षित किये जाने हेतु अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  मोहम्मद शाहिद अबसार के निर्देशानुसार पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) भोपाल में विषय "यातायात रिफ्रेशर कोर्स" पर 29 और 30 सितम्बर को दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।

इस प्रशिक्षण सत्र में मध्यप्रदेश के सभी जिला इकाईयों से रक्षित निरीक्षक से लेकर आरक्षक स्तर तक के पुलिस अधिकारियों को 2 दिवसीय आफलाइन प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ उप पुलिस महानिरीक्षक पीटीआरआई  टी. के. विद्यार्थी द्वारा किया गया।  टी.के. विद्यार्थी द्वारा विषय प्रदेश में होने वाली वाहन दुघटनाओं का विश्लेषण एवं उनकी रोकथाम करने के संबंध में कार्य योजना तैयार करना तथा शासन द्वारा प्रदेश में लागू की गयी विभिन्न प्रकार की शासकीय योजनाओं हिट एण्ड रन योजना, राहवीर योजना, पी. एम. राहत योजना आदि योजनाओं के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जाकर योजनाओं के व्यापक रूप से प्रभावी प्रचार-प्रसार करने हेतु सभी पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।

इस प्रशिक्षण सत्र में व्याख्याता  देवेन्द्र सिंह यादव, एसीपी यातायात, भोपाल द्वारा वाहन पार्किंग के प्रकार एवं उनकी व्यवस्था, सडक उपयोगकर्ताओं का व्यवहार विषय पर, व्याख्याता डॉ. आशीष शर्मा द्वारा सड़क दुर्घटना में पीडितों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने संबंधी विषय पर,  एस.एस.लल्ली से.नि. अति.पु.अधी. द्वारा मोटरयान अधिनियम एवं केन्द्रीय मोटरयान अधिनियम एवं नियम संबंधी विषय पर, व्याख्याता  रविशंकर ब‌ट्टी, उपनिरीक्षक यातायात पुलिस भोपाल द्वारा यातायात प्रवर्तन की नवीन तकनीकों, आधुनिक यातायात उपकरणों, नवीन टेक्नोलॉजी की जानकारी जैसे-POS, ITMS, E-CHALLAN इन्टरसेप्टर व्हीकल, स्पीड रडार गन, ब्रीथ एनालाइजर आदि जैसे नव प्रयोगों के बारे में व्यापक रूप से प्रशिक्षण में उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान उमनि  टी. के. वि‌द्यार्थी, समनि  अभिजीत रंजन, समनि  राजेश कुमार मिश्र, समनि  मनोज कुमार शर्मा, उप पुलिस अधीक्षक  हिमांशु कार्तिकेय एवं प्रशिक्षण टीम के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे। इस प्रशिक्षण सत्र के समापन के दौरान प्रशिक्षणार्थियों की पीटीआरआई द्वारा सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।

 

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मध्यप्रदेश के दिल से प्रकृति और रोमांच के सफर पर निकले 22 राइडर्स, एडवेंचर टूरिज्म को मिली नई रफ्तार https://eveningtimescg.com/22-riders-embark-on-a-journey-of-nature-and-adventure-from-the-heart-of-madhya-pradesh-adventure-tourism-gains-new-momentum/ Thu, 01 Oct 2026 16:55:00 +0000 https://eveningtimescg.com/22-riders-embark-on-a-journey-of-nature-and-adventure-from-the-heart-of-madhya-pradesh-adventure-tourism-gains-new-momentum/ भोपाल 

मध्यप्रदेश में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 10 दिवसीय विशेष मोटरसाइकिल एक्सपीडिशन का शुभारंभ हुआ। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर ने हरी झंडी दिखाकर 1,520 किलोमीटर लंबी इस यात्रा को भोपाल से रवाना किया। यह यात्रा पर्यटकों को प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य, घने जंगलों, ऐतिहासिक विरासत और समृद्ध संस्कृति से सीधे जोड़ने का माध्यम बनेगी।

देश के 9 राज्यों और फ्रांस से जुटे 22 साहसी राइडर्स

इस अभियान में देश-विदेश के कुल 22 राइडर्स भाग ले रहे हैं। इनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और केरल के प्रतिभागी शामिल हैं। यात्रा में फ्रांस के पेरिस से आईं 55 वर्षीय महिला राइडर फैबिएन क्रिस्टीन जैनिन ड्यूपुइस विशेष रूप से शामिल हुई हैं। वे प्रदेश के प्राकृतिक और वन्य जीव स्थलों को दोपहिया वाहन से करीब से देखने को लेकर बहुत उत्साहित थी।

