देश – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com Fri, 02 Oct 2026 14:15:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1.2 https://eveningtimescg.com/wp-content/uploads/2026/05/EVENING-TIMES-1.jpg देश – EVENINGTIMESCG https://eveningtimescg.com 32 32 एनएमडीसी ने महात्मा गांधी को उनकी 157वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी https://eveningtimescg.com/nmdc-paid-tribute-to-mahatma-gandhi-on-his-157th-birth-anniversary/ Fri, 02 Oct 2026 14:15:00 +0000 https://eveningtimescg.com/nmdc-paid-tribute-to-mahatma-gandhi-on-his-157th-birth-anniversary/ हैदराबाद

 भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी ने आज अपने
मुख्‍यालय, हैदराबाद और देश भर की सभी परियोजनाओं में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को उनकी
157वीं जयंती पर श्रद्धांजलि दी।
मुख्‍यालय , हैदराआद में गांधी जयंती समारोह का शुभारंभ श्री विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी), श्री
कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक), श्री विवेक निशांत नाथ, निदेशक (वाणिज्य) और  सी नीलकंठ
रेड्डी, मुख्य सतर्कता अधिकारी द्वारा दीप प्रज्वलन और महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ वरिष्ठ
अधिकारियों और कर्मचारियों तथा उनके परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में किया गया।
इस भव्‍य अवसर पर उपस्थित सभी कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों ने स्वच्छता की शपथ ली । साथ
ही, स्वच्छता, साफ-सफाई , स्वस्थ कार्यस्थल और आसपास के वातावरण को बनाए रखने की अपनी
प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
इस अवसर पर, विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी) ने सभी कर्मचारियों से स्वच्छता के लिए कुछ घंटे
समर्पित करने का आह्वान किया और उनसे आग्रह किया कि वे स्वच्छता बनाए रखने के लिए पहले स्वयं में
परिवर्तन लाते हुए दूसरों को अपना समय तथा प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करें। उन्होंने
ईमानदारी, सत्य और विश्वास पर गांधीजी के विचारों को आत्मसात करके कर्मचारियों से एक शिक्षित,
विकसित और समृद्ध भारत का लक्ष्य रखने का आग्रह किया।
कार्यक्रम का समापन, एनएमडीसी मुख्‍यालय परिसर में स्वच्छता अभियान के अंतर्गत वरिष्ठ अधिकारियों
और कर्मचारियों की भागीदारी के साथ संपन्‍न हुआ।

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गुजरात में UCC लागू, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी https://eveningtimescg.com/ucc-implemented-in-gujarat-gazette-notification-issued-following-presidents-assent/ Fri, 02 Oct 2026 12:34:00 +0000 https://eveningtimescg.com/ucc-implemented-in-gujarat-gazette-notification-issued-following-presidents-assent/ अहमदाबाद 

गुजरात में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. गुजरात सरकार के UCC विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है. इसके बाद राज्य सरकार ने कानून से जुड़ी राजपत्र अधिसूचना भी जारी कर दी है. राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ गुजरात में UCC को लागू करने की दिशा में अहम कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है. अब इसके प्रावधानों को जमीन पर लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आगे की प्रक्रिया तेज होगी. सरकार की ओर से लाए गए इस कानून में विवाह से लेकर तलाक और उत्तराधिकार तक कई अहम नियम शामिल हैं. यानी आने वाले समय में परिवार और निजी कानून से जुड़े कई मामलों में लोगों को नए नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होगी। 

UCC में महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति तथा उत्तराधिकार के मामले में समान अधिकार देने का प्रावधान है. बेटा और बेटी दोनों को संपत्ति में समान अधिकार मिलेगा. वहीं अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के प्रावधानों से बाहर रखा गया है. विवाह का पंजीकरण अनिवार्य करने के साथ लिव-इन संबंधों को लेकर भी नियम बनाए गए हैं. बिना वसीयत मृत्यु होने की स्थिति में संपत्ति के बंटवारे के लिए भी नए प्रावधान हैं. ऐसे में गुजरात में UCC लागू होने के बाद विवाह और परिवार से जुड़े मामलों में क्या बदलाव आएंगे इसे समझना जरूरी है। 

राज्य के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC-2026) बिल को देश की राष्ट्रपति की तरफ से आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद गुजरात सरकार ने इसे 'गुजरात एक्ट नंबर 15 ऑफ 2026' के रूप में अधिसूचित करते हुए 1 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक गुजरात गजट (Gazette) में प्रकाशित कर दिया है।

यह कानून राज्य सरकार द्वारा जारी की जाने वाली आगामी अधिसूचना की तिथि से पूरे गुजरात में पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा राज्य बन गया है जहां समान नागरिक संहिता लागू होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

1. विवाह का पंजीकरण होगा जरूरी

UCC के तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है. कानून लागू होने के बाद सभी विवाहों का निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण कराना होगा. दी गई जानकारी के मुताबिक यह अवधि 60 दिन है. तय समय में पंजीकरण नहीं कराने पर जुर्माने का प्रावधान है. विवाह के समय पुरुष की उम्र कम से कम 21 वर्ष और महिला की उम्र 18 वर्ष होना जरूरी होगा. खास बात यह है कि UCC पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों को खत्म नहीं करता. अलग-अलग धर्मों में विवाह की जो परंपराएं हैं वे जारी रह सकती हैं. हालांकि विवाह का कानूनी पंजीकरण जरूरी होगा। 

गुजरात के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं.
2. एक से ज्यादा विवाह पर रोक

UCC में एकविवाह का नियम रखा गया है. यानी पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता. इसका मतलब है कि वैवाहिक स्थिति में रहते हुए दोबारा विवाह करने पर कानूनी दिक्कत हो सकती है. तलाक और विवाह से जुड़े मामलों के लिए भी कानून में प्रक्रिया तय की गई है. इसके अलावा विवाह का पंजीकरण नहीं होने पर सरकारी दस्तावेजों या रोजगार से जुड़े रिकॉर्ड में वैवाहिक स्थिति बदलने पर भी असर पड़ेगा. ऐसे मामलों में पहले विवाह का पंजीकरण जरूरी होगा। 

3. लिव-इन रिलेशनशिप पर भी नए नियम
गुजरात के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. लिव-इन में रहने वाले या ऐसा संबंध शुरू करने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रार के सामने संयुक्त बयान देकर पंजीकरण कराना होगा. यानी ऐसे संबंधों को लेकर सरकार के पास आधिकारिक रिकॉर्ड रहेगा. लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर भी रजिस्ट्रार को इसकी जानकारी देनी होगी. यह सूचना संयुक्त रूप से या किसी एक पक्ष की ओर से दी जा सकती है. इस तरह लिव-इन संबंधों को भी कानून के दायरे में लाने की कोशिश की गई है। 

4. बेटा-बेटी को संपत्ति में बराबर अधिकार
UCC में उत्तराधिकार को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है. बिना वसीयत बनाए किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके जीवनसाथी बच्चों और माता-पिता को संपत्ति में कानूनी अधिकार मिलेगा. बेटे और बेटी के बीच उत्तराधिकार में भेद नहीं किया जाएगा. इसके अलावा विवाह के बाहर जन्मे बच्चों और सरोगेसी या गोद लेने के जरिए परिवार में आए बच्चों को भी जैविक बच्चों के समान कानूनी और उत्तराधिकार संबंधी अधिकार दिए गए हैं. महिलाओं को भी संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में पुरुषों के बराबर अधिकार देने का प्रावधान है। 

