दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर, रायगढ़, नवा रायपुर और आरंग में लगभग 42.17 करोड़ रुपये के आवासों का विक्रय
नवा रायपुर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा भी 128 फ्लैट्स की खरीदी का निर्णय, लगभग 16.20 करोड़ रुपये के आवासों की होगी बिक्री
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आवासीय योजनाओं को गति देने राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल
वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में रिक्त भवनों के बेहतर उपयोग, संस्थागत आवास सुविधा और नई बसाहट को मिल रहा बढ़ावा
पात्र EWS एवं LIG हितग्राहियों को पूर्ववत मिलता रहेगा शासकीय अनुदान का लाभ, अन्य आय वर्ग एवं संस्थाओं को बिना अनुदान आवास क्रय की सुविधा
रायपुर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आवासीय योजनाओं को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और जनहितैषी बनाने के लिए लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के लंबे समय से रिक्त आवासों के विक्रय के लिए बल्क परचेस की अनुमति दिए जाने से प्रदेश में आवासीय संपत्तियों के विक्रय को नई गति मिली है। इस निर्णय के फलस्वरूप विभिन्न शासकीय एवं निजी संस्थाओं द्वारा अपने कर्मचारियों की आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़ी संख्या में मकानों की खरीदी की जा रही है।
वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा निर्मित आवासों के बेहतर उपयोग, रिक्त संपत्तियों के विक्रय और आवासीय परिसरों में बसाहट बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। बल्क परचेस की व्यवस्था से जहां लंबे समय से खाली पड़े भवनों का उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, वहीं मंडल को राजस्व प्राप्त होने के साथ आवासीय परिसरों में नागरिक सुविधाओं और रखरखाव की व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
छह शहरों में 226 आवासों का विक्रय, लगभग 42.17 करोड़ रुपये का कारोबार
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा संचालित विभिन्न आवासीय योजनाओं के अंतर्गत अब तक दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर, रायगढ़, नवा रायपुर अटल नगर एवं आरंग में संस्थागत खरीदी के माध्यम से कुल 226 आवासों का विक्रय किया गया है। इन आवासों का कुल मूल्य लगभग 42.17 करोड़ रुपये है।
जीएसटी विभाग द्वारा प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में कुल 68 आवासों का क्रय किया गया है, जिनका कुल मूल्य लगभग 23.77 करोड़ रुपये है। इनमें दुर्ग में 24 मकान लगभग 6.50 करोड़ रुपये, जगदलपुर में 16 मकान लगभग 6 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 25 मकान लगभग 10.35 करोड़ रुपये तथा रायगढ़ में 3 मकान लगभग 92 लाख रुपये की राशि से खरीदे गए हैं। इसी प्रकार नवा रायपुर अटल नगर में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मेफेयर संस्था द्वारा 128 मकानों का लगभग 16.20 करोड़ रुपये में क्रय किया गया है। वहीं मैट्स विश्वविद्यालय द्वारा आरंग में 30 मकान लगभग 2.20 करोड़ रुपये की राशि से खरीदे गए हैं।
इसके अतिरिक्त नवा रायपुर अटल नगर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा भी 128 फ्लैट्स की बल्क खरीदी का निर्णय लिया गया है। इन फ्लैट्स का अनुमानित कुल मूल्य लगभग 16.20 करोड़ रुपये है। इस प्रस्तावित खरीदी के पूर्ण होने पर संस्थागत आवास विक्रय का आंकड़ा और बढ़ेगा।
राज्य मंत्रिपरिषद के ऐतिहासिक निर्णय से खुला रिक्त आवासों के उपयोग का रास्ता
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर- 16, 30 एवं 34 में प्रधानमंत्री सह-मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) तथा निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए बड़ी संख्या में आवासों का निर्माण किया गया है। योजना के प्रथम चरण में कुल 6,296 भवनों का क्रियान्वयन किया गया था। इन आवासों के विक्रय के लिए समय-समय पर विज्ञापन जारी किए जाने के बावजूद कुछ भवन लंबे समय तक अविक्रित रहे। इसके कारण भवनों की सुरक्षा, रखरखाव तथा मंडल के वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन से संबंधित चुनौतियां सामने आ रही थीं। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद ने 14 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके अंतर्गत तीन बार विज्ञापन जारी होने के बाद भी अविक्रित रहने वाले आवासों को पात्र हितग्राहियों के अतिरिक्त अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को भी विक्रय करने की अनुमति प्रदान की गई।