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और रॉयल एनफील्ड की 2 साल की साझेदारी

यह फ्लैग-ऑफ मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और रॉयल एनफील्ड के बीच 2026 से 2028 तक चलने वाली दो वर्षीय रणनीतिक साझेदारी की औपचारिक शुरुआत है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में अनुभव-आधारित और जिम्मेदार पर्यटन (रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म) को बढ़ावा देना है। दोनों संस्थाएं मिलकर नए क्यूरेटेड रूट्स तैयार करेंगी, जिससे न केवल पर्यटन के नए आयाम स्थापित होंगे, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित किए जाएंगे।

पचमढ़ी से पन्ना तक का मनोरम यात्रा मार्ग

1 से 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाली इस नौ दिवसीय यात्रा का मार्ग भोपाल से शुरू होकर पचमढ़ी, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना होते हुए पुनः भोपाल पर समाप्त होगा। अभियान में शामिल राइडर्स हाल ही में लॉन्च हुई रॉयल एनफील्ड बुलेट 650 पर सवार होकर पहाड़ी, वनाच्छादित और दुर्गम रास्तों का अनुभव करेंगे। इस यात्रा का भव्य समापन भोपाल में आयोजित होने वाले 7वें मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (एमपीटीएम) 2026 के विशेष समारोह में किया जाएगा।

वन्य जीव संरक्षण और समृद्ध जनजातीय विरासत का जीवंत अनुभव

यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को पेंच, कान्हा और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कोर-जोन में सुबह की विशेष जीप सफारी का अनुभव कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, दल को स्थानीय समुदायों की जीवन शैली, पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने की कला, स्थानीय हस्तशिल्प और विश्व प्रसिद्ध बैगा जनजातीय कला से भी रूबरू कराया जाएगा। इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के बीच आत्मीय संवाद स्थापित होगा।

भविष्य में तैयार होंगे नए टूरिज्म कॉरिडोर और हेरिटेज ट्रेल्स

आगामी दो वर्षों में इस साझेदारी के अंतर्गत राज्य में ऑफ-रोड ट्रेल, हेरिटेज राइड्स और सुंदर प्राकृतिक मार्गों पर आधारित नए मोटरसाइकिल रूट्स विकसित किए जाएंगे। इसका प्राथमिक ध्येय प्रमुख पर्यटन केन्द्रों को अनछुए और दूरस्थ दर्शनीय स्थलों से जोड़ना तथा पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के प्रति यात्रियों को जागरूक करना है।

इस अवसर पर टूरिज्म बोर्ड के संयुक्त निदेशक डॉ. संतोष वास्तव और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (आईजीआरएमएस) के निदेशक प्रो. अमिताभ पांडे सहित पर्यटन बोर्ड एवं रॉयल एनफील्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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पंचायतों को जवाबदेह, पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता : मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल https://eveningtimescg.com/making-panchayats-accountable-transparent-and-self-reliant-is-the-governments-priority-minister-prahlad-singh-patel/ Thu, 01 Oct 2026 16:40:00 +0000 https://eveningtimescg.com/making-panchayats-accountable-transparent-and-self-reliant-is-the-governments-priority-minister-prahlad-singh-patel/ भोपाल 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा है कि त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को अधिक सक्षम, जवाबदेह और पारदर्शी बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिससे विकास योजनाओं का सीधा लाभ ग्रामीण अंचल के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। मंत्री  पटेल विकास भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 में समय की आवश्यकता के अनुसार प्रस्तावित संशोधनों के प्रारूप पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई।