5. आदिवासी समुदाय को कानून से छूट
गुजरात UCC का एक अहम प्रावधान अनुसूचित जनजातियों से जुड़ा है. संविधान के अनुच्छेद 366(25) और 342 के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के प्रावधानों से छूट दी गई है. संविधान के भाग 21 के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले कुछ समूह भी इसके दायरे से बाहर रहेंगे. इसके अलावा विवाह या तलाक से जुड़े विवादों में अदालत जाने से पहले मध्यस्थता का विकल्प रखा गया है. यानी विवाद को अदालत तक ले जाने से पहले आपसी समाधान की कोशिश की जा सकती है. राष्ट्रपति की मंजूरी और राजपत्र अधिसूचना के बाद अब UCC के प्रावधानों को लागू करने से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 

शादी का रजिस्ट्रेशन 60 दिनों में अनिवार्य; भारी जुर्माने का प्रावधान
गुजरात UCC-2026 के लागू होने के बाद विवाह (Marriage) और तलाक (Divorce) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव आएगा:

60 दिनों की सीमा: विवाह संपन्न होने के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन के लिए मेमोरेंडम जमा करना अनिवार्य होगा।

लापरवाही पर जुर्माना: निर्धारित समय में शादी का पंजीकरण न कराने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

नोटिस के बाद भी अनदेखी: यदि नोटिस जारी किए जाने के बाद भी रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर ₹25,000 तक हो सकती है।

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कड़े और स्पष्ट नियम
UCC के तहत लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) को भी कानूनी दायरे में लाते हुए इसके रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बनाया गया है:

कानूनी दर्जा व भरण-पोषण: लिव-इन रिलेशनशिप से जन्म लेने वाले बच्चे को वैध/कानूनी संतान का पूर्ण दर्जा प्राप्त होगा। इसके अलावा, यदि पुरुष साथी महिला को छोड़ता है, तो महिला को भरण-पोषण मांगने का कानूनी अधिकार होगा।

गलत जानकारी देने पर सजा: लिव-इन रजिस्ट्रेशन के दौरान झूठी या गलत जानकारी देने पर 3 महीने तक की जेल या ₹25,000 तक का जुर्माना (या दोनों) हो सकता है।

नाबालिगों के लिए रोक: किसी भी नाबालिग के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने को लेकर अत्यंत सख्त और दंडात्मक प्रावधान शामिल किए गए हैं।

अनुसूची जनजातियों (ST) को छूट और पुराने कानूनों पर प्रभाव
अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) को छूट: संविधान के Part XXI के तहत संरक्षित परंपरागत अधिकारों वाले समूहों और अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस UCC कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

पुराना कानून रद्द: इस नए कानून के लागू होते ही 'Gujarat Registration of Marriages Act, 2006' को निरस्त (Repeal) कर दिया जाएगा। साथ ही, शादी व तलाक से जुड़े पुराने व्यक्तिगत कानूनों की असंगत धाराएं UCC के प्रभाव से बेअसर हो जाएंगी।

मार्च 2026 में विधानसभा में पास हुआ था बिल
गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने मार्च 2026 में UCC बिल को राज्य विधानसभा में पेश कर पास कराया था। इसके बाद इसे अंतिम मंजूरी और हस्ताक्षर के लिए राष्ट्रपति भवन भेजा गया था। राष्ट्रपति की मोहर लगते ही अब गुजरात में UCC-2026 लागू होने का ऐतिहासिक रास्ता साफ हो गया है।

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PM मोदी ने कैप्टन स्मित मछार से की बात, सुनाया अपना अनुभव और बताया हिम्मत का राज https://eveningtimescg.com/pm-modi-spoke-with-captain-smit-machhar-sharing-his-own-experiences-and-revealing-the-secret-to-courage/ Fri, 02 Oct 2026 10:31:00 +0000 https://eveningtimescg.com/pm-modi-spoke-with-captain-smit-machhar-sharing-his-own-experiences-and-revealing-the-secret-to-courage/  नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईदुबई घटना में घायल भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से अभी फोन पर बात की. कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री को घटना के दौरान अपने अनुभव और उन्हें हिम्मत देने वाली बातों के बारे में बताया. पीएम मोदी ने उनकी बहादुरी की सराहना की और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। 

कैप्टन स्मित मछार दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की FZ1073 फ्लाइट उड़ा रहे थे. उड़ान के दौरान उनके को-पायलट ने कथित तौर पर विमान को क्रैश कराने की कोशिश की थी. इस दौरान विमान अपनी क्रूजिंग ऊंचाई से अचानक हजारों फीट नीचे आ गया और कॉकपिट में दोनों पायलटों के बीच हिंसक झड़प हुई। 

खून से थे लथपथ, फिर भी नहीं हारी हिम्मत
इस हमले में कैप्टन स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. खून से लथपथ होने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का तरीका खोजा, जिसके बाद आगे बैठे यात्रियों और क्रू के सदस्यों ने कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर पायलट को काबू किया। 

फ्लाइट में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी फ्लाईदुबई पायलट भी कॉकपिट में पहुंचे और विमान को संभाला. इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक डायवर्ट किया गया और सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। 

कैप्टन स्मित ने 9/11 जैसी त्रासदी रोकी- PM मोदी
घटना के बाद कैप्टन स्मित की बहादुरी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू समेत कई लोगों ने तारीफ की। 

पीएम मोदी ने कहा कि कैप्टन स्मित ने अपनी जान की परवाह किए बिना बहादुरी दिखाई और संभावित 9/11 जैसी त्रासदी को रोकने में अहम भूमिका निभाई. गुजरात सरकार ने भी उन्हें 'विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार' से सम्मानित करने का ऐलान किया है। 

अस्पताल में भर्ती हैं कैप्टन मच्छर
कैप्टन मच्छर ने प्रधानमंत्री को घटना के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि उस दौरान उन्हें हिम्मत किस बात से मिली।

प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद कैप्टन मच्छर की हालत स्थिर है। वह संयुक्त अरब अमीरात के एक अस्पताल में इलाज करा रहे हैं और तेजी से ठीक हो रहे हैं।

संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल में घायल पायलट और उनके परिवार से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि मच्छर का हौसला मजबूत है और वह “मुस्कुरा भी रहे थे और हंस भी रहे थे।”

PM मोदी पहले भी कर चुके हैं तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी और सूझबूझ की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पायलट ने धैर्य और साहस दिखाया। उनकी बहादुरी से पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है। मोदी ने कहा, “इजराइल के प्रधानमंत्री ने भी कहा कि एक भारतीय ने 9/11 जैसी त्रासदी रोक दी। हमारे देश के हर नागरिक को स्मित की बहादुरी पर बहुत गर्व है।” प्रधानमंत्री ने कैप्टन मच्छार के माता-पिता और पत्नी से भी बात की थी। उन्होंने पिता भूपेंद्रभाई, मां गीताबेन और पत्नी सोनलबेन से उनकी सेहत की जानकारी ली। साथ ही भरोसा दिलाया कि भारतीय मिशनों की ओर से पायलट और उनके परिवार को हर संभव मदद दी जाएगी।

राजदूत ने अस्पताल के दौरे के बाद प्रसार भारती से बात की। उन्होंने कहा कि कैप्टन को अच्छा इलाज मिल रहा है और भारतीय दूतावास अधिकारियों के लगातार संपर्क में है।