इस निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया कि अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को आवास क्रय करने पर शासन द्वारा प्रदत्त अनुदान का लाभ नहीं मिलेगा। इससे मूल पात्र हितग्राहियों के हितों को सुरक्षित रखते हुए रिक्त आवासों के उपयोग का नया रास्ता खुला है।
आवासीय योजनाओं की सफलता का आधार उनमें लोगों की बसाहट होना- अध्यक्ष अनुराग सिंह देव
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा लिया गया यह निर्णय दूरदर्शिता, व्यावहारिक सोच और जनहित का महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि किसी भी आवासीय योजना की वास्तविक सफलता केवल भवनों के निर्माण से नहीं, बल्कि उनमें लोगों की बसाहट और उनके बेहतर उपयोग से सुनिश्चित होती है। लंबे समय तक रिक्त रहने वाले भवनों की सुरक्षा एवं रखरखाव पर अतिरिक्त संसाधन खर्च होते हैं। शासन के इस निर्णय से ऐसे भवनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने के साथ मंडल की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।
अनुराग सिंह देव ने कहा कि बल्क परचेस की सुविधा से शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी संस्थाओं को अपने कर्मचारियों के लिए एक ही परिसर में व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराने का अवसर मिल रहा है। इससे कर्मचारियों को बेहतर आवासीय वातावरण मिलेगा और आवासीय परिसरों में बसाहट बढ़ने से आसपास की आर्थिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत EWS एवं LIG वर्ग के पात्र हितग्राहियों को निर्धारित केंद्रीय एवं राज्य शासन के अनुदान का लाभ पूर्ववत मिलता रहेगा। अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों और संस्थाओं को अनुदान के बिना आवास क्रय करने की सुविधा दी गई है। इस प्रकार शासन ने पात्र हितग्राहियों के हितों की सुरक्षा के साथ रिक्त संपत्तियों के बेहतर उपयोग के बीच संतुलन स्थापित किया है।
बल्क परचेस के प्रति संस्थाओं की बढ़ती रुचि शासन की नीति का सकारात्मक परिणाम-आयुक्त अवनीश कुमार शरण
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने बताया कि शासन के निर्णय के बाद विभिन्न शासकीय एवं निजी संस्थाओं द्वारा मंडल की आवासीय योजनाओं में बल्क परचेस के प्रति रुचि दिखाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जीएसटी विभाग द्वारा दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर एवं रायगढ़ में कुल 68 आवासों की खरीदी तथा मेफेयर और मैट्स विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं द्वारा बड़ी संख्या में आवासों का क्रय किया जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके अतिरिक्त विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा नवा रायपुर में 128 फ्लैट्स की बल्क खरीदी का निर्णय संस्थागत आवासीय मांग और शासन की नीति के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। आयुक्त शरण ने बताया कि मंडल द्वारा आवासों के विक्रय की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ऑनलाइन ऑफर के माध्यम से संचालित की जा रही है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रिक्त आवासों के बेहतर उपयोग से बढ़ेगी बसाहट, स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
राज्य शासन की इस पहल से आवासीय योजनाओं में निर्मित संपत्तियों के बेहतर उपयोग के साथ नई बसाहट को प्रोत्साहन मिल रहा है। बड़ी संख्या में कर्मचारियों और उनके परिवारों के आवासीय परिसरों में निवास करने से स्थानीय बाजार, परिवहन, दैनिक उपयोग की वस्तुओं तथा अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी। इसके साथ ही आवासीय परिसरों में नियमित बसाहट होने से भवनों की सुरक्षा, रखरखाव और उपलब्ध नागरिक सुविधाओं के प्रभावी उपयोग में भी सहायता मिलेगी। संस्थागत खरीदी से मंडल को प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग भविष्य की आवासीय एवं अधोसंरचना विकास गतिविधियों को गति देने में भी सहायक हो सकेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबके लिए आवास के विजन के अनुरूप मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आवासीय सुविधाओं के विस्तार और निर्मित आवासों के प्रभावी उपयोग की दिशा में कार्य कर रही है। शासन की बल्क परचेस नीति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है, जिससे प्रदेश में आवासीय विकास, संस्थागत सुविधाओं के विस्तार और व्यवस्थित शहरी बसाहट को नई गति मिल रही है।



