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फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से मचा हड़कंप, 1,300 से ज्यादा लोग हिरासत में; 53 पुलिसकर्मी घायल

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 पेरिस
 बढ़ती महंगाई और शिक्षा तंत्र की लचर हालत को लेकर फ्रांस में शुरू हुआ आंदोलन अब बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर चुका है। राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी नोकझोंक व टकराव हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने अब तक 1,300 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है।

पेरिस स्थित 'साइंसेज पो' शैक्षणिक संस्थान के मुख्य रास्ते को छात्रों ने पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया था। उन्हें रास्ते से हटाने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने बल प्रयोग किया और छात्रों को जबरन घसीटकर वहां से बाहर किया।सामने आए फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि छात्र सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे, तभी सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठियां भांजीं और कुछ लोगों को रेलिंग की ओर धकेलते हुए जमीन पर गिरा दिया, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।

दुकानों को लूटा जा रहा
फ्रांस की सड़कों पर नारेबाजी हो रही है। आगजनी हो रही है। दुकानों को लूटा जा रहा है। सरकार विरोधी नारे लग रहे हैं। प्रदर्शनकारी पुलिसवालों पर हमला कर रहे हैं।  पेरिस के अलावा लियोन, क्लेरमोंट-फेरां और स्ट्रासबर्ग में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस को गोले दाग कर भीड़ को खदेड़ा। वहीं, नीस और नांतेस में वॉटर कैनन का इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल करने की कोशिश की गई। 

70 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात
फ्रांस की सड़कों पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने पूरे देश में 70 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। हेलीकॉप्टरों, बख्तरबंद गाड़ियों से गश्त की जा रही है। प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल करने के लिए वॉटर कैनन और टीयर गैस का इस्तेमाल हो रहा है।  इन सब के पीछे सरकार का मकसद पिछले हफ्ते हुई लूटपाट, आगजनी और सार्वजनिक इमारतों पर हमलों जैसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकना है। एक हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने शांति बनाए रखने की अपील की
देशभर में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच एक बार फिर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि लोग बांटने वालों के बहकावे में न आएं। मैक्रों ने लोगों से आंदोलन खत्म करने की अपील की है। लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

    मैक्रों ने कहा, 'यह तनाव पिछले कुछ सालों से कई वजहों से पनप रहा था। हमने इस तनाव को बढ़ने दिया।  हाल के सालों में ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिन्होंने हमारे गणतंत्र की नींव को हिला दिया है। पहले हुए कुछ हमलों की वजह से अलग-अलग धर्मों को गलत नजरिए से देखा जाने लगा है। इसलिए आज सबसे जरूरी यह है कि हम सब कुछ आपस में मिला न दें। सबसे अहम बात यह है कि हम एक पक्ष को दूसरे पक्ष के खिलाफ खड़ा करने के जाल में न फंसें। कभी भी बहुत देर नहीं होती और मैं यहां मौजूद सभी लोगों को याद दिलाना चाहता हूं कि हमारा गणतंत्र एकता और सद्भाव पर टिका है।'

जानिए किस लिए फ्रांस में हो रहे प्रदर्शन?
देश में बढ़ती महंगाई, शिक्षा क्षेत्र में फंड की कमी और जीवन-यापन के बढ़ते खर्चों के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर सरकार के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे हैं। शनिवार को प्रशासन ने पेरिस में प्रदर्शन का रास्ता शहर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से तक सीमित कर दिया था। मार्च पोर्त द इटली से शुरू हुआ और पोर्त द विन्सेन्स तक पहुंचा। यहां कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्लास द ला नासियों की ओर आगे बढ़ने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

हिंसक टकराव में 53 पुलिसकर्मी भी चोटिल
गृह मंत्रालय का कहना है कि यह सख्त कार्रवाई उपद्रवियों पर लगाम कसने के लिए जरूरी थी, क्योंकि शनिवार को हुई हिंसा के दौरान लगभग 34 दुकानों में जमकर तोड़फोड़ और लूटपाट की गई थी। इस हिंसक टकराव में 53 पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं।

आंदोलनकारियों की संख्या पर अलग-अलग दावे
विरोध-प्रदर्शनों के विस्तार को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।गृह मंत्रालय के आंकड़े बता रहे हैं कि देशभर में हुए करीब 298 प्रदर्शनों में लगभग 4.10 लाख नागरिकों ने हिस्सा लिया। वहीं ट्रेड यूनियन ट्रेड 'जनरल कॉन्फेडरेशन ऑफ लेबर' (CGT) का दावा है कि आंदोलन में 8 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे।

 


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