उन्होंने कहा, “मैं उनसे और उनके परिवार से अस्पताल में मिला। वह अच्छा कर रहे हैं और उनकी हालत स्थिर है। उन्हें देखकर मुझे काफी राहत मिली।”

मित्तल ने कहा, “वह बात कर रहे थे और बातचीत कर रहे थे। उन्हें थोड़ी परेशानी है, लेकिन संयुक्त अरब अमीरात में उन्हें अच्छा इलाज मिल रहा है।”

राजदूत ने कैप्टन मच्छर को “भारत का बहादुर बेटा” बताया। उन्होंने कहा कि मिड-एयर इमरजेंसी के दौरान उनकी बहादुरी से सैकड़ों लोगों की जान बची और बड़ी तबाही टली।

पीएम मोदी ने घरवालों से भी की थी बात
पीएम मोदी ने गुरुवार को पायलट की पत्नी और माता-पिता से भी बात की थी और उन्हें भरोसा दिलाया था कि मछार और उनके परिवार को भारतीय मिशनों की ओर से पूरी मदद मिलेगी।

दुबई से तेल अवीव की ओर बढ़ रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 आसमान में सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी, तभी कॉकपिट के भीतर अचानक अप्रत्याशित संकट खड़ा हो गया।

सह-पायलट ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से विमान का नियंत्रण बिगाड़ते हुए उसे नीचे गिराने की कोशिश की, जिससे चंद सेकंडों में हवाई जहाज हजारों फीट नीचे गोता लगाने लगा।

खतरे को भांपते ही मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मछार ने उसे रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों के बीच कॉकपिट में भीषण संघर्ष शुरू हो गया।

गंभीर चोटों के बावजूद नहीं टूटने दिया हौसला
इस खूनी हाथापाई में कैप्टन स्मित बुरी तरह जख्मी हो गए और शरीर से लगातार बहते खून के कारण उनकी स्थिति नाजुक होने लगी थी। इसके बावजूद उन्होंने होश नहीं खोया। बेहद फुर्ती और सूझबूझ दिखाते हुए उन्होंने किसी तरह कॉकपिट का सुरक्षित लॉक खोल दिया।

दरवाजा खुलते ही केबिन क्रू और अगली कतारों में बैठे मुसाफिर तुरंत भीतर दाखिल हुए और उपद्रव मचा रहे को-पायलट को दबोच कर काबू में कर लिया।

सऊदी अरब में सुरक्षित आपातकालीन लैंडिंग
इत्तेफाक से उसी फ्लाइट में बतौर यात्री सफर कर रहे फ्लाईदुबई के ही दो अन्य पायलट फौरन सक्रिय हुए। उन्होंने कॉकपिट में पहुंचकर अनियंत्रित हो रहे विमान का स्टीयरिंग थामा और उसे स्थिर किया।

हवा में उपजे इस भारी तनाव के बीच सूझबूझ दिखाते हुए उड़ान का रुख सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे की तरफ मोड़ा गया, जहां सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों के साथ विमान को सकुशल उतार लिया गया।

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रायगढ़ बीच पर बड़ा हादसा, पुणे के 8 छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत https://eveningtimescg.com/major-tragedy-at-raigad-beach-8-students-from-pune-drown-in-the-sea/ Fri, 02 Oct 2026 06:29:00 +0000 https://eveningtimescg.com/major-tragedy-at-raigad-beach-8-students-from-pune-drown-in-the-sea/ रायगढ़ 

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में बड़ा हादसा सामने आया है। पुणे के एक निजी कोचिंग क्लास से आए आठ छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। यह हादसा रायगढ़ जिले के दिवेआगर बीच पर हुआ। समुद्र में नहाने के दौरान तेज लहरों की चपेट में आने पर छात्र खुद को नहीं बचा पाए। छात्र महाराष्ट्र के पुणे जिले के आलंदी से पिकनिक मनाने आए थे। कड़ी मशक्कत के बाद समुद्र से सभी आठ छात्रों के शव बाहर निकाल लिए गए। पुणे से रायगढ़ के इस बीच की दूरी करीब 166 किलोमीटर है।

11वीं-12वीं कक्षा के छात्र
जानकारी के अनुसार सभी छात्र पुणे के आलंदी के रहने वाले हैं। वे दिवेआगर बीच नहाते वक्त ही हादसे का शिकार बने। ये छात्र पुणे के आलंदी की एक प्राइवेट कोचिंग क्लास से आए थे। सभी छात्र 11वीं और 12वीं कक्षा के साइंस के स्टूडेंट हैं। स्थानीय लोग पीड़ितों को बचाने के लिए दौड़े और उन्हें बोरली प्राइमरी हेल्थ सेंटर ले गए। जहां पहुंचने पर मेडिकल अधिकारियों ने सभी आठों को मृत घोषित कर दिया।

मृतक छात्रों की पहचान तन्मय दत्तात्रेय वाहिले, सुमित भरत अहिरे, प्रणव रामदास बनसोडे, कैवल्य सतीश वासनकर, राजवीर युवराज वाहिले, यश किरण वानखेड़े, सोहम तुकाराम भंडवलकर और कौस्तुभ संदीप दौंड के रूप में हुई है। ये सभी आठ छात्र 16 साल के थे और पुणे के आलंदी के रहने वाले थे।

जैसे ही घटना की खबर फैली, स्थानीय लोगों और पर्यटकों में हड़कंप मच गया। दिवेआगर में 'भाऊ मारुति सालुंखे महाकाली वॉटर स्पोर्ट्स' के मालिक भाऊ मारुति सालुंखे और उनकी टीम ने तुरंत खोज अभियान शुरू किया। बता दें कि रायगढ़ जिले में अलीबाग, कशिश, और दिवेआगर जैसे कई मशहूर समुद्री तट (बीचेस) हैं, जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मॉनसून या हाई टाइड के दौरान यहां सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

प्रसिद्ध तीर्थस्थल है यह बीच
पुलिस और अधिकारियों ने इस दुखद घटना की जांच शुरू कर दी है। ऐसा मान जा रहा है कि समुद्र के पानी की गहराई और लहरों का अंदाजा नहीं होने के कारण यह दर्दनाक हादसा होने की प्राथमिक जानकारी सामने आई है। दिवेआगर रायगड के श्रीवर्धन तालुका का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। सभी छात्रों के शवों को आगे की कार्रवाई के लिए बोर्ली पंचतन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है।

चार किलोमीटर लंबा है यह बीच
यह बीच लगभग 4 किलोमीटर लंबा है और नारियल, सुपारी तथा सुरु के पेड़ों से घिरा हुआ है। पर्यटकों के लिए यहां जेट स्की, बनाना राइड और बोट राइड जैसी कई वाटर एक्टिविटी उपलब्ध हैं। सुबह के समय यहां हजारों की संख्या में सीगल्स दिखाई देते हैं और यहां से सूर्यास्त का नजारा बहुत मनमोहक होता है। यहां प्रसिद्ध सुवर्णा गणेश मंदिर और प्राचीन रूपनारायण मंदिर भी स्थित हैं।

सुनेत्रा पवार ने की कलेक्टर से बात
इस हादसे को लेकर राज्य की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार रायगढ़ के कलेक्टर से बात की। उन्होंने दिवेआगर बीच पर हुई दुखद घटना में मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। सुनेत्रा पवार ने प्रशासन को सभी जरूरी मदद तुरंत उपलब्ध कराने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