मंत्री  पटेल ने समीक्षा बैठक में 73वें संविधान संशोधन की मूल भावना के अनुरूप ग्राम सभा और ग्राम पंचायतों के अधिकारों व कृत्यों के युक्तियुक्तकरण पर बल दिया। इसके तहत ग्राम सभा को नीतिगत व जनसहभागिता की सशक्त संस्था बनाते हुए स्वच्छता, पेयजल, सड़क और अधोसंरचना निर्माण जैसे सभी कार्यकारी दायित्व सौंपने का निर्णय लिया गया है। साथ ही ग्राम सभा की अप्रासंगिक हो चुकी पुरानी समितियों के प्रावधानों को विलोपित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ग्राम सभा के अतिरिक्त सम्मेलन बुलाने की जिम्मेदारी सरपंच को देने तथा कोरम के अभाव में दो बार बैठक स्थगित होने पर तीसरी बैठक में विकास कार्यों के एजेंडे पर नियमानुसार विचार करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। पेसा (अनुसूचित) क्षेत्रों में ग्राम सभाओं में महिलाओं की कम से कम एक-तिहाई भागीदारी और भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास जैसे गंभीर विषयों पर 50 प्रतिशत गणपूर्ति अनिवार्य की जाएगी।

मंत्री  पटेल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित बसाहट और बिना मूलभूत सुविधाओं के कटने वाली अवैध कॉलोनियों पर सख्त नियंत्रण के लिए सभी ग्राम पंचायतों को कॉलोनी निर्माण नियमों के दायरे में लाने के लिए प्रावधान करें। मंत्री  पटेल ने प्रशासनिक जवाबदेही और वित्तीय अनुशासन पर विशेष जोर देने के निर्देश दिए। मंत्री  पटेल को बताया गया कि गंभीर वित्तीय अनियमितता के मामलों में जांच के दौरान संबंधित पदाधिकारी के वित्तीय अधिकार तुरंत प्रभाव से स्थगित किए जा सकेंगे। अभिलेख न सौंपने, शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग अथवा नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की दरों को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सख्त किया गया है। प्रस्तावित संशोधनों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के नए प्रावधानों को भी समाहित किया गया है।

पंचायतों की वित्तीय सुदृढ़ता के लिए करों और शुल्कों की प्रक्रिया का सरलीकरण किया गया है। राज्य स्तर पर गठित 'मध्यप्रदेश पंचायत राज निधि' के माध्यम से करों व उपकर से प्राप्त राशि का पंचायतों को पारदर्शी तरीके से सहायता अनुदान के रूप में वितरण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास को नई गति मिल सके।

 

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राज्यमंत्री गौर ने विभिन्न विकास कार्यों का किया भूमि पूजन और लोकार्पण https://eveningtimescg.com/minister-of-state-gaur-performed-the-groundbreaking-ceremony-and-inauguration-for-various-development-works/ Thu, 01 Oct 2026 16:25:00 +0000 https://eveningtimescg.com/minister-of-state-gaur-performed-the-groundbreaking-ceremony-and-inauguration-for-various-development-works/ भोपाल

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने गुरुवार को भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में कई विकास कार्यों का भूमि पूजन एवं लोकार्पण किया। राज्यमंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों को गति देने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। इन निर्माण कार्यों के पूरा होने से स्थानीय निवासियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी और आवागमन अधिक सुलभ होगा।

राज्यमंत्री गौर ने वार्ड क्रमांक 65 स्थित मिनाल के एमपीईबी ग्राउंड में 8 लाख 60 हजार रुपये की लागत से पेविंग ब्लॉक लगाने के कार्य का भूमि पूजन किया। इसके साथ ही, वार्ड क्रमांक 68 के अयोध्या नगर स्थित सरयू सरोवर पार्क में 11 लाख 83 हजार रुपये की लागत से छठ कुंड घाट के विकास कार्य की आधारशिला रखी। इसी वार्ड में संतोषी विहार से भवानी कैंपस फेस-2 के द्वार तक 18 लाख 70 हजार रुपये की लागत से बनने वाली सीसी रोड तथा राजीव नगर बी सेक्टर में पेविंग ब्लॉक और शौचालय निर्माण कार्य का भी भूमिपूजन संपन्न हुआ।

नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वार्ड क्रमांक 53 में गुलाबी नगर से शक्ति आर्केड मार्ग, दानिश नगर मार्ग तथा प्रोस्पेरा 80 फीट मार्ग पर नई स्थापित हाई मास्ट लाइटों का लोकार्पण किया गया। इन लाइटों के चालू होने से संबंधित मार्गों पर रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था बेहतर होगी और राहगीरों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी।

कार्यक्रम में राज्यमंत्री गौर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी स्वीकृत एवं निर्माणाधीन विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

