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राजस्थान निकाय चुनाव में BJP का दबदबा, 309 में से 199 निकायों पर कब्जा

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जयपुर
राजस्थान निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए 309 में से 199 नगर निकायों पर जीत दर्ज की है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह परिणाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर है. चुनाव प्रचार के दौरान भजनलाल शर्मा ने जिस तरह रोड शो किए थे और सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा था. उससे 10 नगर निगमों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त या जीत दर्ज होने के बाद पार्टी का उत्साह बढ़ गया है. अब भाजपा की नजर आगामी पंचायत चुनावों पर है, जिन्हें अगली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है.

पहले जानिए क्या कह रहे हैं चुनावी परिणाम
राजस्थान के 309 नगर निकायों में से 199 पर भाजपा ने जीत दर्ज की है. 10 में से सात नगर निगम के परिणाम आ चुके हैं इनमें से छह पर भाजपा के मेयर बने हैं. तीन के परिणाम बाकी है जिसमें से दो में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और तीसरे में भी बीजेपी आगे है यानी 10 में से 9 नगर निगम भाजपा के पास आने वाले हैं.

भजनलाल के लिए क्यों खास है ये बंपर जीत
राजस्थान में यह एकतरफा जीत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में मिली है. यह जीत उस वक्त मिली है जब भजनलाल शर्मा अपना आधा कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. यह जीत उस वक्त मिली है जब आमतौर पर राजस्थान की जनता में एंटी इनकंबेंसी वाले भाव आना शुरू हो जाते हैं. यह जीत उस वक्त मिली है जब बीजेपी का कोर वोटर बीजेपी से नाराज बताया जा रहा है.

इस चुनाव को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पूरी तरह लीड किया था. 10 के 10 नगर निगम क्षेत्रों में भजनलाल शर्मा ने रोड शो किए थे. चुनाव से पहले संकल्प पत्र जारी किया था. दावा किया था कि हम हमारे घोषणा पत्र के 78 फीसदी वादे पूरे कर चुके हैं.

कुल मिलाकर यह चुनाव भजनलाल शर्मा ने अपने काम के आधार पर लड़ा और अपने चेहरे पर लड़ा. सफलता को आप आंकड़ों में देख सकते हैं और आंकड़े कह रहे हैं कि इस चुनाव में भाजपा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की है.

आगे पंचायत चुनाव की परीक्षा बाकी
अब आगे पंचायत चुनाव भी आ रहे हैं और एक बार फिर परीक्षा के मैदान में उतरना है. आज नतीजों के बाद बीजेपी दफ्तर में आए भजनलाल शर्मा का कॉन्फिडेंस बता रहा है कि वे एक और परीक्षा के लिए तैयार हैं. करीब ढाई साल पहले जब भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बने थे तो वे विधायक भी पहली बार ही बने थे. कोई प्रशासनिक और सरकारी अनुभव नहीं था लेकिन इन दी वर्षों में उन्होंने चुपचाप अपना काम किया. नतीजा आज सबके सामने हैं.


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