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13 घंटे, 700 KM और खूबसूरत वादियां, अब इस रूट पर दौड़ेगी वंदे भारत ट्रेन https://eveningtimescg.com/13-hours-700-km-and-scenic-valleys-the-vande-bharat-train-will-now-run-on-this-route/ Fri, 02 Oct 2026 03:52:00 +0000 https://eveningtimescg.com/13-hours-700-km-and-scenic-valleys-the-vande-bharat-train-will-now-run-on-this-route/ बेंगलुरु   

बेंगलुरु से गोवा जाना हो तो आपके पास आमतौर पर दो विकल्प होते हैं- जल्दी पहुंचना है तो फ्लाइट और कम खर्च में जाना है तो बस या ट्रेन. लेकिन अगर मंजिल के साथ रास्ते का मजा भी लेना हो, तो बेंगलुरु-गोवा वंदे भारत का सफर अलग अनुभव दे सकता है. रेलवे मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को बेंगलुरु तक बढ़ाने जा रहा है. इसके बाद गोवा और बेंगलुरु के बीच रेल कनेक्टिविटी को एक प्रीमियम ट्रेन का नया विकल्प मिल जाएगा। 

करीब 13 घंटे की यह यात्रा शहर की भागदौड़ से निकलकर पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ी रास्तों और तटीय कर्नाटक के खूबसूरत नजारों के बीच से गुजरती है. इस सफर में रास्ते के नजारे भी यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं. इसमें वंदे भारत जैसी नए जमाने की ट्रेन का साथ मिल जाए तो फिर क्या ही कहने. अभी बेंगलुरु और गोवा के बीच चलने वाली पारंपरिक ट्रेनों को सफर पूरा करने में करीब 15 घंटे लगते हैं। 

मंगलुरु के रास्ते गोवा पहुंचेगी ट्रेन

रेलवे मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मौजूदा मंगलुरु सेंट्रल-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस को यशवंतपुर जंक्शन तक बढ़ाया जाएगा. यानी ट्रेन बेंगलुरु से चलकर मंगलुरु होते हुए गोवा के मडगांव तक जाएगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसी महीने की शुरुआत में सांसद बृजेश चौटा और विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को लिखे पत्र में इसकी जानकारी दी थी. अभी यह ट्रेन मंगलुरु सेंट्रल और मडगांव के बीच सप्ताह में छह दिन चलती है. गुरुवार को इसकी सेवा नहीं होती. मंगलुरु से मडगांव के बीच एक तरफ का सफर 6 घंटे से थोड़ा कम समय में पूरा होता है। 

करीब 13 घंटे में पूरा होगा सफर
बेंगलुरु के यशवंतपुर से गोवा के मडगांव रेलवे स्टेशनों के बीच वंदे भारत का यह सफर करीब 13 घंटे का होगा. बेंगलुरु से गोवा की दूरी करीब 700 किलोमीटर के आसपास है और इस रूट पर ट्रेन को कई पहाड़ी और घुमावदार हिस्सों से होकर गुजरना पड़ता है. अगर आपकी प्राथमिकता सिर्फ जल्दी पहुंचना है, तो फ्लाइट अब भी काफी कम समय लेती है. वहीं रात की बस से सफर करने में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. वंदे भारत ट्रेन इन दोनों के बीच एक ऐसा विकल्प साबित होगी, जिसमें पूरा सफर दिन के समय करते हुए प्राकृतिक सुंदरता से भरे इस पूरे रास्ते को देखने का मौका मिलेगा। 

वेस्टर्न घाट की खूबसूरती के दीदीर
इस रूट पर सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड के बीच करीब 55 किलोमीटर का घाट सेक्शन आता है. पश्चिमी घाट का यह इलाका रेल यात्रा के सबसे खूबसूरत हिस्सों में गिना जाता है. ट्रेन यहां पहाड़ियों, हरियाली और घाटियों के बीच से गुजरती है. इलेक्ट्रिफिकेशन और रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर ढांचे में सुधार के बाद इस सेक्शन पर रेल ऑपरेशन पहले से बेहतर हुआ है, लेकिन पहाड़ी रास्ता होने की वजह से यहां ट्रेन की रफ्तार मैदानी हिस्सों जैसी नहीं रहती. यही वजह है कि बेंगलुरु से गोवा की पूरी यात्रा में इस हिस्से का असर सफर के समय पर भी पड़ता है। 

किन जगहों से होकर गुजरती है ट्रेन?
यशवंतपुर से निकलने के बाद ट्रेन हासन, सकलेशपुर, सुब्रह्मण्य रोड और मंगलुरु क्षेत्र से होते हुए तटीय कर्नाटक की ओर बढ़ती है. इसके बाद गोवा के मडगांव तक पहुंचती है. यात्रा के दौरान रास्ता लगातार बदलता रहता है. बेंगलुरु के शहरी इलाके से निकलने के बाद हरियाली बढ़ती जाती है और पश्चिमी घाट के पहाड़ी हिस्से शुरू हो जाते हैं. इसके बाद तटीय कर्नाटक का इलाका आता है और आखिर में गोवा। 

वंदे भारत से और मजेदार होगी यात्रा
वंदे भारत में चेयर कार और एग्जीक्यूटिव चेयर कार की सुविधा मिलती है. एग्जीक्यूटिव क्लास में रोटेट होने वाली सीटें और बड़ी खिड़कियां सफर के दौरान बाहर के नजारों को देखने में मदद करेंगी. वंदे भारत एक सेल्फ-प्रोपेल्ड ट्रेनसेट है. इसमें अलग से इंजन नहीं लगा होता बल्कि हर कोच इंजन की तरह काम करता है. इसके चलते सफर के दौरान शोर और झटके पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में कम महसूस होते हैं. करीब 13 घंटे के दिन के सफर में यह सुविधा खासतौर पर काम आएगी, क्योंकि यात्री रास्ते के नजारों का आनंद लेते हुए आराम भी कर सकेंगे। 

ट्रेन में खाने-पीने की सुविधा उपलब्ध
लंबे सफर को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस में यात्रियों के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था रहती है. यात्रा के अलग-अलग हिस्सों में नाश्ता, भोजन और चाय जैसे विकल्प मिलते हैं. ट्रेन में बायो-वैक्यूम टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी हैं. करीब 13 घंटे की इस यात्रा में वंदे भारत की साफ-सफाई और बैठने की सुविधा, पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में यात्रियों के लिए एक अलग अनुभव लेकर आएगी। 

फ्लाइट, बस और वंदे भारत में फर्क
अगर आपका मकसद बेंगलुरु से गोवा सबसे कम समय में पहुंचना है, तो फ्लाइट का मुकाबला करना वंदे भारत के लिए मुश्किल है. उड़ान का समय करीब डेढ़ घंटे हो सकता है, हालांकि एयरपोर्ट तक पहुंचने, चेक-इन और सुरक्षा जांच में लगने वाला समय अलग है. बस से सफर में करीब 12 से 14 घंटे लग सकते हैं. रात को बस से सफर करने पर पहाड़ी और घुमावदार सड़कों की वजह से कुछ यात्रियों को परेशानी भी हो सकती है. वंदे भारत का फायदा यह है कि सफर आरामदायक तरीके से दिन में पूरा होगा. साथ ही वेस्टर्न घाट और कोस्टल कर्नाटक की प्राकृतिक सुंदरता को देखने का मौका मिलेगा। 