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डीजीपी कैलाश मकवाणा ने वर्ष 2024-25 के लिए घोषित किए के.एफ. रुस्तम जी पुरस्कार https://eveningtimescg.com/dgp-kailash-makwana-announced-the-k-f-rustamji-awards-for-the-year-2024-25/ Thu, 01 Oct 2026 16:22:00 +0000 https://eveningtimescg.com/dgp-kailash-makwana-announced-the-k-f-rustamji-awards-for-the-year-2024-25/ भोपाल

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा द्वारा वर्ष वर्ष 2024-25 के लिए प्रतिष्ठितके.एफ. रुस्तम जी पुरस्कारप्रदान किए जाने की घोषणा की है। यह पुरस्कार मध्यप्रदेश पुलिस का एक महत्वपूर्ण सम्मान है, जो उन पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने दस्यु उन्मूलन अभियान, नक्सल विरोधी अभियान, सांप्रदायिक दंगों एवं कानून-व्यवस्था की गंभीर परिस्थितियों के नियंत्रण में असाधारण कार्य करते हुए उच्चकोटि की वीरता, साहस, नेतृत्व क्षमता तथा कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया हो।

के.एफ. रुस्तम जी पुरस्कार तीन श्रेणियों—परम विशिष्ट, अति विशिष्ट एवं विशिष्ट श्रेणी में प्रदान किया जाता है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करना तथा पुलिस बल में उत्कृष्टता एवं साहस की भावना को प्रोत्साहित करना है।

पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है।

वर्ष 2024-25 के लिए के.एफ.रूस्‍तम जी पुरस्‍कार से सम्‍मानित पुलिस अधिकारी और कर्मचारी

परम विशिष्ट श्रेणी :-एक रिवाल्वर एवं प्रमाण पत्र

    रामविलास हुण्डा, उप निरीक्षक, ए.टी.एस. इकाई, भोपाल।

 अति विशिष्ट श्रेणी :-एक बारह बोर गन एवं प्रमाण पत्र

    रघुवीर जोशी, उप निरीक्षक, थाना जावरा, जिला रतलाम

    अब्दुल खालिद कुरैशी, प्रधान आरक्षक 532, एस.आई.बी., बालाघाट

    ताराचंद शुक्ला, प्रधान आरक्षक, ए.टी.एस. इकाई, भोपाल

    पंकज सिन्हा, आरक्षक 387, ए.टी.एस. इकाई खण्डवा

    अक्षय सिंह, आरक्षक, ए.टी.एस. मुख्यालय, भोपाल

विशिष्ट श्रेणी :- रु.50,000/- एवं प्रमाण पत्र

    नवीन कुमार चौधरी, अति. पुलिस अधीक्षक एस.टी.एफ. भोपाल

    मयंक तिवारी, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) अनुभाग शाहपुर, जिला बैतूल, हाल पुलिस मुख्यालय, भोपाल

    श्रीमती आकांक्षा तलया, उप पुलिस अधीक्षक, जिला हरदा हाल अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) जिला रायसेन

    अंजुल अयंक मिश्रा, नगर पुलिस अधीक्षक बरगी, जिला जबलपुर

    जगदीश सिंह सिद्धू, उप पुलिस अधीक्षक एस.टी.एफ. भोपाल

    देवकरण डेहरिया, निरीक्षक, थाना कोतवाली, जिला बैतूल

    अमित सोलंकी, निरीक्षक, थाना बैंक नोट प्रेस जिला देवास

    विक्रांत झांझोट, निरीक्षक, थाना सोनकच्छ, जिला देवास

    शिवांशु मालवीय, निरीक्षक, जिला मंदसौर

    बलदेव सिंह मुजाल्दा, निरीक्षक, थाना नैनपुर, जिला मण्डला हाल जिला धार

    अनूप भार्गव, निरीक्षक, थाना प्रभारी कैंट, जिला गुना

    अभिषेक चौबे, निरीक्षक, थाना ढीमरखेडा, जिला कटनी

    राजेन्द्र सिंह चौहान, उप निरीक्षक (हाल-निरीक्षक) पुलिस लाईन, जिला गुना

    रोहित कुमार मिश्रा, निरीक्षक, थाना कोतवाली, जिला पन्ना

    सत्येन्द्र राजपूत, निरीक्षक, पु.म.नि. कार्यालय चंबल जोन हाल- पुलिस कंट्रोल रूम, जिला भिण्ड

