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विशेष टिप्पणी : लास्ज्लो क्रास्ज्नाहोर्काई को नोबेल खिताब

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• डॉ. सुधीर सक्सेना
अंतत: ऐलान हुआ और हंगरी के यहूदी मूल के उपन्यासकार और पटकथा लेखक लास्ज्लो क्रास्ज्नाहोर्काई नोबेल खिताब के हकदार हुये। एक दहाई पहले सन 2015 में उन्हें मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज से नवाजा गया था। यूं तो सलमान रूश्दी और अमिताव घोष समेत अनेक नाम हवा में तैर रहे थे, किंतु नोबेल जूरी ने उत्तर आधुनिक के खाने में वर्गीकृत हंगरी लेखक को प्रतिष्ठा अलंकरण के योग्य पाया। लास्ज्लो हंगरी के पांक्तेय लेख हैं; सन 1985 में आये अपने पहले ही उपन्यास ‘सातनतांगो’ से चर्चित और प्रतिष्ठित। वह कठिन और चुनौतीपूर्ण लेखन के लिये जाने जाते हैं। यायावर वृत्ति के लास्ज्लो की खूबी है उनके सान्द्र अनुभव। उनके कुछ उपन्यासों पर फिल्में भी बनी है। इनमें बेला टार्र निर्देशित “सातनतांगो’ और ‘द मेलन्कोली ऑफ रेजिस्टेंस’ प्रमुख हैं। 5 जनवरी, सन 1954 को हंगरी में बेकेस काउंटी में ग्यूला में मध्यमवर्गीय परिवार में जनमे लास्ज्लो, विषादपूर्ण और उदासीभरे कथानकों के लिये जाने जाते हैं। पिता ग्योर्गी वकील थे और माँ जूरिया पालिंकास सामाजिक सुरक्षा प्रशासिका। त्रासद अनुभवों के चलते पिता ने अपना यहूदी मूल छिपाये रखा और बेटे को यहूदी होने की बात तब बताई, जब वह 11 वर्ष के किशोर थे। बहरहाल लास्ज्लो लैटिन में प्रवीणता के साथ स्नातक हुये और फिर बुडापेस्ट में उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की। वहीं मानविकी में उन्होंने हंगरी भाषा और साहित्य का अध्ययन किया। उनकी थीसिस, सांदोर, माराई के लेखन और अनुभवों पर एकाग्र थी, जिन्हें सन 48 में सोवियत आधिपत्य के बाद निर्वासन झेलना पड़ा था। अपने पहले ही उपन्यास से नामचीन लेखकों की कतार में आ गये। लास्ज्लो ने नवें दशक और तदंतर खूब यात्रायें कीं। सबसे पहले वह बर्लिन गये और फिर चीन, जापान, मंगोलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका। उनकी बेहिसाब यात्राओं ने उन्हें समृद्ध किया। मंगोलिया और चीन के अनुभवों पर उनकी किताबें आयीं: द प्रिजनर ऑफ उर्गा और डिस्ट्रक्शन एंड सारो बिनीथ द हैवेन्स। क्योटो में तीन प्रवासों ने उनकी शैली व कथ्य को गहरे प्रभावित किया। अपनी चर्चित कृति ‘वार एण्ड वार’ को लिखते हुये उन्होंने योरोप को ओर छोर नापा। अमेरिकी कवि अलेन गिंसबर्ग से उन्हें कीमती सुझाव मिले और उन्होंने कवि के प्रति मुक्त कंठ कृतज्ञता ज्ञापित की। न्यूयार्क में वह उन्हीं के घर पर रूके। उनकी कृति मेलन्कोली ऑफ रेजिस्टेंस’ को सन 1993 में सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक कृति का जर्मन बेस्टेनलीस्टे पुरस्कार मिला। बुक पुरस्कार पाने वाले इस पहले हंगारी लेखक को सन 2020 में मिंस्क में किस्सागोई में महारत के लिये बोरट्रंड प्राइज से नवाजा गया। उनके पुरस्कारों की सूची लंबी है।

Spadework for a Palace (Lás_ (Z-Library)

The World Goes On (László K_ (Z-Library)
लास्ज्लो की ख्याति में उनके उपन्यासों पर उनके मित्र बेला की बनाई फिल्मों की खासी भूमिका है। बेला निर्देशित सातनतांगो, वर्कमीस्टर हार्मोनीज और तूरिन हॉर्स ने उन्हें वैश्विक प्रसिद्धि दी। अनेक आलोचक उनकी तुलना गोगोल से करते हैं। सर्वविनाशकारी आतंक के घटाटेप में कला और साहित्य की स्थापना के लिये सचेष्ट लास्ज्लो किसी राजनीतिक आंदोलन की वकालत तो नहीं करते, किंतु सार्वभौम निराशा, कृषि समुदाय के पतन और सामाजिक सांस्कृतिक क्षय को उदघाटित करते हुये मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना की बात करते हैं। उनके प्राथमिक सरोकार सिायसत से अधिक साहित्य, कला और मानवता में निहित है।
बेहद लंबे और दुरूह याकि जटिल वाक्यों के लिये ज्ञात लास्ज्लो ने सन 1990 में अनिको पेलिहे और फिर सन 1997 में डोरा कोप्सान्यी से शादी की। उनकी तीन संताने हैं : काता, एग्नेस और पन्नी। लंबा समय बर्लिन में बिताने के बाद लास्ज्लो संप्रति स्जेंत्लास्लोस की पहाड़ियों में अपने सुरम्य आवास में रहते हैं।