फ्लाइट के मुकाबले किराए में अंतर
इस रूट पर यात्रा के लिए अलग-अलग साधनों का खर्च भी अलग है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वंदे भारत चेयर कार का किराया करीब ₹1,500 से ₹1,800 और एग्जीक्यूटिव क्लास का करीब ₹2,800 से ₹3,200 के आसपास हो सकता है. फ्लाइट का किराया तारीख और बुकिंग के समय के हिसाब से करीब ₹4,500 से ₹8,000 या उससे ज्यादा भी हो सकता है. बस का किराया करीब ₹1,200 से ₹2,500 के बीच रह सकता है. हालांकि बस और फ्लाइट का किराया यात्रा की तारीख, सीट और बुकिंग के समय के अनुसार बदल सकता है। 

किसके लिए सही है ट्रेन का सफर?
अगर आपके पास समय कम है और गोवा पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते हैं, तो फ्लाइट ज्यादा सुविधाजनक विकल्प हो सकती है. लेकिन अगर सफर को भी छुट्टी का हिस्सा बनाना चाहते हैं, तो वंदे भारत का विकल्प दिलचस्प है. खासकर उन यात्रियों के लिए जो पश्चिमी घाट की हरियाली, पहाड़ों और घाटियों के नजारे देखना चाहते हैं. हालांकि एक बात ध्यान रखने वाली है. यह रात की स्लीपर ट्रेन नहीं है. करीब 13 घंटे का पूरा सफर बैठकर करना होगा. इसलिए छोटे वीकेंड ट्रिप पर जाने वाले यात्रियों के लिए यात्रा के समय को ध्यान में रखना जरूरी है। 

खिड़की वाली सीट का अलग मजा
अगर आप सिर्फ मंजिल तक पहुंचने के बजाय रास्ते को भी देखना चाहते हैं, तो खिड़की वाली सीट लेना बेहतर रहेगा. खासकर घाट सेक्शन में बाहर का नजारा इस सफर का सबसे खास हिस्सा हो सकता है. मोबाइल नेटवर्क पहाड़ी और सुरंग वाले हिस्सों में कमजोर हो सकता है, इसलिए लंबी यात्रा के लिए जरूरी सामग्री पहले से डाउनलोड कर लेना बेहतर है. साथ ही करीब 13 घंटे के सफर में बीच-बीच में सीट से उठकर थोड़ा चलना भी आरामदायक रहेगा। 

ट्रेन को मिलेगा नया नंबर और नया नाम
बेंगलुरु और गोवा के बीच वंदे भारत चलाने का प्रस्ताव इस साल फरवरी में सामने आया था. दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR), कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (KRCL) और दक्षिण रेलवे (SR) की ओर से इसको लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया था. प्रस्ताव के मुताबिक ट्रेन यशवंतपुर से सुबह 6:05 बजे रवाना होकर शाम 7:15 बजे मडगांव पहुंचेगी. शुरुआती प्रस्ताव में ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल स्टेशन पर लाए बिना बायपास करने की बात थी. लेकिन अब इस योजना में बदलाव किया गया है. विस्तारित सेवा में ट्रेन को मंगलुरु सेंट्रल से होकर चलाने की तैयारी है। 

बेंगलुरु-मंगलुरु रूट पर सितंबर में 16 कोच वाली वंदे भारत रेक के साथ दो ट्रायल रन भी किए गए थे. इन परीक्षणों के दौरान ट्रेन ने यह दूरी 7 घंटे से कम समय में पूरी की थी. विस्तार के बाद ट्रेन नए नंबरों के साथ चलेगी. दोनों दिशाओं में इसके लिए 26655 और 26656 नंबर तय किए गए हैं. ये मौजूदा 20646 और 20645 नंबर से अलग होंगे. ट्रेन का नाम भी बदलकर यशवंतपुर-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस किया जाएगा. अभी इस ट्रेन सेवा की शुरुआत की तारीख और अंतिम टाइम-टेबल तय नहीं हुआ है. ट्रेन के कितने स्टॉपेज होंगे इसका भी असर पूरी यात्रा के समय पर पड़ेगा। 

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‘No UPI Day’ पर बंटे व्यापारी, CTI ने किया ऐलान; CAIT ने बनाई दूरी https://eveningtimescg.com/traders-divided-over-no-upi-day-cti-announces-it-while-cait-distances-itself/ Fri, 02 Oct 2026 03:32:00 +0000 https://eveningtimescg.com/traders-divided-over-no-upi-day-cti-announces-it-while-cait-distances-itself/   नई दिल्ली

आज  2 अक्टूबर है यानी गांधी जयंती, अगर आप किसी दुकान पर खरीदारी करने के जाएं और वहां पर दुकानदार आपसे कैश मांगे, यानी यूपीआई पेमेंट लेने से मना कर दे, तो परेशान मत होना. दरअसल, सरकार के 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर के विरोध में व्यापिरियों ने 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' मनाने का ऐलान किया है. हालांकि, इसे लेकर अब व्यापारियों में आपस में ही मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं और वे दो ग्रुप में बंटे हुए नजर आ रहे हैं। 

ऐसा इसलिए क्योंकि नो यूपीआई डे को लेकर 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने व्यापारियों से गांधी जयंती के दिन UPI QR कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स ढककर सिर्फ कैश में भुगतान लेने की अपील की है. तो वहीं कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT ने इससे दूरी बना ली है। 

CAIT का ऐलान- नहीं होंगे शामिल
बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल की अगुवाई वाली कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का कहना है कि वह 2 अक्टूबर को 'No UPI Day' नहीं मनाएगी और न ही उसने इसके लिए व्यापारियों से किसी तरह की कोई अपील की है. कैट ने साफ किया है कि संगठन ने इसमें शामिल होने के बारे में कोई फैसला, प्रस्ताव या आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 

CTI फैसला वापस लेने को तैयार नहीं
एक ओर जहां कैट इससे दूरी बनाए हुए है, तो वहीं दिल्ली के चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने यूपीआई पेमेंट पर MDR लगाने के विरोध में 2 अक्टूबर को No UPI Day मनाने का ऐलान किया है. CTI का कहना है कि व्यापारियों ने अपना फैसला वापस नहीं लिया है. संगठन से जुड़े व्यापारी दिल्ली और पूरे देश में इसे मनाएंगे. इसमें 100 से ज्यादा बड़े व्यापारी संगठन शामिल रहेंगे। 

सीटीआई को उम्मीद है कि देश भर में 2000 से ज्यादा जगहों पर 'नो UPI डे' मनाया जाएगा. संगठन ने दिल्ली और देश के सभी दुकानदारों और व्यापारियों से अपील की है कि वे 2 अक्टूबर को अपनी UPI मशीनों को काले कपड़े से ढक लें और सिर्फ कैश में लेन-देन करें। 

सरकार से UPI MDR हटाने की मांग
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मांग की है कि सरकार 2000 रुपये से ज्यादा के UPI लेन-देन पर लागू किए जाने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को वापस ले. इसके पीछे बड़ा तर्क देते हुए सीटीआई ने कहा है कि इसका बोझ 6 करोड़ दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ेगा। 

इसके साथ ही संगठन की ओर से 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर कहा गया कि इससे UPI Payment में 50% की गिरावट आ सकती है. देश में कैश का चलन फिर से बढ़ सकता है। 

