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बिहार विधान परिषद में बदला नंबर गेम: RJD की जीत के बावजूद नुकसान, ‘49’ के आंकड़े ने बढ़ाई सियासी हलचल

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पटना

Bihar MLC Election Result: एक सीट पर राजद की जीत के बावजूद विधान परिषद में महागठबंधन की हैसियत अपेक्षाकृत कम होगी।

परिषद में उसके अभी 19 सदस्य हैं। मध्य नवंबर के बाद उनकी संख्या 18 रह जाएगी, क्योंकि 16 नवंबर को उन आठ सीटों के प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा, जिन पर चुनाव हुआ है।

इस चुनाव ने ऊपरी सदन में एनडीए को एक सीट की बढ़त दिलाई है। शिक्षक और स्नातक कोटे की इन सीटों के प्रतिनिधियों में से चार चुनाव हार चुके हैं।

19 से घटकर 18 हुई ऊपरी सदन में महागठबंधन की सदस्य संख्या

पराजित होने वालों में भाजपा के नवल किशोर यादव, निर्दलीय आफाक आलम के साथ कांग्रेस के डाॅ. मदन मोहन झा और भाकपा के प्रो. संजय कुमार सिंह हैं।

दल

अभी

आगे

भाजपा

25

26

जदयू

20

20

हम

01

01

रालोमो

01

01

लोजपा–रा

01

01

रालोजपा

01

01

राजद

15

16

कांग्रेस

02

01

माले

01

01

भाकपा

01

00

जसुपा

00

01

निर्दलीय

07

06

कुल

75

75

कांग्रेस और भाकपा महागठबंधन के घटक हैं। इन चारों की सीटों से नए चेहरे विधान परिषद पहुंचेंगे। उनमें पटना शिक्षक सीट पर राजद का परचम लहराने वाले डाॅ. संजीव कुमार भी हैं।

उन्हें लेकर ऊपरी सदन में राजद की सदस्य संख्या 16 हो जाएगी। कांग्रेस दो से एक हो जाएगी और भाकपा शून्य। वहीं एनडीए 49 पर पहुंच गया है। 

भाकपा (माले) की शशि यादव को लेकर महागठबंधन के सदस्यों की कुल संख्या 18 होगी। इस तरह राजद तो बढ़त में रहेगा, लेकिन समग्रता में महागठबंधन पहले से कम होगा।

एनडीए का पलड़ा हुआ भारी

इस चुनाव ने 75 सदस्यीय विधान परिषद में भाजपा की हैसियत बढ़ा दी है। जदयू यथावत है। दोनों चार–चार सीटों पर लड़े थे। उनमें भाजपा की दो सिटिंग सीटें थीं और एक जदयू की।

जदयू ने पटना (स्नातक) की अपनी सीट बचा ली है और तीन पर मात खाई है। भाजपा ने पटना (शिक्षक) सीट गंवाई है, लेकिन दो नई (शिक्षक कोटे की तिरहुत और स्नातक कोटे की दरभंगा) के साथ कुल तीन सीटें जीती हैं।

तीसरी उसकी सिटिंग सीट कोसी (स्नातक) है। पिछली बार भी दो निर्दलीय विजयी हुए थे और इस बार भी। उनमें से एक भाजपा से बगावत कर विजयी हुए राहुल राज हैं।

स्वाभाविक है कि उनका आकर्षण भाजपा के प्रति हो। दूसरे वंशीधर ब्रजवासी के बारे में बताते हैं कि उनका जन सुराज पार्टी से मोहभंग हो गया है। इस तरह ऊपरी सदन में एनडीए का पलड़ा अपेक्षाकृत भारी हुआ है।

तेजस्‍वी–तेज प्रताप के बाद फ‍िर सदन में दो सगे भाई

विधान परिषद में कांग्रेस के एकमात्र सदस्य राजीव कुमार रह जाएंगे। राजद के डाॅ. संजीव कुमार उनके सगे भाई हैं, जो पूर्व मंत्री आरएन सिंह के पुत्र हैं।

इससे पहले विधानसभा में ऐसा संयोग 2015 और 2020 के चुनाव से बना था। तब लालू प्रसाद के दोनों पुत्र (तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव) विधायक चुने गए थे। 2025 में तेजप्रताप पराजित हो गए।

 


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