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राज्योत्सव में दिखेगी बदलते बस्तर की तस्वीर, वन संरक्षण और पर्यटन से रोजगार तक की झलक

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रायपुर

छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में इस बार बस्तर की बदलती तस्वीर देखने को मिलेगी। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ‘बदलता बस्तरदृसंवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर अपनी प्रदर्शनी लगाएगा। इसमें नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति के साथ बढ़ते पर्यटन और रोजगार के अवसरों से लेकर प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण की पहल को प्रदर्शित किया जाएगा। राज्योत्सव की थीम ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ के अनुरूप प्रदर्शनी में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और युवाओं के लिए आजीविका के नए अवसरों पर विशेष जोर रहेगा।

प्रदर्शनी में बस्तर के उन क्षेत्रों की झलक दिखाई जाएगी, जहां कभी नक्सलवाद के कारण पर्यटन गतिविधियां सीमित थीं और अब स्थानीय समुदाय पर्यटन से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। कांगेर घाटी की जंगल सफारी और गुफाओं के साथ स्टार गेजिंग के लिए प्रसिद्ध कोण्डागांव की पुष्पाल घाटी, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के मट्टीमरका और सुकमा के तुंगल डैम को मॉडल के जरिए दिखाया जाएगा। धुड़मारास  के धुरवा होमस्टे और देवगुड़ियों के संरक्षण के माध्यम से बस्तर की संस्कृति और पर्यटन से जुड़ी आजीविका को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

तुंगल कैफे चला रहीं मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं, कांगेर घाटी में युवाओं को रोजगार

प्रदर्शनी में सुकमा का तुंगल कैफे महिला आत्मनिर्भरता की मिसाल के रूप में सामने आएगा। मुख्यधारा में लौटीं 10 महिलाएं मिलकर इस कैफे का संचालन कर रही हैं। वहीं, कांगेर घाटी में चक्रीय निधि से उपलब्ध कराए गए 35 जिप्सी वाहनों से लगभग 200 स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है। तुंगल में युवा नौका विहार और कयाकिंग जैसी गतिविधियों से आय अर्जित कर रहे हैं। स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड के रूप में भी रोजगार मिल रहा है। प्रदर्शनी के जरिए बताया जाएगा कि किस तरह पर्यटन वनांचल के लोगों के लिए आजीविका का नया जरिया बन रहा है।

काले हिरण की वापसी और गिद्ध संरक्षण के प्रयास भी दिखेंगे

वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण होंगी। बारनवापारा में दशकों बाद काले हिरण की वापसी, औरापानी में गिद्ध संरक्षण और छत्तीसगढ़ के पहले रामसर स्थल कोपरा जलाशय के संरक्षण को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में बारनवापारा में काले हिरण की वापसी का उल्लेख किया था। इसके अलावा धमतरी के ठेमली द्वीप को इको-पर्यटन केंद्र के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। ‘गजरथ यात्रा’ के माध्यम से मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन और सह-अस्तित्व का संदेश दिया जाएगा। प्रदेश के राजकीय पशु वन भैंसा, राजकीय वृक्ष साल, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना और राजकीय तितली बनाए जाने के लिए अनुमोदित ऑरेंज ओकलीफ की जानकारी भी दर्शकों को मिलेगी।

वनोपज से आजीविका बढ़ाने के प्रयासों की भी मिलेगी जानकारी

प्रदर्शनी में लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन से वनवासियों की आय बढ़ाने के प्रयासों को भी दिखाया जाएगा। इसके लिए लघु वनोपज प्रसंस्करण इकाई, ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’  और छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड की गतिविधियों का प्रदर्शन किया जाएगा। दर्शक यहां वन उत्पादों की जानकारी लेने के साथ उनकी खरीदारी भी कर सकेंगे।

युवाओं के लिए होगा क्विज प्रतियोगिता, मिलेंगे पुरस्कार

युवाओं और बच्चों के लिए वन, वन्यजीव और बस्तर पर आधारित प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की जाएगी। सही जवाब देने वालों को पुरस्कार मिलेंगे। वहीं, क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शक प्रदेश के इको-पर्यटन स्थलों, वहां पहुंचने के मार्ग, उपलब्ध सुविधाओं और बुकिंग की जानकारी अपने मोबाइल पर प्राप्त कर सकेंगे।

मंडप के तीन द्वारों में दिखेगी आस्था, जनजातीय गौरव और टाइगर बॉय की झलक

लगभग 88 गुणा 30 फीट में तैयार होने वाले मंडप में तीन विशेष द्वार बनाए जाएंगे। इनमें दंतेवाड़ा के वन मंदिर, जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका और बस्तर के प्रसिद्ध ‘टाइगर बॉय’ चेंदरू की स्मृति में चेंदरू द्वार शामिल होंगे। एलईडी स्क्रीन पर बस्तर में आए बदलाव पर आधारित लघु फिल्में भी दिखाई जाएंगी।


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