कहां कितना लगेगा यूपीआई चार्ज?
गौरतलब है कि यूपीआई पेमेंट एमडीआर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% तय किया गया है, लेकिन सभी पेमेंट के लिए एक एक जैसा नहीं है. जैसे इसमें फ्लैट-रेट-मॉडल कैटेगरी को भी शामिल किया गया है. इसके तहत आने वाले तमाम यूपीआई पेमेंट्स, जिनमें पेट्रोल पंप ट्रांजैक्शंस भी आते हैं, उनपर फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा, जो 5 रुपये तय किया गया है. इसके अलावा ₹100000 तक पेमेंट वाले व्यापारियों को राहत दी गई है, यानी इन्हें मर्चेंट डिस्काउंट रेट जीरो (Zero MDR) वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है। 

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राफेल में लगेंगे भारतीय हथियार! फ्रांस बोला- निकालेंगे रास्ता, 114 जेट पर बातचीत जारी https://eveningtimescg.com/indian-weapons-to-be-fitted-on-rafale-jets-france-promises-a-solution-talks-on-114-jets-underway/ Fri, 02 Oct 2026 03:30:00 +0000 https://eveningtimescg.com/indian-weapons-to-be-fitted-on-rafale-jets-france-promises-a-solution-talks-on-114-jets-underway/ नई दिल्ली

भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमानों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है. भारत 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट खरीदने की योजना पर बात कर रहा है. इस सौदे में सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि भारत अपने स्वदेशी हथियार और सिस्टम इन विमानों में आसानी से लगा सके। 

फ्रांस ने अब साफ संकेत दिया है कि सोर्स कोड की पूरी पहुंच दिए बिना भी कोई तरीका निकाला जा सकता है. फ्रांसीसी वायु और अंतरिक्ष बल के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल डोमिनिक टार्डिफ ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की इच्छा को वे समझते हैं. उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय वायुसेना को ज्यादा स्वतंत्रता और क्षमता देने का रास्ता खोजा जा सकता है. यह बयान तब आया जब दोनों देश तरंग शक्ति अभ्यास में शामिल हैं। 

आधुनिक लड़ाकू विमानों का सोर्स कोड बहुत संवेदनशील होता है. इसमें मिशन सिस्टम, सेंसर, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और हथियार से जुड़े सॉफ्टवेयर निर्देश होते हैं. पूरा सोर्स कोड देने का मतलब है विमान की अंदरूनी तकनीक को पूरी तरह खोल देना। 

फ्रांस जैसे देश इसे आसानी से नहीं देते क्योंकि इससे सुरक्षा और व्यावसायिक हित जुड़े होते हैं. भारत चाहता है कि वह अपने बनाए हथियार जैसे ब्रह्मोस मिसाइल, अस्त्र मिसाइल या अन्य स्वदेशी सिस्टम राफेल पर आसानी से लगा सके. बिना सोर्स कोड के यह काम मुश्किल लगता था. लेकिन अब फ्रांस ने वैकल्पिक तरीका सुझाया है। 

आईसीडी से कैसे होगा एकीकरण
एक महत्वपूर्ण विकल्प इंटरफेस कंट्रोल डॉक्यूमेंट यानी आईसीडी है. यह दस्तावेज बताता है कि विमान के सिस्टम बाहरी हथियार या सेंसर से कैसे बात करेंगे. भारतीय रक्षा सूत्रों के अनुसार इस इंटरफेस स्तर की जानकारी से स्वदेशी हथियार जोड़े जा सकते हैं। 

पूरा सोर्स कोड लिए बिना भी संचार स्थापित किया जा सकता है. इससे भारत को ज्यादा स्वायत्तता मिलेगी. फ्रांसीसी अधिकारी ने कहा कि फ्रांसीसी कंपनियां, भारतीय उद्योग और दोनों सरकारें मिलकर इस पर चर्चा कर सकती हैं. भारत पहले 36 राफेल विमान खरीद चुका है। 

अब 114 और विमानों का प्रस्ताव है जिसमें मेक इन इंडिया का बड़ा हिस्सा होगा. इससे घरेलू विमान निर्माण क्षमता मजबूत होगी. हथियार एकीकरण की मांग इसी बड़े समझौते का हिस्सा है. प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, निर्माण और भारतीय उद्योग की भागीदारी भी चर्चा में है। 
फ्रांस राफेल के अपग्रेडेड वर्जन F4 पर काम कर रहा है. 2030 के दशक में F5 वर्जन लाने की योजना है. F5 में सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और इंजन में सुधार होंगे. भारत अगर अपने हथियार आसानी से लगा सके तो भविष्य में विमान को अपनी जरूरतों के अनुसार अपग्रेड करना आसान होगा। 

आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वतंत्रता
यह चर्चा सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक भी है. भारत चाहता है कि आयातित प्लेटफॉर्म पर भी उसकी अपनी क्षमता बनी रहे. स्वदेशी हथियार लगाने से निर्भरता कम होती है और ऑपरेशनल स्वतंत्रता बढ़ती है. फ्रांस ने संप्रभुता और घरेलू उद्योग के महत्व को स्वीकार किया है। 

लेफ्टिनेंट जनरल टार्डिफ ने कहा कि फ्रांस भी स्वतंत्र फैसले लेने की क्षमता को महत्वपूर्ण मानता है. दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग पहले से मजबूत है. तरंग शक्ति जैसे अभ्यास इसे और गहरा बनाते हैं. अगर आईसीडी जैसे तंत्र से समझौता हो जाता है तो 114 विमानों का सौदा आगे बढ़ सकता है. इससे भारतीय वायुसेना को आधुनिक विमान मिलेंगे और घरेलू रक्षा उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। 

कुल मिलाकर फ्रांस का यह रुख सकारात्मक है. सोर्स कोड की बाधा को पार करने का विकल्प निकलने से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत हो सकते हैं. भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है. आगे की बातचीत में तकनीकी विवरण और व्यावसायिक शर्तें तय होंगी। 

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गर्म होता यूरोप, पिघलते ग्लेशियर! स्विट्जरलैंड ने एक साल में खोई 5% से ज्यादा बर्फ https://eveningtimescg.com/europe-heating-up-glaciers-melting-switzerland-lost-over-5-of-its-ice-in-a-single-year/ Thu, 01 Oct 2026 14:33:00 +0000 https://eveningtimescg.com/europe-heating-up-glaciers-melting-switzerland-lost-over-5-of-its-ice-in-a-single-year/  नई दिल्ली
   स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों पर इस साल रिकॉर्ड गर्मी का बड़ा असर पड़ा है. 2026 में देश के ग्लेशियरों ने अपनी 5 फीसदी से ज्यादा बर्फ खो दी. यह जानकारी स्विस ग्लेशियर मॉनिटरिंग नेटवर्क यानी GLAMOS और स्विस एकेडमी ऑफ साइंसेज की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल सर्दियों में बर्फ कम गिरी. इसके बाद गर्मियों में बहुत ज्यादा गर्मी पड़ी. इससे ग्लेशियरों की बर्फ तेजी से पिघल गई। 

पिछले सिर्फ 5 साल में स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर करीब 20 फीसदी बर्फ खो चुके हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हर कुछ साल में नहीं, बल्कि लगातार ऐसे साल आ रहे हैं जब ग्लेशियरों को बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है. इसका असर आगे पानी की सप्लाई पर भी पड़ सकता है, क्योंकि गर्मियों में ग्लेशियरों से निकलने वाला पानी कई जगहों के लिए जरूरी होता है। 