    श्रीमती रानी राठौर, उप निरीक्षक, थाना मनावर, जिला धार

    श्रीमती कल्पना गुप्ता, उप निरीक्षक, कार्यालय पुलिस महानिरीक्षक, सागर जोन, सागर

    अभिषेक प्रताप पाण्डेय, उप निरीक्षक (विसबल), हॉक फोर्स, बालाघाट

    मकसूद अली, उप निरीक्षक, थाना बरायटा, जिला सागर हाल जिला विदिशा

    चंद्रभान सिंह चौहान, सहायक उप निरीक्षक (हाल-उप निरीक्षक), थाना महाकाल, जिला उज्जैन

    आशीष अवस्थी, प्रधान आरक्षक 168, सायबर सेल, पन्ना

    मनमोहन शर्मा, प्रधान आरक्षक 725, सायबर सेल, रतलाम

    शिवप्रताप सिंह सेंगर, प्रधान आरक्षक 770, सायबर सेल, देवास

    सूरज तिवारी, कार्यवाहक प्रधान आरक्षक, थाना कोतवाली (हाल- सायबर सेल), जिला-धार

    इमरान खान, प्रधान आरक्षक (विसबल), ए.टी.एस. इकाई, इन्दौर

    रितेश ठाकुर, प्रधान आरक्षक, रा.अ.अ.ब्यूरो, पुलिस मुख्यालय, भोपाल

    महेशचन्द्र नायक, आरक्षक 234, ए.टी.एस. इकाई, इन्दौर

    गौतम चौरे, आरक्षक (विसबल) 963, ए.टी.एस. इकाई, जिला खण्डवा

    पवन यादव, आरक्षक 601, ए.टी.एस. इकाई, जिला खण्डवा

    इमरान खान, आरक्षक (विसबल), एटीएस इकाई, इन्दौर

    विकास भूरिया, आरक्षक 1607, एस.टी.एफ. भोपाल हाल नगरीय पुलिस, इंदौर।

 

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6वीं मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियों को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित https://eveningtimescg.com/state-level-workshop-held-regarding-preparations-for-the-6th-chief-secretaries-conference/ Thu, 01 Oct 2026 16:06:00 +0000 https://eveningtimescg.com/state-level-workshop-held-regarding-preparations-for-the-6th-chief-secretaries-conference/ भोपाल

 प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाली 6वीं मुख्य सचिव कॉन्फ्रेंस की तैयारियों के संबंध में आज एमपीआरडीसी मुख्यालय, भोपाल में प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। “Accelerating Linear Infrastructure Projects: Good Practices and New Ideas” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान, उनके समाधान तथा विभिन्न विभागों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नवाचारों को साझा करने पर विस्तृत चर्चा हुई।

एमपीआरडीसी के तकनीकी सलाहकार  आर.के. मेहरा ने स्वागत वक्तव्य में कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्यों के अनुरूप लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के निर्माण में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने, आवश्यक अनुमतियों में होने वाले विलंब को कम करने तथा विभिन्न विभागों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का अध्ययन कर उनके संबंध में नीति आयोग को फीडबैक फॉर्म के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य परियोजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक सुगम बनाते हुए उन्हें समयबद्ध रूप से पूर्ण करना है।

कार्यशाला में वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक  एच.एस. मोहंता ने परिवेश पोर्टल, वन भूमि के व्यपवर्तन, ईको-सेंसिटिव जोन, जैव विविधता क्षेत्रों, अभयारण्य एवं टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में अनुमतियों से संबंधित प्रक्रियाओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने निर्माण परियोजनाओं के दौरान वृक्षारोपण से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए भी व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए।

कार्यशाला में भू-अर्जन, आरओडब्ल्यू/आरओयू, वन स्वीकृति, वन्यजीव स्वीकृति, यूटिलिटी शिफ्टिंग, राज्य स्तरीय अनुमतियां, निर्माण सामग्री एवं अन्य आवश्यक अनुमतियों से संबंधित विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लीनियर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में विभिन्न स्तरों पर आने वाली प्रक्रियात्मक एवं व्यावहारिक बाधाओं को चिन्हित कर उनके प्रभावी समाधान तलाशना तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। साथ ही, परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए अपनाई जा रही श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नए विचारों को साझा करने पर भी जोर दिया गया।

 

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