सर्दियों में कम बर्फ, गर्मियों में ज्यादा गर्मी
इस साल ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की दो बड़ी वजह रहीं. पहली, सर्दियों में कम बर्फबारी और दूसरी, गर्मियों में रिकॉर्ड गर्मी. ग्लेशियरों पर सर्दियों में जमा होने वाली बर्फ गर्मियों में उनके लिए एक तरह की सुरक्षा का काम करती है. लेकिन इस साल नई बर्फ कम जमा हुई। 

इसके बाद गर्मियों में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया. मई से सितंबर के बीच गर्म और सूखा मौसम रहा. कई ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी तापमान जमने वाले स्तर से ऊपर रहा. इससे ग्लेशियरों की पुरानी बर्फ भी तेजी से पिघलने लगी. GLAMOS के डायरेक्टर मैथियास हुस के मुताबिक, अब ग्लेशियरों के लिए बहुत ज्यादा बर्फ पिघलने वाले साल बार-बार देखने को मिल रहे हैं. उनके मुताबिक, यह स्थिति चिंता की बात है। 

एलेट्श ग्लेशियर में सबसे ज्यादा पिघली बर्फ
स्विट्जरलैंड के सबसे बड़े ग्लेशियर एलेट्श में इस साल अब तक का सबसे ज्यादा पिघलाव दर्ज किया गया. ग्लेशियर डी त्सानफ्लूरॉन की औसत मोटाई भी 4 मीटर से ज्यादा कम हो गई. कुछ छोटे ग्लेशियर इस साल पूरी तरह गायब हो गए. हालांकि 2026 में बर्फ पिघलने की रफ्तार 2022 के रिकॉर्ड से थोड़ी कम रही. साल 2022 में नॉर्थ अफ्रीका से आई धूल बर्फ पर जम गई थी. इससे बर्फ ने सूरज की ज्यादा गर्मी सोखी और तेजी से पिघली। 

3 महीने में 2.2 ट्रिलियन लीटर पानी पिघला
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों से करीब 2.2 ट्रिलियन लीटर पानी पिघला. यह मात्रा स्विट्जरलैंड के घरों में एक साल में इस्तेमाल होने वाले पीने के पानी से 4 गुना से भी ज्यादा है. ग्लेशियरों से इतना पानी निकलने का फिलहाल एक फायदा भी है. गर्मियों में जब पानी कम होता है, तब ग्लेशियरों से पिघलकर आने वाला पानी नदियों और दूसरे जल स्रोतों तक पहुंचता है. इससे पानी की कमी कुछ हद तक कम होती है. लेकिन ग्लेशियर जितने छोटे होते जाएंगे, उनसे मिलने वाला पानी भी कम होता जाएगा. यानी अभी जो फायदा मिल रहा है, वह हमेशा नहीं रहेगा। 

5 साल में 20% बर्फ खत्म
पिछले 5 साल में स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर करीब 20 फीसदी बर्फ खो चुके हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह काफी तेज गिरावट है. अगर गर्मी बढ़ने और कम बर्फबारी का सिलसिला जारी रहा, तो ग्लेशियर लगातार छोटे होते जाएंगे. इसका असर सिर्फ पहाड़ों पर नहीं पड़ेगा. ग्लेशियरों से मिलने वाला पानी गर्मियों में कई इलाकों के लिए जरूरी है. इसलिए बर्फ के लगातार कम होने से आने वाले समय में पानी की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। 

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PPF निवेशकों के लिए बड़ी खबर, सरकार ने ब्याज दर पर लिया बड़ा फैसला https://eveningtimescg.com/big-news-for-ppf-investors-government-takes-a-major-decision-on-interest-rates/ Thu, 01 Oct 2026 13:35:00 +0000 https://eveningtimescg.com/big-news-for-ppf-investors-government-takes-a-major-decision-on-interest-rates/ नई दिल्ली

PPF (Public Provident Fund) में निवेश करने वालों के लिए अक्टूबर से दिसंबर 2026 की तिमाही में कोई बदलाव नहीं हुआ है। केंद्र सरकार ने स्मॉल सेविंग्स स्कीम (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों की समीक्षा के बाद सभी प्रमुख योजनाओं की दरें पिछली तिमाही के स्तर पर ही रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि PPF पर अक्टूबर-दिसंबर 2026 में भी 7.10% सालाना ब्याज मिलेगा। वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (Department of Economic Affairs) ने 30 सितंबर 2026 को Q3 FY2026-27 के लिए यह फैसला जारी किया था। आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं।

PPF की ब्याज दर लंबे समय से 7.10% पर बनी हुई है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भी सरकार ने इसमें कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है, यानी जिन निवेशकों को PPF की दर बढ़ने की उम्मीद थी, उन्हें फिलहाल मौजूदा 7.10% दर से ही संतोष करना होगा। PPF की ब्याज दर हर तिमाही सरकार द्वारा स्मॉल सेविंग्स स्कीम (Small Savings Schemes) की समीक्षा के दौरान तय की जाती है।

PPF एक लॉन्ग टर्म सेविंग्स स्कीम (Long-Term Savings Scheme) है, जिसकी मूल अवधि 15 साल होती है। इसमें एक फाइनेंशियल ईयर में कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.50 लाख जमा किए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति के नाम पर सामान्य तौर पर एक ही PPF अकाउंट रखा जा सकता है। खाता बैंक या पोस्ट ऑफिस के माध्यम से खोला जा सकता है। PPF में निवेश का एक फायदा यह भी है कि खाते को 15 साल की अवधि पूरी होने के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। निवेशक एक्सटेंशन के दौरान कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रख सकता है या बिना नए निवेश के भी खाते को जारी रखने का विकल्प चुन सकता है।

PPF को टैक्स-इफिशिएंट इंवेस्टमेंट (Tax-Efficient Investment) के तौर पर देखा जाता है। इसका मतलब है कि आपको मिलने वाले रिटर्न पर कम से कम टैक्स लगे, ताकि टैक्स चुकाने के बाद आपके पास ज्यादा से ज्यादा मुनाफा बचे। मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act, 2025) के तहत पात्र निवेश पर सेक्शन 123 के अंतर्गत कुल ₹1.50 लाख तक की डिडक्शन का प्रावधान है, जिसमें PPF भी शामिल है। यह लाभ पुरानी टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनने वाले पात्र टैक्सपेयर्स के लिए है। PPF से मिलने वाला ब्याज और मेच्योरिटी अमाउंट भी टैक्स के बाहर (Tax Exemption) है।

इस तरह PPF को आम तौर पर EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में रखा जाता है। हालांकि, टैक्स बेनिफिट (Tax Benefit) लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी आय और चुना गया टैक्स रिजीम (New Tax Regime) इन नियमों के तहत पात्र है या नहीं।

PPF अकाउंट को एक्टिव रखने के लिए हर फाइनेंशियल ईयर कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है। अगर किसी साल न्यूनतम कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं किया जाता है, तो अकाउंट इनएक्टिव (Account Inactive) हो सकता है। इसे दोबारा एक्टिव (Active) कराने के लिए संबंधित नियमों के अनुसार बकाया न्यूनतम डिपॉजिट (Deposit) और पेनॉल्टी (Penalty) का भुगतान करना पड़ता है।

PPF में पार्शियल विड्रॉल (Partial Withdrawal) की सुविधा भी उपलब्ध है। हालांकि, इसके लिए निर्धारित शर्तें लागू होती हैं। सामान्य तौर पर विड्रॉल की सुविधा 7वें फाइनेंशियल ईयर से शुरू होती है। इसलिए यह योजना केवल ब्याज कमाने के लिए ही नहीं, बल्कि लंबे समय के फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) के लिए भी इस्तेमाल की जाती है।

PPF की 15 साल की मूल अवधि पूरी होने के बाद निवेशक के पास खाते को बंद करने या इसे आगे जारी रखने का विकल्प होता है। इस अकाउंट को 5 साल की अवधि के ब्लॉक में एक्सटेंड किया जा सकता है। अगर निवेशक कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखने का विकल्प चुनता है, तो मौजूदा नियमों के अनुसार नए निवेश पर भी ब्याज मिलता रहता है।

इसलिए, अक्टूबर-दिसंबर 2026 में PPF इंवेस्टर्स के लिए मुख्य अपडेट यही है कि 7.10% की मौजूदा ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लॉन्ग-टर्म (Long-Term) निवेश करने वालों के लिए PPF की ब्याज दर के साथ-साथ इंवेस्टमेंट पीरियड, टैक्स रिजीम और अपने फाइनेंशियल गोल्स (Financial Goals) को ध्यान में रखकर फैसला करना जरूरी है।

 

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UPI की रफ्तार बरकरार, सितंबर में 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन; ₹29.37 लाख करोड़ का पेमेंट https://eveningtimescg.com/upi-momentum-continues-24-07-billion-transactions-and-%e2%82%b929-37-lakh-crore-in-payments-in-september/ Thu, 01 Oct 2026 11:33:00 +0000 https://eveningtimescg.com/upi-momentum-continues-24-07-billion-transactions-and-%e2%82%b929-37-lakh-crore-in-payments-in-september/  नई दिल्ली
आजकल छोटी दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक पेमेंट का तरीका तेजी से बदल रहा है. कुछ रुपये की चाय हो या हजारों रुपये की खरीदारी, मोबाइल निकालकर QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है. सितंबर के UPI आंकड़े भी इसी बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं. इस महीने यूपीआई पर कुल 24.07 बिलियन यानी 2407 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनकी कुल वैल्यू ₹29.37 लाख करोड़ रही. यानी औसतन हर दिन करीब 802 मिलियन यानी 80.2 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए। 

खास बात यह है कि ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब 15 अक्टूबर से ₹2000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर नया MDR फ्रेमवर्क लागू होने वाला है. हालांकि, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यूपीआई ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेगा. यानी आप अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों या रिश्तेदारों को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर किसी तरह का चार्ज नहीं लगेगा. नई व्यवस्था सिर्फ मर्चेंट यानी दुकानदारों या व्यापारियों को किए जाने वाले पेमेंट पर लागू होगी. यहां भी जानना जरूरी है कि MDR चार्ज पेमेंट करने वाले पर नहीं बल्कि रिसीव करने वाले पर लागू होगा। 

हर दिन 80 करोड़ से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के मुताबिक सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या सालाना आधार पर 23 फीसदी बढ़ी. वहीं कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. सितंबर में हर दिन औसतन ₹97,913 करोड़ के यूपीआई ट्रांजैक्शन हुए. यानी रोजाना ट्रांजैक्शन की संख्या और उनकी कुल रकम, दोनों रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए. अगर सिर्फ महीने के कुल आंकड़े देखें तो सितंबर में यूपीआई ट्रांजैक्शन अगस्त के मुकाबले थोड़े कम रहे। 

अगस्त में 24.51 बिलियन ट्रांजैक्शन हुए थे और उनकी कुल वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ थी. लेकिन इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि सितंबर में डिजिटल पेमेंट की रफ्तार कमजोर हुई. कैशफ्री के को-फाउंडर रीजू दत्ता के मुताबिक अगस्त में 31 दिन थे, जबकि सितंबर में 30 दिन. इसलिए दोनों महीनों के कुल आंकड़ों की तुलना करते समय दिनों की संख्या को ध्यान में रखना जरूरी है। 

सितंबर में बड़े UPI ट्रांजैक्शन बढ़े
रीजू दत्ता के मुताबिक अप्रैल से अगस्त के बीच यूपीआई पर एवरेज डेली ट्रांजैक्शन वैल्यू करीब ₹96,000 करोड़ रही थी. सितंबर में यह बढ़कर करीब ₹98,000 करोड़ पहुंच गई. इसकी एक वजह सितंबर में अपेक्षाकृत ज्यादा रकम वाले ट्रांजैक्शन होना भी बताया जा रहा है. महीने के बीच में गणेश चतुर्थी का त्योहार भी पड़ा, जिससे खरीदारी और उपभोक्ता खर्च को सहारा मिला. सितंबर के आंकड़ों को आने वाले फेस्टिव सीजन के लिए भी अहम माना जा रहा है। 

अक्टूबर में बड़ी फेस्टिव सेल्स शुरू होने की उम्मीद है, जबकि नवंबर में दिवाली का त्योहार आएगा. डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म Fibe के एमडी और ग्रुप सीईओ अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक ₹29.37 लाख करोड़ की रकम वाले 24.07 बिलियन मंथली यूपीआई ट्रांजैक्शन यह दिखाते हैं कि डिजिटल पेमेंट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी मजबूती से शामिल हो चुका है. उनके मुताबिक फेस्टिव सीजन में पेमेंट, कर्ज और तकनीक को जोड़ने से वित्तीय सेवाओं की पहुंच और बढ़ सकती है। 

छोटे शहरों तक है UPI की पहुंच
यूपीआई की बढ़ती पहुंच सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. PayNearby के फाउंडर आनंद कुमार बजाज के मुताबिक छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और मोहल्ले की दुकानों में भी यूपीआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है. यानी डिजिटल पेमेंट अब सिर्फ बड़े मॉल या ऑनलाइन खरीदारी तक सीमित नहीं रहा. स्थानीय दुकानदार और छोटे कारोबारी भी तेजी से यूपीआई से जुड़ रहे हैं। 

IMPS लेनदेन में भी हुई बढ़ोतरी
सितंबर में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS)
के जरिए भी लेनदेन में बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसकी कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू ₹7.06 लाख करोड़ रही, जो सालाना आधार पर 18 फीसदी ज्यादा है. सितंबर में IMPS पर रोजाना औसतन 11.80 मिलियन यानी करीब 1.18 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए. इनकी औसत दैनिक वैल्यू ₹23,530 करोड़ रही। 

UPI की रफ्तार पर पड़ेगा MDR का असर?
फिलहाल जानकारों का मानना है कि नए MDR फ्रेमवर्क से यूपीआई के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम या वैल्यू पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन ₹2,000 तक के दायरे में आते हैं और इस सीमा तक जीरो MDR जारी रहेगा. अक्षय मेहरोत्रा के मुताबिक यूपीआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके लिए सस्टेनेबल इकोनॉमिक मॉडल जरूरी होगा. उनके अनुसार मामूली MDR से यूपीआई को चलाने में जो इंफ्रास्ट्रक्चर लगता है, उसको मेंटेन करने के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा. अब नजर 15 अक्टूबर पर है, जब नया MDR फ्रेमवर्क लागू होगा। 

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